NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
दिल्ली हिंसा : उनकी कहानी जिन्होंने अपनों को खोया...
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगाग्रस्त इलाकों में हिंसा में किसी की जान गई, किसी का कोई अपना हमेशा के लिए चला गया, किसी का रोजगार छिना तो कोई बेघर हो गया। यहां ख़ौफ़ज़दा लोगों की अपनी-अपनी आपबीती है।
अमित सिंह, तारिक अनवर, मुकुंद झा
28 Feb 2020
Delhi violence

उत्तरी पूर्वी दिल्ली में बीते दिनों हुई हिंसा में मरने वालों की संख्या 42 तक पहुंच गई है। वे इलाके जो हिंसा से प्रभावित थे, वहां अब भी मुर्दनी छाई हुई है। सड़कों पर पुलिस, रैपिड ऐक्शन फोर्स और अर्धसैनिक बलों के जवान बड़ी संख्या में नजर आ रहे हैं। इन इलाकों में गाड़ियां जलाई गईं, दुकाने लूटी गईं और घर भी जला दिए हैं। नफ़रत की आग से उठे धुएं ने कई लोगों की जान भी ली है।

हिंसा प्रभावित खजूरी खास के श्रीराम कालोनी की गली नंबर 18 में रहने वाले 30 साल के बब्बू की मौत दंगों में हो गई है। बब्बू आटो ड्राइवर थे और उनके तीन बच्चे हैं। बब्बू अपने घर में इकलौते कमाने वाले थे। वो किराए के मकान में रहते थे। बब्बू की मौत तीन दिन तक जीटीबी हॉस्पिटल में भर्ती रहने के बाद हुई।

IMG-20200228-WA0025.jpg

उनके बीमार पिता सलीम कहते हैं, 'मुझे नहीं पता है कि उसके साथ क्या हुआ है और कब हुआ। वह घर से आटो लेकर निकला था उसके बाद वापस नहीं लौटकर आया। बाद में घर के बगल वाले खजूरी चौक पर उसकी गाड़ी मिली। कुछ देर बाद सबने बताया कि उसके साथ मारपीट की गई है वह घायल नाले के किनारे पड़ा है। फिर मेरे कुछ रिश्तेदार यहां से उसे हॉस्पिटल लेकर गए। हॉस्पिटल में तीन दिन रहने के बाद खबर आई कि उसकी मौत हो गई है।'

सलीम इतना बताते बताते भावुक हो जाते हैं। वो आगे कहते हैं, 'हमने दंगा करने वालों का क्या बिगाड़ा है। मैंने किसी हिंदू का क्या बिगाड़ा है। या उन्होंने हमारा क्या बिगाड़ा है। कुछ भी तो नहीं...फिर हम एक दूसरे को क्यों मार रहे हैं। फिर वो हमें क्यों मार दे रहे हैं। यह जो कुछ भी हो रहा है वह गलत हो रहा है। यह ठीक नहीं हो रहा है। मेरे बच्चे का परिवार अब कैसे चलेगा। मुझे दंगा करने वालों से बस यही कहना है कि वो जो कर रहे हैं वह सही नहीं है। इसे बंद कर दें।'

IMG-20200228-WA0024.jpg

इसी तरह हिंसा प्रभावित कर्दमपुरी में रहने वाले 22 वर्षीय फैजान की मौत हिंसा के दौरान हो गई। फैजान के परिवार का दावा है कि सोशल मीडिया पर वायरल जिस वीडियो में पुलिस पांच लड़कों को कथित रूप से सड़क पर लिटा कर पीट रही है और ‘जन गण मन’ गवा रही है, उसमें एक फैजान भी है। फैजान सिलाई का काम करता था और उसके पिता की मौत कई साल पहले हो चुकी थी।

फैजान की मां अस्तमुल के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह रोती जाती हैं और बताती जाती हैं, ‘मैं सोमवार को धरने पर बैठी हुई थी, मेरा बेटा घर में था। उसे पता चला कि बाहर झगड़ा हो गया है। वह मुझे लेने के लिए कर्दमपुरी पुलिया पर गया था। लेकिन पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर आंसू गैस के गोले छोड़ दिए और वहां धुआं छा गया और वह सड़क की तरफ चला गया, जहां पुलिस ने उसे पकड़ लिया।’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘पुलिस ने फैजान को बहुत पीटा। उसका चार और लड़कों के साथ सड़क पर पड़े वीडियो वायरल है, जिसमें पुलिस पांच लड़कों को पीट रही है और राष्ट्रगान गवा रही है।’

आपको बता दें कि कर्दमपुरी पुलिया पर संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और एनआरसी के खिलाफ महिलाओं का एक महीने से ज्यादा समय से शांतिपूर्ण धरना चल रहा था।

IMG-20200228-WA0031.jpg

अस्मतुल बताती हैं, इसके बाद पुलिस उनके बेटे को पकड़ कर ज्योति नगर थाने ले गई और वहां भी उसे पीटा और इलाज नहीं कराया। वह बताती हैं, ‘मैं उसकी तलाश में जीटीबी अस्पताल गई और हर कमरे में अपने बेटे को ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिला, इसके बाद मैं थाने गई और उसकी फोटो दिखाकर पूछा तो पुलिसकर्मी ने बताया कि वह यहीं है। मैंने कहा, उससे मिलवा दो। लेकिन पुलिस ने न तो मिलवाया और न ही दिखाया। मैं रात एक बजे तक थाने में बैठी रही। मैं बुधवार सुबह फिर थाने गई जहां पुलिस वाले कहने लगे कि इसे भी बंद करो। बाद में मंगलवार रात पुलिस ने मेरे बेटे को छोड़ा।’

IMG-20200228-WA0016 (2).jpg

फैजान के पड़ोसी इमरान भारती ने बताया कि पुलिस के छोड़ने के बाद फैजान को घर ले आए तो उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। सड़क पर दंगे भड़के होने के कारण उसे अस्पताल नहीं ले जा पा रहे थे तो बड़ी मुश्किल से किसी तरह लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल ले जा पाए, जहां उसकी तबीयत और बिगड़ गई और डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अभी घरवालों को फैजान की लाश भी नहीं मिली है और अस्मतुल रो रोकर बेहाल हो रही हैं।

इसके अलावा, धरना स्थल पर 32 साल के मोहम्मद फुरकान की भी मौत हो गई। इस मामले में भी परिजन दावा कर रहे हैं कि फुरकान पुलिस की गोलीबारी का शिकार हुआ। फुरकान के भाई इमरान ने बताया, ‘24 फरवरी को शाम करीब साढ़े पांच बजे मुझे कॉल आई कि मेरे भाई को गोली मार दी गई , लेकिन मुझे इस पर यकीन नहीं हुआ क्योंकि मैं एक घंटा पहले उससे घर पर मिलकर गया था।’

वह बताते हैं, ‘मैंने उसे कॉल की पर उसने फोन नहीं उठाया तो मुझे शक हुआ। इसके बाद कुछ लोगों का मेरे पास फिर कॉल आया कि मेरे भाई को ऑटो में डालकर अस्पताल लेकर गए हैं। मैं जीटीबी अस्पताल भागा जहां आपातकाल वार्ड में मैंने अपने भाई को तलाश किया। मुझे वहां फुरकान नहीं उसकी लाश मिली।’

इमरान ने बताया कि 32 साल के फुरकान शादीशुदा थे और उनके दो बच्चे है। चार साल की एक लड़की है और दो साल का बेटा है। उनकी शादी 2014 में हुई थी। उन्होंने बताया, ‘कर्दमपुरी में महिलाओं के प्रदर्शन स्थल पर सामने की तरफ से पुलिस या अर्द्धसैनिक बलों ने हमारे टैंट पर आंसू गैस के गोले छोड़े और गोलियां चलाईं। इसी गोलीबारी में मेरे भाई फुरकान के पैर में गोली लग गई। उनके अलावा तीन-चार लोगों को गोली लगी थी। बाकी लोग बच गए लेकिन मेरे भाई की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पुलिस की कार्रवाई में कई महिलाएं भी जख्मी हुई हैं।’

आपको बता दें कि उत्तरपूर्व दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़कने के बाद कम से कम अब तक 42 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। दिल्ली पुलिस ने 27 फरवरी यानी गुरुवार देर शाम मारे गए 25 लोगों के नामों की लिस्ट जारी की थी। इसमें दोनों समुदाय के लोग शामिल थे।

Delhi Violence
Anti CAA
Pro CAA
hindu-muslim
communal violence
Communal riots
delhi police
Khureji
Chandbagh
Bhajanpura
Jafrabad
East-Delhi Violence
Amit Shah
BJP
AAP
Arvind Kejriwal

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

दुर्भाग्य! रामनवमी और रमज़ान भी सियासत की ज़द में आ गए

ग़ाज़ीपुर; मस्जिद पर भगवा झंडा लहराने का मामला: एक नाबालिग गिरफ़्तार, मुस्लिम समाज में डर

लखीमपुर हिंसा:आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के लिए एसआईटी की रिपोर्ट पर न्यायालय ने उप्र सरकार से मांगा जवाब

टीएमसी नेताओं ने माना कि रामपुरहाट की घटना ने पार्टी को दाग़दार बना दिया है


बाकी खबरें

  • Chhattisgarh
    रूबी सरकार
    छत्तीसगढ़: भूपेश सरकार से नाराज़ विस्थापित किसानों का सत्याग्रह, कांग्रेस-भाजपा दोनों से नहीं मिला न्याय
    16 Feb 2022
    ‘अपना हक़ लेके रहेंगे, अभी नहीं तो कभी नहीं’ नारे के साथ अन्नदाताओं का डेढ़ महीने से सत्याग्रह’ जारी है।
  • Bappi Lahiri
    आलोक शुक्ला
    बप्पी दा का जाना जैसे संगीत से सोने की चमक का जाना
    16 Feb 2022
    बप्पी लाहिड़ी भले ही खूब सारा सोना पहनने के कारण चर्चित रहे हैं पर सच ये भी है कि वे अपने हरफनमौला संगीत प्रतिभा के कारण संगीत में सोने की चमक जैसे थे जो आज उनके जाने से खत्म हो गई।
  • hum bharat ke log
    वसीम अकरम त्यागी
    हम भारत के लोग: समृद्धि ने बांटा मगर संकट ने किया एक
    16 Feb 2022
    जनवरी 2020 के बाद के कोरोना काल में मानवीय संवेदना और बंधुत्व की इन 5 मिसालों से आप “हम भारत के लोग” की परिभाषा को समझ पाएंगे, किस तरह सांप्रदायिक भाषणों पर ये मानवीय कहानियां भारी पड़ीं।
  • Hijab
    एजाज़ अशरफ़
    हिजाब के विलुप्त होने और असहमति के प्रतीक के रूप में फिर से उभरने की कहानी
    16 Feb 2022
    इस इस्लामिक स्कार्फ़ का कोई भी मतलब उतना स्थायी नहीं है, जितना कि इस लिहाज़ से कि महिलाओं को जब भी इसे पहनने या उतारने के लिए मजबूर किया जाता है, तब-तब वे भड़क उठती हैं।
  • health Department
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग
    16 Feb 2022
    "स्वास्थ्य सेवा की बात करें तो उत्तर प्रदेश में पिछले पांच सालों में सुधार के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। प्रदेश के जालौन जिले की बात करें तो यहां के जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक पिछले चार साल से…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License