NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
क्या छात्रों और एक्टिवस्ट को जानबूझकर निशाना बना रही है दिल्ली पुलिस?
दिल्ली हिंसा के आरोप में चल रहीं गिरफ्तारियों और अन्य कार्रवाई की कड़ी में पुलिस ने आइसा अध्यक्ष कंवलप्रीत का फोन ज़ब्त किया है। कंवलप्रीत का कहना है कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई डराने वाली है, ताकि हम एक लोकतांत्रिक देश में अपनी बात न रख सकें।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Apr 2020
AISA

दिल्ली : इस साल फरवरी के आखिर में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के जांच मामले में दिल्ली पुलिस ने सोमवार, 27 अप्रैल को छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन (आइसा) की दिल्ली इकाई की अध्यक्ष कंवलप्रीत कौर का मोबाइल फोन ज़ब्त कर लिया है। फोन ज़ब्त करने के लिए पुलिस ने जो नोटिस दिया, उसमें एक एफआईआर का हवाला दिया गया, जिसमें अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट यानी यूएपीए (UAPA) जैसे चार्ज लगाए जाने का ज़िक्र है।

इस संबंध में आइसा ने एक बयान जारी कर पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध किया है। संगठन द्वारा जारी किये गये बयान में कहा गया है, “नागरिकता संशोधन कानून के विरोधी एक्टिविस्ट असम के अखिल गोगोई से लेकर जामिया छात्रों-एक्टिविस्टों तक को झूठे मामले बनाकर सख़्त व काले कानूनों के तहत फंसाया गया है। ठीक ऐसा ही उत्तर प्रदेश में भी हुआ था, जब नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन स्थलों से छात्र-एक्टिविस्टों को गिरफ़्तार कर लिया गया था।

भीमा कोरेगांव मामले में अभी तक 11 बुद्धिजीवियों, प्रोफेसरों और एक्टिविस्टों को यूएपीए लगाकर जेल में डाला जा चुका है। हाल में, सीएए के विरोध प्रदर्शनों में अपनी आवाज़ शामिल करने वाले और कश्मीर में लॉकडाउन करके धारा 370 हटाने के विरोध में अपने आईएएस पद से इस्तीफ़ा दे देने वाले कन्नन गोपीनाथन पर भी दमन और दीव में मुकदमा दर्ज़ किया गया है, और आरोप लगा दिया गया कि वे नौकरी पर लौटने से मना कर रहे हैं।

यह स्पष्ट है कि बहाने चाहे जो भी दिये जा रहे हों, लेकिन योजना एक ही है- असहमति की आवाज़ों को निशाना बनाना व जेल में डालना, और भारतीय संविधान की हिफ़ाज़त में बोलने की हिम्मत करने के लिए दंड देना।” 

आइसा दिल्ली इकाई की अध्यक्ष कंवलप्रीत ने एक बयान में कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई डराने वाली है, ताकि हम एक लोकतांत्रिक देश में अपनी बात न रख सकें।

कंवलप्रीत के अनुसार, “मैंने अपने संगठन आइसा और अन्य हजारों लोगों के साथ सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में भाग लिया। हमने विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, जहां भारतीय संविधान की प्रस्तावना भी पढ़ी। उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा के बाद, हमने शांति, लोकतंत्र और न्याय के लिए आवाज उठाई। हम पीड़ितों के लिए राहत कार्य में सक्रिय थे। मुझे ये जानकर बहुत दुख हुआ कि पुलिस मुझे संविधान की रक्षा में बोलने और प्रदर्शनों में मेरी सक्रियता के लिए मुझे डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है। ”

कंवलप्रीत के वकील अभिषेक चिमनी ने न्यूज़क्लिक को बताया, “दिल्ली पुलिस ने कंवलप्रीत के फोन को ज़ब्त कर लिया है, लेकिन इसके लिए कोई विशेष कारण नहीं बताया। फिलहाल हम मामले को देख रहे हैं और उसके बाद ही कुछ कह पाएंगे।”

आइसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन साई बालाजी ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा कि दिल्ली पुलिस की ये कार्रवाई जेएनयू हिंसा और भीमा कोरेगांव मामले जैसी अन्य घटनाओं के समान ही है जहां पीड़ितों को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए अपराधियों के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने कहा, “यह कार्रवाई राजस्थान के एक प्रमुख समाचार पत्र द्वारा प्रकाशित एक ख़बर के आधार पर की गई है, जिसमें जामिया और जेएनयू से संगठन के सदस्यों और अन्य छात्रों पर उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया है। इन रिपोर्टों के आधार पर, भाजपा समर्थित अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने हमारी भागीदारी को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय के सामने एक प्रेजेंटेशन भी बनाया, जो बीजेपी द्वारा ही नियंत्रित था। अब उसी स्क्रिप्ट को अमल में लाते हुए दिल्ली पुलिस छात्रों और कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है।”

एन साईं बालाजी ने आगे बताया, "यह साफ है कि कपिल मिश्रा द्वारा दिल्ली पुलिस के सामने भड़काऊ भाषण दिए जाने के बाद दंगे भड़के लेकिन बावजूद इसके पुलिस ने कपिल मिश्रा से पूछताछ करने तक की ज़हमत नहीं उठाई। इसी तरह, परवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर ने भी चुनाव प्रचार के दौरान सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने वाले भाषण दिए। लेकिन किसी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इन सबके बीच सबसे बुरी बात ये है कि महामारी और लॉकडाउन के समय को गृह मंत्रालय और मोदी सरकार विरोधियों की गिरफ्तारी के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। ये ऐसा समय है जब बड़े विरोध प्रदर्शन की न तो कोई गुंजाइश है और न ही राहत के लिए अदालतों तक पहुंच आसान हैं।

गौरतलब है कि इसी तरह दिल्ली दंगों के सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने पूर्व छात्र नेता उमर खालिद, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के सदस्य दानिश, जामिया के छात्र सफूरा ज़रगर, मीरान हैदर और जामिया एलुमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष शिफा-उर-रहमान को भी गिरफ्तार किया है। आपको बता दें कि जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी की मीडिया को-ऑर्डिनेटर सफूरा ज़रगर इस समय गर्भवती हैं। इन छात्रों के खिलाफ देशद्रोह, हत्या, हत्या के प्रयास, धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और दंगा भड़काने जैसे मामले दर्ज किए गए हैं।

 

AISA
delhi police
Delhi riots
Kanwalpreet Kaur
Northeast Delhi
Umar khalid
Safoora Zargar
Meeran Haider
COVID-19 lockdown

Related Stories

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मुस्लिम विरोधी हिंसा के ख़िलाफ़ अमन का संदेश देने के लिए एकजुट हुए दिल्ली के नागरिक

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई

यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं

दिल्ली दंगों के दो साल: इंसाफ़ के लिए भटकते पीड़ित, तारीख़ पर मिलती तारीख़

दिल्ली: प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों पर पुलिस का बल प्रयोग, नाराज़ डॉक्टरों ने काम बंद का किया ऐलान

किसान आंदोलन@378 : कब, क्या और कैसे… पूरे 13 महीने का ब्योरा

'यूपी मांगे रोज़गार अभियान' के तहत लखनऊ पहुंचे युवाओं पर योगी की पुलिस का टूटा क़हर, हुई गिरफ़्तारियां

दिल्ली: ऐक्टू ने किया निर्माण मज़दूरों के सवालों पर प्रदर्शन

त्रिपुरा हिंसा: फ़ैक्ट फाइंडिंग टीम के वकीलों पर भी UAPA, छात्रों, वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं का त्रिपुरा भवन पर प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • ram_navmi
    अफ़ज़ल इमाम
    बढ़ती हिंसा व घृणा के ख़िलाफ़ क्यों गायब है विपक्ष की आवाज़?
    13 Apr 2022
    हिंसा की इन घटनाओं ने संविधान, लोकतंत्र और बहुलतावाद में विश्वास रखने वाले शांतिप्रिय भारतवासियों की चिंता बढ़ा दी है। लोग अपने जान-माल और बच्चों के भविष्य को लेकर सहम गए हैं।
  • varvara rao
    भाषा
    अदालत ने वरवर राव की स्थायी जमानत दिए जाने संबंधी याचिका ख़ारिज की
    13 Apr 2022
    बंबई उच्च न्यायालय ने एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में कवि-कार्यकर्ता वरवर राव की वह याचिका बुधवार को खारिज कर दी जिसमें उन्होंने चिकित्सा आधार पर स्थायी जमानत दिए जाने का अनुरोध किया था।
  • CORONA
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,088 नए मामले, 26 मरीज़ों की मौत
    13 Apr 2022
    देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 5 लाख 21 हज़ार 736 लोग अपनी जान गँवा चुके है।
  • CITU
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन
    13 Apr 2022
    ये सभी पिछले माह 39 दिन लंबे चली हड़ताल के दौरान की गई कार्रवाई और बड़ी संख्या आंगनवाड़ी कर्मियों को बर्खास्त किए जाने से नाराज़ थे। इसी के खिलाफ WCD के हेडक्वार्टस आई.एस.बी.टी कश्मीरी गेट पर प्रदर्शन…
  • jallianwala bagh
    अनिल सिन्हा
    जलियांवाला बाग: क्यों बदली जा रही है ‘शहीद-स्थल’ की पहचान
    13 Apr 2022
    जलियांवाला बाग के नवीकरण के आलोचकों ने सबसे महत्वपूर्ण बात को नज़रअंदाज कर दिया है कि नरसंहार की कहानी को संघ परिवार ने किस सफाई से हिंदुत्व का जामा पहनाया है। साथ ही, उन्होंने संबंधित इतिहास को अपनी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License