NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
क्या उन परिवारों को भी टीका उत्सव मनाना है जहां कोरोना से मौत हुई है?
प्रधानमंत्री का ये सेलिब्रेशन मोड नया नहीं है। असल में जब सरकारें तबाही को रोक नहीं पाती या कहें कि प्राथमिकता नहीं होती तो तबाही को ही उत्सव में बदल दिया जाता है।
राज कुमार
12 Apr 2021
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में रविवार 11 अप्रैल से 14 अप्रैल तक टीका उत्सव ‘लॉन्च’ किया गया है। फोटो साभार: पीटीआई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में रविवार 11 अप्रैल से 14 अप्रैल तक टीका उत्सव ‘लॉन्च’ किया गया है। फोटो साभार: पीटीआई

आज, 12 अप्रैल, 2021 तक भारत में कोरोना से 1 लाख 70 हज़ार 179 लोगों की मौत हो चुकी है। 1 करोड़ 35 लाख से ज्यादा कोरोना केस अब तक दर्ज़ हो चुके हैं। इस दौरान एक साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। कोरोना की दूसरी लहर दस्तक दे चुकी है। कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी सेलिब्रेशन मोड में ही हैं।

तबाही में उत्सव!

11 अप्रैल से 14 अप्रैल तक टीका “उत्सव” मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने लोगों के नाम पत्र भी लिखा है। उसमें उन्होंने बताया है कि लोगों को क्या करना है। लेकिन ये नहीं बताया है कि सरकार क्या कर रही है? सरकार ने इस एक साल के दौरान क्या किया? सरकार ने इस एक साल के दौरान गंभीरता से स्वास्थ्य के ढांचे को कोरोना से निपटने के काबिल क्यों नहीं बनाया? प्रधानमंत्री की ज़िम्मेदारी होती है, जवाबदेही होती है। वो सिर्फ कोई मोटिवेशनल गुरु नहीं होता है। जिसका काम सिर्फ प्रवचन करना है।

प्रधानमंत्री का ये सेलिब्रेशन मोड नया नहीं है। इन्होंने ही इस आपदा को अवसर बताया था। याद कीजिये कोरोना के शुरुआती दिन जब प्रधानमंत्री ने देश की जनता को संबोधित किया था और लोग सड़कों पर भीड़ बनाकर ढोल-नगाड़ों के साथ उत्सव मनाने निकल पड़े थे। ताली-थाली उत्सव की भी याद कीजिये। मोमबत्ती जलाओ, बत्ती बुझाओ आदि-आदि। प्रधानमंत्री शुरू से ही सेलिब्रेशन मोड में है। असल में जब सरकारें तबाही को रोक नहीं पाती या कहें कि प्राथमिकता नहीं होती तो तबाही को ही उत्सव में बदल दिया जाता है।

इसी कड़ी में अब “टीका उत्सव” आया है। जिसके बारे में माननीय प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी से कुछ सवाल है। ताकि उत्सव अच्छे से मनाया जा सके।

टीका उत्सव के बारे में कुछ सवाल

  • क्या उन परिवारों को भी उत्सव मनाना है जिनके सदस्य की मौत कोरोना से हुई है?
  • उन श्मशान घाटों में उत्सव मनाने की क्या तैयारी है जहां अंतिम संस्कार के लिये भी टोकन मिल रहे हैं?
  • उन टीका केंद्रों पर उत्सव कैसे मनाया जाएगा जहां स्टॉक की कमी है?
  • जिन लोगों को रेंडेसिवर लेने के लिए दो-दो दिन इंतज़ार करना पड़ रहा है, क्या उन्हें लाइन में गुब्बारे और फुलझड़ी लेकर खड़ा होना होगा?
  • अगर पुलिस बिना मास्क नागरिक को सड़क पर गिराकर पीटती है तो क्या भीड़ को तालियां और सीटियां भी बजानी होंगी?
  • क्या उन प्रवासी मज़दूरों को भी उत्सव मनाना होगा जो हज़ारों किलोमीटर पैदल चलकर अपने गांव पहुंचे? क्या उन्हें पांव के छालों पर कुमकुम लगाकर नृत्य होगा?
  • क्या उन मज़दूरों के परिवार को भी उत्सव मनाना होगा जिनके एकमात्र कमाने वाले रेल से कटकर मर गये?
  • जिनकी नौकरियां चली गई और काम-धंधे ठप्प हो गये क्या उन्हें भी उस वेक्सीन की फोटो के सामने डांस करना होगा जिसका स्टॉक कम बताया जा रहा है?
  • क्या ढोल, डीजे, गुलाल, गुब्बारे, पटाखे आदि का खर्च सीधे जन-धन खाते में भेजा जाएगा?

ये कुछ सवाल इसलिये हैं ताकि उत्सव और भी ज़ोरदार तरीके से मनाया जा सके। इसके साथ ही दो सुझाव भी है। पहला सुझाव ये है कि शब्दकोष में संशोधन किया जाए और तबाही को उत्सव का पर्यायवाची बना दिया जाए। दूसरा, सरकार को दुनिया का सबसे बड़ा आकाश-बाण बनाना चाहिये। जिसे जब आकाश में छोड़ा जाए और ज़ोरदार धमाके के साथ वो फटे तो आसमान में “विशवगुरु भारत” लिख दे। इससे हमारे उत्सव की धमक पूरी दुनिया देख सकेगी।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। आप सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Tika Utsav
vaccination festival
COVID-19
Coronavirus
Modi government
Covid-19 India

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • farmers’ movement
    रौनक छाबड़ा
    दिल्ली के बॉर्डर पर जश्न के बीच किसानों के होंठों पर एक ही सवाल: 'सरकार ने क्यों की इतनी देर'
    20 Nov 2021
    किसान आंदोलन के केंद्र सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे तब तक घर नहीं लौटेंगे, जब तक कि संसद में विवादास्पद कृषि क़ानूनों को वापस लेने के लिए एक विधेयक पारित नहीं हो…
  • Stubble-burning
    अजय कुमार
    वोट बैंक की पॉलिटिक्स से हल नहीं होगी पराली की समस्या
    20 Nov 2021
    अगर सरकार वोट बैंक की बजाए जनकल्याण से संचालित होती तो पराली की समस्या से निजात मिल जाता
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 10,302 नए मामले, 267 मरीज़ों की मौत
    20 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.36 फ़ीसदी यानी 1 लाख 24 हज़ार 868 हो गयी है।
  • climate change
    रेनार्ड लोकी
    COP26: नीतियों या उपभोक्ता व्यवहारों से मेल नहीं खाता जलवायु संकल्प 
    20 Nov 2021
    ग्लासगो जलवायु समझौते ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई को पटरी से उतार दिया है।
  • Farmers Protest
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बरः किसानों ने तोड़ा मोदी का अहंकार, लड़ाई है अभी बाक़ी
    19 Nov 2021
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने तीन कृषि कानूनों को रद्द करते समय भी बोले गये PM के झूठ को किया बेनकाब, बात की बॉर्डर पर बैठे किसानों-नेताओं से और जानने की कोशिश की आगे की रणनीति
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License