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भारत
राजनीति
दिल्ली हिंसा : लॉकडाउन के बावजूद दिल्ली पुलिस कर रही है गिरफ़्तारियाँ
जामिया की एक गर्भवती छात्रा सहित दिल्ली पुलिस ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा और सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शनों के संबंध में कुल 10 लोगों को हिरासत में लिया है।
तारिक़ अनवर
20 Apr 2020
Translated by महेश कुमार
दिल्ली हिंसा

नई दिल्ली: भले ही पूरे देश में तालाबंदी हो रही हो और लोग नोवेल कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए अपने घरों के अंदर बंद हों, लेकिन दिल्ली पुलिस इस वक़्त का और इन हालात का फायदा उठाती नज़र आ रही है, पुलिस दिल्ली में हुई हिंसा के संबंध में छापे मार रही है और उन लोगों को गिरफ्तार कर रही है जो उत्तर-पूर्वी दिल्ली में विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) और भारतीय नागरिकों के प्रस्तावित राष्ट्रीय रजिस्टर (NRIC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में आगे की कतारों में थे।

सूत्रों की मानें तो कम से कम 10 लोगों को राष्ट्रीय राजधानी में सांप्रदायिक हिंसा की साजिश और  नागरिकता विरोधी कानून के विरोध के मामले में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में मीरान हैदर और सफोरा जरगर – जो जामिया मिलिया इस्लामिया में रिसर्च स्कॉलर है और जामिया समन्वय समिति (जेसीसी) के सदस्य है, खालिद सैफी जैसे कार्यकर्ता और पूर्व में कांग्रेस काउन्सलर रही  इशरत जहां भी इसमें शामिल हैं। जेसीसी का गठन जामिया के मौजूदा छात्रों और पूर्व छात्रों ने उस वक़्त किया था, तब जब पुलिस ने पिछले साल दिसंबर में कैंपस में घुसकर सीएए के विरोध प्रदर्शनों पर हिंसा का इस्तेमाल किया था।

इसमें अजीब बात है कि ये है कि ये कार्यवाही ऐसे वक़्त हो रही है, जब देश भर की जेलों से घातक कोविड़-19 के खतरे के मद्देनजर विचाराधीन कैदियों को पैरोल पर रिहा किया जा रहा है।

कई अन्य - लगभग 50 के करीब व्यक्तियों को दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा ने पूछताछ के लिए जांचकर्ताओं के सामने हाजरी देने का नोटिस जारी किया हैं। जिन लोगों को नोटिस दिया गया है, वे जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र हैं, जो कांग्रेस समर्थित नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और वाम दलों से जुड़े छात्र संगठन के कार्यकर्ता हैं तथा पिंजरा तोड़ के कार्यकर्ता भी इसमें शामिल हैं – जो दिल्ली विश्वविद्यालय की महिला छात्रों का एक समूह है।

शहर भर में हुए विरोध प्रदर्शन और उसके बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा के संबंध में कई प्राथमिकी दर्ज की गई है। लेकिन पुलिस ने अब तक की गई कुल गिरफ्तारियों या उन पर लगाए गए आरोपों के बारे में का कोई भी विवरण या जानकारी नहीं दी है।

जामिया मिलिया इस्लामिया में एम.फिल (सोशियोलॉजी) की छात्रा ज़रगर के पति को अपनी पत्नी के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों की जानकारी लेने के लिए बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। यह भी नहीं पता कि 11 अप्रैल को किस जिले की पुलिस ने उन्हे हिरासत में लिया था। बाद में मिली जानकारी के अनुसार उन्हें उत्तर-पूर्व जिला पुलिस ने जाफराबाद में इजलास में भाग लेने और इसके माध्यम से सड़क को अवरुद्ध करने के आरोप में हिरासत में लिया है।

पुलिस ने जामिया समन्वय समिति की मीडिया समन्वयक सफोरा ज़रगर को गिरफ्तार किया है। उन पर दिल्ली के उत्तर-पूर्व जिले के जाफराबाद में सीएए के विरोध प्रदर्शनों का आयोजन करने का आरोप है।

न्यूज़क्लिक ने जांचकर्ताओं से जब बात कि तो उन्हौने बताया कि जांच अभी भी चल रही है और इसलिए, इस समय आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों के बारे में बताना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा, "यह केवल जांच के बाद ही बताना संभव होगा।"

स्पेशल सेल ने जांच में सहयोग करने के लिए सबको नोटिस जारी किए हैं, ये सब नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए दंगों के संबंध में हैं। सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए दंगों और हिंसा से संबंधित मामलों की जांच क्राइम ब्रांच की स्पेशल शाखा और दो विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहे हैं।

यहाँ यह याद दिलाना जायज होगा कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने 23 फरवरी को भड़काऊ भाषण दिया था, और नतीजतन सीएए, एनपीआर और एनआरसी का विरोध करने और समर्थन करने वाले समूहों के बीच झड़पें हुई थीं, जो बाद में पूरे उत्तर-पूर्व दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा में बदल गई थी। यह हिंसा उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में 27 फरवरी तक जारी रही। इस हिंसा में कम से कम 53 लोगों की जान चली गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए थे।

मूल रूप से कश्मीर से संबंध रखने वाली, ज़गर एक सीएए विरोधी कार्यकर्ता हैं, जो मई 2018 में एनएसयूआई की इकाई भंग होने से पहले जामिया इकाई की महासचिव भी थी। वह जामिया मिलिया में सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान अतिथि वक्ताओं की व्यवस्था करने में जुटी थी।

27 वर्षीय जरगर, गर्भवती हैं, को नॉर्थ-ईस्ट जिला पुलिस ने पहले तो दंगों के सिलसिले में गिरफ़्तार किया फिर 13 अप्रैल को स्पेशल सेल ने उन्हें साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया।

हैदर जो छात्र राष्ट्रीय जनता दल से हैं, उनका संगठन राष्ट्रीय जनता दल से संबद्ध हैं। उन्होंने सीएए विरोध प्रदर्शनों पर टीवी डिबेट में भी भाग लिया और 15 दिसंबर को विश्वविद्यालय के पुस्तकालय के अंदर छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर लगातार सवाल खड़े किए थे।

मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखने वाले मीरन हैदर ओखला के जामिया नगर के अबुल फजल एन्क्लेव में रहते हैं, जिन्हे वास्तव में 31 मार्च को इंस्पेक्टर प्रमोद चौहान ने नोटिस दिया था, जो अपराध शाखा द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी (संख्या 59/2020) के संबंध में पूछताछ के लिए 6 मार्च को पेश हुए थे। दिल्ली पुलिस ने बाद में उन्हे गिरफ्तार कर लिया था।

गिरफ़्तारी का समय

हालांकि, गिरफ्तारी का समय अपने आप में आशंका पैदा करता हैं, क्योंकि कई लोगों का मानना  हैं कि लॉकडाउन के बीच असंतोष की आवाज़ों को दबाना पुलिस की रणनीति का एक हिस्सा है।

जामिया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघों के साथ-साथ राईट एक्टिविस्टस और राजनीतिक नेताओं ने इन गिरफ्तारियों को "मनमाना" और "सत्ता का दुरुपयोग", बताया है और पुलिस की कार्रवाई की निंदा की है - जो उनके अनुसार - उन लोगों की आवाज़ों को दबाने की कोशिश है जो सरकारी नीतियों की आलोचना करते हैं।

“यह एक ऐसा समय है जब राष्ट्र को धरती पर स्वास्थ्य और भूख के संकट पर ध्यान केंद्रित करना था; जब हमारी प्राथमिकता वायरस से लड़ने के लिए एकजुट रहना होना चाहिए थी। ऐसे समय में जब लॉकडाउन की वजह से नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का पूरी तरह से उपयोग करने में असमर्थ हैं, राज्य द्वारा सत्ता के किसी भी तरह के दुरुपयोग के खिलाफ नागरिकों की रक्षा करना सरकारों का नैतिक कर्तव्य है।'' उक्त बातें ‘हम भारत के लॉग' द्वारा जारी 13 अप्रैल के एक बयान में दर्ज हैं – यह 26 राईट एक्टिविस्टस और राजनीतिक नेताओं की व्यापक संस्था है।

उन्होंने पुलिस पर दिल्ली हिंसा के मामले में "काल्पनिक कथाओं को गढ़ने" और सरकार की नीतियों का विरोध करने वालों को चुप कराने और कोविड़-19 के लिए हुए लॉकडाउन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य द्वारा सत्ता का दुरुपयोग रिपोर्ट नहीं होगा।'

उनके बयान के मुताबिक, “इस पूरे मामले में विशेष रूप से जो चिंता की बात है वह यह कि श्रीमती सफूरा जरगर गर्भवती हैं और ऐसी स्थिति में उन्हें उचित देखभाल और चिकित्सा की जरूरत है। कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन के दौरान इस तरह की कार्रवाई उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है“।

जेसीसी, जो अब अन्य कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के डर से चुप है, ने अपने पहले एक बयान में कहा था कि, “देश बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य संकट से गुज़र रहा है; हालाँकि, राज्य मशीनरी असंतुष्टों की आवाज़ को दबाने के लिए झूठे केस लगा कर छात्र कार्यकर्ताओं को परेशान कर रही है। लॉकडाउन के बाद से ही पिछले कुछ दिनों से, हमारे दोस्त मीरन जरूरतमंदों को राशन मुहैया कराने का काम काफी लगन से काम कर रहे थे। यह शर्मनाक है कि इन हालात में भी, मुस्लिम आवाजों को निशाना बनाया जा रहा है और राज्य द्वारा उनका शिकार किया जा रहा है।”

पुलिस की समझ 

शिकायत भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 (दंगाई), 148 (दंगाई, घातक हथियार से लैस), 149 (गैरकानूनी सभा करना) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत दायर की गई है। इस शिकायत को नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के क्राइम ब्रांच के एक सब-इंस्पेक्टर अरविंद कुमार की शिकायत के आधार पर दायर किया गया है। इस शिकायत को दो व्यक्तियों - उमर खालिद, जो जेएनयू के पूर्व छात्र और कार्यकर्ता है और भजनपुरा निवासी दानिश के खिलाफ दर्ज किया गया है।

क्राइम ब्रांच ने खुद के द्वारा दर्ज मामलों को स्पेशल शाखा को स्थानांतरित कर दिया था, जिसने आईपीसी की गंभीर धाराओं जैसे 124B (राजद्रोह), 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 353 (अपने कर्तव्य के निर्वहन से लोक सेवक को रोकना और उनपर हमला करना), 186 (सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में लोक सेवक को बाधा डालना), 212 (अपराधी को छिपाना), 395 (डकैती), 427 (शरारत कर 50 रुपये की संपत्ति का नुकसान करना) , 435 (आग या विस्फोटक पदार्थ द्वारा 100 रुपये की राशि को नुकसान पहुंचाने के इरादे से शरारत करना), 436 (घर को नष्ट करने के इरादे से आग या विस्फोटक पदार्थ का इस्तेमाल करना,), 452 (चोट पहुंचाना, हमला करने की तैयारी करना और घर में घुसना), 454 (गुप्त रूप से घर में घुसना), 109  (बहकाना।उकसाना), 114 (अपराध के समय उकसावा देने वाले का उपस्थित रहना), 147, 148, 149, 124ए 153ए (धर्म, जाति के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना और जन्म स्थान, निवास, भाषा के आधार पर) और इसके अतिरिक्त 34 आईपीसी की धारा लगाई गई जिसमें (सामान्य इरादा) जिसमें 3 और 4 की धारा भी है जो सार्वजनिक संपत्ति की क्षति और रोकथाम (पीडीपीपी) और 25 और 27 शस्त्र अधिनियम की धारा शामिल है।

क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज की गई मूल प्राथमिकी में, शिकायतकर्ता – सब इंस्पेक्टर अरविंद कुमार ने कहा, “मेरे एक मुखबिर ने मुझे सूचित किया है कि दिल्ली में 23, 24 और 25 फरवरी को हुए दंगों की पूर्व सूचना थी। इसके लिए सुनियोजित साजिश रची गई थी, जिसे जेएनयू के छात्र उमर खालिद और उसके गुर्गों ने रचा था - जो दो अलग-अलग संगठनों से जुड़े हैं। उमर खालिद ने इस साजिश के तौर पर - दो अलग-अलग जगहों पर भड़काऊ भाषण दिए, लोगों को सड़कों पर उतरने को कहा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की प्रस्तावित भारत यात्रा के मद्देनजर यात्रा को रोकने की अपील की ताकि इस बात का प्रचार प्रसार किया जा सके कि भारत में अल्पसंख्यकों को सताया जाता है। जैसा कि योजनाबद्ध था, उमर खालिद और उसके साथियों ने दिल्ली में कई जगहों पर सड़कों पर महिलाओं और बच्चों को दंगे का जरिया बनाया।

साजिश के तहत दिल्ली के कई हिस्सों जैसे मौजपुर, कर्दमपुरी, जाफराबाद, चांद बाग, गोकलपुरी, शिव विहार और आसपास के इलाकों में आग्नेयास्त्रों, पेट्रोल बम, एसिड की बोतलें, पत्थर, गुलेल और अन्य घातक हथियार एकत्र किए गए थे। दानिश पुत्र खालिद, भाजनपुरा निवासी को दंगों में उकसाने के लिए दो अलग-अलग जगहों से बाहरी लोगों को जुटाने का काम सौंपा गया था। साजिश के एक हिस्से तौर पर, जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे की सड़क को महिलाओं और बच्चों द्वारा अवरुद्ध कर दिया गया था ताकि लोगों को असुविधा हो और उनके भीतर तनाव पैदा हो। यह भी सुनिश्चित किया गया था कि इन क्षेत्रों के स्कूलों में पढ़ने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे योजनाबद्ध तरीके से जल्दी घर पहुँच जाए। अगर इस साजिश की जांच की जाती है, तो उन लोगों की पहचान करना संभव होगा जिन्होंने दंगों को अंजाम दिया था।”

गौर से देखें तो आप पाएंगे कि एफआईआर में जो कहानी गढ़ी गई है वह सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई सदस्यों द्वारा लगाए गए उन आरोप और बयानों के अनुरूप है, जिसमें उन्हौने हिंसा के बाद कहा था कि डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रीय दौरे के समय इस तरह की  हिंसा भारत को ख़राब रौशनी पेश करना चाहती है।

इस बीच ये खबर भी दे दें कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़काने वाले भाजपाई नेता कपिल मिश्रा को गिरफ़्तार करने की एक याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और सरकार और पुलिस उनके बचाव में खड़ी है।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

Delhi Violence: Delhi Police on Arrest Spree While Prisoners Being Released Amid Lockdown

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