NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
Covid-19 के नाम पर पुलिस की बर्बरता के ख़िलाफ़ इज़रायल के फिलिस्तीनी नागरिकों का प्रदर्शन
इज़रायल पर अक्सर फ़िलिस्तीनी अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ भेदभाव और बर्बरता का आरोप लगाया जाता रहा है। फिलिस्तीनी नागरिक इजरायल की कुल आबादी का लगभग 20% हैं।
पीपल्स डिस्पैच
02 Apr 2020
इज़रायल के फिलिस्तीनी नागरिकों का प्रदर्शन

Covid-19 को लेकर पाबंदी के नाम पर पुलिस की बर्बरता के विरोध में जाफ़ा शहर में इज़रायल के हजा़ारों फ़िलीस्तीनी नागरिकों ने बुधवार 1 अप्रैल को सड़कों पर प्रदर्शन किया। इज़रायल की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर रबर की गोलियां चलाई और स्टन ग्रेनेड फेंके जिससे कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए जबकि कई लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया।

महिला सहित स्थानीय लोगों को पुलिस द्वारा धक्का देने और लगभग 5000 हज़ार शेकेल या 1388 यूएस डॉलर का जुर्माना लगाते हुए रशीद काटने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए और प्रदर्शन किया। कोरोनावायरस को लेकर पाबंदी और लॉकडाउन के बावजूद लोग पुलिस की बर्बर कार्रवाई के ख़िलाफ़ सड़कों पर प्रदर्शन करने लगे।

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी एक बच्चे को रोक रही है और अपना पहचान पत्र दिखाने को कह रही है। पहचान पत्र दिखाने में नाकाम रहने पर पुलिस उसे गिरफ़्तार करने की कोशिश कर रही है। पुलिस के हिंसक होने पर बच्चे के परिवार के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने मामले को सुलझाने की कोशिश की।

बाद में पुलिस ने इज़रायल में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी क्वारंटीन से संबंधित दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए इस घटना को सही ठहराने की कोशिश की। इस दिशानिर्देशों के अनुसार किसी भी व्यक्ति को उसके घर से 100 मीटर से ज़्यादा दूर जाने की अनुमति नहीं है। हालांकि, मिडिल ईस्ट आई से बात करने वाले स्थानीय लोगों के अनुसार, बच्चे ने उक्त नियमों का उल्लंघन नहीं किया था और पुलिस की ये प्रतिक्रिया सामान्य रूप से इज़रायल में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ और विशेष रूप से फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ व्याप्त शत्रुता का परिणाम था।

रिपोर्टों के अनुसार, अब इज़रायल की समाचार और सोशल मीडिया फ़र्ज़ी ख़बरों को फैला रही है। वह ये कह रही है कि पुलिस बच्चा को गिरफ़्तार करने की कोशिश कर रही थी क्योंकि वह Covid-19 से संक्रमित था।

इज़रायल में 2 अप्रैल तक Covid-19 से 31 लोगों की मौत हो चुकी है वहीं इससे 6211 लोग संक्रमित हो चुके हैं।

जाफ़ा इज़़रायल की राजधानी तेल अवीव के दक्षिण में स्थित एक फ़िलिस्तीनी शहर है।

ऐसे समय में लोगों की गिरफ़्तारी की गई है जब ख़राब रखरखाव और भीड़भाड़ वाली जेलों में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कैदियों की रिहाई के लिए वैश्विक तौर पर अपील की गई हैं। ऐसे मुश्किल समय में लोगों को गिरफ़्तार करने के इन तरीक़ो से इज़रायल की मंशा का पता चलता है। इसने क़ैदियों की रिहाई के अपील को ठुकरा दिया है और यहां तक कि क़ैदियों के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन करते हुए उन पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए कोरोनोवायरस महामारी का इस्तेमाल किया है।

जाफ़ा की घटना से पहले भी इज़रायल की पुलिस और सशस्त्र कर्मियों पर फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण प्रशासित क्षेत्र की सीमा पर संक्रमित पाए गए एक फिलिस्तीनी नागरिक को पिछले महीने छोड़ कर भाग जाने का आरोप लगाया गया था। इज़रायल ने लाखों लोगों के जीवन को ख़तरे में डालकर क़ब्जे वाले गाज़ा क्षेत्र की दशकों पुरानी रोक को हटाने से भी इनकार कर दिया है।

साभार : पीपल्स डिस्पैच

Israel
Palestine
COVID-19
Israel’s Palestine
Protests
Police brutality

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

महामारी के दौर में बंपर कमाई करती रहीं फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां

विश्व खाद्य संकट: कारण, इसके नतीजे और समाधान

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां

कोविड मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर मोदी सरकार का रवैया चिंताजनक

महंगाई की मार मजदूरी कर पेट भरने वालों पर सबसे ज्यादा 

फ़िनलैंड-स्वीडन का नेटो भर्ती का सपना हुआ फेल, फ़िलिस्तीनी पत्रकार शीरीन की शहादत के मायने

न नकबा कभी ख़त्म हुआ, न फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध


बाकी खबरें

  • Anganwadi workers
    रौनक छाबड़ा
    हरियाणा: हड़ताली आंगनवाड़ी कार्यकार्ताओं के आंदोलन में अब किसान और छात्र भी जुड़ेंगे 
    08 Mar 2022
    आने वाले दिनों में सभी महिला कार्यबलों से सम्बद्ध यूनियनों की आस ‘संयुक्त महापंचायत’ पर लगी हुई है; इस संबंध में 10 मार्च को रोहतक में एक बैठक आहूत की गई है।
  • refugee crisis
    एपी
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: संयुक्त राष्ट्र ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इसे यूरोप का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट बताया 
    08 Mar 2022
    अमेरीका ने रूस से आयात होने वाले तेल पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनी मुहिम शुरू की, तो दूसरी तरफ जेलेंस्की ने रूस को चिकित्सा आपूर्ति मार्ग पर हुआ समझौता याद दिलाया।
  • राज कुमार
    गोवा चुनावः कौन जीतेगा चुनाव और किसकी बनेगी सरकार?
    08 Mar 2022
    इस बार भाजपा के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है क्योंकि तमाम विपक्षी दल भाजपा को हराने के लिए लड़े हैं और ये स्थिति कांग्रेस के पक्ष में जाती है।
  • privatization of railways
    सतीश भारतीय
    निजी ट्रेनें चलने से पहले पार्किंग और किराए में छूट जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं!
    08 Mar 2022
    रेलवे का निजीकरण गरीब और मध्यम वर्ग की जेब पर वजन लादने जैसा है। क्योंकि यही वर्ग व्यवसाय और आवाजाही के लिए सबसे ज्यादा रेलवे पर आश्रित है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की घटकर 50 हज़ार से कम हुई
    08 Mar 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 3,993 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.12 फ़ीसदी यानी 49 हज़ार 948 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License