NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
घटना-दुर्घटना
भारत
राजनीति
दिल्ली : दो फैक्ट्रियों में लगी आग, बार-बार की घटनाओं पर उठे सवाल
जहाँगीरपुरी में 2 केमिकल फैक्ट्रियों में लगी आग, दमकल की 15 गाड़ियां मौके पर आग बुझाने की कोशिश कर रही।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
14 Mar 2020
delhi fire

दिल्ली के जीटी-करनाल रोड जहांगीरपुरी में पीवीसी पाइप और केमिकल फैक्टरी में भीषण आग लग गई। घटना की सूचना मिलने के बाद दमकल की 15 गाड़ियां मौके पर आग बुझाने की कोशिश कर रही हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक, जहांगीरपुरी इलाके जीटीके डिपो के पास स्थित दो फैक्ट्री में शनिवार आग लग गई। इनमें भूतल व पहली मंजिल पर आग लगी हुई है। आग में एक व्यक्ति के घायल होने की ख़बर है।

दिल्ली में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। लेकिन सवाल यह है की ये आग लग क्यों रही है?

दिल्ली में बीते दिनों कई फैक्ट्रियों में आग लग रही है, जिसमें कई मज़दूरों ने अपनी जान भी गँवा दी है। ये घटनाए सरकारी तंत्र पर सवाल खड़ा करती है, इन घटनाओं का कौन जिम्मेदार ? अब तक इन सभी घटनाओ में किस पर कठोर करवाई हुई ?  शायद किसी पर नहीं कुछ लोगों पर कार्रवाई हुई तो उसे बस खानापूर्ति कह सकते हैं।

इस तरह की घटनाएं प्रशासन और फैक्ट्री मालिकों के मिलीभगत से होती हैं। चंद पैसे बचने के लिए फैक्ट्री मालिक मज़दूरों की जान से खेलते हैं। दिल्ली की अधिकतर फैक्ट्रियों में मज़दूरों की सुरक्षा के नाम पर बड़ा शून्य होता है।

मज़दूर संगठनों ने समय समय पर कई बार इस बातों के लेकर कहा है कि “ऐसी घटनाएं प्रशासन कि लापरवाही से होती हैं। भ्रष्ट अधिकारी जिनकी जिम्मेदारी है कि वो फैक्ट्री का दौरा करें और नियमों का लागू कराएं लेकिन अधिकारी भ्रष्ट हैं और अक्सर नियमों के उल्लंघन को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।”

Delhi
Delhi’s factory Fire
factory fire
Chemical Factory
AAP

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

मुंडका अग्निकांड के लिए क्या भाजपा और आप दोनों ज़िम्मेदार नहीं?

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

मुंडका अग्निकांड : 27 लोगों की मौत, लेकिन सवाल यही इसका ज़िम्मेदार कौन?

दिल्ली में गिरी इमारत के मलबे में फंसे पांच मज़दूरों को बचाया गया

रोहतक : मारुति सुज़ुकी के केंद्र में लगी आग, दो कर्मियों की मौत

दिल्ली में एक फैक्टरी में लगी आग, नौ लोग झुलसे

गाजीपुर अग्निकांडः राय ने ईडीएमसी पर 50 लाख का जुर्माना लगाने का निर्देश दिया

बांग्लादेश : 52 मज़दूरों की हत्या के आरोप में फ़ैक्ट्री मालिक हिरासत में


बाकी खबरें

  • bose
    प्रबीर पुरकायस्थ
    मोदी सरकार और नेताजी को होलोग्राम में बदलना
    28 Jan 2022
    बोस की सच्ची विरासत को उनकी होलोग्राफिक छवि के साथ खत्म कर देना : बिना किसी सार और तत्व के प्रकाश तथा परछाइयों का खेल। यह लगातार मोदी सरकार की वास्तविक विरासत बनती जा रही है!
  • Taliban
    एम. के. भद्रकुमार
    पश्चिम ने तालिबान का सहयोजन किया 
    28 Jan 2022
    अफगानिस्तान में हो रही घटनाओं पर प्रतिबिंबों की श्रंखला में इस बार के लेख में इंगित  किया गया है कि कैसे पश्चिमी राजनयिकों और तालिबान अधिकारियों के एक कोर ग्रुप के बीच ओस्लो में हुए तीन दिवसीय…
  • up elections
    महेश कुमार
    यूपी चुनाव: पश्चिमी यूपी के लोग क्यों भाजपा को हराना चाहते हैं?
    28 Jan 2022
    पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है और किसान आंदोलन का गढ़ है। चर्चा से तो लगता है कि लोग बदलाव चाहते हैं।
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेकः योगी का दावा ग़लत, नहीं हुई किसानों की आय दोगुनी
    28 Jan 2022
    सदन में कृषि मंत्री का लिखित जवाब और नेशनल सैंपल सर्वे दोनों ही बताते हैं कि यूपी के किसानों की आय में 2015-16 की अपेक्षा मात्र 3 रुपये मासिक की वृद्धि हुई है।
  • covid
    डॉ. ए.के. अरुण
    बजट 2022-23: कैसा होना चाहिए महामारी के दौर में स्वास्थ्य बजट
    28 Jan 2022
    कुछ अपवादों को छोड़ दें तो 85 फ़ीसद अस्पताल और उपचार केन्द्र धन के अभाव में महज़ ढाँचे के रूप में खड़े हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License