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भारत
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क्या आपको ये मालूम है कि बाढ़ और कोरोना से असम बेहाल है?
असम में बाढ़ संबंधी घटनाओं में शुक्रवार तक कम से कम 75 लोगों की मौत हो गयी है, जबकि 36 लाख लोग प्रभावित हैं। वहीं, शनिवार को पिछले 24 घंटें में कोरोना संक्रमण के 892 नए मामले दर्ज किए गए हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Jul 2020
Assam
साभार : ट्विटर

असम में बाढ़ संबंधी घटनाओं में शुक्रवार को पांच और लोगों की मौत हो गयी जबकि पूरे प्रदेश में लाखों लोग इससे प्रभावित हुए हैं। हालांकि, मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि देश के उत्तरी और उत्तरपूर्वी हिस्सों में मानसून की सक्रियता बढ़ेगी जो समस्या को और "बढ़ा" सकती है।

मौसम विभाग ने बताया कि अनुकूल मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण शनिवार और रविवार से देश के उत्तरी और उत्तरपूर्वी भागों में बारिश की स्थिति एवं इसकी तीव्रता में वृद्धि होने की संभावना है। विभाग ने बयान जारी कर बताया, 'यह बाढ़ की मौजूदा स्थिति को और बढ़ा सकता है और पूर्वोत्तर राज्यों, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम में भूस्खलन भी हो सकता है। एक आधिकारिक बुलेटिन में कहा गया है कि असम में बाढ़ के कारण पांच और लोगों की मौत हो गयी जबकि पूरे प्रदेश के 28 जिलों में 36 लाख लोग प्रभावित हुये हैं।

असम प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने बुलेटिन में कहा है कि असम के धुबरी, दरांग, बोंगईगांव, गोलपाड़ा एवं कामरूप जिलों में एक एक व्यक्ति की मौत हुयी है। इसमें कहा गया है कि बृहस्पतिवार को प्रदेश के 33 जिलों में से 27 जिलों के 39.8 लाख लोग इस जल प्रलय  के कारण प्रभावित हुये थे।

बुलेटिन में कहा गया है कि इस साल प्रदेश में बाढ़ एवं भूस्ख्लन से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ कर 102 हो गयी है। प्रदेश में बाढ़ संबंधी घटनाओं में 75 लोगों की मौत हो गयी थी जबकि भूस्खलन में 26 लोगों की मौत हो चुकी है।

पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्र सरकार से प्रदेश में बाढ़ की स्थिति पर तुरंत ध्यान देने एवं प्रदेश को अधिक से अधिक सहायता देने की अपील की है। असम के कुछ हिस्सों में बाढ़ के कारण लोगों की मौत एवं संपत्ति के नुकसान पर दलाई लामा ने भी दुख जताया है।

बौद्धों के आध्यात्मिक गुरू ने असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को पत्र लिख कर सरकार के राहत एवं बचाव कार्यों की सराहना की और प्रभावित लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की। आर्सेनल फुटबॉल क्लब ने भी कहा है कि संकट के इस दौर में वह असम के लोगों के साथ है। क्लब ने असम के लोगों से हिम्मत से काम लेने की अपील की है।

मौसम विभाग ने 18 से 20 जुलाई के दौरान देश के उत्तर पश्चिमी हिस्से में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना जतायी है। इसके अलावा पूर्वोत्तर एवं पूर्वी भारत में 18 से 21 जुलाई के बीच तेज बारिश होने की संभावना है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे असम में बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आएं। उन्होंने ट्वीट किया, ‘पूरा देश असम के साथ है। असम के लोग अपने साहसी स्वभाव से इस मुसीबत का डटकर सामना कर रहे हैं और इस आपदा से उबर जाएंगे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील है कि हर संभव मदद का हाथ बढ़ाएं।’

गौरतलब है कि असम के लोग बाढ़ और कोरोना की दोहरी मार झेल रहे हैं। असम में शनिवार को पिछले 24 घंटें में कोरोना संक्रमण के 892 नए मामले दर्ज किए गए हैं। जबकि तीन लोगों की मौत हो गई है।

आपको बता दें कि असम में बाढ़ एक वार्षिक घटना जैसी हो गई है। राज्य में वर्ष 1988, 1998 और 2004 में आई बाढ़ को अभी तक की सबसे भयावह आपदा माना जाता था; लेकिन इस वर्ष आई बाढ़ अधिक विनाशक प्रतीत हो रही है।

आपको यह भी बता दें कि असम की भू-आकृति इसको अधिक बाढ़ प्रवण बनाती है। असम घाटी एक यू आकर की घाटी है जिसकी औसतन चौड़ाई 80 से 90 किमी. है, वही इस घाटी के बीच से प्रवाहित होने वाली नदियों की चौड़ाई 8 से 10 किमी. है। तिब्बत, भूटान, अरुणाचल और सिक्किम आदि क्षेत्रों से भूमि ढलान असम की ओर है, इसलिये इन सभी क्षेत्रों से पानी की निकासी का मार्ग केवल असम की ओर होता है, जो असम में आने वाली बाढ़ का एक बड़ा कारण है।

असम राज्य की सबसे बड़ी नदी ब्रह्मपुत्र है, जिसका अपवाह क्षेत्र चीन, भारत, बांग्लादेश और भूटान में लगभग 580,000 वर्ग किमी. का है। असम विश्व की शीर्ष पाँच अवसाद प्रवाहित करने वाली नदियों में से एक है। इन अवसादों के जमाव से पानी के प्रवाह में रूकावट आती है। इसके अलावा नदियों का प्रवाह भूकंप प्रभावित क्षेत्रों से होने के कारण नदियों के मार्ग में परिवर्तन हो जाता है। साथ ही नदियों का स्वरूप भी प्रभावित होता है।

लेकिन दिक्कत यह है कि इन सारी जानकारियों के बावजूद बाढ़ रोकने की नीति बनाना सरकार की प्राथमिकता में नहीं है। इतने सालों से यह बातें सरकार के सामने हैं लेकिन सरकार अब तक नीति बना पाने में असफल रही है। अगर हम सिर्फ सरकार की बात करें तो वह ऐसे कई कदम उठा सकती है जिससे इस विभीषिका को घटाया जा सकता हैं।

जैसेकि बाढ़ की विभीषिका को रोकने वाली जल संरक्षण, प्रबंधन जैसी परियोजनाओं में निवेश को बढ़ाया जाना चाहिये। साथ ही भौगोलिक स्थलाकृतियों को ध्यान में रखते हुए बांधों का निर्माण किया जाना चाहिये।

साथ ही सरकार और संबंधित एजेंसियों को तटबंध बनाने की मौजूदा नीति की समीक्षा करने की ज़रूरत है। इस प्रकार की योजनाओं में स्थानीय लोगों को भी भागीदार बनाया जाना चाहिये।

ऐसे में असम की बाढ़ एक दीर्घकालिक और बहुत ही जटिल समस्या रही है। इस संबंध में सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास पर्याप्त साबित नहीं हो पा रहे है। इसलिये विशेष रूप से असम में आने वाली बाढ़ के कारणों की समीक्षा कराई जानी चाहिये। साथ ही बाढ़ के लिये नई योजनाओं में लोगों की सहभागिता, पर्याप्त वित्तीयन और तकनीकों के कुशल प्रयोग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिये।

हालांकि ऐसा नहीं किया गया है। आपको यह भी बता दें कि स्वतंत्रता के बाद असम में बाढ़ की समस्या के समाधान के लिये अस्थायी बांध बनाए गए, जिनकी कमज़ोर संरचना के कारण स्थिति और अधिक दयनीय हो गई। ये एक दीर्घकालिक समस्या है। और सरकारें लगातार इसको नजरंदाज कर रही हैं। साथ ही मेनस्ट्रीम मीडिया में पूर्वोत्तर भारत की घटनाओं का जिक्र नहीं किया जा रहा है। ऐसें में पूर्वोत्तर की जनता बेहाल है और बाकी देश का उन समस्याओं पर ध्यान नहीं हैं। 

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Assam Flood
Sarbananda Sonowal
NDRF
Narendra modi
Central Government

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