NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
अंतरराष्ट्रीय
कोरोना वायरस से होने वाले रोग कोविड-19, सार्स और मार्स में अंतर
जर्नल साइंस ने नीदरलैंड के वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा किए गए एक अध्ययन को प्रकाशित किया। वैज्ञानिकों ने तीनों रोगों के रोगजनक का तुलनात्मक अध्ययन किया।
संदीपन तालुकदार
23 Apr 2020
कोरोना वायरस

कोई बीमारी कैसे पैदा होती है, इसके रोगजनकों को जानने के बाद यह पता चलता है कि जैविक तंत्र एक रोगग्रस्त स्थिति की ओर ले जाता है। यह ज़्यादा ख़तरनाक हो जाता है जब कोई बीमारी एक महामारी का रूप ले लेती है। कोरोनावायरस के चलते पैदा हुए कोविड-19 (COVID-19) में पिछली कुछ महामारियों की कई समानताएं हैं अर्थात् सिवेयर अक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS- सार्स) और मिड्डल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS- मार्स) जो कोरोनावायरस के कारण भी होते हैं। हालांकि, इसके स्तर और शक्ति की बात की जाए तो COVID-19 एसएआरएस और एमईआरएस से अलग है और इसकी प्रकृति के कई पहलू अभी भी अस्पष्ट हैं।

एक तो सकारात्मक पहलू ये है कि COVID-19 के रोगजनक को समझकर हम एसएआरएस और एमईआरएस के बारे में पिछली जानकारी का इस्तेमाल कर सकते हैं। इन दोनों में एक चीज समान है वह है प्रेरक एजेंट।

17 अप्रैल को जर्नल साइंस ने नीदरलैंड के वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा किए गए एक अध्ययन को प्रकाशित किया जिन्होंने तीनों बीमारियों के रोगजनकों का तुलनात्मक अध्ययन किया।

उन्होंने SARS-CoV-2 वायरस को चार चार सिनोमोलगस मैकैस (लंबे पूंछ वाले बंदर) के दो समूहों के शरीर में डाला गया। एक समूह में चार वयस्क (चार से पांच साल की उम्र के बीच) और दूसरे समूह में इतनी ही संख्या में वृद्ध (15-20 वर्ष के बीच) मैकैस थे। शोध समूह ने जो वायरल स्ट्रेन का इस्तेमाल किया वह चीन से लौटे एक जर्मन यात्री का था।

उन्होंने इतनी ही बंदरों की संख्या के समूह में MERS-CoV को संक्रमित किया। ये कोरोनावायरस का एक प्रकार है जिससे मार्स होता है।

उन्होंने पाया कि मैकाक्स के मामले में भी बिना किसी प्रत्यक्ष क्लिनिकल संकेत यानी बिना लक्षण वाले मामलों के उत्पादन संबंधी संक्रमण हुआ। यही मानव संक्रमण के मामलों की एक बड़ी संख्या में भी पाया गया है। यह भी पाया गया है कि ये वायरस मनुष्यों में लक्षण और बिना लक्षण वालों में फैल सकता है। SARS और COVID-19 दोनों में वायरस की संख्या में वृद्धि लंबे समय तक देखी गई है।

दिलचस्प बात यह है कि बिना लक्षण वाले मामलों में जो कि उक्त अध्ययन का हिस्सा था संक्रमण की प्रक्रिया की शुरुआत में चरम पर पहुंच गया। SARS-CoV-2 जिसके चलते COVID-19 होता है, इसे संक्रमण कराने के चार दिनों तक नाक से निकाले गए श्लेष्मा में भी पाया गया था। ये SARS (उक्त पशुओं पर) या MERS के मामले में नहीं देखा गया।

SARS-CoV-2 वायरस की प्रारंभिक वृद्धि इन्फ्लूएंजा वायरस से काफी मिलती-जुलती है। यह गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि शुरुआती वृद्धि यह बता सकती है कि SARS-CoV-2 के लिए डिटेक्शन और आइसोलेशन बहुत प्रभावी क्यों नहीं हो सकता है। SARS और MERS के मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं था। SARS-CoV-2 में संक्रमित मैकास के नाक और ब्रोन्कियल श्लेष्मा से वायरस की उपस्थिति का पता चला था।

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि SARS-CoV-2 RNA आंत की तरह श्वसन मार्ग के अलावा अन्य अंगों में भी मौजूद था। पाया गया कि यह मनुष्यों में भी हुआ था।

SARS-CoV-2 और SARS-CoV क्रमशः COVID-19 और SARS के लिए जिम्मेदार वायरस है जो टाइप-I और टाइप-II न्यूमोसाइट्स को संक्रमित करते हैं। न्यूमोसाइट्स कोशिकाओं के प्रकार हैं जो फेफड़ों के एल्वियोली को पंक्तिबद्ध करते हैं। एल्वियोली छोटे गुब्बारे के आकार के हवा वाली थैली है जिनका कार्य रक्त से ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान करना है। टाइप-I और टाइप-II न्यूमोसाइट्स के अलग-अलग विशिष्ट कार्य हैं। लेकिन, MERS के मामले की जहां तक बात है तो ये वायरस केवल टाइप-II न्युमोसाइट्स को संक्रमित करता है।

टाइप-I न्यूमोसाइट्स के नुकसान के कारण अधिक पानी के जमाव के चलते फेफड़े में सूजन हो जाता है। यह हाइअलाइन झिल्ली के निर्माण के लिए भी जिम्मेदार है। हाइअलाइन झिल्लियां (hyaline membrane)प्रोटीन और मृत कोशिकाओं से बनी होती हैं जो एल्वियोली को अवरुद्ध करती हैं। परिणामस्वरूप, गंभीर मामलों में वायु का आवागमन कठिन और असंभव हो जाता है। फेफड़ों में इस आवागमन के असफल होने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। अधिक गंभीर मामलों में इससे मौत हो जाती है। यह बताता है कि हाइअलाइन झिल्ली का निर्माण SARS और COVID-19 की पहचान क्यों है। MERS के मामले में केवल टाइप-II न्यूमोसाइट्स संक्रमित होते हैं और हाइअलाइन झिल्ली का निर्माण अक्सर नहीं होता है।

गैर-मानव प्राइमेट मॉडल का इस्तेमाल करके विश्लेषण मानव संक्रमण के लिए भी संकेत प्रदान करता है। गैर-मानव मॉडल अध्ययन हमेशा किसी बीमारी की बेहतर समझ प्रदान करने वाले विचार के रूप में रहा है, जो अक्सर मानव उपयोग के लिए चिकित्सीय विकास करने में सहायक होता है क्योंकि रोगग्रस्त मानव शरीर में रोगजनन का अध्ययन बहुत सीमित गुंजाइश प्रदान करता है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल लेख को नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ा जा सकता है।

What are the Differences Between COVID-19, MERS and SARS; Diseases Caused by Coronaviruses

Coronavirus
COVID-19
SARS
MERS
coronaviruses
Pathogenesis of Coronaviruses
Non Human Primate Study on Pathogenesis of Coronavirus
Cynomolgus Macaques Pathogenesis of COVID19

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • सत्यम् तिवारी
    वाद-विवाद; विनोद कुमार शुक्ल : "मुझे अब तक मालूम नहीं हुआ था, कि मैं ठगा जा रहा हूँ"
    16 Mar 2022
    लेखक-प्रकाशक की अनबन, किताबों में प्रूफ़ की ग़लतियाँ, प्रकाशकों की मनमानी; ये बातें हिंदी साहित्य के लिए नई नहीं हैं। मगर पिछले 10 दिनों में जो घटनाएं सामने आई हैं
  • pramod samvant
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेकः प्रमोद सावंत के बयान की पड़ताल,क्या कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार कांग्रेस ने किये?
    16 Mar 2022
    भाजपा के नेता महत्वपूर्ण तथ्यों को इधर-उधर कर दे रहे हैं। इंटरनेट पर इस समय इस बारे में काफी ग़लत प्रचार मौजूद है। एक तथ्य को लेकर काफी विवाद है कि उस समय यानी 1990 केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।…
  • election result
    नीलू व्यास
    विधानसभा चुनाव परिणाम: लोकतंत्र को गूंगा-बहरा बनाने की प्रक्रिया
    16 Mar 2022
    जब कोई मतदाता सरकार से प्राप्त होने लाभों के लिए खुद को ‘ऋणी’ महसूस करता है और बेरोजगारी, स्वास्थ्य कुप्रबंधन इत्यादि को लेकर जवाबदेही की मांग करने में विफल रहता है, तो इसे कहीं से भी लोकतंत्र के लिए…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये
    16 Mar 2022
    किसी भी राजनीतिक पार्टी को प्रश्रय ना देने और उससे जुड़ी पोस्ट को खुद से प्रोत्सान न देने के अपने नियम का फ़ेसबुक ने धड़ल्ले से उल्लंघन किया है। फ़ेसबुक ने कुछ अज्ञात और अप्रत्यक्ष ढंग
  • Delimitation
    अनीस ज़रगर
    जम्मू-कश्मीर: परिसीमन आयोग ने प्रस्तावों को तैयार किया, 21 मार्च तक ऐतराज़ दर्ज करने का समय
    16 Mar 2022
    आयोग लोगों के साथ बैठकें करने के लिए ​28​​ और ​29​​ मार्च को केंद्र शासित प्रदेश का दौरा करेगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License