NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कानून
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
ट्रेड यूनियनों के मुताबिक दिल्ली सरकार की न्यूनतम वेतन वृद्धि ‘पर्याप्त नहीं’
ट्रेड यूनियनों की ओर से मांग की जा रही है कि न्यूनतम वेतन को बढ़ा कर 26,000 रूपये करने के साथ-साथ असंगठित श्रमशक्ति को 7,500 रूपये का मासिक नकद समर्थन दिया जाए। इन्हीं मांगों पर दबाव बनाने के लिए उनकी ओर से 25 नवंबर को एक दिन की हड़ताल का आह्वान किया गया है।
रौनक छाबड़ा
10 Nov 2021
minimum wage
प्रतीकात्मक उपयोग

ट्रेड यूनियनों का मानना है कि राष्ट्रीय राजधानी में न्यूनतम मजदूरी की दरों में हालिया वृद्धि से कामकाजी आबादी को कोई खास राहत मिलने वाली नहीं है क्योंकि यह बढ़ोत्तरी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ती मुद्रास्फीति के प्रभाव को निष्प्रभावी बनाने के लिए “पर्याप्त नहीं है।”

उनकी ओर से आगे कहा गया है कि इतिहास ने इस बात को साबित किया है कि राजधानी में श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी की दरों में की गई कोई भी वृद्धि महज कागजों तक ही सीमित रही है, क्योंकि उन्हें जमीन पर लागू करने के लिए “शायद ही कोई राजनीतिक इच्छाशक्ति” मौजूद है।

उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा सोमवार को जारी एक आदेश के मुताबिक दिल्ली में श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ोत्तरी कर दी गई है। इसमें वेतन संरचना के एक घटक, महंगाई भत्ते (डीए) में इजाफा कर दिया गया है। सिसोदिया के पास दिल्ली में श्रम एवं रोजगार विभाग का भी कार्यभार है।

डीए में बढोत्तरी एक द्वि-वार्षिक कदम है। इसे अप्रैल और नवंबर में नियमित तौर पर छह महीने की पूर्ववर्ती अवधि के लिए औसत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संख्या के आधार पर परिवर्तनीय डीए (वीडीए) घटक की दरों को संशोधित करके किया जाता है। 

उसी फार्मूले के मद्देनजर, इस बार वृद्धि के बाद दिल्ली में अकुशल श्रमिकों का मासिक वेतन 15,908 से बढ़ाकर 16,604 रूपये कर दिया गया है; जबकि अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए वेतन 17,537 रूपये से बढ़ाकर 17,693 रूपये; और कुशल श्रमिकों के लिए 19,291 रूपये से बढ़ाकर 19,473 रूपये तक कर दिया गया है। 

आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने एक बयान में कहा है कि “सुपरवाइजरों और लिपिकीय कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन की दर में भी वृद्धि की गई है। 

न-मैट्रिक कर्मचारियों की मासिक तनख्वाह 17,537 रूपये से बढ़कर 17,693 रूपये कर दी गई है, वहीँ मैट्रिक पास किंतु गैर-स्नातक कर्मचारियों के मासिक वेतन को 19,291 रूपये से बढ़ाकर 19,473 रूपये कर दिया गया है। स्नातक या उससे ऊपर की शैक्षणिक योग्यता वाले कर्मचारियों के मासिक वेतन को 20,976 रूपये से बढ़ाकर 21,184 रूपये कर दिया गया है।

सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) की दिल्ली ईकाई के महासचिव अनुराग सक्सेना के मुतबिक डीए में नवीनतम वृद्धि, कुलमिलाकर “श्रमिकों के घावों पर नमक छिडकने जैसी हरकत” के सिवाय कुछ नहीं है। उनके मुताबिक, “छंटनी की निरंतर बढ़ती घटनाओं और आवश्यक वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों” के कारण इस बढ़ोत्तरी से श्रमिकों को किसी प्रकार की कोई राहत नहीं मिलने जा रही है।”

सक्सेना ने कहा “श्रमिकों को राहत के तौर पर डीए में 156 रूपये की वृद्धि को दिखाना कुछ और नहीं बल्कि उनके साथ एक क्रूर मजाक है। अधिकांश दैनिक इस्तेमाल की वस्तुओं की कीमतों में 40 से 50% की वृद्धि दर बनी हुई है, जबकि कुछ अन्य वस्तुओं की कीमतें तो दोगुनी हो चुकी हैं। ऐसी स्थिति में डीए में 1% से भी कम की बढोत्तरी क्या राहत पहुंचा सकती है?

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के प्रकोप को देखते हुए दिल्ली में श्रमिक संघों की ओर से असंगठित श्रम शक्ति को 7,500 रूपये की मासिक नकद सहायता राशि के साथ-साथ वेतन के तौर पर 26,000 रूपये की मांग की जा रही है। केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने भी 25 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी में एक-दिवसीय शहर-व्यापी हड़ताल को आयोजित करने का आह्वान किया है। 

सक्सेना ने बताया “इस हड़ताल की मुख्य मांगों में से एक वेतन संशोधन बोर्ड का गठन भी है- जिसका गठन कानूनन हर 5 साल में अनिवार्य है - ताकि केंद्रीय बाजार की मौजूदा कीमतों को ध्यान में रखते हुए नए न्यूनतम वेतनमान को सूत्रबद्ध किया जा सके।”

हिंद मजदूर सभा (एचएमएस) के राज्य सचिव नारायण सिंह के अनुसार, हालाँकि, न्यूनतम मजदूरी की दरों में वृद्धि भी तब तक किसी काम की नहीं है जब तक कि सरकार के पास उन्हें जमीनी स्तर पर अमल में लाने के लिए पर्याप्त तंत्र उपलब्ध नहीं है। 

सिंह के अनुसार “दिल्ली सरकार न्यूनतम मजदूरी की दरों में वृद्धि तो कर देती है, लेकिन हकीकत तो यह है कि दिल्ली का अधिकांश कार्यबल वर्तमान में मासिक भुगतान के आधार पर कार्यरत है जो कि न्यूनतम मजदूरी से कम हैं। ऐसी स्थिति में अहम मुद्दा यह है कि सरकार बढ़ी हुई मजदूरी की दरों को कैसे लागू कर पाने के बारे में सोच रही है। हमें नहीं लगता है कि ऐसा करने के लिए उसके पास शायद ही कोई राजनीतिक इच्छाशक्ति बची हो।”

इसे सुनिश्चित करने के लिए 2018 में आप सरकार ने न्यूनतम मजदूरी (दिल्ली) अधिनियम में संशोधन को अधिसूचित करने का काम किया था, ताकि श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी दिए जाने से इंकार करने की सूरत में कठोर दंड को लागू किया जा सके। इसके मुताबिक, जो नियोक्ता अपने श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी का भुगतान करने में विफल पाए जाते, उन्हें 50,000 रूपये तक का जुर्माना चुकाने के साथ-साथ तीन-वर्ष की सजा का सामना करना पड़ सकता था। 

लेकिन सिंह के अनुसार इसे भी जमीनी हकीकत के प्रदर्शन के तौर पर लागू नहीं किया जा सका है। उन्होंने अफ़सोस जताते हुए कहा “न तो पर्याप्त मात्रा में जांच ही हो पा रही है और न ही हमारे पास पर्याप्त श्रम निरीक्षक हैं।”

उन्होंने बताया कि केंद्रीय श्रमिक संघों द्वारा 25 नवंबर की अपनी हड़ताल के जरिये आप सरकार पर इस दिशा में भी काम शुरू करने के लिए दबाव डाला जायेगा।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/Delhi-Government-Minimum-Wage-Hike-Not-Enough-Say-Trade-Unions

minimum wage
Anti Labour Policies
wages
Workers Strike
trade unions
CITU

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दक्षिण अफ्रीका में सिबन्ये स्टिलवाटर्स की सोने की खदानों में श्रमिक 70 दिनों से अधिक समय से हड़ताल पर हैं 

लुधियाना: PRTC के संविदा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'


बाकी खबरें

  • ram_navmi
    अफ़ज़ल इमाम
    बढ़ती हिंसा व घृणा के ख़िलाफ़ क्यों गायब है विपक्ष की आवाज़?
    13 Apr 2022
    हिंसा की इन घटनाओं ने संविधान, लोकतंत्र और बहुलतावाद में विश्वास रखने वाले शांतिप्रिय भारतवासियों की चिंता बढ़ा दी है। लोग अपने जान-माल और बच्चों के भविष्य को लेकर सहम गए हैं।
  • varvara rao
    भाषा
    अदालत ने वरवर राव की स्थायी जमानत दिए जाने संबंधी याचिका ख़ारिज की
    13 Apr 2022
    बंबई उच्च न्यायालय ने एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में कवि-कार्यकर्ता वरवर राव की वह याचिका बुधवार को खारिज कर दी जिसमें उन्होंने चिकित्सा आधार पर स्थायी जमानत दिए जाने का अनुरोध किया था।
  • CORONA
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,088 नए मामले, 26 मरीज़ों की मौत
    13 Apr 2022
    देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 5 लाख 21 हज़ार 736 लोग अपनी जान गँवा चुके है।
  • CITU
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन
    13 Apr 2022
    ये सभी पिछले माह 39 दिन लंबे चली हड़ताल के दौरान की गई कार्रवाई और बड़ी संख्या आंगनवाड़ी कर्मियों को बर्खास्त किए जाने से नाराज़ थे। इसी के खिलाफ WCD के हेडक्वार्टस आई.एस.बी.टी कश्मीरी गेट पर प्रदर्शन…
  • jallianwala bagh
    अनिल सिन्हा
    जलियांवाला बाग: क्यों बदली जा रही है ‘शहीद-स्थल’ की पहचान
    13 Apr 2022
    जलियांवाला बाग के नवीकरण के आलोचकों ने सबसे महत्वपूर्ण बात को नज़रअंदाज कर दिया है कि नरसंहार की कहानी को संघ परिवार ने किस सफाई से हिंदुत्व का जामा पहनाया है। साथ ही, उन्होंने संबंधित इतिहास को अपनी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License