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भारत
राजनीति
दिल्ली चुनाव: महिला सुरक्षा, वोटरों और राजनीतिक दलों के बीच कितना बड़ा मुद्दा?
इस बार चुनाव में महिला सुरक्षा को लेकर वोटरों का क्या नज़रिया है और राजनीतिक पार्टियों के लिए ये कितना बड़ा मुद्दा है, ये जानने के लिए न्यूज़क्लिक ने दिल्ली के कुछ क्षेत्रों का दौरा किया और मतदाताओं और नेताओं से बातचीत की।
सोनिया यादव
30 Jan 2020
Delhi Elections

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इन दिनों विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैंं। साथ ही जोरों पर है आधी आबादी की सुरक्षा का मुद्दा, जो अक्सर चुनाव के पहले लाइम लाइट में आता है और चुनावों के खत्म होते ही कहीं गुम हो जाता है।

दिल्ली में साल 2012 में निर्भया कांड के बाद लोगों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला था। इसके बाद 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले देश की राजधानी को पीएम नरेंद्र मोदी ने 'रेप कैपिटल' तक बता दिया था। तब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे और दिल्ली में चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। अब एक बार फिर बीजेपी महिला सुरक्षा के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (आप) को कठघरे में खड़ा कर रही है तो वहीं आप सुरक्षा की स्थिति पहले से बेहतर होने का दावा कर रही है।

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आठ फ़रवरी को दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के लिए चुनाव होना है। इस बार चुनाव में महिला सुरक्षा को लेकर वोटरों का क्या नज़रिया है और राजनीतिक पार्टियों के लिए ये कितना बड़ा मुद्दा है, ये जानने के लिए न्यूज़क्लिक ने दिल्ली के कुछ क्षेत्रों का दौरा किया और मतदाताओं और नेताओं से बातचीत की।

हमने शुरुआत दिल्ली के दिल यानी कनॉट प्लेस से की। यहां हमें अधिकतर युवा महिलाएं मिली, जो रोज़ना ऑफिस और कॉलेज आना-जाना करती हैं, अपने अधिकारों को लेकर जागरूक भी हैं और पितृसत्ता को चुनौती भी देती हैं। इन महिलाओं का साफ तौर पर कहना है कि 'हमारा वोट नाम को नहीं, काम को जाएगा।'

पेशे से पत्रकार ऋचा शर्मा अन्य लड़कियों के साथ कनॉट प्लेस के पास ही एक कामकाजी महिला हॉस्टल में रहती हैं। यहां रह रहीं अधिकतर महिलाओं का मानना है कि केजरीवाल की नीतियों से महिलाओं को फायदा तो हुआ है लेकिन उन्हें ये शिकायत भी है कि अरविंद केजरीवाल सरकार ने अपने कई वादे पूरे करने में बहुत देरी की है।

ऋचा शर्मा कहती हैं, 'चाहे वो सीसीटीवी कैमरे लगवाना हो या बसों में महिलाओं के लिए फ़्री सफ़र की सुविधा, ये क़दम उठाने में केजरीवाल ने ज़ाहिर तौर पर देरी की। मैं अब भी दिल्ली में देर रात अकेले बाहर नहीं रह सकती। मेरी पढ़ाई पुणे में हुई, वहां लड़कियां देर रात समंदर के किनारे बिना डर के घूम सकती हैं तो दिल्ली की सड़कों पर उन्हें अंधेरा होते ही डर क्यों लगने लगता है? ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके डर को ख़त्म करने के लिए पर्याप्त क़दम नहीं उठाए गए।'

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दिल्ली में 2012 में हुए जघन्य निर्भया गैंगरेप कांड के बाद सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए समर्पित एक विशेष फंड की घोषणा की जिसका नाम ‘निर्भया फंड’ रखा गया था संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से जुड़ी योजनाओं के लिये 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को महिला हेल्पलाइन, वन स्टाप सेंटर स्कीम सहित विभिन्न योजनाओं के लिये धन आवंटित किया गया था। लेकिन दिल्ली समेत अन्य कई राज्यों में को महिला हेल्पलाइन के लिए दिए गए पैसे जस के तस पड़े हैं। वहीं वन स्टाप सेंटर स्कीम पर भी कोई खर्चा नहीं किया गया।

इस संबंध में दक्षिणी दिल्ली के तुगलकाबाद इलाके में रहने वाली एक सरकारी अधिकारी बताती हैं, केजरीवाल सरकार के कई मंत्रियों ने निर्भया आंदोलन के समय अहम भूमिका निभाई थी। सरकार में आने से पहले महिला सुरक्षा को लेकर कई दावे भी किए थे, लेकिन वे भी कुछ खास नहीं कर पा रहे। जाहिर है पुलिस व्यवस्था उनके हाथों में नहीं है लेकिन महिला हेल्पलाइन नंबर दुरूस्त करना, वन स्टाप सेंटर, महिला होमगार्ड्स की नियुक्ति जैसे मसलों पर वो कदम उठा सकते हैं।

दिल्ली में बलात्कार मामलों की बात करें तो एनसीआरबी के डेटा के मुताबिक साल 2015 में कुल 2,199 केस दर्ज हुए तो वहीं 2016 में 2,155, 2017 में 1,229 और 2018 में 1,215 मामले सामने आए। लंबित मामलों के जल्द निपटारे के लिए बीते साल जुलाई 2019 में दिल्ली कैबिनेट ने 18 फास्ट ट्रैक कोर्ट और 22 कॉमर्शियल कोर्ट बनाने को मंजूरी दी। साथ ही फास्ट ट्रैक कोर्ट में 90 पर्सेंट टेंपररी पोस्ट को परमानेंट करने का प्रस्ताव भी रखा। सरकार को इसके लिए सालाना 8.88 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।

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पेशे से वकील आर्शी मयूर विहार में रहती हैं, महिला सुरक्षा के संबंध में उनका कहना है, ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाना सही है लेकिन उससे पहले जूडिश्यरी के बोझ को भी समझना होगा। ऐसे आप एक जगह से बोझ उठा कर दूसरी जगह शिफ्ट कर रहे हैं। जजों की नियुक्तियों का मसला भी न्याय व्यवस्था का अहम हिस्सा है। वैसे जब चुनाव आता है, तब महिला सुरक्षा का मुद्दा भी सामने आता है। वैसे मीडिया भी तभी बातें करते हैं, जब कोई बड़ा कांड होता है। सबसे पहले हमें समझना होगा कि हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है और अगर अपराधी पकड़ा भी जाए तो न्याय क्यों नहीं समय पर मिल पाता। यहां पुलिस केंद्र सरकार के अंदर आती है, जो यूनिवर्सिटी कैंपस तक को सुरक्षित नहीं कर पा रही तो ये हमारी सुरक्षा क्या करेगी।

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पूर्वी दिल्ली के कालका जी और ओखला विधानसभा क्षेत्र में दलित और मुस्लिम महिलाओं से हमने बात करने की कोशिश की। यहां महिलाओं ने सीएए और एनआरसी के विरोध के दौरान महिलाओं पर की गई टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर की, शिक्षण संस्थानों में हो रही हिंसा पर भी सवाल उठाए। यहां महिलाओं का कहना है कि कैसे बीजेपी के बड़े नेता खुले आम महिलाओं का अपमान कर रहे हैं और उन पर कोई कार्रवाई तक नहीं हो रही है।

रिया प्रजापति एक निजी कंपनी में कर्मचारी हैं और सात साल के बच्चे के साथ अकेले कालकाजी में रहती हैं। उनका कहना है 'आप समझ सकते हैं कि आज भी जब लड़की के साथ कोई दुर्घटना की खबर सामने आती है, तो लोग उसके ऊपर ही सवाल खड़े करते हैं। हमारी महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति इरानी महिला सुरक्षा पर भाषण तो अच्छा देती हैं लेकिन कुलदीप सेंगर, चिन्मयानंद, एम जे अकबर पर चुप्पी साध लेती हैं। क्या ऐसे लोग बेटी बचाएंगे?’

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में महिलाओं के प्रति अपराध के दर्ज मामलों की संख्या साल 2015 में 17 हजार 222 और साल 2016 में 15 हजार 310 थी। वहीं 2017 में इन आंकड़ों में कमी आई और 13 हजार 76 मामले दर्ज किए गए। इसके मुताबिक दिल्ली में अपराध में गिरावट देखने को मिली हैं। इन अपराधों में बलात्कार, घरेलू हिंसा, मारपीट, दहेज प्रताड़ना, एसिड हमला, अपहरण, मानव तस्करी, साइबर अपराध और कार्यस्थल पर उत्पीड़न आदि शामिल है।

गैर सरकारी संगठन वुमेन प्रोटेक्शन ऑर्गनाइशेन के आशीष ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, ‘दिल्ली में महिलाओं को कई तरीके से उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, जैसे आपको चलते-फिरते लोग कुछ बोल कर निकल जाते हैं, यहां एसिड अटैक जैसी घटनाएं भी होती हैं, दहेज हत्या, कन्या भूण्र हत्या, बलात्कार जैसी घटनाएं तो हैं ही। दरअसल दिल्ली की महिलाएं बाकी इलाकों से थोड़ी अलग हैं, यहां ज्यादा आबादी पढ़ी-लिखी महिलाओं की है, जो अपने दिमाग से वोट करती हैं, पति या परिवार के कहने पर नहीं करती। इसलिए यहां पार्टियों को महिलाओं को अपनी बातों से संतुष्ट करना होगा।

महिला सुरक्षा को लेकर सभी पार्टियां अपने-अपने वादे और दावे कर रही हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव में सुरक्षा और सीसीटीवी का मसला लगातार उछल रहा है। भारतीय जनता पार्टी के नेता अमित शाह की ओर से लगातार दिल्ली सरकार पर सीसीटीवी को लेकर निशाना साधा जा रहा है, अब अरविंद केजरीवाल का इसी पर जवाब सामने आया है। बेटियों के नाम एक संदेश जारी करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में जहां भी सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, वहां पर अपराध में कमी आई है।

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आम आदमी पार्टी की नेता और कालकाजी विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याक्षी आतिशी ने इस संबंध में बताया, ‘महिला सुरक्षा को लेकर हमारी पार्टी गंभीर है। हम बस मार्शल की तर्ज पर मोहल्ला मार्शल लगाएंगे ताकि महिलाओं की सुरक्षा हो सके। डेढ़ लाख सीसीटीवी लग गए, डेढ़ लाख और लग रहे हैं, हम महिलाओं की सुरक्षा से कोई खिलवाड़ नहीं करेंगे। हमने महिलाओं के लिए बस सेवा फ्री की जिससे वह खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।

वहीं दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष शर्मिष्ठा मुखर्जी ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, ‘दिल्ली में महिला सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। केंद्र की मोदी और दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने महिला सुरक्षा को लेकर तमाम वायदे किए लेकिन महिलाओं पर होने वाले अपराधों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष ने कहा- बीजेपी और ‘आप’ ने दिल्ली को रेप कैपिटल बना दिया। 2012 में यहां रेप के कुल 706 मामले दर्ज हुए। 15 नवंबर 2019 तक आंकड़ा 1947 पर पहुंच गया।

शर्मिष्ठा ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा, मोदी जी बोलते हैं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ लेकिन जब आप बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं के लिए बजट से आवंटित 928 करोड़ में से केवल 19 प्रतिशत हिस्सा ही जिले और राज्यों के स्तर तक पहुंच सका है। बाकी एक बड़ा हिस्सा विज्ञापन पर खर्चा हुआ है, ऐसे में बीजेपी से जनता क्या उम्मीद करेगी।

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घोषणा पत्रों की बात करें तो आम आदमी पार्टी ने अपने मेनिफेस्टो में फ्री बस सेवा जारी रखने के साथ मार्शलों की तैनाती, सीसीटीवी कैमरे, स्ट्रीट लाइट लगवाने के कामों को आगे बढ़ाने की बात की है। महिला सुरक्षा के लिए मोहल्ला मार्शल का प्रस्ताव रखा है। वहीं शर्मिष्ठा मुखर्जी का कहना है कि कांग्रेस अपने घोषणा पत्र में महिलाओं के लिए तीन खास योजनाओं का जिक्र करेगी। जिसमें आवाज उठाओ अभियान, महिला हेल्पलाइन नंबर, स्कूलों में जेंडर सेंसडाइजेशन कोर्स आदि शामिल हैं।

गौरतलब है कि 2015 दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी की जबरजस्त जीत हुई थी। 70 विधानसभा सीटों में से 67 पर आप ने जीत दर्ज की थी वहीं 3 सीटें बीजेपी के खाते में आई थी जबकी कांग्रेस को शून्य से ही संतोष करना पड़ा था।

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