NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली हिंसा : अदालत ने पुलिस से पीड़ितों के पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट मांगी
अदालत घायलों के लिए एंबुलेसों के सुरक्षित निकलने और हिंसा प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए तत्काल आदेश देने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल तय की गई है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Mar 2020
delhi high court

नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को पुलिस को उत्तरपूर्वी दिल्ली में हिंसा प्रभावित लोगों के पुनर्वास एवं उपचार के लिए उठाए गए कदमों पर स्थिति रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने दिल्ली पुलिस को अदालत के 26 फरवरी के आदेश के अनुपालन में उसके द्वारा उठाए गए कदमों पर एक रिपोर्ट दायर करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश में पीड़ितों के पुनर्वास के लिए कुछ निर्देश जारी किए गए थे।

अदालत ने मामले में अगली सुनवाई 30 अप्रैल तय की है। दिल्ली सरकार के स्थायी वकील (फौजदारी मामलों के) राहुल मेहरा ने अदालत को रविवार शाम राष्ट्रीय राजधानी के अन्य इलाकों में फैली अफवाहों के बारे में सूचित किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ऐसी अफवाहों से निपटने में अच्छा काम कर रही है। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि हेल्पलाइनों की मौजूदा संख्या पीड़ितों द्वारा की जा रही कॉलों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है।

अदालत घायलों के लिए एंबुलेसों के सुरक्षित निकलने और हिंसा प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए तत्काल आदेश देने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उत्तरपूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा से कम से कम 42 लोगों की मौत हुई और 200 से अधिक लोग घायल हुए।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता सुरूर मंदर ने अदालत को बताया कि पुनर्वास के ज्यादातर काम खुद समुदाय ही कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ कमियां रह रही हैं जैसे की राहत शिविर बनाना, साथ ही अदालत से अनुरोध किया कि वह सरकार को निर्देश दें कि पुनर्वास के काम वह अपने हाथ में ले ले।

सुनवाई के दौरान मेहरा ने कहा कि अदालत द्वारा न्याय मित्र नियुक्त की गईं जुबेदा बेगम पीड़ितों और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का काम बहुत अच्छी तरह कर रही हैं और उनके काम का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यहां हर पुलिस थाने में कानूनी सेवा प्राधिकार डेस्क बनाई जाए। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 25-26 फरवरी की दरम्यानी रात को सुनवाई के बाद पुलिस को संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर हुई हिंसा में घायल हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और उनका तत्काल उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर के आवास पर अदालत ने आधी रात को तब सुनवाई की जब एक वकील ने कहा कि स्थिति गंभीर है और पीड़ितों को एक छोटे से अस्पताल से जीटीबी अस्पताल भेजना मुश्किल है। इस पर अदालत ने आदेश दिया कि पुलिस सरकारी अस्पतालों तक सुरक्षित रास्ता और घायलों के लिए आपातकालीन उपचार सुनिश्चित करे। न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर और न्यायमूर्ति अनूप जे. भंभानी की पीठ ने पुलिस को इस व्यवस्था के लिए सभी संसाधनों का इस्तेमाल करने का निर्देश भी दिया था।

हिंसा पीड़ितों की मदद करने में नाकाम रही केंद्र, दिल्ली सरकार: मानवाधिकार कार्यकर्ता

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने केंद्र और दिल्ली सरकार की निंदा करते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि वे उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंसा पीड़ित लोगों को कोई चिकित्सकीय एवं कानूनी मदद मुहैया कराने में नाकाम रहे। हर्ष मंदर, अंजलि भारद्वाज, एनी राजा और हरजीत सिंह भट्टी समेत कई कार्यकर्ताओं ने देश की खराब स्वास्थ्य प्रणाली की भी निंदा करते हुए कहा, ‘‘प्रभावित इलाकों के निकट कोई अस्पताल नहीं है।’’

‘प्रोग्रेसिव मेडिकोज एंड साइंटिस्ट्स’ के हरजीत सिंह भट्टी ने दावा किया कि जिन लोगों को गोलियां लगीं, उनके उपचार में काफी देरी की गई ‘‘क्योंकि पुलिस ने निजी चिकित्सकीय मदद को हिंसास्थल पर जाने की अनुमति नहीं दी।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘पुलिस अशिष्ट थी... और घायल लोग डर एवं अविश्वास के कारण सरकारी अस्पतालों में उपचार के लिए तैयार नहीं थे।’’ अंजलि भारद्वाज ने कहा कि अब भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्हें अभी तक कोई चिकित्सीय मदद नहीं मिली है।

उन्होंने दावा किया, ‘‘हिंसा ने भारत की खराब स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को भी उजागर कर दिया। सरकारी अस्पतालों के पास क्षमता से अधिक काम है... दंगा पीड़ित इलाकों में कोई अस्पताल नहीं है... निकटतम अस्पताल 10 किलोमीटर दूर है।’’

उन्होंने कहा कि केंद्र या दिल्ली सरकार में से किसी ने भी ‘‘29 फरवरी तक लोगों से संपर्क नहीं किया’’। भारद्वाज ने कहा, ‘‘कोई भी मुआवजे के लिए उनके पास नहीं पहुंचा... और जब हमने पूछा कि क्या हम मुआवजा प्रपत्र भरने में उनकी मदद कर सकते हैं तो पीड़ितों ने इस भय से इनकार कर दिया कि इस सूचना का इस्तेमाल किसी अन्य मकसद के लिए किया जा सकता है।’’

कार्यकर्ताओं ने मांग की कि जनप्रतिनिधि हिंसा पीड़ित स्थलों पर जाएं और पीड़ितों से मुलाकात करें जो विश्वास जीतने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा उनके लिए शरणस्थलों एवं पर्याप्त राहत की व्यवस्था की जाए। कार्यकर्ताओं ने कहा, ‘‘चौबीसों घंटे काम करने वाले चिकित्सकीय शिविरों की आवश्यकता है।’’

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Delhi Violence
Delhi High court
delhi police
communal violence
Communal riots
Justice Murlidhar
AAP
Arvind Kejriwal
BJP

Related Stories

दिल्ली उच्च न्यायालय ने क़ुतुब मीनार परिसर के पास मस्जिद में नमाज़ रोकने के ख़िलाफ़ याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

कानपुर हिंसा: दोषियों पर गैंगस्टर के तहत मुकदमे का आदेश... नूपुर शर्मा पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं!

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 


बाकी खबरें

  • Mohan Bhagwat
    अनिल जैन
    संघ से जुड़े संगठन अपने प्रमुख मोहन भागवत की ही बातों को क्यों नहीं मानते?
    17 Dec 2021
    संघ प्रमुख की बातों के विपरीत अल्पसंख्यकों और दलितों पर हमले की जो घटनाएं होती हैं उसकी औपचारिक निंदा भी कभी संघ की ओर से नहीं की जाती है। आख़िर क्यों?
  • manikpur
    सौरभ शर्मा
    यूपी चुनाव: बुंदेलखंड से पलायन जारी, सरकारी नौकरियों का वादा अधूरा
    17 Dec 2021
    बेहिसाब खराब मौसम ने इस क्षेत्र में कृषि को अव्यवहारिक या नुकसान का सौदा बना दिया है, जियाके कारण नौकरियों की तलाश में युवाओं का बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र से पलायन कर रहा जो चुनाव में एक प्रमुख मुद्दा…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 7,447 नए मामले, ओमिक्रॉन से अब तक 87 लोग संक्रमित 
    17 Dec 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 47 लाख 26 हज़ार 49 हो गयी है।
  • Hindutva
    अशोक कुमार पाण्डेय
    हिंदू दक्षिणपंथियों को यह पता होना चाहिए कि सावरकर ने कहा था "हिंदुत्व हिंदू धर्म नहीं है"
    17 Dec 2021
    उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि जैसे ही सावरकर ने हिंदुओं को 'अपने आप में एक राष्ट्र' कहा था, तो वे जातीय-धार्मिक आधार पर दो राष्ट्रों के सिद्धांत का प्रतिपादन करने वाले पहले व्यक्ति बन गये थे।
  • bank strike
    न्यूज़क्लिक टीम
    निजीकरण के खिलाफ़ बैंक कर्मियों की देशव्यापी हड़ताल
    16 Dec 2021
    यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने दो सरकारी बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ 16 दिसंबर से दो दिन की देशव्यापी हड़ताल पर है । इसके तहत देशभर में बैंक कर्मी सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License