NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली: रासुका अधिसूचना एक रुटीन प्रक्रिया, लेकिन डर तो है!
"राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की अधिसूचना एक रुटीन प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन जिस तरह से इसे घोषित और प्रचारित किया गया है उससे पता चलता है कि इसका मकसद कुछ और भी हो सकता है।"
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Jan 2020
delhi police

नई दिल्ली: दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने एक अधिसूचना जारी कर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत दिल्ली पुलिस आयुक्त को किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार प्रदान किया है। रासुका कानून ऐसे व्यक्ति को एहतियातन महीनों तक हिरासत में रखने का अधिकार देता है, जिससे प्रशासन को राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए खतरा महसूस हो।

अधिसूचना के मुताबिक उपराज्यपाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 की धारा तीन की उपधारा (3) का इस्तेमाल करते हुए 19 जनवरी से 18 अप्रैल तक दिल्ली पुलिस आयुक्त को किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार दिया। यह अधिसूचना राज्यपाल की मंजूरी के बाद 10 जनवरी को जारी की गई थी।

आपको बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी में अभी संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ शाहीन बाग, खुरेजी, तुर्कमान गेट समेत विभिन्न जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं।

न्यूज़क्लिक से बातचीत में दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता शाहिद अली ने कहा, 'हम इस अधिसूचना का विरोध करते हैं। यह साफ तौर पर असंतोष की आवाज को दबाने के लिए अधिसूचित किया गया है। इसका मकसद सीएए के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों को दबाना है। हम इस अधिसूचना को चुनौती देंगे क्योंकि यह बर्बर है।'

हालांकि, दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह रूटीन आदेश है जो हर तीन महीने पर जारी किया जाता है और मौजूदा परिस्थितियों से इसका कोई लेना देना नहीं है।

letter_1.JPG
सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट अनस तनवीर सिद्दीकी ने कहा कि अधिसूचना एक रुटीन प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन जिस तरह से इसे घोषित और प्रचारित किया गया है उससे पता चलता है कि इसका मकसद कुछ और भी हो सकता है।

उन्होंने इसके टाइमिंग पर सवाल उठाया और कहा कि आगामी गणतंत्र दिवस को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शनकारियों के बीच भय पैदा करने के लिए यह किया जा सकता है।

क्यों ख़तरनाक है एनएसए

नेशनल सिक्योरिटी एक्ट यानी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980, जिसे शॉर्ट में एनएसए या रासुका कहते हैं, देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से संबंधित एक कानून है। यह कानून केंद्र और राज्य सरकार को किसी भी संदिग्ध नागरिक को हिरासत में लेने की शक्ति देता है। पब्लिक ऑर्डर या ज़रूरी चीज़ों की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारें भी इसके तहत किसी को गिरफ्तार कर सकती हैं।

पकड़े गए व्यक्ति को पांच दिनों तक गिरफ्तारी या हिरासत में लेने की वजह बताना जरूरी नहीं है। असाधारण परिस्थितियों में 15 दिनों तक किसी को बिना वजह बताए हिरासत में रखा जा सकता है। हालांकि ये मुद्दत वजह बताने की है। लेकिन इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है। 23 सितंबर, 1980 को इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान इसे बनाया गया था।

इस कानून की सबसे खराब बात यह है कि हिरासत में लिया गया शख्स केवल हाईकोर्ट के एडवाइजरी बोर्ड के सामने अपील कर सकता है लेकिन ट्रायल के दौरान उसे किसी एडवोकेट की सहायता लेने की इजाजत नहीं होगी। जबकि सामान्य परिस्थितियों में जब एक शख्स को गिरफ्तार किया जाता है तो उसे कुछ निश्चित बुनियादी अधिकार हासिल होते हैं।

उसे यह बताना जरूरी होता है कि किस कारण से हिरासत में लिया गया है। इसके अलावा उसको जमानत हासिल करने का भी अधिकार है। साथ ही गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर उसे कोर्ट के सामने पेश किया जाना चाहिए। इसके अलावा गिरफ्तार शख्स अपने वकील से संपर्क करने और उससे कानूनी मदद लेने का भी हकदार होता है। लेकिन एनएसए में इस तरह का कोई भी अधिकार उपलब्ध नहीं होगा।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में रासुका के तहत भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर को कई महीने तक जेल में रखा गया था। वहीं इस कानून के तहत मणिपुर के पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम को जेल में रखा गया था। सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने पर उन्हें नवंबर 2018 में गिरफ्तार किया गया था। वह 133 दिन जेल में रहे थे। जनवरी 2019 में यूपी की बीजेपी सरकार ने गौवध के आरोप में बुलंदशहर में तीन शख्स को एनएसए के तहत गिरफ्तार किया था।

दिलचस्प बात यह है कि नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) जो राष्ट्रीय स्तर पर अपराधों के डेटा इकट्ठा करने का काम करता है उसको एनएसए के तहत दर्ज मामलों को गिनने का अधिकार नहीं है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर इसके तहत होने वाली कार्रवाइयों का कोई डेटा नहीं है। हालांकि तमाम राज्य सरकारें इसका दुरुपयोग करती रही हैं। जानकार इसमें उत्तर प्रदेश को पांच शीर्ष राज्यों में शुमार करते हैं।

आपको बता दें कि इससे पहले 14 जनवरी को आंध्र प्रदेश सरकार ने भी इसी तरह के आदेश दिए हैं, जहां राज्य की पुलिस को एक साल तक यह अधिकार दिए गए हैं कि वे कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकने वाले किसी भी व्यक्ति को रासुका के तहत हिरासत में ले सकते हैं

National Security Act
Delhi
Anil Baijal
CAA
NRC
Shaheen Bagh Protest
KhurejiProtest
Turkman Gate Protest
NSA
NCRB
NCRP Report
delhi police

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

धनशोधन क़ानून के तहत ईडी ने दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ़्तार किया

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

मुंडका अग्निकांड के लिए क्या भाजपा और आप दोनों ज़िम्मेदार नहीं?

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

मुंडका अग्निकांड : 27 लोगों की मौत, लेकिन सवाल यही इसका ज़िम्मेदार कौन?


बाकी खबरें

  • leather industry
    न्यूज़क्लिक टीम
    बंद होने की कगार पर खड़ा ताज नगरी का चमड़ा उद्योग
    10 Feb 2022
    आगरा का मशहूर चमड़ा उद्योग और उससे जुड़े कारीगर परेशान है। इनका कहना है कि सरकार इनकी तरफ ध्यान नही दे रही जिसकी वजह से पॉलिसी दर पॉलिसी इन्हें नुकसान पे नुक्सान हो रहा है।
  • Lakhimpur case
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर कांड: मुख्य आरोपी और केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को मिली ज़मानत
    10 Feb 2022
    केंद्रीय मंत्री के बेटे की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा था कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है कि उसने किसानों को कुचलने के लिए घटना में शामिल वाहन के चालक को उकसाया था।
  • uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : टिहरी बांध से प्रभावित गांव आज भी कर रहे हैं न्याय की प्रतीक्षा!
    10 Feb 2022
    उत्तराखंड के टिहरी ज़िले में बने टिहरी बांध के लिए ज़मीन देने वाले ग्रामीण आज भी बदले में ज़मीन मिलने की आस लगाए बैठे हैं लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
  •  Bangladesh
    पीपल्स डिस्पैच
    बांग्लादेश: सड़कों पर उतरे विश्वविद्यालयों के छात्र, पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ उपजा रोष
    10 Feb 2022
    बांग्लादेश में शाहजलाल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के बाद, देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्र एकजुटता की लहर दौड़ गई है। इन प्रदर्शनकारी छात्रों ने…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    वैश्विक निरक्षरता के स्थिर संकट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ
    10 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र ने नोट किया कि 'दुनिया भर में 150 करोड़ से अधिक छात्र और युवा कोविड-19 महामारी के कारण बंद स्कूल और विश्वविद्यालयों से प्रभावित हो रहे हैं या प्रभावित हुए हैं'; कम से कम 100 करोड़…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License