NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या आपको ये मालूम है कि बाढ़ और कोरोना से असम बेहाल है?
असम में बाढ़ संबंधी घटनाओं में शुक्रवार तक कम से कम 75 लोगों की मौत हो गयी है, जबकि 36 लाख लोग प्रभावित हैं। वहीं, शनिवार को पिछले 24 घंटें में कोरोना संक्रमण के 892 नए मामले दर्ज किए गए हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Jul 2020
Assam
साभार : ट्विटर

असम में बाढ़ संबंधी घटनाओं में शुक्रवार को पांच और लोगों की मौत हो गयी जबकि पूरे प्रदेश में लाखों लोग इससे प्रभावित हुए हैं। हालांकि, मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि देश के उत्तरी और उत्तरपूर्वी हिस्सों में मानसून की सक्रियता बढ़ेगी जो समस्या को और "बढ़ा" सकती है।

मौसम विभाग ने बताया कि अनुकूल मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण शनिवार और रविवार से देश के उत्तरी और उत्तरपूर्वी भागों में बारिश की स्थिति एवं इसकी तीव्रता में वृद्धि होने की संभावना है। विभाग ने बयान जारी कर बताया, 'यह बाढ़ की मौजूदा स्थिति को और बढ़ा सकता है और पूर्वोत्तर राज्यों, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम में भूस्खलन भी हो सकता है। एक आधिकारिक बुलेटिन में कहा गया है कि असम में बाढ़ के कारण पांच और लोगों की मौत हो गयी जबकि पूरे प्रदेश के 28 जिलों में 36 लाख लोग प्रभावित हुये हैं।

असम प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने बुलेटिन में कहा है कि असम के धुबरी, दरांग, बोंगईगांव, गोलपाड़ा एवं कामरूप जिलों में एक एक व्यक्ति की मौत हुयी है। इसमें कहा गया है कि बृहस्पतिवार को प्रदेश के 33 जिलों में से 27 जिलों के 39.8 लाख लोग इस जल प्रलय  के कारण प्रभावित हुये थे।

बुलेटिन में कहा गया है कि इस साल प्रदेश में बाढ़ एवं भूस्ख्लन से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ कर 102 हो गयी है। प्रदेश में बाढ़ संबंधी घटनाओं में 75 लोगों की मौत हो गयी थी जबकि भूस्खलन में 26 लोगों की मौत हो चुकी है।

पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्र सरकार से प्रदेश में बाढ़ की स्थिति पर तुरंत ध्यान देने एवं प्रदेश को अधिक से अधिक सहायता देने की अपील की है। असम के कुछ हिस्सों में बाढ़ के कारण लोगों की मौत एवं संपत्ति के नुकसान पर दलाई लामा ने भी दुख जताया है।

बौद्धों के आध्यात्मिक गुरू ने असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को पत्र लिख कर सरकार के राहत एवं बचाव कार्यों की सराहना की और प्रभावित लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की। आर्सेनल फुटबॉल क्लब ने भी कहा है कि संकट के इस दौर में वह असम के लोगों के साथ है। क्लब ने असम के लोगों से हिम्मत से काम लेने की अपील की है।

मौसम विभाग ने 18 से 20 जुलाई के दौरान देश के उत्तर पश्चिमी हिस्से में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना जतायी है। इसके अलावा पूर्वोत्तर एवं पूर्वी भारत में 18 से 21 जुलाई के बीच तेज बारिश होने की संभावना है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे असम में बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आएं। उन्होंने ट्वीट किया, ‘पूरा देश असम के साथ है। असम के लोग अपने साहसी स्वभाव से इस मुसीबत का डटकर सामना कर रहे हैं और इस आपदा से उबर जाएंगे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील है कि हर संभव मदद का हाथ बढ़ाएं।’

गौरतलब है कि असम के लोग बाढ़ और कोरोना की दोहरी मार झेल रहे हैं। असम में शनिवार को पिछले 24 घंटें में कोरोना संक्रमण के 892 नए मामले दर्ज किए गए हैं। जबकि तीन लोगों की मौत हो गई है।

आपको बता दें कि असम में बाढ़ एक वार्षिक घटना जैसी हो गई है। राज्य में वर्ष 1988, 1998 और 2004 में आई बाढ़ को अभी तक की सबसे भयावह आपदा माना जाता था; लेकिन इस वर्ष आई बाढ़ अधिक विनाशक प्रतीत हो रही है।

आपको यह भी बता दें कि असम की भू-आकृति इसको अधिक बाढ़ प्रवण बनाती है। असम घाटी एक यू आकर की घाटी है जिसकी औसतन चौड़ाई 80 से 90 किमी. है, वही इस घाटी के बीच से प्रवाहित होने वाली नदियों की चौड़ाई 8 से 10 किमी. है। तिब्बत, भूटान, अरुणाचल और सिक्किम आदि क्षेत्रों से भूमि ढलान असम की ओर है, इसलिये इन सभी क्षेत्रों से पानी की निकासी का मार्ग केवल असम की ओर होता है, जो असम में आने वाली बाढ़ का एक बड़ा कारण है।

असम राज्य की सबसे बड़ी नदी ब्रह्मपुत्र है, जिसका अपवाह क्षेत्र चीन, भारत, बांग्लादेश और भूटान में लगभग 580,000 वर्ग किमी. का है। असम विश्व की शीर्ष पाँच अवसाद प्रवाहित करने वाली नदियों में से एक है। इन अवसादों के जमाव से पानी के प्रवाह में रूकावट आती है। इसके अलावा नदियों का प्रवाह भूकंप प्रभावित क्षेत्रों से होने के कारण नदियों के मार्ग में परिवर्तन हो जाता है। साथ ही नदियों का स्वरूप भी प्रभावित होता है।

लेकिन दिक्कत यह है कि इन सारी जानकारियों के बावजूद बाढ़ रोकने की नीति बनाना सरकार की प्राथमिकता में नहीं है। इतने सालों से यह बातें सरकार के सामने हैं लेकिन सरकार अब तक नीति बना पाने में असफल रही है। अगर हम सिर्फ सरकार की बात करें तो वह ऐसे कई कदम उठा सकती है जिससे इस विभीषिका को घटाया जा सकता हैं।

जैसेकि बाढ़ की विभीषिका को रोकने वाली जल संरक्षण, प्रबंधन जैसी परियोजनाओं में निवेश को बढ़ाया जाना चाहिये। साथ ही भौगोलिक स्थलाकृतियों को ध्यान में रखते हुए बांधों का निर्माण किया जाना चाहिये।

साथ ही सरकार और संबंधित एजेंसियों को तटबंध बनाने की मौजूदा नीति की समीक्षा करने की ज़रूरत है। इस प्रकार की योजनाओं में स्थानीय लोगों को भी भागीदार बनाया जाना चाहिये।

ऐसे में असम की बाढ़ एक दीर्घकालिक और बहुत ही जटिल समस्या रही है। इस संबंध में सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास पर्याप्त साबित नहीं हो पा रहे है। इसलिये विशेष रूप से असम में आने वाली बाढ़ के कारणों की समीक्षा कराई जानी चाहिये। साथ ही बाढ़ के लिये नई योजनाओं में लोगों की सहभागिता, पर्याप्त वित्तीयन और तकनीकों के कुशल प्रयोग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिये।

हालांकि ऐसा नहीं किया गया है। आपको यह भी बता दें कि स्वतंत्रता के बाद असम में बाढ़ की समस्या के समाधान के लिये अस्थायी बांध बनाए गए, जिनकी कमज़ोर संरचना के कारण स्थिति और अधिक दयनीय हो गई। ये एक दीर्घकालिक समस्या है। और सरकारें लगातार इसको नजरंदाज कर रही हैं। साथ ही मेनस्ट्रीम मीडिया में पूर्वोत्तर भारत की घटनाओं का जिक्र नहीं किया जा रहा है। ऐसें में पूर्वोत्तर की जनता बेहाल है और बाकी देश का उन समस्याओं पर ध्यान नहीं हैं। 

Assam
Assam Flood
Sarbananda Sonowal
NDRF
Narendra modi
Central Government

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • स्टालिन और मोदी
    नीलाम्बरन ए
    मोदी-स्टालिन मुलाकात: संघवाद और राज्य की स्वायत्तता अब अहम मसले हो सकते हैं  
    17 Jun 2021
    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन 13 जून को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिख कर उनसे हाइड्रोकॉर्बन एक्सप्लोरेशन के लिए मांगी गई निविदाओं को राज्य के कानून का ‘उल्लंघन’ बताते हुए उसको…
  • दिल्ली: अदालत ने बिना राशन कार्ड वाले लाभार्थियों की सीमा को चुनौती देने वाली अर्ज़ी पर दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: अदालत ने बिना राशन कार्ड वाले लाभार्थियों की सीमा को चुनौती देने वाली अर्ज़ी पर दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया
    17 Jun 2021
    “27 मई के संबंधित दिशानिर्देश में इस योजना के तहत लाभार्थियों की 20 लाख की मनमानी सीमा तय कर दी गयी है। बीस लाख की इस सीमा का कोई तर्कसंगत आधार नहीं जान पड़ता है। इस योजना के तहत जिन लोगों को लाभों…
  • किसान आंदोलन: ट्रेड यूनियनों ने किया 26 जून के ‘कृषि बचाओ-लोकतंत्र बचाओ’ आह्वान का समर्थन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    किसान आंदोलन: ट्रेड यूनियनों ने किया 26 जून के ‘कृषि बचाओ-लोकतंत्र बचाओ’ आह्वान का समर्थन
    17 Jun 2021
    केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच निरंतर सक्रिय रूप से एसकेएम की तीन कृषि कानूनों और बिजली विधेयक को निरस्त करने तथा एमएसपी को कानूनी गारंटी देने की मांगों का समर्थन करता रहा है। एकजुटता और…
  • हरियाणा में आशा कार्यकर्ताओं ने निगरानी रखे जाने के डर से सरकार के ट्रैकिंग ऐप को नकारा
    सागरिका किस्सू
    हरियाणा में आशा कार्यकर्ताओं ने निगरानी रखे जाने के डर से सरकार के ट्रैकिंग ऐप को नकारा
    17 Jun 2021
    हाल के दिनों में आशा कार्यकर्ताओं को अपने दैनिक लक्ष्यों को अपडेट करने के लिए एमडीएम 360 शील्ड नामक एप्लीकेशन को डाउनलोड करने के लिए कहा गया था। यह एप्लीकेशन संबंधित अधिकारियों को कार्यकर्ताओं की…
  • RBI
    भाषा
    कोविड महामारी की दूसरी लहर में लोगों का बैंक जमा घटा, हाथ में रखी नकदी भी कम हुई: आरबीआई लेख
    17 Jun 2021
    लेख में कहा गया है कि बैंक कर्ज की तुलना में बैंक जमा में गिरावट की दर भी अधिक रही है। यह बताता है कि इस बार बैंकों में जमा की जाने वाली घरेलू बचत घटी है। यह पहली लहर के दौरान देखी गई बचत में वृद्धि…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License