NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
नताशा, देवांगना और आसिफ़ को ज़मानत: अदालत ने असहमति की आवाज़ें दबाए जाने पर जताई चिंता
दिल्ली दंगे के एक मामले में ज़मानत देते हुए कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा, "हम यह बोलने के लिए मजबूर हैं, ऐसा लगता है, कि राज्य (सरकार) के मन में असहमति की आवाज़ को दबाने के चिंता में विरोध करने के लिए संवैधानिक रूप से गारंटीकृत अधिकार और आतंकवादी गतिविधि के बीच की जो रेखा है वो कुछ धुंधली होती दिख रही है। अगर यह सोच ज़ोर पकड़ती है तो यह लोकतंत्र के लिए एक दुखद दिन होगा।"
मुकुंद झा
15 Jun 2021
devangna-natasha-asif
तस्वीर में देवांगना (बाएं), नताशा (बीच में) और आसिफ़ (दाएं)

नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगे के एक मामले में जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय की छात्राओं नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा को आज मंगलवार 15 जून को ज़मानत दे दी। इन लोगों को पिछले साल फरवरी में दंगों से जुड़े एक मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति एजे भंभानी की पीठ ने निचली अदालत के इन्हें ज़मानत ना देने के आदेश को ख़ारिज करते हुए तीनों को नियमित ज़मानत दे दी।

न्यायालय ने माना है कि प्रथम दृष्टया, तीनों के खिलाफ वर्तमान मामले में रिकॉर्ड की गई सामग्री के आधार पर धारा 15, 17 या 18 यूएपीए के तहत कोई अपराध नहीं बनता है।

इन्हें 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर ज़मानत दी गई। अदालत ने पिंजरा तोड़ कार्यकर्ताओं नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और तन्हा को अपने-अपने पासपोर्ट जमा करने, गवाहों को प्रभावित न करने और सबूतों के साथ छेड़खानी न करने का निर्देश भी दिया।

ज़मानत देते हुए, जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और एजे भंभानी की पीठ ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा, "हम यह बोलने के लिए मजबूर हैं, ऐसा लगता है, कि राज्य (सरकार) के मन में असहमति की आवाज़ को दबाने के चिंता में विरोध करने के लिए संवैधानिक रूप से गारंटीकृत अधिकार और आतंकवादी गतिविधि के बीच की जो रेखा है वो कुछ धुंधली होती दिख रही है। अगर यह सोच ज़ोर पकड़ती है तो यह लोकतंत्र के लिए एक दुखद दिन होगा।"

दिल्ली हाईकोर्ट ने इससे पहले जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा की अपील पर आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिसमें पिछले साल दिल्ली में हुए दंगों में बड़ी साजिश से जुड़े एक मामले में उनकी ज़मानत खारिज करने के खिलाफ अपील की गई थी।

तन्हा ने 26 अक्टूबर, 2020 के एक आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी ज़मानत याचिका को खारिज कर दिया गया था। तन्हा को कड़े यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने प्रथम दृष्टया यह देखते हुए ज़मानत अर्जी खारिज कर दी कि तन्हा के खिलाफ मामला चलने योग्य है और उन्होंने कथित तौर पर पूरी साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई।

तन्हा की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल पेश हुए, जबकि सरकार की ओर से अमन लेखी दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष पेश हुए।

दिल्ली पुलिस द्वारा दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में दर्ज प्राथमिकी 59/2020 में कुल 15 लोगों को नामजद किया गया था। इनमें तन्हा, नरवाल और कलिता, गुलफिशा फातिमा, इशरत जहां, सफूर ज़रगर, मीरन हैदर, खालिद सैफी, शिफू-उर-रहमान और कई अन्य कार्यकर्ता भी शामिल है। पुलिस ने दावा किया कि तन्हा ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाई।

न्यायालय में, दिल्ली पुलिस ने उनकी नियमित ज़मानत का विरोध करते हुए कहा कि दंगे पूर्व नियोजित थे और एक साजिश रची गई थी जिसमें तन्हा एक हिस्सा थे ।

तन्हा के वकीलों ने तर्क दिया था कि वह दंगों के दौरान दिल्ली में मौजूद नहीं थे और किसी भी विरोध स्थल का दौरा नहीं किया था जहां दंगा और हिंसा हुई थी, और तन्हा को दंगों से जोड़ने का कोई भौतिक सबूत नहीं है और किसी भी धन के संबंध में कोई आरोप नहीं है ।

आपको बता दें कि तन्हा जामिया मिलिया इस्लामिया में बीए (ऑनर्स) (फारसी) के अंतिम वर्ष के छात्र है। उन्हें मई 2020 में यूएपीए के तहत दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार किया गया था और तब से लगातार हिरासत में है।

मई 2020 में ही 23 तरीख को शाम पिंजरा तोड़ की दो कार्यकर्ता देवांगना कलिता और नताशा नरवाल को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा उनके घर से गिरफ़्तार किया गया था। दोनों को बीती फरवरी में जाफ़राबाद में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के ख़िलाफ़ हुए एक प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया। हालांकि आरोप है कि गिरफ़्तारी के समय परिवार वालों को कारण तक नहीं बताया गया था। अगले दिन रविवार, 24 मई को दोनों को कोर्ट में पेश किया गया लेकिन कोर्ट ने दोनों को ज़मानत दे दी थी। इसके बाद ताकि वो जेल से रिहा न हो सके इसलिए पुलिस ने कई अन्य मुक़दमे लगाएं है। हालाँकि अभी किसी भी मामले में पुलिस उन्हें दोषी नहीं ठहरा पाई है।

अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि देवांगना पर चार और नताशा पर तीन मामलों में मुकदमा चल रहा है। अब उन्हें सभी मामलों में ज़मानत मिल गई है। उनके वकील अदित पुजारी ने कहा कि उन्हें जेल से रिहा किया जाएगा।

जिस मामले में उन्हें 23 मई को गिरफ़्तार किया गया था वो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 186, 188, 283, 109, 341, 353 के तहत दर्ज किया गया था। जबकि जिस मामले में उन्हें 24 मई को गिरफ़्तार दिखाया गया वो IPC की धारा 147, 149, 353, 283, 323, 332, 307, 302, 427, 120-बी, 188 के साथ ही हथियार कानून और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान रोकथाम कानून की प्रासंगिक धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। बाद में शुक्रवार 29 मई 2020 को, दिल्ली पुलिस ने नताशा के ऊपर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत भी मुकदमा दर्ज किया था ।

गौरतलब है कि 24 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्व दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा भड़क गई थी, जिसने सांप्रदायिक टकराव का रूप ले लिया था। हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी तथा करीब 200 लोग घायल हो गए थे।

देवांगना कलिता सेंटर ऑफ़ वीमेन स्टडियज़ में एमफिल की छात्रा हैं, वहीं नताशा नरवाल सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज में पीएचडी की छात्रा हैं। वे दोनों पिंजरा तोड़ की संस्थापक सदस्य हैं। ‘पिंजरा तोड़’ की स्थापना साल 2015 में हॉस्टल और पेइंग गेस्ट में छात्राओं की सुविधा और अधिकारों के मकसद से की गई थी। कालिता और नरवाल ने क्रमशः डीयू के मिरांडा हाउस और हिंदू कॉलेज से ग्रेज्युशन किया है।

अभी ये दोनों जेल में ही हैं। हालांकि उम्मीद है कि जल्द ही कुछ कागज़ी कार्रवाई के बाद ये सभी जेल से बाहर आ जाएंगे। आपको बता दे जेल में रहने के दौरान नताशा के पिता की कोरोना से मृत्यु भी हो गई। नताशा को ज़मानत न मिलने से वो अंतिम समय के संघर्ष में पिता का साथ न दे पाईं। उनकी माता का निधन काफ़ी साल पहले ही हो चुका था। जबकि उनका एक ही भाई था जो स्वयं कोरोना से जूझ रहा था। हालांकि पिता की मृत्यु के बाद उन्हें न्यायलय ने 14 दिन की अंतिरम ज़मानत दी थी।

नताशा के पिता महावीर जब तक जीवित थे वो लगातार कहते रहे कि उनकी बेटी बेक़सूर है और जेल से बाहर आएगी और उन्होंने यह भी कहा था की हो सकता है कि जब वो जेल से बाहर आए तो वो इस दुनिया में न हों। दुर्भाग्य से उनकी ये बात पूरी तरह सही साबित हुई और जब उनकी बेटी को ज़मानत मिली तो वो इस दुनिया को छोड़कर जा चुके हैं।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ )

Natasha Narwal
Devangana Kalita Granted Bail
Asif Iqbal Tanha
Delhi riots
February Violence
delhi police
Delhi Violence
Narwal Granted Bail
Delhi High court
Northeast Delhi

Related Stories

दिल्ली उच्च न्यायालय ने क़ुतुब मीनार परिसर के पास मस्जिद में नमाज़ रोकने के ख़िलाफ़ याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!

शाहीन बाग़ ग्राउंड रिपोर्ट : जनता के पुरज़ोर विरोध के आगे झुकी एमसीडी, नहीं कर पाई 'बुलडोज़र हमला'

जहांगीरपुरी : दिल्ली पुलिस की निष्पक्षता पर ही सवाल उठा दिए अदालत ने!

अदालत ने कहा जहांगीरपुरी हिंसा रोकने में दिल्ली पुलिस ‘पूरी तरह विफल’

मोदी-शाह राज में तीन राज्यों की पुलिस आपस मे भिड़ी!


बाकी खबरें

  • kisan andolan
    राजेंद्र शर्मा
    ओये किसान, तू तो बड़ा चीटिंगबाज़ निकला!
    27 Nov 2021
    कटाक्ष: बेचारे मोदी जी को साल भर, जी हां पूरे साल भर, इसके सब्ज़बाग़ दिखाए कि बस, तीन कानूनों की वापसी की ही बात है। तीन कानून बस। इधर कानून वापस हुए और उधर बार्डर खाली, लेकिन...
  •  Prayagraj murder and rape case
    सोनिया यादव
    यूपी: प्रयागराज हत्या और बलात्कार कांड ने प्रदेश में दलितों-महिलाओं की सुरक्षा पर फिर उठाए सवाल!
    27 Nov 2021
    इस घटना के बाद एक बार विपक्ष खस्ता कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमलावर है, तो वहीं सरकार इस मामले में फिलहाल चुप्पी साधे हुए है। हालांकि राज्य में एक के बाद एक घटित हो रही ऐसी घटनाएं सरकार के '…
  • ncrt
    गौरी आनंद
    ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए NCERT वेबसाइट पर डाली गई शिक्षक प्रशिक्षण नियमावली को हटाया गया, LGBTQ+ समूहों ने किया विरोध
    27 Nov 2021
    700 से ज़्यादा लोगों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र को सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भेजा गया।
  • farming
    डॉ. ज्ञान सिंह
    किसानों की बदहाली दूर करने के लिए ढेर सारे जायज कदम उठाने होंगे! 
    27 Nov 2021
    केवल 3 कृषि कानूनों को वापस ले लेने से ही छोटे किसानों, खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण कारीगरों की दुर्दशा में सुधार नहीं होने जा रहा है। भारी कर्ज और बेहद गरीबी में जी रहे किसानों की भलाई के लिए ढेर सारे…
  • poverty
    भरत डोगरा
    डेटा: ग़रीबी कम करने में नाकाम उच्च विकास दर
    27 Nov 2021
    सरकार को असमानता को कम करना चाहिए और जीडीपी विकास दर को बढ़ा-चढ़ा कर पेश नहीं करना चाहिए। ग़रीबों को कोने में धकेलते हुए उनकी क़ीमत पर, आय और पूंजी को चंद मुट्ठियों में जमा किया जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License