NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बात बोलेगी : दरअसल, वे गृह युद्ध में झोंकना चाहते हैं देश को
हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर 2021 तक चली बैठक को धर्म संसद का नाम देने वाले वे सारे उन्मादी मारने-काटने की बात करने वाले, ख़ुद को स्वामी और साध्वी कहलाने वाले शख़्स दरअसल समाज को उग्र हिंदु राष्ट्र के लिए तैयार करने का तो काम कर ही रहे हैं, साथ ही आगामी विधानसभा चुनावों के लिए ज़हरीला ध्रुवीकरण कर रहे हैं।
भाषा सिंह
24 Dec 2021

देश को गृह युद्ध में धकेलने की साजिशें बहुत तेज़ हैं। इसके लिए अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ, बहुसंख्यक आबादी में नफ़रत की धार को तेज़ किया जा रहा है। भीड़ द्वारा हिंसा करने, एक इंसान को पीट-पीटकर मार डालने को जायज़ ठहराने वालों की तादाद में अब बहुतेरे धर्मावलंबी शामिल हो चुके हैं। और सबसे बड़े खतरे की बात यह कि सार्वजनिक मंचों से धर्म के नाम पर आयोजित इन जमावड़ों में मुसलमानों की हत्या करने के अह्वान, हथियारों के प्रदर्शन और अंत में हिंदू राष्ट्र को बनाने के लिए प्रतिज्ञा ली जाती है, इनका टेलिकास्ट किया जाता है और गैर-भाजपा वाले दलों में भी कोई उबाल नहीं आता। सब कुछ सोशल मीडिया पर जानबूझकर दिखाया जाता है, शेयर किया जाता है, हत्यारों और हत्या को धर्म की रक्षा के लिए पर्याय बनाने वाले अधर्मियों को समाज के नेता के तौर पर पेश किया जाता है, और तमाम राजनीतिक दलों को सांप सूघ जाता है। यह अकारण नहीं है। गैर-भाजपा दलों का नरसंहार के लिए उकसाने वालों पर पहल न लेना, प्रतिक्रिया देने में भी कोताही करना, बहुत देर बाद संभल-संभल कर जगना- बताता है कि इस नरसंहार व नफरत पर आधारित राजनीति ने कितनी पैठ बना ली है।

हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर 2021 तक चली इस बैठक को धर्म संसद का नाम देने वाले वे सारे उन्मादी मारने-काटने की बात करने वाले, खुद को स्वामी और साध्वी कहलाने वाले शख्स दरअसल समाज को उग्र हिंदु राष्ट्र के लिए तैयार करने का तो काम कर ही रहे हैं, साथ ही आगामी विधानसभा चुनावों के लिए जहरीला ध्रुवीकरण कर रहे हैं। इसका राजनीतिक एजेंडा साफ है- हिंदू-मुसलमान में नफरत-मार-काट मचाकर सीटों का समीकरण भाजपा के पक्ष में करना। उत्तर प्रदेश हो या उत्तराखंड—दोनों ही जगह जमीन से भाजपा के लिए माहौल अच्छा नहीं है। लोगों में नाराजगी बड़े पैमाने पर है। ऐसे में हिंदू खतरे में हैं, का जाप करके तमाम मुद्दों को पीछे ढकेलना—तात्कालिक मकसद इस तरह के जमावड़ों का है।

लेकिन यहां तैयारी तात्कालिक से ज्यादा दूरगामी लक्ष्यों की है। जिसे नफरत में सने इस तीन दिन के आयोजन में तबरीबन हर वक्ता ने दोहराया। मुसलमानों के नरसंहार का पूरा ब्लू प्रिंट लेकर ये आयोजन हुआ। हिंदुओं के शौर्य को ललकारने के लिए ऐसे-ऐसे डॉयलॉग मारे गये, जिसे सुनकर लगता ही नहीं कि हमारी सभ्यता इतना लंबा सफर तय करके यहां तक पहुंची है। हथियारों की खरीद, तलवार नहीं आधुनिक हथियारों से मारने, 100-200 लोगों द्वारा लाखों को निपटाने की बात मंच से तमाम देश के खिलाफ, संविधान के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले वक्ता ऐसे कर रहे थे, मानो आपस में ही होड़ लगी है कि कौन कितने बड़े पामाने पर हिंसा के लिए लोगों को उकसा सकता है। एक नरसंहार बेचने वालों के जमावड़े के वीडियो देखकर मानवता भी सिहर उठे।

यहां दो चीजें और ध्यान देने वाली हैं। पहली तो यह कि इस खून के प्यासे जमावड़े को पढ़ाई-लिखाई से भी खासी दिक्कत है। वह बार-बार चिल्लाते हैं कि किताब नहीं, पढ़ाई नहीं-हथियार चाहिए, युद्ध का साजो-सामान चाहिए। जीवन में बुनियादी खुशियों पर खर्चा नहीं मुसलमानों को मारने के लिए आधुनिक-महंगे वाले तौर-तरीके चाहिए। साथ ही हिंदुओं द्वारा ज्यादा बच्चे न पैदा करने पर गहरा मलाल हर उन्मादी वक्ता को था। मजे की बात है कि ये सारे के सारे घर-गृहस्थी से दूर, बच्चे पैदा करने, पालने से तो बहुत दूर—पारिवारिक जिम्मेदारियों से भगोड़े लोगों की जमात के सदस्य हैं। ये सब दूसरे के बच्चों को गृह युद्ध में ढकेलेने को आतुर हैं।

इसके साथ ही एक बात और स्पष्ट हो गई कि देश के संविधान को बदलने की जरूरत इस उन्मादी भीड़ को नहीं है। क्योंकि वह इसे मानते नहीं, और चूंकि उन्हें पता है कि जो लोग सत्ता में बैठे हैं, वे उन्हीं का एजेंडा चला रहे हैं, लिहाजा उन्हें कोई छू नहीं सकता, चाहे वे संविधान जलाए, भगवा संविधान पेश करें, गांधी की तस्वीर पर गोली मारकर गोडसे जिंदाबाद का नारा लगायें—उन्हें सब की छूट है।

जिस तरह से आवंटित सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ने से रोका जा रहा है और इसे हरियाणा राज्य के मुख्यमंत्री का खुला समर्थन हासिल है, जिस तरह से चर्चों पर हमले हो रहे हैं, क्रिसमस से पहले ही आयोजनों पर रोक लगाई जा रही है, रात का कर्फ्यू कर दिया गया है—उससे साफ है कि इस राज्य मशीनरी ने अपने घुटने फासीवादी ताकतों के आगे टेक दिये हैं। हिंसा को धार्मिक व राजनीतिक वैधता प्रदान करने के क्रूर दौर से भारतीय लोकतंत्र गुज़र रहा है।

(लेखिका वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

UTTARAKHAND
Communalism
Hate Speech
haridwar
Hindutva
dharm sansad
BJP
RSS
Muslims
Civil War

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

डिजीपब पत्रकार और फ़ैक्ट चेकर ज़ुबैर के साथ आया, यूपी पुलिस की FIR की निंदा

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल


बाकी खबरें

  • veto
    एपी/भाषा
    रूस ने हमले रोकने की मांग करने वाले संरा के प्रस्ताव पर वीटो किया
    26 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 और विपक्ष में एक मत पड़ा। चीन, भारत और संयुक्त अरब अमीरात मतदान से दूर रहे।
  • Gujarat
    राजेंद्र शर्मा
    बैठे-ठाले: गोबर-धन को आने दो!
    26 Feb 2022
    छुट्टा जानवरों की आपदा का शोर मचाने वाले यह नहीं भूलें कि इसी आपदा में से गोबर-धन का अवसर निकला है।
  • Leander Paes and Rhea Pillai
    सोनिया यादव
    लिएंडर पेस और रिया पिल्लई मामले में अदालत का फ़ैसला ज़रूरी क्यों है?
    26 Feb 2022
    लिव-इन रिलेशनशिप में घरेलू हिंसा को मान्यता देने वाला ये फ़ैसला अपने आप में उन तमाम पीड़ित महिलाओं के लिए एक उम्मीद है, जो समाज में अपने रिश्ते के अस्तित्व तो लेकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करती…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022: किस तरफ होगा पूर्वांचल में जनादेश ?
    26 Feb 2022
    इस ख़ास बातचीत में परंजॉय गुहा ठाकुरता और शिव कुमार बात कर रहे हैं यूपी चुनाव में पूर्वांचाल की. आखिर किस तरफ है जनता का रुख? किसको मिलेगी बहुमत? क्या भाजपा अपना गढ़ बचा पायेगी? जवाब ढूंढ रहे हैं…
  • manipur
    शशि शेखर
    मणिपुर चुनाव: भाजपा के 5 साल और पानी को तरसती जनता
    26 Feb 2022
    ड्रग्स, अफस्पा, पहचान और पानी का संकट। नतीजतन, 5 साल की डबल इंजन सरकार को अब फिर से ‘फ्री स्कूटी’ का ही भरोसा रह गया है। अब जनता को तय करना है कि उसे ‘फ्री स्कूटी’ चाहिए या पीने का पानी?    
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License