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क्या बीएचयू प्रशासन की संवेदनहीनता ने ली आईआईटी कर्मचारी पिंटू की जान?
'नॉन टीचिंग कर्मचारी पिंटू कुमार, जो कैफेटेरिया में कार्यरत था, ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। धरना देने वाले कर्मचारियों का कहना है कि, 'हमने सहयोगी पिंटू कुमार को न्याय दिलाने और उसके बुज़ुर्ग मां-बाप को उचित मुआवज़ा देने की मांग के साथ-साथ दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।'
रिज़वाना तबस्सुम
01 Mar 2020
IIT BHU

बीएचयू (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) और विवादों का चोली दामन का साथ लगता है, किसी न किसी वजह को लेकर बीएचयू अक्सर चर्चा में ही रहता है। कुछ महीने पहले छात्रों के साथ छेड़खानी वाले मुद्दे पर बीएचयू की किरकिरी हुई थी, उसके बाद बीएचयू के आईआईटी इंस्टीट्यूट के छात्राओं के हॉस्टल में मिल रहे खाने को लेकर जमकर विवाद हुआ था। एक बार फिर बीएचयू का आईआईटी इंस्टीट्यूट चर्चा में है, इस बार वजह है- आईआईटी बीएचयू के नॉन टीचिंग कर्मचारी का आत्महत्या करना।

बीते सोमवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू आईआईटी) डायरेक्टर ऑफिस के सामने नान टीचिंग कर्मचारियों ने जमकर धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने आईआईटी डायरेक्टर और आला अधिकारियों पर संवेदनहीनता के आरोप लगाए।

मालूम हो कि, 'नान टीचिंग कर्मचारी पिंटू कुमार, जो कैफेटेरिया में कार्यरत था, ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। धरना देने वाले कर्मचारियों का कहना है कि, 'हमने सहयोगी पिंटू कुमार को न्याय दिलाने और उसके बुज़ुर्ग मां-बाप को उचित मुआवज़ा देने की मांग के साथ-साथ दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।'

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मृतक पिंटू कुमार को जानने वाले बीएचयू आईआईटी के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, 'पिंटू कुमार पिछले कई महीनों से लगातार परेशान चल रहा था। वो कैफेटेरिया में काम करता था, वो हमेशा कहता था कि, 'काम बहुत है, मैं नहीं कर पा रहा हूँ, कई बार उसने ऑफिस में शिकायत की लेकिन किसी ने भी उसकी बात नहीं सुनी। वो यहाँ 2017 से काम कर रहा था, वो परमानेंट कर्मचारी था। वो पटना का रहने वाला था, माँ-बाप का इकलौता बेटा था। वो मर गया, उसके माँ-बाप आए, उसकी बॉडी लेकर गए, हमारे डिपार्टमेन्ट ने शोक मनाना तो दूर, कोई उसके माँ-बाप से मिलने तक नहीं गया। क्या ये होता हैं प्रशासनिक लोग? कर्मचारी की जान चली जा रही है और कोई बात तक नहीं कर रहा है? क्या संवेदना नाम की कोई चीज नहीं होती है।'

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आईआईटी के एक अन्य नॉन टीचिंग स्टाफ प्रकाश कुमार (बदला हुआ नाम) ने बताया कि पिंटू हमारे यहाँ (आईआईटी) काम करते था, वो कैफेटेरिया में जूनियर असिस्टेंट थे, प्रकाश कहते हैं कि, पिंटू को ज्यादा काम करना होता था, कैफेटेरिया की सारी ज़िम्मेदारी उन्हीं पर थी। वहाँ काम भी ज्यादा था, अकेले आदमी संभाल नहीं पा रहा था, वो बहुत प्रेशराइज़ हो गया था।’

प्रकाश कहते हैं कि, 'पिंटू ने कई बार एप्लीकेशन दिया था कि उनका वहाँ से किसी और डिपार्टमेन्ट में ट्रांसफर कर दिया जाय, वो वहाँ 2017 से काम करते हुए थक गया था। पिंटू की बीती हालत के बारे में बताते हुए प्रकाश कहते हैं कि, 'इससे पहले पिंटू बहुत डिप्रेशन में चला गया था, उसे बहुत दवा करनी पड़ी थी, वो करीब पंद्रह दिन की छुट्टी पर था। छुट्टी से वापस आने के बाद उसने मेडिकल लगाया था ताकि उसकी स्थिति और हालत को सुना-समझा जा सके, लेकिन किसी ने भी पिंटू की हालत नहीं समझी, और डिपार्टमेन्ट में उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई।'

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू आईआईटी) के निदेशन पीके जैन ने मीटिंग करने और समस्याओं को सुनने की बात कही और कर्मचारियों से बात की। मीटिंग में शामिल एक कर्मचारी बताते हैं कि, हमने कुछ बातें निदेशक के सामने रखीं थी, जिसे लेकर उन्होने पॉज़िटिव में बोला है लेकिन ऐसा लग रहा है कि निदेशक ने सिर्फ बोल ही दिया है।

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अपनी मांग के बारे में बताते हुए कर्मचारी कहते हैं कि, 'हमने पिंटू के इस तरह से जाने पर उनके लिए कुछ पैसे देने की बात कही, हालांकि उनका बीमा है लेकिन फिर भी तुरंत के लिए हम लोगों ने कुछ अपनी तरफ से ही इकट्ठा करके देने की बात कही। निदेशक ने हाँ तो कह दिया लेकिन उन्होने ये कह दिया है कि आप लोग पाँच छह लोगों की टीम बनाइए उसके बाद बात करते हैं।’

कर्मचारी बताते हैं कि, 'जिस संवेदनहीनता के लिए हम निदेशक के पास शिकायत करने गए थे, वही चीज हमें वहाँ भी मिला। जो हमारे पदाधिकारी हैं, जो चीजों को डील कर रहे हैं, उनकी हमारी सबसे ज्यादा शिकायत संवेदनहीनता की ही है। कोई आत्महत्या कर लिया है और किसी को समझ ही नहीं आ रहा है।

कर्मचारी कहते हैं, 'कोई एक ही जगह पर कई साल से काम कर रहा है, कोई परेशान है, वो कई बार ट्रांसफर के लिए शिकायत कर चुका था, उसका ट्रांसफर नहीं किया गया, उसने आत्महत्या कर ली। वो बहुत परेशान था, नहीं झेल पा रहा था। छोटी से बात थी, आखिर उसका ट्रांसफर क्यों नहीं किया गया। यहाँ पर छोटी-छोटी बातों को इशू बनाया जा रहा था। एडमिनिस्ट्रेशन एक तरह से संवेदनहीन हो गया है।'

28 साल के पिंटू कुमार के बारे में डिपार्टमेन्ट के एक अन्य कर्मचारी कहते हैं कि, 'जब भी पिंटू निदेशक के ऑफिस में जब भी जाता था, बहुत परेशान रहता था, हम लोग उससे कहते थे कि बर्डेन मत लो, लेकिन वो कैफेटेरिया में काम करता था, वो एक मिनट के लिए भी फ्री नहीं होता था। वो डिप्रेशन में चला गया था।'

एक अन्य कर्मचारी बताते हैं कि, 'पिंटू कुमार का सेलेक्शन उसके होम टाउन पटना में अच्छी पोस्ट पर हो गया था, वो यहाँ से ट्रांसफर लेटर (एनओसी, एक नौकरी छोड़ने और दूसरी जगह ज्वाइन करने के लिए जरूरी पत्र) मांग रहा था जिसे यहाँ से नहीं दिया। इस वजह से उसकी पटना वाली नौकरी चली गई, और वो ज्यादा डिप्रेशन में रहने लगा।'

इन सबके बारे में जब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू आईआईटी) डायरेक्टर प्रोफेसर प्रमोद कुमार जैन से बात करने की कोशिश की गई तो बात नहीं हो पाई। ऑफिस में जाने पर वो मीटिंग में व्यस्त बताए गए, कॉल करने पर मेल करने के लिए कहा गया। मेल करने के तीन दिन बाद तक डायरेक्टर की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। न तो समय दिया गया और न ही किसी सवाल के जवाब दिए गए।

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