NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली दंगे: पुलिस जांच पर गंभीर सवाल, उमर ख़ालिद ने ‘मीडिया ट्रायल’ का लगाया आरोप
दिल्ली पुलिस पर कोर्ट के आदेश के बावजूद आरोपियों को समय से आरोप–पत्र की प्रति उपलब्ध न कराने, जांच में ढीले रवैये, और मीडिया को आरोप पत्र लीक करने जैसे गंभीर आरोप हैं।
मुकुंद झा
05 Jan 2021
उमर ख़ालिद

दिल्ली: दिल्ली दंगे को लेकर पहले ही सवालों के घेरे में रही दिल्ली पुलिस अब अपने जांच को लेकर भी सवालों के घेरे में है। कल यानि 4 जनवरी को तीन अलग-अलग कोर्ट में दिल्ली पुलिस को अपने बेपरवाह और ढीले रवैये के कारण न्यायाधीशों से फ़टकार खानी पड़ी।

पहला और सबसे गंभीर आरोप, दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र नेता, उमर खालिद ने दिल्ली की एक अदालत के समक्ष सोमवार को आरोप लगाया कि उनके खिलाफ “मीडिया ट्रायल” चलाया जा रहा है और इससे उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष सुनवाई का उसका अधिकार प्रभावित हो रहा है।

एक अन्य मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस के चार्जशीट पर ही गंभीर सवाल उठाए गए और कहा पुलिस ने ‘‘लापरवाही’’ के साथ मामले की जांच की है और बहुत ‘‘ढीले-ढाले तरीके से आरोप पत्र’’ दाखिल किया गया।

तीसरा मामले में भी पुलिस की जांच के तरीके पर सवाल उठे। उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के मामलों में सुनवाई में देरी पर संज्ञान लेते हुए एक अदालत ने यहाँ पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को निर्देश दिया कि वो आरोपियों को समय से आरोप–पत्र की प्रति उपलब्ध कराने के लिए जांच अधिकारियों को निर्देशित करें। आपको बता दें कि यह काफी अभियुक्तों की शिकायत है कि उन्हें उनकी चार्जशीट नहीं दी जा रही है।

पुलिस पर कई वकीलों ने और अन्य लोगों ने आरोप लगया की पुलिस ने मनगढ़ंत कहानी के आधार पर लोगों को आरोपी बनाकर जेल में डाला है। अब सबूत के अभाव में वो जानबूझकर देरी कर रही है।

आइए, अब सोमवार के इन तीनों मामलों पर तफ़सील से नज़र डालते है कि कोर्ट ने क्या सवाल उठाए और पुलिस की जांच क्यों है सवालों के घेरे में।

खालिद ने कोर्ट में अपने खिलाफ़ ‘मीडिया ट्रायल’ का लगाया आरोप, पुलिस पर उठाए गंभीर सवाल

पिछले साल फ़रवरी में खजूरी खास में हुए दंगों से जुड़े मामले में जब मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए खालिद को पेश किया गया तो उसने यह बात रखी। उसने दावा किया कि मीडिया के एक वर्ग को मामले में दायर पूरक आरोप-पत्र भी मिल गया वह भी तब जब उसे या उसके वकील को अदालत से इसकी प्रति नहीं मिली थी।

उसने आरोप लगाया कि बयानों को चुनिंदा तरीके से लीक किया जा रहा है जिससे स्वतंत्र सुनवाई का उसका अधिकार बाधित हो रहा है।

खालिद ने यह भी कहा कि हिरासत में रहने के दौरान उसने किसी बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

खालिद ने कोर्ट में कहा कि "मैं पूरी निष्ठा के साथ कह रहा हूँ कि आरोपियों द्वारा इसकी प्रतिलिपि प्राप्त करने से पहले चार्जशीट पर मीडिया रिपोर्टिंग का यह पैटर्न ट्रायल के लिए पूर्वाग्रहपूर्ण है। कृपया अभियोजन और जांच अधिकारी से पूछें कि यह कैसे हो रहा है कि मीडिया को एक प्रति मिल रही है।"

मीडिया का कहना है कि मेरे स्वीकारोक्ति बयानों (डिस्क्लोजर) में मैंने दंगों में अपनी भूमिका को स्वीकार किया है। यह दावा कैसे किया जा सकता है जब मैंने 4 अक्टूबर को ही इसे लिखित रूप में पुष्टि की थी कि मैंने किसी भी बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।

मैं अच्छी तरह से जानता हूँ कि यह स्वीकारोक्ति बयान अदालत में स्वीकार्य नहीं हैं, लेकिन चुनिंदा डिस्क्लोज़र स्टेटमेंट को लीक करने का एक स्पष्ट पैटर्न है। इसलिए मुझे ध्यान में रखते हुए मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि आप जांच अधिकारी से पूछें कि कैसे आरोप पत्र बार-बार लीक हो रहा है। यह मेरे स्वतंत्र और निष्पक्ष अदालती कार्यवाही के अधिकार को प्रभावित कर रहा है। "

अदालत इस मामले में पांच जनवरी को फिर सुनवाई करेगा

इस मामले में उसके खिलाफ पिछले साल 26 दिसंबर को पूरक आरोप-पत्र दायर किया गया था। इस मामले में निलंबित आप पार्षद ताहिर हुसैन भी एक आरोपी है।

खालिद को मामले में पिछले साल अक्टूबर में गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले सितंबर 2020 में उसे दंगों की साजिश रचने से जुड़े एक मामले में सख्त गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था।

अदालत ने तीन लोगों की जमानत दी, जांच में ढिलाई पर तीखी टिप्पणी की

यहाँ की एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के मामले में तीन लोगों को सोमवार को जमानत देते हुए कहा कि बहुत ‘‘लापरवाही’’ से मामले की जांच की गई और बहुत ‘‘ढीले-ढाले तरीके से आरोप पत्र’’ दाखिल किया गया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने पिछले साल 25 फरवरी को दंगों के दौरान जाफराबाद इलाके में फलों के एक गोदाम में लूटपाट और आगज़नी के मामले में ओसामा, आतिर और गुलफाम को दस-दस हजार रुपये की ज़मानत राशि और इतनी राशि के मुचलके पर जमानत दे दी ।

अदालत ने कहा कि ज़मानत याचिकाओं पर पुलिस के जवाब में कुछ गवाहों की सूची दी गयी, लेकिन पिछले साल मई में दाखिल आरोप पत्र में कुछ गवाहों के बयान नहीं थे।

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, ‘‘जमानत याचिकाओं, इसके जवाब में दाखिल हलफ़नामे और खासकर आरोप पत्र पर गौर करने के बाद यही लगता है कि लापरवाही से आरोप पत्र तैयार कर इसे दाखिल किया गया। जांच में भी लापरवाही बरती गयी।’’

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘गवाहों की जो सूची दाखिल की गई, उसमें कुछ गवाहों का उल्लेख है। सीआरपीसी की धारा 161 (पुलिस द्वारा पूछताछ) के तहत किसी भी गवाहों के बयान को आरोप पत्र में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद 22 मई को बहुत ढीले-ढाले तरीके से आरोप पत्र दाखिल किया गया।’’

अदालत ने तीनों आरोपियों को सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने और बिना अनुमति के दिल्ली से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया।

विशेष लोक अभियोजक उत्तम दत्त ने ज़मानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी दिल्ली दंगे में शामिल थे। लेकिन वो सुनवाई के दौरान कोई भी ऐसा सबूत या गवाह पेश नहीं कर सके जिससे साबित हो की अभियुक्त पर लगे आरोप में कोई दम है।

अदालत का पुलिस को निर्देश, आरोपियों को समय से दें आरोप पत्र

उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के मामलों में सुनवाई में देरी पर संज्ञान लेते हुए एक अदालत ने यहाँ पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को निर्देश दिया कि वो आरोपियों को समय से आरोप –पत्र की प्रति उपलब्ध कराने के लिये जांच अधिकारियों को निर्देशित करें।

मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार ने यह निर्देश दिया। दंगों से संबंधित कम से कम तीन मामलों में कई आरोपियों द्वारा अदालत को बताया गया था कि अदालत के आदेश के बावजूद उन्हें आरोप-पत्र की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई है।

अदालत ने संबंधित जांच अधिकारियों (आईओ) को भी नोटिस जारी कर यह बताने को कहा है कि उसके निर्देश के मुताबिक जेल अधीक्षक के ज़रिए आरोपियों को आरोप-पत्र की प्रति क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई। उसने कहा कि जवाब सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) के ज़रिए अग्रसारित होना चाहिए।

अदालत ने 24 दिसंबर को दिए गए अपने आदेश में कहा था, “यह संज्ञान में आया है कि विभिन्न मामलों में जांच अधिकारी अदालत के निर्देश के बावजूद तय समय में आरोपियों को प्रति उपलब्ध नहीं करा रहे हैं जिसकी वजह से कई मामलों को आगे की कार्यवाही के लिए सत्र अदालत को सौंपने में देरी हो रही है। इसलिए, इस आदेश की प्रति डीसीपी, उत्तर पूर्व को भी जारी की जाए जिससे वह सभी पुलिस थानों में आईओ को निर्देशित करें कि मामले में सुनवाई की अगली तारीख से पहले सभी आरोपियों को समय पर आरोप-पत्र की प्रति उपलब्ध कराई जाए।”

अदालत ने कहा, “इस बीच, मौजूदा प्रकरण में जांच अधिकारी को निर्देश दिया जाता है कि मामले में सुनवाई की अगली तारीख से पहले संबंधित जेल अधीक्षक के जरिए आरोपियों को आरोप-पत्र की प्रति उपलब्ध कराई जाए। कोर्ट ने पुलिस को सुनवाई की अगली तारीख पर आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट सौंपने का भी आदेश दिया।”

उपरोक्त सभी मामलों में पुलिस पर लगे उन सभी आरोप को और बल मिलता दिख रहा है जिसमें पुलिस पर बिना किसी आधार के राजनीति से प्रेरित हो कर, बिना किसी आधार के निर्दोष लोगों पर कार्यवाही कर के जेल में डालने के आरोप है। हालंकि, पुलिस अपने बचाव में लगातार कह रही है कि उसकी जांच पूरी तरह से निष्पक्ष है। लेकिन जिस तरह से कोर्ट पुलिस की जांच पर टिप्पणियाँ कर रहा है, उसने पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ )

Delhi riots
Umar khalid
Delhi Violence
FIR 101
Khajuri Khas
North east delhi
JNU
delhi police
BJP
Amit Shah

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • MP: अवैध बेदखली और लूट के खिलाफ आदिवासियों का कलेक्ट्रेट घेराव, कहा- सरकार हमसे सीख ले कानून
    सबरंग इंडिया
    मध्य प्रदेश: अवैध बेदखली और लूट के ख़िलाफ़ आदिवासियों का कलेक्ट्रेट घेराव, कहा सरकार हमसे सीखे क़ानून
    22 Jul 2021
    खंडवा में जागृत आदिवासी दलित संगठन के लाल झंडे के नेतृत्व में मंगलवार को आदिवासी समुदाय के तीन हजार से ज्यादा लोगों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव व धरना प्रदर्शन किया।
  • Pegasus जासूसी कांड का सबसे बड़ा सवाल: क्या सरकार ने स्पाइवेयर नहीं खरीदा?
    न्यूज़क्लिक टीम
    Pegasus जासूसी कांड का सबसे बड़ा सवाल: क्या सरकार ने स्पाइवेयर नहीं खरीदा?
    22 Jul 2021
    सरकार कहती है कि संसद सत्र को पटरी से उतारने के लिए विपक्ष और कुछ अन्य शक्तियों ने योजना के तहत 'पेगासस फोन-जासूसी का हौव्वा खड़ा किया. क्या सरकार का यह आरोप सही है?
  • khori village
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    खोरी गांव में चल रही तोड़-फोड़ की कार्रवाई के ख़िलाफ़ दिल्ली में हुई प्रेस कांफ्रेंस
    21 Jul 2021
    "खोरी को पूरी दुनिया से काट कर एक गुमनाम मौत देने की पूरी साजिश है हरियाणा सरकार और फरीदाबाद नगर निगम की इसलिए आज इस बात ले सख़्त ज़रूरत है कि खोरी की खबर को मीडिया और व्यापक जन आबादी तक ले जाया जाए।'
  • जनांदोलन की रेडिकल दिशा, सधी रणनीति और बुलंद हौसले के साथ किसान-आंदोलन इस देश का भविष्य है
    लाल बहादुर सिंह
    जनांदोलन की रेडिकल दिशा, सधी रणनीति और बुलंद हौसले के साथ किसान-आंदोलन इस देश का भविष्य है
    21 Jul 2021
    ज़ाहिर है यह किसान आंदोलन के evolution में अगला चरण है, अवधारणा के स्तर पर एक जीवंत जनांदोलन द्वारा सांसदों के लिए "पीपुल्स ह्विप" के विचार का गहरा प्रतीकात्मक महत्व है।
  • COVID
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 42,015 नए मामले, 3,998 मरीज़ों की मौत
    21 Jul 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 42,015 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 4 लाख 7 हज़ार 170 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License