NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
मज़दूरों पर दोहरी मार: “मालिक कह रहा है यहां से जाओ, लेकिन मैं कहां जाऊं?”
फैक्ट्री मालिकों को भी डर है की ये मज़दूर यहाँ रहे तो इनका खर्च भी उन्हें ही उठाना पड़ेगा। इसके साथ ही पुलिसिया कार्रवाई का भी डर है। इन्ही कारणों से मालिक मज़दूरों को भगाना चाहता है।
मुकुंद झा
27 Mar 2020
मज़दूरों पर दोहरी मार
Image courtesy: India Speaks Daily

दिल्ली के मादीपुर के जूता चप्पल फैक्ट्री में कई मज़दूर फंसे हैं। इन फैक्ट्रियों में काम करने वाले ठेका मज़दूर बिलाल अहमद समेत करीब उनके लगभग दस साथी यहां हैं। उन्होंने बताया, "वो लोग जिस फैक्ट्री में हैं, वहां का मालिक उनसे जाने के लिए कह रहा है, जबकि बाहर पूरी तरह लॉकडाउन है। ऐसे में हम कहाँ जाए?"

यह सब बताते हुए बिलाल की आवाज में अजीब सी घबराहट थी। ये सभी मज़दूर जूता फैक्ट्री में ही काम करते थे और उसी फैक्ट्री में रात को सो भी जाया करते थे। इनका न दिल्ली में कोई घर है न कोई जानकर, ऐसे में अब इन लोगों के लिए संकट है कि जाएं तो जाएं कहाँ। ये मज़दूर अपने घर जाना चाहते हैं लेकिन इनके पास कोई साधन नहीं हैं। इसके लिए इन्होंने पुलिस से भी मदद मांगी लेकिन वहां से भी निराशा मिली।

दिल्ली की तमाम छोटी बड़ी फैक्ट्रियों में इसी तरह के मज़दूर रहते हैं, जो किसी अन्य राज्य से पलायन करके आते  है, रूम का किराया बचाने के लिए वो लोग इस तरह की फैक्ट्रियो में रहते हैं। मज़दूरों ने बताया कि मादीपुर में ही करीब सौ से अधिक मज़दूर इस तरह की फैक्ट्रियों में फंसे हुए हैं। इनमे अधिकतर बिहार ,बंगाल और उत्तर प्रदेश से आये मज़दूर हैं।

IMG-20200327-WA0034.jpg
ये मज़दूर ठेके पे काम करते थे, इनकी औसतन कमाई 200 से लेकर 600 रुपये प्रतिदिन है। लेकिन इस कोरोना वायरस के चलते पिछले कई महीनो से काम भी बहुत मंदा था, क्योंकि इनका कच्चा माला चीन से ही आता था। जिस कारण इन मज़दूरों की हालत पहले से ही काफी बुरी थी। ऐसे में अचानक इस तरह का फैसला इन लोगों के लिए दोहरी मार लेकर आया है, एक तरफ इनके पास खाने के लिए पैसा नहीं है, न रहने को छत तो दूसरी तरफ इस माहमारी का डर।

 ये लोग जिस तरह की स्थिति में रहते इसमें सबसे अधिक संभवना है की ये किसी भी संक्रमण की चपेट में आ जाएं। इसके साथ मज़दूरों को अपने घर की भी चिंता सता रही है।  

फैक्ट्री मालिकों को भी डर है की ये मज़दूर यहाँ रहे तो इनका खर्च भी उन्हें ही उठाना पड़ेगा। इसके साथ ही पुलिसिया कार्रवाई का भी डर है। इन्ही कारणों से मालिक मज़दूरों को भगाना चाहता है।

इस महामारी से पहले भी इन मज़दूरों की स्थति बहुत अच्छी नहीं थी। मज़दूरों ने हमें दिखाया था कि कैसे वो आमनवीय स्थिति में रहते हैं और काम भी करते हैं।

वहां सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं थे अगर रात को कहीं कोई घटना घट जाए तो शायद ही कोई मज़दूर जिंदा बचे। हमने यह पहले भी देखा कि चाहे वो बवाना अग्निकांड हो या फिर अनाज मंडी अग्निकांड जहाँ कई मज़दूरों की जान चली गई थी। क्योंकि वहां भी किसी तरह कि कोई सुरक्षा नहीं थी। दिल्ली में ऐसी अवैध सैकड़ो फैक्ट्रियां है जहाँ इस तरह हज़ारों मज़दूर काम कर रह थे। पिछले दो साल में ही सैकड़ों मज़दूरों की मौत हो चुकी है।

इस महामारी के बाद हुए लॉक डाउन के बाद तो उनका जीवन और भी बदतर हो गया है। ऐसे ही एक मज़दूर सुमित कहते है कि "पहले किसी तरह से काम करके ज़िन्दा तो थे लेकिन अब लग रहा शायद वो भी मुश्किल हो गया हैं, मेरे पास मात्र 150 रुपये हैं, मालिक कह रहा है यहां से जाओ लेकिन मै कहाँ जाऊं? हमारे पास खाने को भी कुछ नहीं हैं। क्योंकि हम लोगों के पास सामान रखने की न तो जगह होती और न ही पैसे, इसलिए हम रोज लाते हैं और रोज खाते हैं।

मज़दूरों ने यह भी बताया कि अभी तक इन लोगों के पास किसी तरह की कोई सरकारी मदद नहीं पहुंची है। जबकि सरकार लगातार दावे कर रही है कि वो किसी भी मज़दूर को भूखा नहीं सोने देगी। सरकार ने इन लोगों के लिए शेल्टर होम में खाने की व्यवस्था की है लेकिन एक तो इन लोगों को इस बात की जानकारी नहीं हैं, दूसरा इनमें से कई मज़दूरों ने वहां जाने से मना किया और कहा बस सरकार हमें हमारे घर भिजवा दे।  

भारत की कुल आबादी का अधिकांश हिस्सा असंगठित क्षेत्र के दिहाड़ी मजदूरों, संगठित क्षेत्र के ठेका, कैजुअल, ट्रेनी एवं फिक्स्ड टर्म के मजदूरों एवं गरीब तबके के लोगों रिक्शा-तांगे, रेहडी वाले, टुकटुक-टैम्पो, चलकर अपना जीवनयापन करते हैं।  इनमें से अधिकांश लोग एवं उनके बच्चे सरकारों की गलत नीतियों के कारण पहले से ही कुपोषित हैं। इनमें से असंख्य लोग स्लम बस्तियों में एवं फुटपाथों, रेलवे स्टेशनों आदि में खुले आसमान के नीचे जीवन-बसर करने को मज़बूर हैं।

इनमें अधिकांश मजदूर ऐसे हैं जिन्हें हाथों हाथ दिहाड़ी दी जाती है। इनमें से गरीब तबके के अधिकांश लोग ऐसे हैं कि वो रोज कुआं खोदते हैं और पानी पीते हैं। 23 मार्च ‘लॉक डाउन’ करने का इनपर प्रतिकूल असर पड़ा है। इसी कारण यह मज़दूर किसी तरह से भागकर अपने घर पहुंचना चाहते हैं। क्योंकि उन्हें भरोसा है वहां कम से कम खाना और छत तो मिल ही जाएगा।

इसे भी पढ़ें : कोरोना वायरस: दिहाड़ी मजदूरों के सामने संकट कितना बड़ा है?

मज़दूर संगठन एक्टू के दिल्ली राज्य सचिव अभिषेक ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि "सरकार को चहिए की इन मज़दूरों के लिए खाने, रहने की और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी ले। एक आदेश पारित करे जिसमे साफ साफ लिखा हो कोई भी मालिक फैक्ट्रियों में रहने वाले मज़दूरों को बाहर नहीं निकाल सकता है या फिर उनके लिए सुरक्षित घर पहुंचने की व्यवस्था करे।"

Coronavirus
COVID-19
Corona Crisis
Labour
Daily Wage Workers
India Lockdown
poverty
Hunger Crisis
modi sarkar
Narendra modi

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • govt employee
    अनिल जैन
    निजीकरण की आंच में झुलस रहे सरकारी कर्मचारियों के लिए भी सबक़ है यह किसान आंदोलन
    28 Nov 2021
    किसानों की यह जीत रेलवे, दूरसंचार, बैंक, बीमा आदि तमाम सार्वजनिक और संगठित क्षेत्र के उन कामगार संगठनों के लिए एक शानदार नज़ीर और सबक़ है, जो प्रतिरोध की भाषा तो खूब बोलते हैं लेकिन कॉरपोरेट से लड़ने…
  • poverty
    अजय कुमार
    ग़रीबी के आंकड़ों में उत्तर भारतीय राज्यों का हाल बेहाल, केरल बना मॉडल प्रदेश
    28 Nov 2021
    मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स के मुताबिक केरल के अलावा भारत का और कोई दूसरा राज्य नहीं है, जहां की बहुआयामी गरीबी 1% से कम हो। 
  • kisan andolan
    शंभूनाथ शुक्ल
    हड़ताल-आंदोलन की धार कुंद नहीं पड़ी
    28 Nov 2021
    एक ज़माने में मज़दूर-किसान यदि धरने पर बैठ जाते थे तो सत्ता झुकती थी। पर पिछले चार दशकों से लोग यह सब भूल चुके थे।
  • Hafte Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    संवैधानिक मानववाद या कारपोरेट-हिन्दुत्ववाद और यूपी में 'अपराध-राज'!
    27 Nov 2021
    संविधान दिवस के मौके पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोपों-प्रत्यारोपो की खूब बौछार हुई. क्या सच है-संविधानवाद और परिवारवाद का? क्या भारत की सरकारें सचमुच संविधान के विचार और संदेश के हिसाब से…
  • crypto
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या Crypto पर अंकुश ज़रूरी है?
    27 Nov 2021
    मोदी सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर अंकुश लगा रही हैI लेकिन आखिर यह क्रिप्टोकरेंसी है क्या? क्या यह देश में मुद्रा की जगह ले सकती है?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License