NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
क्या ताली और थाली बजाकर सच में वायरस मरते हैं?
सुपरस्टार अमिताभ बच्चन से लेकर मोहनलाल तक और मोदी जी की बातों के पीछे जाकर उनके भावों को समझने वाली 'विशेष जनता' सोशल मीडिया पर फ़ैलाने लगी कि लोग थाली और घंटी की आवाज़ से वायरस को मार देंगे।  
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Mar 2020
ताली और थाली
Image courtesy:Prabhatkhabar

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा ताली और थाली बजाकर उनका आभार व्यक्त कीजिये जो कोरोना वायरस की लड़ाई में सबसे आगे खड़े हैं। यानी दिनभर जनता कर्फ्यू की शांति के बाद एक तरह की ऐसी गूंज निकालिये जिससे डॉक्टरों, हेल्थवर्करों को लगे की उन्हें शाबाशी दी जा रही है। प्रधानमंत्री ने बस इतना कहा। लेकिन बहुत से लोगों ख़ासकर ‘आईटी सेल’ ने प्रधानमंत्री की बातों को बिल्कुल दूसरी तरह से लिया और फैलाया।

सुपरस्टार अमिताभ बच्चन से लेकर मोहनलाल तक और मोदी जी की बातों के पीछे जाकर उनके भावों को समझने वाली 'विशेष जनता' सोशल मीडिया पर फ़ैलाने लगी कि लोग थाली और घंटी की आवाज़ से वायरस को मार देंगे।  

अब यह बात इतनी तेज़ी से फैली की लोगों ने दिन भर कर्फ़्यू का पालन किया और शाम होते ही थाली, ताली और शंख लेकर वायरस को मारने निकल पड़े। इसके बाद ऐसा छीछालेदर मचा कि डॉक्टरों की हौसलाअफ़ज़ाई होने की बजाय उनका काम और मुश्किल करने वाला माहौल बना दिया।

लेकिन क्या इस बात में सच्चाई है कि थाली, ताली, घंटी, शंख या किसी भी तरह के कंपन से वायरस मरते हैं। तो जवाब है बिल्कुल नहीं।  

वायरॉलजिस्ट डॉक्टर दिलीप कहते हैं-

स्टील की थाली और घंटियों की आवाज़ से वायरस मर जाएगा, इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। हां, अल्ट्रासाउंड के ज़रिए बैक्टीरिया सेल्स को डिसरप्ट किया जाता है। अल्ट्रासॉउन्ड द्वारा बैक्टीरिया यानी जिवाणु या किटाणु को अलग थलग किया जाता है न कि वायरस यानी विषाणु को। अल्ट्रासॉउन्ड्स में अल्ट्रासॉनिक वेव्स काम करता है। जिससे हाई फ्रीक्वेंसी पैदा होती है। इसे ऐसे समझिये कि जब बहुत छोटी लम्बाई की तरंग बहुत ज़्यादा फ्रीक्वेंसी पैंदा करती है। इसलिए एक स्पेसिफिक फ्रीक्वेंसी या ज़रूरी फ्रीक्वेंसी निकालने के लिए नपी-तुली मशीन्स की ज़रूरत होती है। जिनसे वह फ्रीक्वेंसी निकल पाए और काम हो पाए। बर्तनों से ऐसा मुमकिन नहीं है। इनसे निकलने वाली तरंगों की लम्बाई यानी वेवलेंथ बहुत लम्बी होती है।

सेल डिसरप्ट करने वाले इन एक्सपेरिमेंट्स के दौरान फ्रीक्वेंसी इतनी ज़्यादा होती है कि हम अपने कान खुले नहीं छोड़ सकते। क्योंकि इन फ्रीक्वेंसीज़ से हमारे कान खराब हो जाएंगे। और वायरस को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
विश्वास मानिए, आप कुछ भी बजाकर अल्ट्रासॉनिक वेव्स पैदा नहीं कर सकते। प्रधानमंत्री की बातें लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए थीं। अगर आप विज्ञान की ओर से वायरस मारने या भगाने के झूठे दावे करेंगे तो ये बेहद गलत और गुमराह करने वाला होगा।

अमिताभ बच्चन को भी शायद अपनी ग़लती का एहसास हुआ तभी उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट किया।

‘पीटीआई-भाषा’ के मुताबिक अपने ट्वीट में अमिताभ बच्चन ने कहा था कि एक राय दी गई कि 22 मार्च को शाम पांच बजे ‘अमावस्या’ के दिन वायरस बैक्टीरिया की बुरी ताकतें अपने चरम पर होती हैं। शंख बजाने से होने वाले कंपन से वायरस का प्रभाव कम हो जाता है या नष्ट हो जाता है, क्योंकि चांद नए ‘नक्षत्र’ रेवती की ओर जाता है।

बच्चन ने अपना यह ट्वीट अपनी फोटो के साथ पोस्ट किया था और इसके साथ तीन प्रश्नवाचक चिन्ह लगाए थे। इस वजह से कई लोगों को हैरानी हुई कि क्या अभिनेता अपनी राय साझा कर रहे हैं या सोशल मीडिया पर चल रहे मत पर सवाल कर रहे हैं।

बहरहाल, सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों ने गैर तथ्यात्मक बात पोस्ट करने के लिए उनकी आलोचना की।

सबसे पहले, गीतकार वरूण ग्रोवर ने बच्चन की आलोचना की और कहा कि इस मुश्किल वक्त में अभिनेता को और जिम्मेदार होना चाहिए।

Janta curfew
Thali or Taali
Coronavirus
COVID-19
Amitabh Bachchan
Narendra modi
Social Distance

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • Jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध
    02 Feb 2022
    पिछले दिनों झारखंड सरकार के कर्मचारी चयन आयोग द्वारा प्रदेश के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों की नियुक्तियों के लिए भोजपुरी, मगही व अंगिका भाषा को धनबाद और बोकारो जिला की स्थानीय भाषा का दर्जा…
  • ukraine
    पीपल्स डिस्पैच
    युद्धोन्माद फैलाना बंद करो कि यूक्रेन बारूद के ढेर पर बैठा है
    02 Feb 2022
    मॉर्निंग स्टार के संपादक बेन चाकों लिखते हैं सैन्य अस्थिरता बेहद जोखिम भरी होती है। डोंबास में नव-नाजियों, भाड़े के लड़ाकों और बंदूक का मनोरंजन पसंद करने वाले युद्ध पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ है।…
  • left candidates
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: मज़बूत विपक्ष के उद्देश्य से चुनावी रण में डटे हैं वामदल
    02 Feb 2022
    “…वामदलों ने ये चुनौती ली है कि लूट-खसोट और उन्माद की राजनीति के खिलाफ एक ध्रुव बनना चाहिए। ये ध्रुव भले ही छोटा ही क्यों न हो, लेकिन इस राजनीतिक शून्यता को खत्म करना चाहिए। इस लिहाज से वामदलों का…
  • health budget
    विकास भदौरिया
    महामारी से नहीं ली सीख, दावों के विपरीत स्वास्थ्य बजट में कटौती नज़र आ रही है
    02 Feb 2022
    कल से पूरे देश में लोकसभा में पेश हुए 2022-2023 बजट की चर्चा हो रही है। एक ओर बेरोज़गारी और गरीबी से त्रस्त देश की आम जनता की सारी उम्मीदें धराशायी हो गईं हैं, तो
  • 5 election state
    रवि शंकर दुबे
    बजट 2022: क्या मिला चुनावी राज्यों को, क्यों खुश नहीं हैं आम जन
    02 Feb 2022
    पूरा देश भारत सरकार के आम बजट पर ध्यान लगाए बैठा था, खास कर चुनावी राज्यों के लोग। लेकिन सरकार का ये बजट कल्पना मात्र से ज्यादा नहीं दिखता।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License