NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
आंदोलन
नज़रिया
भारत
राजनीति
आप दुखी न हों, आप तो यही चाहते थे सरकार!
आप दुखी या चिंतित न हों सरकार। न इसका दिखावा करें, क्योंकि आप यही सब तो चाहते थे!
मुकुल सरल
25 Feb 2020
Delhi Violence

आग का क्या है, पल दो पल में लगती है

बुझते-बुझते एक ज़माना लगता है

                                                  (कैफ़ भोपाली)

वाकई राजधानी दिल्ली आग में झुलस रही है। लेकिन आप दुखी या चिंतित न हों सरकार। न इसका दिखावा करें, क्योंकि आप जो चाहते थे, वही तो हो गया…!

हां, आप यही सब तो चाहते थे!

वरना क्या वजह है कि दिल्ली समेत देशभर में दो महीने से ज़्यादा समय से नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के ख़िलाफ़ आंदोलन चल रहा है और आपके कानों पर जूं तक न रेंगी। आप तो और बढ़-चढ़कर कहने लगे कि पुनर्विचार का सवाल ही नहीं, एक इंच न पीछे हटेंगे।

वरना क्या वजह है कि हमारी शीर्ष अदालत भी सीएए को लेकर दायर की गईं 144 याचिकाओं को सुनने की बजाय, इस कानून की संवैधानिकता जांचने की बजाय सबसे पहले शाहीन बाग़ का रास्ता खुलवाने के काम में जुट गई।

इसे भी पढ़े : मी लॉर्ड!, सवाल शाहीन बाग़ के रास्ते का नहीं, देश के रास्ते का है कि देश किस तरफ़ जाएगा?

वरना क्या वजह है कि 'छोटे सरकार' (केजरीवाल सरकार) चुनाव जीतने के बाद भी इस मसले के हल के लिए कुछ ठोस नहीं करते। कुछ न करते लेकिन अपना स्टैंड तो साफ करते! विधानसभा में कोई प्रस्ताव लाने की बात तो करते! लेकिन नहीं...

और उस दिल्ली में जिसके वे दुलारे बेटे होने का दावा करते हैं, आग लगने के बाद भी शांति-सद्भाव के लिए लोगों के बीच जाने की बजाय घर बैठकर ट्वीट न करते रहते।

बड़े सरकार (मोदी-शाह सरकार) क्या वजह है कि पहले दिन से ही आपकी तरफ़ से सीएए-एनआरसी के मसले को हिन्दू बनाम मुसलमान बनाने की कोशिश की जा रही है। आपकी हर सभा में इसी को लेकर बात की गई। शाहीन बाग़ की औरतें जब यह कह रहीं थी कि ये संविधान बचाने की लड़ाई है, आप तब भी इसे हिन्दू-मुसलमान में बांटने की कोशिश करते दिख रहे थे। इस कानून से हिन्दू-मुसलमान सभी चिंतित थे लेकिन आप चिंता के नाम पर भी यही कह रहे थे कि "मुसलमान इस कानून से न डरें"।

amit shah.jpg

ऐसा क्यों है कि जिस दिन हमारे गृहमंत्री अमित शाह दिल्ली चुनाव का शुभारंभ करते हुए टुकड़े-टुकड़े गैंग को सबक सिखाने की बात करते हैं उसी दिन जेएनयू में हमला होता है और पुलिस बाहर मूकदर्शक बनी खड़ी रहती है।

जिस दिन गृहमंत्री शाहीन बाग़ में करंट लगाना चाहते हैं, जिस दिन सांसद और मंत्री अनुराग ठाकुर 'गोली मारो…' का नारा देते हैं। सांसद प्रवेश वर्मा कहते हैं कि 'ये लोग आपके घरों में घुस आएंगे...' , उन्हीं दिनों में जामिया और शाहीन बाग़ में गोली चल जाती है। दो नौजवान कट्टा-रिवाल्वर लहराते हुए गोली चलाते हैं और बचने के लिए पुलिस की ओर भागते हैं।

जिस दिन बीजेपी के हारे हुए खिलाड़ी कपिल मिश्रा अपने समर्थकों को लेकर सड़क पर उतरते हैं और पुलिस के सामने रास्ते खोलने के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम देते हैं उसी दिन दिल्ली में दंगा हो जाता है। हालांकि मैं इसे दंगा नहीं बल्कि सुनियोजित हमला कहूंगा।

kapil.jpg

सांसद जी ने चुनाव जीतने के एक घंटे के भीतर शाहीन बाग़ खाली कराने का ऐलान किया था और चुनाव हारने के बाद यह ज़िम्मेदारी कपिल मिश्रा ने ले ली। क्योंकि बीजेपी में उनके होने पर ही सवाल उठने लगा है। इसलिए किसी तरह तो उन्हें अपनी उपयोगिता साबित करनी थी।

क्या वजह है कि जेएनयू के हमलावर आज तक नहीं पकड़े जाते। जामिया में बर्बरता के लिए किसी की ज़िम्मेदारी तय नहीं होती।

उत्तर प्रदेश में 23 लोगों की मौत हो जाती है लेकिन शासन-प्रशासन यह दावा करते रहते हैं कि पुलिस ने गोली नहीं चलाई। जब गोली चलाने के सुबूत सामने आ जाते हैं तब कहा जाता है कि पुलिस की गोली से कोई नहीं मरा। जब पुलिस की गोली का भी सुबूत मिलता है तो कहा जाता है कि सेल्फ डिंफेंस में मारा गया। और ये सब बातें भूलकर एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुस्करा कर कहते हैं कि पुलिस की गोली से कोई नहीं मरा।

लेकिन दिल्ली में एक हेड कॉन्सेटबल की मौत के तुरंत बाद मीडिया बिना पल गंवाए कहने लगती है कि सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों की हिंसा में हेड कॉन्सेटबल की मौत हो गई। ऐसी ख़बरें चलाई जाती हैं, ऐसे हैडिंग लगाए जाते हैं कि एक वर्ग विशेष के प्रति अन्य लोगों का गुस्सा भड़क जाए।

इस हिंसा में हेड कॉन्सेटबल रतनलाल की जान जाना बेहद दुखद है, उन्हें शहीद कहा जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने अपनी ड्यूटी पर अपनी जान गंवाई। लेकिन उनकी शहादत को सलाम करते हुए भी ये सवाल तो पूछा जाना चाहिए कि पुलिस प्रशासन बताए कि उनकी मौत की वजह क्या है और बिना जांच-पड़ताल के कैसे मीडिया ने तुरंत ये चला दिया कि सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों ने उन्हें मारा। ये भी सवाल पूछा जाना चाहिए कि हेड कॉन्सेटबल समेत अब तक मारे गए सात लोगों की हत्या का दोषी कौन है। कौन लेगा ज़िम्मेदारी। क्या वही लोग जो अपने हर काम को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बताते हैं।

और अंत में अहम सवाल जो सीएए-एनआरसी विरोधी हर प्रदर्शनकारी बार-बार पूछ रहा है कि जब उनका आंदोलन दो महीने से भी ज़्यादा समय से शांतिपूर्वक चल रहा है तो क्या वजह है कि जब-जब सीएए समर्थक सड़कों पर उतरते हैं या उतारे जाते हैं तो हिंसा होती है?

इसे भी पढ़े :  CAA तो नागरिकता देने का कानून है, तो विरोध क्यों?

सच्चाई यही है कि आज जो कुछ घटा है या घट रहा है, उसका माहौल बहुत मेहनत से बरसों से बनाया जा रहा है। लोगों के ज़ेहन में एक-दूसरे के ख़िलाफ़ नफ़रत भरी जा रही है। और उसी नफ़रत के ज़हर का प्रयोग सत्ता पाने, बचाने और बढ़ाने के लिए बार-बार किया जाता है। लेकिन इस बार हमला बड़ा है और निशाना हमारा संविधान है, ताकि उसे ध्वस्त कर एक 'अंधे-राष्ट्र' का निर्माण किया जा सके।

लेकिन अंत में अल्लामा इक़बाल का तराना-ए-हिंद "सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा" याद आता है जिसमें कहा गया है कि

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी

सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमाराhindustan.jpg

North east delhi
CAA violence
Right wing
Anti-CAA protest
BJP
Modi government
Delhi riots
delhi police
Karawal Nagar
Khajuri
Jafrabad
Maujpur
Delhi Violence
CAA
NRC
NPR
Chand Bagh
Narendra modi
Amit Shah

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

ग़ाज़ीपुर; मस्जिद पर भगवा झंडा लहराने का मामला: एक नाबालिग गिरफ़्तार, मुस्लिम समाज में डर

लखीमपुर हिंसा:आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के लिए एसआईटी की रिपोर्ट पर न्यायालय ने उप्र सरकार से मांगा जवाब

टीएमसी नेताओं ने माना कि रामपुरहाट की घटना ने पार्टी को दाग़दार बना दिया है

चुनाव के रंग: कहीं विधायक ने दी धमकी तो कहीं लगाई उठक-बैठक, कई जगह मतदान का बहिष्कार


बाकी खबरें

  • musahar
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित
    02 Mar 2022
    दलित आम तौर पर ऐसे मूक मतदाता माने जाते हैं, जो अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं का आसानी से इज़हार नहीं करते। हालांकि, इस चुनाव को नज़दीक से देखने पर इस बात के साफ़ संकेत मिल जाते हैं कि उनका झुकाव बसपा…
  • कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    02 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.20 फ़ीसदी यानी 85 हज़ार 680 हो गयी है।
  • एम. के. भद्रकुमार
    यूक्रेन युद्ध ने यूरोपियन यूनियन और अमेरिका को ईरान सौदे पर सोचने को मजबूर किया
    02 Mar 2022
    क्या नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार पर अमेरिका-रूस टकराव और यूक्रेन के आसपास बने हालात वियना में चल रही ईरान परमाणु वार्ता को पटरी से उतार देगी?
  • ukraine
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी; सोवियत संघ का हिस्सा रहे राष्ट्रों से दूर रहे पश्चिम, रूस की चेतावनी
    02 Mar 2022
    रूसी बलों ने मंगलवार को यूक्रेन के घनी आबादी वाले शहरी इलाकों पर हमले तेज करते हुए यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर के मध्य स्थित एक मुख्य चौराहे और कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी की। वहीं भारत ने…
  • बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    02 Mar 2022
    पालीगंज विधानसभा क्षेत्र से सीपीआई माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि वह सीटेट और बीटेटट उत्तीर्ण सभी अभ्यर्तियों के लिए सातवें चरण की बहाली के लिए 2014-21 तक सभी रिक्तियों को जोड़कर मार्च महीने में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License