NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली दंगे में पीड़ितों के मुआवज़े में भेदभाव का आरोप, बृंदा करात ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी
माकपा के पोलित ब्यूरो की सदस्य बृंदा करात ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि पिछले साल राष्ट्रीय राजधानी में हुए दंगों के नाबालिग पीड़ितों के परिवारों को भी वयस्क पीड़ितों के परिवारों के बराबर मुआवज़ा प्रदान किया जाए।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
07 Jan 2021
 बृंदा करात ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी

दिल्ली : दिल्ली दंगो के नाबालिग पीड़ितों के परिवारों को वयस्कों के परिजन के बराबर मुआवज़ा नहीं मिल रहा है। इसको लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने नाराज़गी ज़ाहिर की और इसे भेदभावपूर्ण बताया और सभी पीड़ितों के परिजन को बराबर मुआवज़ा देने को कहा। माकपा के पोलित ब्यूरो की सदस्य बृंदा करात ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि पिछले साल राष्ट्रीय राजधानी में हुए दंगों के नाबालिग पीड़ितों के परिवारों को भी वयस्क पीड़ितों के परिवारों के बराबर मुआवज़ा प्रदान किया जाए।

गत वर्ष फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कुछ इलाकों में हुई सांप्रदायिक हिंसा में कम से कम 53 लोग मारे गए थे और सैकड़ो लोगो गंभीर रूप से घायल हुए थे। जबकि करोड़ो रूपए की संपत्ति को नुकसान हुआ था।

केजरीवाल ने हिंसा में मारे गए वयस्क लोगों के परिवारों के लिए 10-10 लाख रुपये और नाबालिग पीड़ितों के परिवारों के लिए पांच-पांच लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की थी।

हाल ही में दो पीड़ितों के परिजन से मुलाकात करने वाली बृंदा ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि मुआवज़े में ‘भेदभाव’ हुआ है।

उन्होंने अपने पात्र में कहा 'मैं हाल ही में उत्तर पूर्वी दिल्ली की साम्प्रदायिक हिंसा में मारे गए दो नाबालिगों के परिवारों से दुबारा मिली। उन्होंने मुझे सरकार के "मुआवज़े पैकेज" में नाबालिगों के साथ भेदभाव के बारे में बताया। जहाँ मारे गए वयस्क के लिए मुआवज़ा 10 लाख है वहीं मारे गए नाबालिगों के लिए मुआवज़ा 5 लाख है।"

उन्होंने बताया ऐसे दो पीड़ित थे, राम सुगारथ का 15 वर्षीय बेटा नितिन पासवान और शहाबुद्दीन का 17 वर्षीय बेटा अमीन।

माकपा नेता के मुताबिक, गरीब परिवारों के बहुत सारे बच्चे स्कूल जाने के साथ अपने परिवार के काम भी हाथ बंटाते हैं और ऐसे में मुआवजे का निर्धारण का आधार व्यक्ति की कमाई के आधार पर करना उचित नहीं हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री से यह आग्रह भी किया कि इन दंगों के पीड़ितों की मौत की पहली बरसी के अवसर पर उनके परिवारों को मुआवज़े की राशि प्रदान की जाए।

पत्र मुख्यतः अंग्रेजी में था लेकिन माकपा ने मीडिया को भेजे अपने विज्ञप्ति में हिंदी अनुवाद भी साँझा किया है। पूरा पत्र नीचे पढ़ा जा सकता है।

आदरणीय श्री अरविंद केजरीवाल,

मैं हाल ही में उत्तर पूर्वी दिल्ली की साम्प्रदायिक हिंसा में मारे गए दो नाबालिगों के परिवारों से दोबारा मिली। उन्होंने मुझे सरकार के "मुआवज़े पैकेज" में नाबालिगों के साथ भेदभाव के बारे में बताया। जहाँ मारे गए वयस्क के लिए मुआवज़ा 10 लाख है वहीं मारे गए नाबालिगों के लिए मुआवज़ा 5 लाख है।

ऐसे दो पीड़ित थे, राम सुगारथ का 15 वर्षीय बेटा नितिन पासवान और शहाबुद्दीन का 17 वर्षीय  बेटा अमीन।

ऐसा प्रतीत होता है कि मुआवज़े में अंतर इसलिए है क्योंकि वयस्क परिवार का कमाने वाला सदस्य है तथा कमाने वाले सदस्य की मौत से परिवार की आय छिन जाती है, इसलिए अधिक मुआवज़े की आवश्यकता है। जहाँ एक ओर इस पूरी समझ में करुणा की कमी है, वहीं इस ढांचे के तहत भी "कमाने वाले सदस्य" की परिभाषा गरीब परिवारों की सच्चाई के प्रति संवेदनशील नहीं है। अधिकतर गरीब परिवारों में बच्चे स्कूल के वक़्त भी परिवार का कारोबार चलाने में मदद करते हुए वयस्कों की जिम्मेदारी निभाते हैं।

नितिन और अमीन दोनों ही अपने परिवारों की मदद कर रहे थे। नितिन के पिता सामान ढोने वाला ठेला चलाते थे और नितिन अक्सर स्कूल के बाद और छुट्टियों के दिन उनकी मदद किया करता था। अमीन मोटरसाइकिल मरम्मत की दुकान में काम करता था और समय-समय पर अपने परिवार की मदद किया करता था। इसलिए अगर मुआवज़े के पीछे तर्क कमाने वाले परिवार के सदस्य की मौत से परिवार की आय का नुकसान होना है, तो दोनों नितिन और अमीन के परिवार पूरे 10 लाख का मुआवज़ा पाने के योग्य हैं।

 इसके अलावा, मेरा मानना है कि दिल्ली सरकार को इस भयंकर हिंसा में मारे गए नाबालिगों के मां-बाप को हुए भावनात्मक नुकसान, चोट और आघात पर भी ध्यान देना चाहिए। यह सही होगा कि अपने बच्चे के न रहने का दर्द झेल रहे परिवारों को सरकार व समाज उचित मुआवज़ा दे। दोनों ही मामलों में परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति देखते हुए जहां दोनों ही कमाने वाले सदस्यों की स्थाई आय नहीं है, यह न्यायोचित होगा कि दिल्ली सरकार द्वारा बाकी पीड़ितों को दिया गया 10 लाख का मुआवज़ा इन परिवारों को भी दिया जाए।

जैसा कि आप जानते हैं कि इनके बच्चों की मौत की पहली बरसी, अगले महीने फरवरी के अंत मे होगी। ऐसे दुखद मौके पर अगर ये दोनों ही परिवार बाकी बचे 5 लाख हासिल कर पाते हैं, तो यह आपकी सरकार की तरफ से न्याय का एक महत्त्वपूर्ण संदेश साबित होगा।

सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद के साथ,
भवदीय,
बृंदा करात

Delhi Violence
Delhi riots
Brinda Karat
Arvind Kejriwal

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

ख़बरों के आगे-पीछे: MCD के बाद क्या ख़त्म हो सकती है दिल्ली विधानसभा?

‘आप’ के मंत्री को बर्ख़ास्त करने से पंजाब में मचा हड़कंप

मुंडका अग्निकांड के लिए क्या भाजपा और आप दोनों ज़िम्मेदार नहीं?

ख़बरों के आगे-पीछे: राष्ट्रपति के नाम पर चर्चा से लेकर ख़ाली होते विदेशी मुद्रा भंडार तक

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

पंजाब पुलिस ने भाजपा नेता तेजिंदर पाल बग्गा को गिरफ़्तार किया, हरियाणा में रोका गया क़ाफ़िला


बाकी खबरें

  • AAKAR
    आकार पटेल
    क्यों मोदी का कार्यकाल सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में सबसे शर्मनाक दौर है
    09 Dec 2021
    जब कोरोना की दूसरी लहर में उच्च न्यायालयों ने बिल्कुल सही ढंग से सरकार को जवाबदेह बनाने की कोशिश की, तो सुप्रीम कोर्ट ने इस सक्रियता को दबाने की कोशिश की।
  • Sudha Bharadwaj
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    एल्गार परिषद मामला: तीन साल बाद जेल से रिहा हुईं अधिवक्ता-कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज
    09 Dec 2021
    भारद्वाज को 1 दिसंबर को बंबई उच्च न्यायालय ने जमानत दी थी और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत को उन पर लगाई जाने वाली पाबंदियां तय करने का निर्देश दिया था।
  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    किसानों की ऐतिहासिक जीत: सरकार ने सभी मांगें मानी, 11 दिसंबर से ख़ाली करेंगे मोर्चा!
    09 Dec 2021
    अंततः सरकार अपने हठ से पीछे हटकर किसानों की सभी माँगे मानने को मजबूर हो गई है। सरकार ने किसानों की लगभग सभी माँगें मान ली हैं। इस बाबत कृषि मंत्रालय की तरफ़ से एक पत्र भी जारी कर दिया गया है। किसानों…
  • Sikhs
    जसविंदर सिद्धू
    सिख नेतृत्व को मुसलमानों के ख़िलाफ़ अत्याचार का विरोध करना चाहिए: विशेषज्ञ
    09 Dec 2021
    पंजाब का नागरिक समाज और विभिन्न संगठन मुसलमानों के उत्पीड़न के खिलाफ बेहद मुखर हैं, लेकिन सिख राजनीतिक और धार्मिक नेता चाहें तो और भी बहुत कुछ कर सकते हैं।
  • Solidarity march
    पीपल्स डिस्पैच
    एकजुट प्रदर्शन ने पाकिस्तान में छात्रों की बढ़ती ताक़त का अहसास दिलाया है
    09 Dec 2021
    एकजुटता प्रदर्शन के लिए वार्षिक स्तर पर निकले जाने वाले जुलूस का आयोजन इस बार 26 नवंबर को किया गया। इसमें छात्र संगठनों पर विश्विद्यालयों में लगे प्रतिबंधों के ख़ात्मे, फ़ीस बढ़ोत्तरी को वापस लेने और…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License