NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
दिल्ली नर्स यूनियन ने दी काम रोकने की चेतावनी, क्या ऐसे कोरोना से जीतेगा देश?
यूनियन का कहना है कि पीपीई किट और मास्क की कमी जल्द दूर की जाए, नर्सों के रुकने का बेहतर इंतज़ाम हो, नहीं तो नर्सें काम बंद कर देंगी।  
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 Apr 2020
दिल्ली नर्स यूनियन
Image courtesy: Flipboard

“कोरोना वायरस के खिलाफ भारत सामूहिक रूप से असफल होगा अगर डॉक्टरों, नर्सों और इलाज कर रहे अन्य कर्मचारियों के लिए पर्याप्त व्यक्तिगत रक्षा उपकरण (पीपीई) की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की जाएगी।”

ये बातें भारतीय चिकित्सा परिषद (आईएमए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य डॉ. शांतनु सेन ने मौजूदा परिस्थितियों के संदर्भ में कही हैं। देश में लगातार कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। देशभर में जारी लॉकडाउन के बावजूद स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही हैं। ऐसे में बार-बार देश के स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा ज़रूरी बचाव के उपकरणों की मांग और उनकी खस्ता हालत इस परिस्थिति को और चिंताजनक बना देती है।

हाल ही में यूनाइटेड नर्सेस एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर कहा था कि भारत सरकार डब्ल्यूएचओ के मानकों का पालन नहीं कर रही है। देश में अभी तक राष्ट्रीय प्रोटोकॉल तक तैयार नहीं किया जा सका है। अब निजी सुरक्षा उपकरण की मांग को लेकर दिल्ली नर्स यूनियन ने काम रोकने की चेतावनी दे दी है। यूनियन का कहना है कि पीपीई किट और मास्क की कमी जल्द दूर की जाए, एक ही हॉल में बेड लगाकर सभी नर्सों को रुकने का इंतज़ाम करने की बजाय उन्हें अलग कमरे दिए जाएं नहीं तो नर्से काम बंद कर देंगी।  

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल से ड्यूटी के बाद 95 प्रतिशत नर्सों को अपने घर जाना पड़ रहा है, ऐसे में कोरोना संक्रमण का ख़तरा घरवालों पर भी बराबर बना हुआ है।

इस संबंध में दिल्ली नर्सेस यूनियन की महासचिव जीमोल शाजी ने कहा, ‘हमारा जीवन भी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हमारा यही कहना है कि हम कोई भी ड्यूटी नहीं करेंगे। प्रबंधन को हमने इस संबंध में कई बार मेल भेजा, लेकिन इन मांगों को लेकर अब तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है।’

बता दें कि दिल्ली सरकार ने राजधानी के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के उपचार से जुड़े डॉक्टरों और नर्सों को होटल की सुविधा देने की बात कही थी। लेकिन दिल्ली नर्सेज फेडरेशन का कहना है कि प्रशासन आदेश के बाद भी अब तक कोई व्यवस्था नहीं कर पाया है। इस संबंध में दिल्ली नर्सेज फेडरेशन ने शुक्रवार, 10 मार्च को दिल्ली के एलजी अनिल बैजल को पत्र लिखकर इस पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।

क्या लिखा है पत्र में?

फेडरेशन के पत्र में लिखा है कि स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने 29 मार्च को आदेश जारी कर राजधानी के चार बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों, नर्सों व पैरामेडिकल स्टाफ को  होटल में रहने, भोजन व अन्य आवश्यक सुविधाओं को देने का निर्देश दिया था। लेकिन अब तक तक नर्सों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इसके अभाव में नर्सों को अपने घर जाना पड़ रहा है, जिससे उनके बच्चों व परिवार में भी कोरोना होने का खतरा है।

फेडरेशन के उपाध्यक्ष जितेंद्र कुमार के अनुसार, “नर्सों को भी पीपीई किट, मास्क जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रहीं। दिल्ली कैंसर इंस्टीट्यूट में बेहतर सुविधाएं न होने के कारण ही स्टाफ में कोरोना वायरस का संक्रमण मिल रहा है। इसके अलावा, अस्पताल के सामान्य क्षेत्र जैसे लिफ्ट, सीढ़ी व लोगों द्वारा इस्तेमाल हो रही जगहों को हर 4 घंटे में सैनिटाइज किया जाना चाहिए।”

मालूम हो कि दिल्ली में अब तक कम से कम 35 स्वास्थ्य कर्मी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसमें से 20 नर्सिंग स्टाफ़ हैं। दिल्ली के कैंसर इंस्टीट्यूट में नर्सिंग स्टाफ़ सहित 11 स्वास्थ्य कर्मियों में कोरोना की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से कुछ ऐसे भी हैं जो कोरोना मरीजों का इलाज नहीं कर रहे थे। इसका सीधा  मतलब है कि सभी स्वास्थ्य कर्मियों को पीपीई किट जैसे सुरक्षा के उपकरण दिए जाने चाहिए फिर चाहें वो किसी भी विभाग में क्यों न तैनात हों।

'द इंडियन एक्सप्रेस' ने दिल्ली में नर्सों की समस्याओं को लेकर एक रिपोर्ट छापी है और इसमें कुछ नर्सों से बातचीत के आधार पर कई खामियाँ उजागर की गई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 18 मार्च से कोरोना वार्ड में काम कर रहे दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी कहते हैं कि जो कोरोना मरीजों के सीधे संपर्क में आ रहे हैं उन्हें तो पीपीई किट दिए गए हैं, लेकिन दूसरे लोगों को कहा गया है कि सर्जिकल मास्क और ओटी गाउन से काम चलाएँ।

हालाँकि वो ये भी बताते हैं कि नर्सिंग अफ़सरों को रहने के लिए बिल्डिंग मुहैया कराई गई है लेकिन एक-एक कमरे में कम से कम 8-8 लोगों को रखा गया है और कॉमन वाशरूम है। वह कहते हैं कि इसीलिए उन्होंने वहाँ रहने से इनकार कर दिया और वह हर रोज़ घर जाते हैं। वह कहते हैं कि जैसे ही उन्हें पता चला था कि उनकी ड्यूटी कोरोना वार्ड में लगेगी उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों को क़रीब 250 किलोमीटर दूर अपने गांव भेज दिया था।

निजी हॉस्पिटल में नर्सिंग अधिकारी और यूनाइटेड नर्सेस एसोसिएशन के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष रिंस जोसफ़ ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' से कहा कि जिन प्राइवेट हॉस्पिटलों में कोरोना वार्ड नहीं हैं वो अपने स्टाफ़ को पीपीई किट नहीं मुहैया करा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'स्वास्थ्य कर्मचारियों को पर्याप्त (सुरक्षा) गियर के बिना आग की कतार में खड़ा कर दिया गया है'।

दिल्ली नर्सेस फ़ेडरेशन के महासचिव एलडी राम चंदानी ने बताया कि जो कोरोना मरीजों से सीधे संपर्क में नहीं आ रहे हैं उन्हें कम से कम एचआईवी ड्रेस किट ही दे दिया जाए। वह आरोप लगाते हैं कि नर्सिंग स्टाफ़, सफ़ाई कर्मचारियों को एन95 मास्क भी नहीं दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि पीपीई और मास्क की कमी है। मेडिकल स्टाफ की रहने की उचित व्यवस्था नहीं है। दिल्ली का कोई भी अस्पताल चाहें जीटीबी अस्पताल हो या लोकनायक हो, दीनदयाल हो या फिर अंबेडकर अस्पताल, किसी भी अस्पताल में रहने की सुविधा, पीपीई किट और मास्क आदि उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।’

बता दें कि सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण बीते दिनों दिल्ली के हिंदू राव अस्पताल से चार डॉक्टरों के इस्तीफा देने का भी मामला सामने आया था।

हालाँकि, बात सिर्फ दिल्ली की नहीं है। देशभर में एक के बाद एक कई डॉक्टरों और नर्सों ने सोशल मीडिया पर लचर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। वहीं बचाव के बेसिक उपकरण जैसे दस्ताने और मास्क न मिलने पर उत्तर प्रदेश के एंबुलेंस कर्मियों को हड़ताल तक पर जाना पड़ा। देश के दूसरे राज्यों से पहले आई रिपोर्टों में बताया गया कि रेनकोट और हेलमेट पहनकर स्वास्थ्यकर्मियों को काम करना पड़ रहा है।

महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले के एक सरकारी अस्पताल की नर्सों ने भी सुरक्षा उपकरणों की मांग की थी। नर्सों ने बताया था कि अस्पताल में पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा किट, आवश्यक दवाएं, सैनिटाइजर और हैंडवाश सुविधाएं नहीं हैं।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर 22 मार्च जनता कर्फ्यू के दिन सभी देशवासियों ने ‘कोरोना योद्धाओं’ यानी कोरोना की लड़ाई में फ्रंटलाइन पर काम करने वाले सभी स्वास्थ्य कर्मियों के लिए ताली और थाली बजाई थी। इस ताली और थाली से भले ही इन लोगों का मनोबल थोड़े समय के लिए बढ़ गया हो लेकिन इनके जान जाने का खतरा कतई कम नहीं हुआ। आज भी इन स्वास्थ्यकर्मियों को बेसिक सुविधाओं क लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

Coronavirus
COVID-19
Corona Crisis
Delhi Nurses Union
PPE kit
Delhi Nurses Federation
LD Ram Chandani

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • EVM
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: इस बार किसकी सरकार?
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में सात चरणों के मतदान संपन्न होने के बाद अब नतीजों का इंतज़ार है, देखना दिलचस्प होगा कि ईवीएम से क्या रिजल्ट निकलता है।
  • moderna
    ऋचा चिंतन
    पेटेंट्स, मुनाफे और हिस्सेदारी की लड़ाई – मोडेरना की महामारी की कहानी
    09 Mar 2022
    दक्षिण अफ्रीका में पेटेंट्स के लिए मोडेरना की अर्जी लगाने की पहल उसके इस प्रतिज्ञा का सम्मान करने के इरादे पर सवालिया निशान खड़े कर देती है कि महामारी के दौरान उसके द्वारा पेटेंट्स को लागू नहीं किया…
  • nirbhaya fund
    भारत डोगरा
    निर्भया फंड: प्राथमिकता में चूक या स्मृति में विचलन?
    09 Mar 2022
    महिलाओं की सुरक्षा के लिए संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन धूमधाम से लॉंच किए गए निर्भया फंड का उपयोग कम ही किया गया है। क्या सरकार महिलाओं की फिक्र करना भूल गई या बस उनकी उपेक्षा कर दी?
  • डेविड हट
    यूक्रेन विवाद : आख़िर दक्षिणपूर्व एशिया की ख़ामोश प्रतिक्रिया की वजह क्या है?
    09 Mar 2022
    रूस की संयुक्त राष्ट्र में निंदा करने के अलावा, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों में से ज़्यादातर ने यूक्रेन पर रूस के हमले पर बहुत ही कमज़ोर और सतही प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा दूसरों…
  • evm
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: नतीजों के पहले EVM को लेकर बनारस में बवाल, लोगों को 'लोकतंत्र के अपहरण' का डर
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में ईवीएम के रख-रखाव, प्रबंधन और चुनाव आयोग के अफसरों को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। उंगली गोदी मीडिया पर भी उठी है। बनारस में मोदी के रोड शो में जमकर भीड़ दिखाई गई, जबकि ज्यादा भीड़ सपा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License