NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
घटना-दुर्घटना
भारत
राजनीति
क्या बीएचयू प्रशासन की संवेदनहीनता ने ली आईआईटी कर्मचारी पिंटू की जान?
'नॉन टीचिंग कर्मचारी पिंटू कुमार, जो कैफेटेरिया में कार्यरत था, ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। धरना देने वाले कर्मचारियों का कहना है कि, 'हमने सहयोगी पिंटू कुमार को न्याय दिलाने और उसके बुज़ुर्ग मां-बाप को उचित मुआवज़ा देने की मांग के साथ-साथ दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।'
रिज़वाना तबस्सुम
01 Mar 2020
IIT BHU

बीएचयू (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) और विवादों का चोली दामन का साथ लगता है, किसी न किसी वजह को लेकर बीएचयू अक्सर चर्चा में ही रहता है। कुछ महीने पहले छात्रों के साथ छेड़खानी वाले मुद्दे पर बीएचयू की किरकिरी हुई थी, उसके बाद बीएचयू के आईआईटी इंस्टीट्यूट के छात्राओं के हॉस्टल में मिल रहे खाने को लेकर जमकर विवाद हुआ था। एक बार फिर बीएचयू का आईआईटी इंस्टीट्यूट चर्चा में है, इस बार वजह है- आईआईटी बीएचयू के नॉन टीचिंग कर्मचारी का आत्महत्या करना।

बीते सोमवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू आईआईटी) डायरेक्टर ऑफिस के सामने नान टीचिंग कर्मचारियों ने जमकर धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने आईआईटी डायरेक्टर और आला अधिकारियों पर संवेदनहीनता के आरोप लगाए।

मालूम हो कि, 'नान टीचिंग कर्मचारी पिंटू कुमार, जो कैफेटेरिया में कार्यरत था, ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। धरना देने वाले कर्मचारियों का कहना है कि, 'हमने सहयोगी पिंटू कुमार को न्याय दिलाने और उसके बुज़ुर्ग मां-बाप को उचित मुआवज़ा देने की मांग के साथ-साथ दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।'

IIT.jpg
मृतक पिंटू कुमार को जानने वाले बीएचयू आईआईटी के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, 'पिंटू कुमार पिछले कई महीनों से लगातार परेशान चल रहा था। वो कैफेटेरिया में काम करता था, वो हमेशा कहता था कि, 'काम बहुत है, मैं नहीं कर पा रहा हूँ, कई बार उसने ऑफिस में शिकायत की लेकिन किसी ने भी उसकी बात नहीं सुनी। वो यहाँ 2017 से काम कर रहा था, वो परमानेंट कर्मचारी था। वो पटना का रहने वाला था, माँ-बाप का इकलौता बेटा था। वो मर गया, उसके माँ-बाप आए, उसकी बॉडी लेकर गए, हमारे डिपार्टमेन्ट ने शोक मनाना तो दूर, कोई उसके माँ-बाप से मिलने तक नहीं गया। क्या ये होता हैं प्रशासनिक लोग? कर्मचारी की जान चली जा रही है और कोई बात तक नहीं कर रहा है? क्या संवेदना नाम की कोई चीज नहीं होती है।'

IMG-20200229-WA0007.jpg

आईआईटी के एक अन्य नॉन टीचिंग स्टाफ प्रकाश कुमार (बदला हुआ नाम) ने बताया कि पिंटू हमारे यहाँ (आईआईटी) काम करते था, वो कैफेटेरिया में जूनियर असिस्टेंट थे, प्रकाश कहते हैं कि, पिंटू को ज्यादा काम करना होता था, कैफेटेरिया की सारी ज़िम्मेदारी उन्हीं पर थी। वहाँ काम भी ज्यादा था, अकेले आदमी संभाल नहीं पा रहा था, वो बहुत प्रेशराइज़ हो गया था।’

प्रकाश कहते हैं कि, 'पिंटू ने कई बार एप्लीकेशन दिया था कि उनका वहाँ से किसी और डिपार्टमेन्ट में ट्रांसफर कर दिया जाय, वो वहाँ 2017 से काम करते हुए थक गया था। पिंटू की बीती हालत के बारे में बताते हुए प्रकाश कहते हैं कि, 'इससे पहले पिंटू बहुत डिप्रेशन में चला गया था, उसे बहुत दवा करनी पड़ी थी, वो करीब पंद्रह दिन की छुट्टी पर था। छुट्टी से वापस आने के बाद उसने मेडिकल लगाया था ताकि उसकी स्थिति और हालत को सुना-समझा जा सके, लेकिन किसी ने भी पिंटू की हालत नहीं समझी, और डिपार्टमेन्ट में उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई।'

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू आईआईटी) के निदेशन पीके जैन ने मीटिंग करने और समस्याओं को सुनने की बात कही और कर्मचारियों से बात की। मीटिंग में शामिल एक कर्मचारी बताते हैं कि, हमने कुछ बातें निदेशक के सामने रखीं थी, जिसे लेकर उन्होने पॉज़िटिव में बोला है लेकिन ऐसा लग रहा है कि निदेशक ने सिर्फ बोल ही दिया है।

IMG-20200229-WA0010_0.jpg

अपनी मांग के बारे में बताते हुए कर्मचारी कहते हैं कि, 'हमने पिंटू के इस तरह से जाने पर उनके लिए कुछ पैसे देने की बात कही, हालांकि उनका बीमा है लेकिन फिर भी तुरंत के लिए हम लोगों ने कुछ अपनी तरफ से ही इकट्ठा करके देने की बात कही। निदेशक ने हाँ तो कह दिया लेकिन उन्होने ये कह दिया है कि आप लोग पाँच छह लोगों की टीम बनाइए उसके बाद बात करते हैं।’

कर्मचारी बताते हैं कि, 'जिस संवेदनहीनता के लिए हम निदेशक के पास शिकायत करने गए थे, वही चीज हमें वहाँ भी मिला। जो हमारे पदाधिकारी हैं, जो चीजों को डील कर रहे हैं, उनकी हमारी सबसे ज्यादा शिकायत संवेदनहीनता की ही है। कोई आत्महत्या कर लिया है और किसी को समझ ही नहीं आ रहा है।

कर्मचारी कहते हैं, 'कोई एक ही जगह पर कई साल से काम कर रहा है, कोई परेशान है, वो कई बार ट्रांसफर के लिए शिकायत कर चुका था, उसका ट्रांसफर नहीं किया गया, उसने आत्महत्या कर ली। वो बहुत परेशान था, नहीं झेल पा रहा था। छोटी से बात थी, आखिर उसका ट्रांसफर क्यों नहीं किया गया। यहाँ पर छोटी-छोटी बातों को इशू बनाया जा रहा था। एडमिनिस्ट्रेशन एक तरह से संवेदनहीन हो गया है।'

28 साल के पिंटू कुमार के बारे में डिपार्टमेन्ट के एक अन्य कर्मचारी कहते हैं कि, 'जब भी पिंटू निदेशक के ऑफिस में जब भी जाता था, बहुत परेशान रहता था, हम लोग उससे कहते थे कि बर्डेन मत लो, लेकिन वो कैफेटेरिया में काम करता था, वो एक मिनट के लिए भी फ्री नहीं होता था। वो डिप्रेशन में चला गया था।'

एक अन्य कर्मचारी बताते हैं कि, 'पिंटू कुमार का सेलेक्शन उसके होम टाउन पटना में अच्छी पोस्ट पर हो गया था, वो यहाँ से ट्रांसफर लेटर (एनओसी, एक नौकरी छोड़ने और दूसरी जगह ज्वाइन करने के लिए जरूरी पत्र) मांग रहा था जिसे यहाँ से नहीं दिया। इस वजह से उसकी पटना वाली नौकरी चली गई, और वो ज्यादा डिप्रेशन में रहने लगा।'

इन सबके बारे में जब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू आईआईटी) डायरेक्टर प्रोफेसर प्रमोद कुमार जैन से बात करने की कोशिश की गई तो बात नहीं हो पाई। ऑफिस में जाने पर वो मीटिंग में व्यस्त बताए गए, कॉल करने पर मेल करने के लिए कहा गया। मेल करने के तीन दिन बाद तक डायरेक्टर की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। न तो समय दिया गया और न ही किसी सवाल के जवाब दिए गए।

UttarPradesh
BHU
IIT-BHU
Pintu Kumar
suicide
Protests
IIT Institute

Related Stories

हापुड़ अग्निकांड: कम से कम 13 लोगों की मौत, किसान-मजदूर संघ ने किया प्रदर्शन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

बलिया: पत्रकारों की रिहाई के लिए आंदोलन तेज़, कलेक्ट्रेट घेरने आज़मगढ़-बनारस तक से पहुंचे पत्रकार व समाजसेवी

पत्रकारों के समर्थन में बलिया में ऐतिहासिक बंद, पूरे ज़िले में जुलूस-प्रदर्शन

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं

पेपर लीक प्रकरणः ख़बर लिखने पर जेल भेजे गए पत्रकारों की रिहाई के लिए बलिया में जुलूस-प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट का घेराव

बीएचयू : सेंट्रल हिंदू स्कूल के दाख़िले में लॉटरी सिस्टम के ख़िलाफ़ छात्र, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत


बाकी खबरें

  • budget
    अजय कुमार
    बजट के नाम पर पेश किए गए सरकारी भंवर जाल में किसानों और बेरोज़गारों के लिए कुछ भी नहीं!
    01 Feb 2022
    बजट हिसाब किताब का मामला होता है। लेकिन भाजपा के काल में यह भंवर जाल बन गया है। बजट भाषण में सब कुछ होता है केवल बजट नहीं होता।
  • nirmla sitaraman
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बजट में अगले 25 साल के लिये अर्थव्यवस्था को गति देने का आधार: सीतारमण
    01 Feb 2022
    आमजन ख़ासकर युवा को नए आम बजट में न अपना वर्तमान दिख रहा है, न भविष्य, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि केंद्रीय बजट ने समग्र और भविष्य की प्राथमिकताओं के साथ अगले 25 साल के लिये…
  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बजट में मध्यम वर्ग के साथ विश्वासघात और युवाओं की जीविका पर प्रहार: विपक्ष 
    01 Feb 2022
    “सरकार ने देश के वेतनभोगी वर्ग और मध्यम वर्ग को राहत नहीं देकर उनके साथ ‘विश्वासघात’ और युवाओं की जीविका पर ‘आपराधिक प्रहार’ किया है।”
  • kanpur
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: ' बर्बाद होता कानपुर का चमड़ा उद्योग'
    01 Feb 2022
    अपने चमड़े के कारोबार से कानपुर का नाम पूरी दुनिया में मशहूर है। लेकिन आज चमड़ा फैक्ट्री अपने पतन की ओर है। चमड़ा व्यापारियों का कहना है कि इसका एक बड़ा कारण सरकार द्वारा गंगा नदी के प्रदूषण का हवाला…
  • varansi weavers
    दित्सा भट्टाचार्य
    यूपी: महामारी ने बुनकरों किया तबाह, छिने रोज़गार, सरकार से नहीं मिली कोई मदद! 
    01 Feb 2022
    इस नए अध्ययन के अनुसार- केंद्र सरकार की बहुप्रचारित प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) और प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) जैसी योजनाओं तक भी बुनकरों की पहुंच नहीं है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License