NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
छात्रों को ज़मानत देने के अदालत के आदेश में अड़चन डालने की कोशिश कर रही है दिल्ली पुलिस: बृंदा करात
करात ने आरोप लगाया, ‘‘दिल्ली पुलिस कार्यवाही को लंबित कर रही है ताकि वे छात्रों को जेल में रखे रह सकें। उन्होंने जो कारण दिये, वे अजीबोगरीब थे।’’
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 Jun 2021
बृंदा करात

नयी दिल्ली : दिल्ली की उच्च न्यायालय ने दिल्ली दंगे में कथित आरोपी तीन छात्र नेताओं नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और आसिफ इकबाल तनहा को जमानत दी थी जिसके बाद सब को उम्मीद थी की ये सभी जल्द ही जेल की सलाखों के बाहर होंगे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने औपचरिकताओं का बहाना बनाकर इन्हें अभी तक रिहा नहीं किया है।  जबकि इस बीच दिल्ली पुलिस इनकी ज़मानत के उच्च न्यायालय के निर्णय के ख़िलाफ़ उच्चतम न्यायालय चली गई है। इसको लेकर दिल्ली पुलिस की मंशा पर लोग सवाल उठा रहे हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पोलित ब्यूरो की सदस्यऔर पूर्व सांसद  बृंदा करात ने बुधवार को आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस पिछले साल उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से संबंधित मामलों में तीन छात्र कार्यकर्ताओं को जमानत देने के उच्च न्यायालय के आदेश को जानबूझकर बाधित करने की कोशिश कर रही है।

करात ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम कर रही दिल्ली पुलिस नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और आसिफ इकबाल तनहा की जमानत पर रिहाई को रोकने के लिए अजीबोगरीब बहाने बना रही है। करात ने नरवाल की रिहाई के लिए आवश्यक जमानत भी दी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को तीनों को जमानत दी थी जिसके बाद नरवाल और कलीता ने एक निचली अदालत में तत्काल रिहाई के लिए अनुरोध किया था।

इस बीच दिल्ली पुलिस ने कार्यकर्ताओं को जमानत देने के उच्च न्यायालय के आदेशों को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। इन तीनों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामले दर्ज किये गये थे।

करात ने आरोप लगाया, ‘‘दिल्ली पुलिस कार्यवाही को लंबित करा रही है ताकि वे छात्रों को जेल में रखे रह सकें। उन्होंने जो कारण दिये, वे अजीबोगरीब थे।’’

उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने अदालत में कहा कि वह कालिता के घर के पते का सत्यापन करने के लिए एक अधिकारी को राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन से असम भेज रही है। करात ने आरोप लगाया कि यह उन्हें जेल में रखने की ‘एक और चाल’ है।

आरोपियों के वकील अदित पुजारी ने आरोप लगाया कि पुलिस उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद आरोपियों की रिहाई में जानबूझकर विलंब कर रही है।

पुजारी ने पुलिस से कहा, ‘‘आप उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रख रहे हैं। जमानत मिल चुकी है और तब से 24 घंटे हो चुके हैं।’’

तीनों छात्र कार्यकर्ताओं को पिछले साल फरवरी में हुए दंगों से जुड़े मामलों में सख्त गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मई 2020 में गिरफ्तार किया गया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कल तीनों को जमानत देते हुए कहा था कि राज्य ने प्रदर्शन के अधिकार और आतंकी गतिविधि के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया है तथा यदि इस तरह की मानसिकता मजबूत होती है तो यह ‘‘लोकतंत्र के लिए एक दुखद दिन होगा।’’

इसने यूएपीए के तहत ‘आतंकवादी गतिविधि’ की परिभाषा को ‘‘कुछ न कुछ अस्पष्ट’’ करार दिया और इसके ‘‘लापरवाह तरीके’’ से इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी देते हुए छात्र कार्यकर्ताओं को जमानत देने से इनकार करने के निचली अदालत के आदेशों को निरस्त कर दिया था।

उच्च न्यायालय ने 113, 83 और 72 पृष्ठों के तीन अलग-अलग फैसलों में कल कहा था कि यूएपीए की धारा 15 में ‘आतंकवादी गतिविधि’ की परिभाषा व्यापक है और कुछ न कुछ अस्पष्ट है, ऐसे में आतंकवाद की मूल विशेषता को सम्मिलित करना होगा तथा ‘आतंकवादी गतिविधि’ मुहावरे को उन आपराधिक गतिविधियों पर ‘‘लापरवाह तरीके से’’ इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है जो भारतीय दंड संहिता के तहत आते हैं।

अदालत ने कहा था, ‘‘ऐसा लगता है कि असहमति को दबाने की अपनी बेताबी में सरकार के दिमाग में प्रदर्शन करने के लिए संविधान प्रदत्त अधिकार और आतंकवादी गतिविधि के बीच की रेखा कुछ न कुछ धुंधली होती हुई प्रतीत होती है। यदि यह मानसकिता प्रबल होती है तो यह लोकतंत्र के लिए एक दुखद दिन होगा।’’

गौरतलब है कि 24 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा भड़क गई थी, जिसने सांप्रदायिक टकराव का रूप ले लिया था। हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी तथा करीब 200 अन्य घायल हुए थे।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ )

Delhi Violence
delhi police
UAPA
Brinda Karat
Delhi High court

Related Stories

दिल्ली उच्च न्यायालय ने क़ुतुब मीनार परिसर के पास मस्जिद में नमाज़ रोकने के ख़िलाफ़ याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

विशेष: कौन लौटाएगा अब्दुल सुब्हान के आठ साल, कौन लौटाएगा वो पहली सी ज़िंदगी

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!

शाहीन बाग़ ग्राउंड रिपोर्ट : जनता के पुरज़ोर विरोध के आगे झुकी एमसीडी, नहीं कर पाई 'बुलडोज़र हमला'

जहांगीरपुरी : दिल्ली पुलिस की निष्पक्षता पर ही सवाल उठा दिए अदालत ने!


बाकी खबरें

  • book
    शिरीष खरे
    तरक़्क़ीपसंद तहरीक की रहगुज़र :  भारत में प्रगतिशील सांस्कृतिक आंदोलन का दस्तावेज़
    13 Nov 2021
    ज़ाहिद ख़ान की हालिया किताब की समीक्षा और उसके बारे में कुछ अहम बातें।
  • peasant movement
    लाल बहादुर सिंह
    विचार: पूर्व के आंदोलनों से किस तरह अलग और विशिष्ट है किसान आंदोलन
    13 Nov 2021
    कुछ राजनैतिक विश्लेषकों ने भी यह सवाल उठाया है कि किसान आंदोलन का वैचारिक राजनैतिक अवदान अतीत के दूसरे महत्वपूर्ण आंदोलनों जैसा नहीं है। इसी की पड़ताल कर रहे हैं वरिष्ठ लेखक और एक्टिविस्ट लाल बहादुर…
  • DAP Shortage a Symptom of Larger Food Planning Crisis
    इंद्र शेखर सिंह
    डीएपी की कमी बड़े खाद्य संकट का लक्षण है
    13 Nov 2021
    तिलहन और सरसों के दाम पहले से ही ऊंचे चल रहे हैं। दामों के और अधिक बढ़ने से खाना पकाने की सभी वस्तुएं कई घरों की पहुंच से बाहर हो जाएंगी।
  • Zakia Jafri
    संचिता कदम
    एसआईटी  ने सिर्फ़ 'काम' किया, तहक़ीक़ात नहीं की: ज़किया जाफ़री एसएलपी में कपिल सिब्बल
    13 Nov 2021
    एसआईटी न सिर्फ़ पुलिस अधिकारियों के अहम रिकॉर्ड छिपाने जैसे पहलुओं पर ग़ौर करने में नाकाम रही, बल्कि उसने आरोपियों के बयानों की 'सच्चाई का पता लगाये बिना' उनके बयानों को आसानी से स्वीकार कर लिया।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 11,850 नए मामले, 555 मरीज़ों की मौत
    13 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.40 फ़ीसदी यानी 1 लाख 36 हज़ार 308 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License