NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
ऑस्ट्रेलिया में इन दिनों चर्चा के केंद्र में क्यों है सेक्स एजुकेशन?
पश्चिम देशों में चैनल कॉन्टोस के चर्चा में रहने की वजह है एक याचिका, जो उसने अपने गृह देश ऑस्ट्रेलिया की अदालत में लगाई है। दरअसल, उसकी याचिका ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में यौन संबंध के बारे में शिक्षा सुधार के लिए कॉल करती है।
शिरीष खरे
26 Dec 2021
Chanel Contos
यह तस्वीर चैनल कॉन्टोस के ट्विटर अकाउंट से साभार ली गई है.

यह कहानी लंदन में स्नातक की पढ़ाई कर रही ऑस्ट्रेलिया की एक ऐसी छात्रा की है, जो कुछ दिनों पहले तक एक आम छात्रा का जीवन जी रही थी, कोरोना महामारी के दौर में देर तक सोती रहती थी और अपने पूर्वी लंदन स्थित अपार्टमेंट में महीनों तक लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेती थी, लेकिन बता दें कि चैनल कॉन्टोस नाम की यह छात्रा इन दिनों चर्चा में है।

पश्चिम देशों में चैनल कॉन्टोस के चर्चा में रहने की वजह है एक याचिका, जो उसने अपने गृह देश ऑस्ट्रेलिया की अदालत में लगाई है। दरअसल, उसकी याचिका ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में यौन संबंध के बारे में शिक्षा सुधार के लिए कॉल करती है। इस तरह, उसके और उसके करीबी दोस्तों ने छात्रों के रूप में यौन उत्पीड़न के दर्दनाक अनुभवों को फिर से महसूस करना शुरू दिया है, जो इस पूरे मुद्दे पर वैश्विक विमर्श के जरिए यौन संबंधी शिक्षा में सुधार लाना चाहते हैं।

'दी न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए इंटरव्यू में मिस कॉन्टोस बताती है कि एक दिन अचानक उसने यौन उत्पीड़न से पीड़ित कई छात्र छात्राओं के टेस्टिमोनियल कलेक्ट करने शुरु कर दिए, फिर इस बारे में उसने अपने देश के सांसदों को जानकारियां दीं। यही नहीं, जब बाकी रूममेट रात को अपने-अपने कमरे के दरवाजे लगाकर सोते थे, तब भी वह अपने बेडरूम से वीडियो जारी करके इस मुद्दे पर एडवोकेसी करती थी।

स्कूलों में यौन संबंधी शिक्षा क्यों?

कॉन्टोस बताती है, ''ऐसा नहीं है कि यौन उत्पीड़न हर दिन होता है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि कोई उस पर बात नहीं करता है। यह बच्चों के साथ होता है, यहां तक कि किशोरों के साथ भी होता है, कई तो समान आयु वर्ग के लड़के या लड़कियां अपने दोस्तों का यौन उत्पीड़न करते हैं, इसलिए इस आयु वर्ग के छात्रों को इस मुद्दे पर जागरूक बनाने के लिए यौन शिक्षा की सख्त जरूरत है। यदि इन्हें स्कूलों में ही यौन उत्पीड़न के बारे में नहीं पढ़ाया गया, तो यही बच्चे बड़े होकर जब शक्तिशाली पदों पर पहुंचेगें, तब कार्यस्थल पर अपने प्रभाव का लाभ लेकर यौन उत्पीड़न करेंगे।

अब कॉन्टोस का लक्ष्य ऑस्ट्रेलिया की शिक्षा प्रणाली में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन लाना है, जिसका सरोकार यौन संबंधी शिक्षा को ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में अनिवार्य तौर पर शामिल कराने से है। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया सरकार भी इन दिनों यौन शिक्षा के मुद्दे पर आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही है और यही वजह है कि वहां वर्तमान शिक्षा नीति पर समीक्षा की जा रही है।

वहीं, इस मुद्दे से जुड़े कई दूसरे छात्र यह मानते हैं कि यदि स्कूलों में छात्रों के बीच के अंतरंग संबंधों को जल्दी से जल्दी नेविगेट करने का कौशल नहीं सिखाया जाता है तो यह एक चूक है, जो आंशिक रूप से किशोरों के बीच यौन उत्पीड़न और यौन हमले की व्यापकता के लिए जिम्मेदार है।

यौन शिक्षा के मामले में भारत

इधर, भारत के संदर्भ में इस तरह के विमर्श को देखा जाए तो वर्ष 1994 में जनसंख्या और विकास पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के किशोर और युवाओं के यौन प्रजनन अधिकारों की पुष्टि की गई थी। इसके तहत भारत सरकार स्कूलों में किशोरों के लिए मुफ्त व अनिवार्य व्यापक लैंगिक शिक्षा प्रदान करने के लिए बढ़ावा देती है।

वर्ष 2007 में भारत सरकार ने किशोरों के लिए यौन शिक्षा कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इस कार्यक्रम में बॉडी इमेज, हिंसा व दुर्व्यवहार, लिंग व लिंगभेद और यौन रोग जैसे संवेदनशील मुद्दों को शामिल किया गया। इसमें अहम बात यह रही कि अंतरंग संबंधों के बारे में खुलकर बातचीत को आवश्यक बताया गया था।

इस बारे में दिल्ली राज्य शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद में सहायक प्रोफेसर आलोक कुमार मिश्रा बताते हैं कि भारत में यौन शिक्षा को लेकर एक तरह की चुप्पी ही रही है। हालांकि, दिल्ली के स्कूलों में किशोरियों के लिए एक कार्यक्रम चल रहा है, जिसमें पीरियड्स के बारे में महिला शिक्षिकाएं लड़कियों को जानकारियां देती हैं और सेनेटरी पैड्स वितरित करती हैं।

वह कहते हैं, ''सामाजिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए यौन शिक्षा स्कूली बच्चों को दी जा सकती है, क्योंकि यह स्वास्थ्य और मनोविज्ञान कारकों को प्रभावित करता है। हम नहीं चाहते हैं कि अधूरी, गलत और अफवाह आधारित सूचनाएं पाकर बच्चे भटक जाएं।''

मीटू कैंपेन का अगला चरण

दूसरी तरफ, पश्चिमी मीडिया इस कैम्पेन को उन युवा प्रचारकों की लहर का हिस्सा मानती है, जो ऑस्ट्रेलिया में मीटू (MeToo) कैम्पेन को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं, जहां इसकी शुरुआत धीमी मानी जाती है।

वहीं, यौन उत्पीड़न के विरोध में कार्य रहा एक नया संगठन, टीच यस कंसेंट (Teach Us Consent) अब इस बात की एडवोकेसी के लिए सामने आया है कि बच्चों को स्कूलों में यौन उत्पीड़न के बारे में संबोधित किया जाना चाहिए, ताकि बच्चे जैसे-जैसे परिपक्व हों, वे यौन उत्पीड़न और डिजिटल उत्पीड़न जैसे विषयों के बारे में अच्छी तरह से समझ सकें और हाई स्कूल तक पहुंचते हुए इस तरह की चुनौतियों से भलीभांति निपट भी सकें।

हालांकि, पश्चिमी देशों में एक वर्ग यौन शिक्षा को लागू कराने के मामले में असहमत नजर आता है। यही नहीं, एक वर्ग इसके विरोध में भी है जो यह मानता है कि ऐसी शिक्षा छात्रों को यौन संबंध बनाने के लिए उकसा सकती है। इस बारे में कॉन्टोस कहती है, ''संयम एक विकल्प है, जिसका अर्थ यौन सहमति नहीं होता।''

यौन उत्पीड़न पर घिरी ऑस्ट्रेलिया सरकार

पिछले एक साल के दौरान ऑस्ट्रेलिया में बलात्कार और यौन उत्पीड़न के प्रकरणों में तेजी आई है, यहां तक कि बलात्कार और यौन उत्पीड़न के आरोपों से सरकार का ऊपरी स्तर भी गिरफ्त में है, ऐसे में वहां यौन संबंधी शिक्षा को लेकर एक माहौल बन रहा है और इस दिशा में सरकार भी सहमति के आधार पर कोई बड़ा निर्णय लेना चाहती है।

दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलिया के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य न्यू साउथ वेल्स (New South Wales) में पुलिस द्वारा सार्वजनिक की गई रिपोर्ट के मुताबिक यौन उत्पीड़न में वहां एक वर्ष के दौरान 61 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

यह भी एक वजह है कि यौन संबंधी शिक्षा के लिए दाखिल की गई याचिका के समर्थन में एक सप्ताह के भीतर 44 हजार से अधिक ऑस्ट्रेलिया के नागरिकों द्वारा हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।

यौन संबंधों के लिए सहमति पर आधारित शिक्षा

दक्षिण पूर्वी ऑस्ट्रेलिया स्थित एक राज्य विक्टोरिया (The state of Victoria) ने घोषणा की है कि वह कम उम्र से ही यौन संबंधों पर सहमति शिक्षा को अनिवार्य कर देगा। वहीं, अगले वर्ष जुलाई में ऑस्ट्रेलिया के ही क्वींसलैंड राज्य (Queensland state) ने भी कहा है कि वह यौन सहमति पर शिक्षा करेगा, जो अपेक्षाकृत अधिक स्पष्ट होगी।

दूसरी तरफ, समाजशास्त्र की प्रोफेसर जेसिका रिंगरोज (Jessica Ringrose) ने पिछले दिनों ब्रिटिश मीडिया के साथ बातचीत के दौरान कहा कि सहमति से संपर्क और यौन शिक्षा से बच्चों में आत्म-सम्मान की भावना बढ़ेगी, वे रिश्तों में सीमाओं की समझ को समझेंगे और लोगों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना सीखेंगे। इस बारे में वह कहती हैं, ''यह पहले होना चाहिए, क्योंकि सभी शोध इसकी ओर इशारा करते हैं।'' जेसिका रिंगरोज यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (University College London) में और लिंग, कामुकता और शिक्षा मामलों की विशेषज्ञ हैं।

वहीं, ऑस्ट्रेलियाई मीडिया भी यौन संबंधों पर सहमति शिक्षा पर चर्चा कराने के लिए 23 वर्षीय कॉन्टोस की ओर रुख कर रही है और केवल कुछ महीनों में ही चैनल कॉन्टोस का नाम सेक्स एजुकेशन का पर्याय बन गया है। इस मुद्दे पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन (Prime Minister Scott Morrison) ने चैनल कॉन्टोस से मुलाकात का वादा किया है। दरअसल, चैनल कॉन्टोस की चर्चा इसलिए भी अधिक है कि उन्होंने यौन शिक्षा में सुधार के लिए अपने देश से करीब दस हजार मील दूर रहकर भी राष्ट्रीय आंदोलन के लिए प्रवक्ता की अप्रत्याशित भूमिका निभाई है।

13 साल की थी तब यौन उत्पीड़न

कॉन्टोस बताती हैं कि जब वह 13 साल की थी तो एक लड़के ने उनका यौन उत्पीड़न किया गया था। उस लड़के ने कॉन्टोस को आतंकित किया था और बाद में उसने एक अन्य दोस्त के साथ भी यौन उत्पीड़न किया था। वह इस उत्पीड़न की शिकायत न करने के कारण खुद को दोषी मानती है और कहती है कि ऐसी शिकायतों का अच्छी तरह से निराकरण करने के लिए स्कूलों में भी पारदर्शिता की कोई व्यवस्था नहीं होती है।

कॉन्टोस कहती है, ''यदि स्कूल में ही उस लड़के को अपने दोस्तों के साथ सम्मान करना सिखाया जाता और लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील बनाया जाता तो शायद वह ऐसा नहीं करता!''

(शिरीष खरे पुणे स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

australia
Chanel Contos
Sex Education
Sex education in India
sexual harassment
Importance of Sex Education
sexual crimes
sexual violence

Related Stories

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

ऑस्ट्रेलिया: नौ साल बाद लिबरल पार्टी सत्ता से बेदख़ल, लेबर नेता अल्बानीज होंगे नए प्रधानमंत्री

ऑस्ट्रेलिया-इंडिया इंस्टीट्यूट (AII) के 13 अध्येताओं ने मोदी सरकार पर हस्तक्षेप का इल्ज़ाम लगाते हुए इस्तीफा दिया

मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर

2021 : चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका की युद्ध की धमकियों का साल

यौन शोषण के आरोप में गोवा के मंत्री मिलिंद नाइक का इस्तीफ़ा

निर्भया कांड के नौ साल : कितनी बदली देश में महिला सुरक्षा की तस्वीर?

यूपी: मुज़फ़्फ़रनगर में स्कूली छात्राओं के यौन शोषण के लिए कौन ज़िम्मेदार है?

यूपी: ललितपुर बलात्कार मामले में कई गिरफ्तार, लेकिन कानून व्यवस्था पर सवाल अब भी बरकरार!


बाकी खबरें

  • yogi
    रोहित घोष
    यूपी चुनाव: योगी आदित्यनाथ बार-बार  क्यों कर रहे हैं 'डबल इंजन की सरकार' के वाक्यांश का इस्तेमाल?
    25 Feb 2022
    दोनों नेताओं के बीच स्पष्ट मतभेदों के बावजूद योगी आदित्यनाथ नरेंद्र मोदी के नाम का इसतेमाल करने के लिए बाध्य हैं, क्योंकि उन्हें मालूम है कि नरेंद्र मोदी अब भी जनता के बीच लोकप्रिय हैं, जबकि योगी…
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर, युद्ध और दांवः Ukraine पर हमला और UP का आवारा पशु से गरमाया चुनाव
    24 Feb 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने Ukraine पर Russia द्वारा हमले से अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की हार पर चर्चा की। साथ ही, Uttar Pradesh चुनावों में आवारा पशु, नौकरी के सवालों पर केंद्रित होती…
  • UP Elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022 : आवारा पशु हैं एक बड़ा मुद्दा
    24 Feb 2022
    न्यूज़क्लिक के इस ख़ास इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता ने सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता डॉ संदीप पांडे से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। डॉ पांडेय ने…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    अमेरिकी लालच से पैदा हुआ रूस और यूक्रेन का तनाव, दुनिया पर क्या असर डाल सकता है?
    24 Feb 2022
    अमेरिका के लालच से पैदा हुआ रूस और यूक्रेन का तनाव अगर बहुत लंबे समय तक चलता रहा तो दुनिया के बहुत से मुल्कों में आम लोगों के जीवन जीने की लागत बहुत महँगी हो जाएगी।
  • Tribal Migrant Workers
    काशिफ काकवी
    मध्य प्रदेश के जनजातीय प्रवासी मज़दूरों के शोषण और यौन उत्पीड़न की कहानी
    24 Feb 2022
    गन्ना काटने वाले 300 मज़दूरों को महाराष्ट्र और कर्नाटक की मिलों से रिहा करवाया गया। इनमें से कई महिलाओं का यौन शोषण किया गया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License