NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
देवांगना के कथित भड़काऊ भाषण का कोई वीडियो अदालत में पेश नहीं कर पाई दिल्ली पुलिस
हाईकोर्ट की ओर से वीडियो मांगने पर पुलिस ने कहा कि उसके पास उस समय के कोई वीडियो नहीं हैं जब पिंजरा तोड़ समूह के लोग और देवांगना कालिता, दंगों की घटना के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दे रही थी।
मुकुंद झा
22 Aug 2020
देवांगना

दिल्ली: दिल्ली हमले या दंगे को लेकर दिल्ली पुलिस की जांच को लेकर लगातार कई सवाल उठ रहे हैं। शुक्रवार 21 अगस्त को सुनवाई के दौरान एक ऐसी ही घटना हुई, जो पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। दिल्ली उच्च न्यायालय शुक्रवार को पिंजरा तोड़ की सदस्य और जेएनयू की शोध छात्र देवांगना कालिता की ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान भड़काऊ भाषण देते हुए पिंजरा तोड़ की सदस्य के वीडियो दिखाए। लेकिन पुलिस ने कहा कि उसके पास उस समय के वीडियो नहीं हैं जब पिंजरा तोड़ समूह के लोग और देवांगना, भड़काऊ भाषण दे रहीं थी।

दिल्ली पुलिस का ये ज़वाब किसी के लिए भी पचा पाना मुश्किल है क्योंकि आजकल पुलिस हर छोटे बड़े प्रदर्शनो की वीडियोग्राफी करती है। इसके साथ ही जिस दिन और जगह की घटना का जिक्र पुलिस कर रही है वहां तो मीडिया का जमघट था। इसके साथ ही आजकल सोशल मीडिया पर भी वीडियो खूब मिलते हैं इसके अलावा आजकल सबके हाथ में मोबाइल है जिसमे वीडियो रिकॉर्डिंग होती है। ऐसे में पुलिस का ये कहना कि उसके पास कोई फुटेज नहीं है जब वह भीड़ को उकसा रही थीं! इससे क्या समझ आता है यही कि ये पिंजरा तोड़ और देवांगना पर आरोप बिना किसी ठोस सबूत के लगा दिए गए।

ये दिल्ली दंगे से जुड़ा कोई पहला मामला नहीं है जब पुलिस के दावे संदिग्ध हैं और उसके तर्क पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा हो। कोर्ट ने भी पुलिस के बयान पर सवाल किया जिसका जवाब दिल्ली पुलिस के पास नहीं था। वो बस एक बात दोहरा रही है कि पिंजरा तोड़ के सदस्यों ने लोगो को हिंसा के लिए उकसाया लेकिन उसको प्रमाणित करने के लिए अभी तक वो कोई भी ठोस सबूत नहीं दे सकी।

पुलिस के कमज़ोर तर्क और कोई सबूत न दे पाने के कारण देवांगना को दो अन्य मामलों में जमानत चुकी है। लेकिन पुलिस जब भी उन्हें किसी मामले में ज़मानत मिलती तुरंत उन्हें नए मामले में गिरफ़्तार कर लेती है। पुलिस ने उन्हें 23 मई से पुलिस हिरासत में ले रखा है, लेकिन पुलिस अबतक उनके दिल्ली दंगे में शामिल होने का कोई भी सबूत नहीं दे पाई है। इसको लेकर सामाजिक संगठन और कई लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस एक झूठी पटकथा के तहत जन आंदोलनों के नेता, छात्रों, शिक्षाविदों को दिल्ली दंगे के मामले में फंसा रही है। लेकिन पटकथा इतनी कमजोर है कि पुलिस अपने दावों के समर्थन में कोई भी सबूत पेश नहीं कर पा रही है।

कोर्ट में क्या हुआ?

पुलिस ने कहा कि उसके पास 24 और 25 फरवरी को हुए दंगों और 22 और 23 फरवरी को हुए दंगों से पहले लोगों को कथित रूप से उकसाने के वीडियो हैं, जब नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ पूर्वोत्तर के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के बाहर एक बड़ी सभा बैठी थी और विरोध कर रही थी।

सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित एक मामले में देवांगना कलिता की जमानत याचिका पर दलीलें सुनने के बाद, न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैथ ने कहा: "मुझे मीडिया या किसी और द्वारा रिकॉर्ड किए गए भाषण के वो हिस्से दिखाएं जिसमे कलिता भीड़ को गुनाह करने के लिए उकसा रही है।"

अदालत ने कहा, उस अवधि के दौरान, मीडिया हर जगह था और सब कुछ रिकॉर्ड कर रहा था। जज ने कहा, "मैं जानना चाहता हूं कि उसने क्या कहा जो भीड़ को बेकाबू हो गई।"

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने पुलिस की ओर से पेश होकर कहा कि 25 फरवरी को कोई मीडिया नहीं थी जब घटना हुई और गवाह ने भीड़ को उकसाने में कालिता की भूमिका को देखा है।
जब विधि अधिकारी ने कहा कि कलिता के कॉल डिटेल रिकॉर्ड से उसकी लोकेशन पता चली है, तो जज ने कहा कि उसने स्वीकार किया है कि वह वहां थी।

एएसजी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया,“यह अच्छी तरह से नियोजित और संगठित था जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को यहाँ आना था, उनके सामने देश की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया था। सार्वजनिक संपत्ति नष्ट की गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और एक व्यक्ति की मौत हो गई। ”
कलिता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि पुलिस कथित तौर पर उनके द्वारा दिए गए किसी भी तरह के दायित्व या भाषण को नहीं दिखा रही हैं, लेकिन केवल सीआरपीसी के तहत दर्ज अन्य के बयानों पर भरोसा कर रही है।

सिब्बल ने अदालत के साथ एक वीडियो साझा किया जिसमें दिख रहा है की पुलिस प्रदर्शन को रिकॉर्ड कर रही है, इसके बाद भी पुलिस अदालत को कोई वीडियो नहीं दिखा रही है।
सिब्बल ने कहा कि “अभियुक्त  राजनीतिज्ञ नहीं है। वह एक शिक्षाविद और एक शोध अध्येता हैं। उसे पहले ही दो मामलों में जमानत दी जा चुकी है। पुलिस हमें वीडियो और अभद्र भाषा दिखाए जिसमें वो लोगो को उकसा रही हैं। परन्तु पुलिस हमें यह नहीं दिखा रही है ऐस में कोई कारण नहीं है अभियुक्त को न्याय से वंचित रखा जाए।

उच्च न्यायालय ने दलीलें सुनने के बाद ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया जिसने कलिता की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

सुनवाई के दौरान, ASG ने कहा कि यह एक ऐसा मामला था जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल थे और यह संभव नहीं है कि हर कोई वीडियो फुटेज में आए और सबूतों से पता चला कि कलिता दंगों में शामिल थी।
सिब्बल के तर्कों पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जमानत पर विचार करने के लिए किसी व्यक्ति के शैक्षणिक रिकॉर्ड की आवश्यकता नहीं होती है और यह अपराध की प्रकृति है जिसे जमानत के लिए देखा जाना आवश्यक है और क्या वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है।

उन्होंने कहा कि वे बहुत चतुर ऑपरेटर हैं। यह बहुत गंभीर मामला है। वह शिक्षित है और कानून को जानती है, इसलिए वह यह भी जानती है कि कानून से कैसे बचना है। ”

जब अदालत ने इस मामले में जांच अधिकारी से पूछा कि क्या उन्होंने कलिता द्वारा दिया गया भाषण रिकॉर्ड किया है, तो उन्होंने कहा कि 10,000 लोगों की भीड़ थी और यहां तक कि मीडिया के लोग भी नहीं थे और वह बयान एक किलोमीटर दूर कर रही थी।

इसपर न्यायाधीश ने तुरंत पूछा "यदि वह 1 किमी दूर थी, तो आपने यह कैसे सुना कि वह क्या कह रही थी"।
इस पर, IO ने SHO का नाम लिया, जो कलिता के पास गए थे, उन्होंने उस भड़काऊ भाषण को सुना था।

मामला क्या है ?

​​​​कलिता और समूह की एक अन्य सदस्य नताशा नरवाल को मई में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया था और उन पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें दंगा, गैरकानूनी विधानसभा और हत्या का प्रयास शामिल था।

दंगों में कथित रूप से एक "पूर्व-निर्धारित साजिश" का हिस्सा होने के लिए, उन्हें एक अलग आतंकवाद निरोधक कानून यूएपीए के तहत गिरफ़्तार किया गया है।

कुल मिलाकर, कालिता के खिलाफ चार मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें इस साल के शुरू में पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों के संबंध में और पुरानी दिल्ली के दरियागंज इलाके में पिछले साल दिसंबर में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा शामिल है।

कलिता को दो मामलों में दरियागंज और एक पूर्वोत्तर दिल्ली में जमानत मिल चुकी है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई इनपुट के साथ )

NE Delhi Violence
Pinjra Tod
Devangana kalita
delhi police
Delhi Communal Violence
Anti-CAA Protests

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!

शाहीन बाग़ ग्राउंड रिपोर्ट : जनता के पुरज़ोर विरोध के आगे झुकी एमसीडी, नहीं कर पाई 'बुलडोज़र हमला'

जहांगीरपुरी : दिल्ली पुलिस की निष्पक्षता पर ही सवाल उठा दिए अदालत ने!

अदालत ने कहा जहांगीरपुरी हिंसा रोकने में दिल्ली पुलिस ‘पूरी तरह विफल’

'नथिंग विल बी फॉरगॉटन' : जामिया छात्रों के संघर्ष की बात करती किताब

मोदी-शाह राज में तीन राज्यों की पुलिस आपस मे भिड़ी!

पंजाब पुलिस ने भाजपा नेता तेजिंदर पाल बग्गा को गिरफ़्तार किया, हरियाणा में रोका गया क़ाफ़िला


बाकी खबरें

  • sc
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पीएम सुरक्षा चूक मामले में पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में समिति गठित
    12 Jan 2022
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘‘सवालों को एकतरफा जांच पर नहीं छोड़ा जा सकता’’ और न्यायिक क्षेत्र के व्यक्ति द्वारा जांच की निगरानी करने की आवश्यकता है।
  • dharm sansad
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
    12 Jan 2022
    पीठ ने याचिकाकर्ताओं को भविष्य में 'धर्म संसद' के आयोजन के खिलाफ स्थानीय प्राधिकरण को अभिवेदन देने की अनुमति दी।
  • राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला
    विजय विनीत
    राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला
    12 Jan 2022
    "आरएसएस को असली तकलीफ़ यही है कि अशोक की परिकल्पना हिन्दू राष्ट्रवाद के खांचे में फिट नहीं बैठती है। अशोक का बौद्ध होना और बौद्ध धर्म धर्मावलंबियों का भारतीय महाद्वीप में और उससे बाहर भी प्रचार-…
  • Germany
    ओलिवर पाइपर
    जर्मनी की कोयला मुक्त होने की जद्दोजहद और एक आख़िरी किसान की लड़ाई
    12 Jan 2022
    पश्चिमी जर्मनी में एक गांव लुत्ज़ेराथ भूरे रंग के कोयला खनन के चलते गायब होने वाला है। इसलिए यहां रहने वाले सभी 90 लोगों को दूसरी जगह पर भेज दिया गया है। उनमें से केवल एक व्यक्ति एकार्ड्ट ह्यूकैम्प…
  • Hospital
    सरोजिनी बिष्ट
    लखनऊ: साढ़ामऊ अस्पताल को बना दिया कोविड अस्पताल, इलाज के लिए भटकते सामान्य मरीज़
    12 Jan 2022
    लखनऊ के साढ़ामऊ में स्थित सरकारी अस्पताल को पूरी तरह कोविड डेडिकेटेड कर दिया गया है। इसके चलते आसपास के सामान्य मरीज़ों, ख़ासकर गरीब ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। साथ ही इसी अस्पताल के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License