NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या है ब्रह्मडीह कोयला घोटाला, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय को मिली 3 साल की सज़ा
1999 में झारखंड के गिरिडीह में ‘ब्रह्मडीह कोयला ब्लॉक' के आवंटन में अनियमितता से जुड़े मामले में दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व अटल सरकार में कोयला मंत्री रहे दिलीप राय को सोमवार को तीन साल क़ैद की सज़ा सुनाई है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
27 Oct 2020
 दिलीप राय
फाइल फोटो

दिल्ली की एक अदालत ने झारखंड में 1999 में कोयला खदान आवंटन में अनियमितताओं जुड़े एक मामले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिलीप राय को सोमवार को तीन साल कैद की सजा सुनाई। दिलीप राय (68) तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कोयला राज्य मंत्री थे।

विशेष न्यायाधीश भरत पाराशर ने कोयला मंत्रालय के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप कुमार बनर्जी और नित्यानंद गौतम तथा कैस्ट्रॉन टेक्नोलॉजी लिमिटेड (सीटीएल) के निदेशक महेन्द्र कुमार अग्रवाल को भी तीन-तीन साल की सजा सुनाई। बनर्जी और गौतम अब 80 साल के तथा अग्रवाल 75 साल के हो चुके हैं। अदालत ने हालांकि इन लोगों को जमानत प्रदान कर दी, जिससे कि वे फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में संपर्क कर सकें।

अदालत ने राय पर 10 लाख रुपये का, बनर्जी तथा गौतम पर दो लाख रुपये का तथा अग्रवाल पर 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। साथ ही दोषी पाई गई सीटीएल पर 60 लाख रुपये और कैस्ट्रॉन माइनिंग लिमिटेड (सीएमएल) पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

सफ़ेदपोशों के अपराध ज़्यादा ख़तरनाक: अदालत

अदालत ने कहा कि सफेदपोश लोगों द्वारा किए जाने वाले अपराध साधारण लोगों द्वारा किए जाने वाले अपराधों से ‘अधिक खतरनाक’ हैं क्योंकि इससे जनता के मनोबल पर असर पड़ता है। अदालत ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि मामला सफेदपोश लोगों और समाज में उच्च पदों पर बैठे लोगों द्वारा किए गए अपराध से जुड़ा है। सफेदपोश लोगों द्वारा किए जाने वाले अपराध साधारण लोगों द्वारा किए जाने वाले अपराधों से अधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि एक तो इससे वित्तीय नुकसान काफी अधिक होता है तथा दूसरा इससे जनता के मनोबल पर असर पड़ता है।

अदालत ने परिवीक्षा पर रिहा करने के दोषियों के आग्रह को खारिज कर दिया। दोषियों ने अदालत से आग्रह किया था कि उनकी वृद्धावस्था को देखते हुए उनके प्रति उदार रुख अपनाया जाना चाहिए। सीबीआई की ओर से पेश लोक अभियोजकों-वी के शर्मा और ए पी सिंह ने हालांकि दोषियों को अधिकतम सजा दिए जाने का आग्रह किया था।

अदालत ने पांच आरोपियों को 120-बी (आपराधिक साजिश), 409 (लोकसेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) सहित भारतीय दंड संहिताओं की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। वहीं, छठी आरोपी सीएमएल को भांदसं की धारा 379 (चोरी) के तहत दोषी ठहराया गया था।

ब्रह्मडीह कोयला घोटाला

यह मामला 1999 में झारखंड के गिरिडीह में ब्रह्मडीह कोयला खदान के आवंटन से संबंधित है। सीबीआई ने आरोपपत्र में कहा था कि मई 1998 में सीटीएल ने कोयला ब्लॉक आवंटित करने के लिए मंत्रालय में आवेदन किया था। कोल इंडिया लिमिटेड ने मंत्रालय को सूचित किया कि जिस जगह पर खनन के लिए आवेदन किया गया है, वहां खतरा है। क्योंकि वहां खनन क्षेत्र पानी से भरा हुआ है।

अप्रैल 1999 में कंपनी ने फिर से आवेदन किया और मंत्री दिलीप राय को नए आवेदन पर शीघ्रता से विचार करने की बात कही। मई 1999 में आवेदन फाइल दिलीप राय के मंत्रालय से तत्कालीन केंद्रीय कोयला सचिव के पास आई और वहां से तत्कालीन अतिरिक्त सचिव नित्या नंद गौतम के पास भेजी गई। गौतम ने अपने पिछले अवलोकन से यू टर्न ले लिया और कोयला ब्लॉक सीटीएल को आवंटित करने की सिफारिश की। जिसके बाद स्क्रीनिंग कमेटी ने कोयला मंत्रालय द्वारा दिशानिर्देशों में ढील देने के लिए कोल ब्लॉक के आवंटन के लिए सीटीएल की सिफारिश की।

कोयला मंत्रालय द्वारा 1 सितंबर 1999 को सीटीएल के पक्ष में ब्रह्मडीह कोयला ब्लॉक के आवंटन को पत्र जारी किया। यह आरोप लगाया गया था कि ब्लॉक के आवंटन के बाद सीटीएल ने संबंधित अधिकारियों द्वारा किसी भी खदान खोलने की अनुमति मिलने के बिना भी अवैध रूप से कोयला निकालना शुरू कर दिया।

बीजू जनता दल के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे दिलीप राय

64 वर्षीय राय बीजू जनता दल (बीजेडी) के संस्थापक सदस्य थे और वाजपेयी सरकार के दौरान एनडीए गठबंधन का हिस्सा होने के कारण वह केंद्रीय राज्यमंत्री बने थे। उस दौरान वह राज्यसभा सदस्य थे। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत जनता पार्टी से की थी। बाद में वह बीजेडी, कांग्रेस और बीजेपी के सदस्य रहे। वे एक सफल होटल व्यवसायी भी हैं।

राय सबसे पहले 1985 में जनता पार्टी के टिकट से ओडिशा विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। इसके लगभग एक दशक बाद वह दिल्ली की राजनीति में सक्रिय हुए। 1996 में राज्यसभा सदस्य बने और लगभग 2 महीने बाद ही एच डी देवेगौड़ा मंत्रालय में शामिल हो गए। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में राय को 1999 में कोयला राज्य मंत्री बनाया गया था।

2002 में वह निर्दलीय चुनाव लड़कर राज्यसभा पहुंचे थे, जिसके बाद बीजेडी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। 2004 में कांग्रेस में शामिल हो गए, चार साल बाद इसे छोड़ दिया। साल 2009 में वह भाजपा में शामिल हो गए थे। 2014 में वह राउरकेला से भाजपा के टिकट पर विधानसभा के लिए चुने गए। लेकिन साल 2018 में उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। ऐसा माना गया है कि सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल किए गए जाने के बाद उन्होंने ऐसा किया था।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Brahmadih coal scam
Coal Scam
Dilip Ray
Atal Bihari Vajpayee
BJP
NDA Govt

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • Employment
    नीलू व्यास
    भारत में नौकरी संकट जितना दिखता है उससे अधिक भयावह है!
    01 Feb 2022
    सामान्य तथ्य यह है कि इच्छुक छात्र सरकारी नौकरियों की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन निजीकरण, डिजिटलीकरण एवं ऑटोमेशन में लगातार वृद्धि के चलते इनमें लगातार कमी होती जा रही है।
  • Election Commission
    भाषा
    निर्वाचन आयोग ने गौतमबुद्ध नगर में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 10 प्रत्याशियों को नोटिस जारी किए
    01 Feb 2022
    चुनाव और कोविड के मद्देनज़र गौतमबुद्ध नगर में 1 फरवरी से लेकर 31 मार्च तक दो महीने के लिए धारा 144 लागू की गई है। इसके अलावा जेवर से चुनाव लड़ रहे सपा-रालोद के प्रत्याशी अवतार सिंह भड़ाना और उनके…
  • Rajeshwar Singh
    भाषा
    सरकार ने ईडी अधिकारी राजेश्वर सिंह को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दी, लड़ सकते हैं चुनाव
    01 Feb 2022
    कई विवादों में रहे सिंह ने पिछले साल के अंत में वीआरएस के लिए आवेदन दिया था। सूत्रों ने बताया कि वह भाजपा के टिकट पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ सकते है।
  • Yogi
    असद रिज़वी
    यूपी चुनाव : वे मुद्दे जो भाजपा के लिए बन सकते हैं मुसीबत! 
    01 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का “हिंदुत्व” का मुद्दा चलता दिख नहीं रहा है। भगवा पार्टी अब विपक्षियों के सहयोगियों को तोड़ने या कम से कम उन्हें लेकर लोगों के मन में शक…
  • Rural India
    भरत डोगरा
    बजट '23: सालों से ग्रामीण भारत के साथ हो रही नाइंसाफ़ी से निजात पाने की ज़रूरत
    01 Feb 2022
    कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों के लिए कम पैसों का आवंटन इंडिया और भारत के बीच के आय और जीवन स्तर के लिहाज़ से बनी चौड़ी खाई की व्याख्या करता है, लेकिन क्या सरकार के कान पर जूं भी रेंग रही है ?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License