NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
द्रौपदी : अग्निकुंड से हिमशिखर तक की अर्थहीन यात्रा…
वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप कुमार के कविता संग्रह 'बिन जिया जीवन ' के 'महाभारत व्यथा' अध्याय की पांचवी और अंतिम कविता 'द्रौपदी'।
न्यूज़क्लिक डेस्क
13 Oct 2019
Maharbharat
प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार : open the magazine

द्रौपदी

 

 

अंतिम यात्रा है

हिमालय की पीठ पर चलते-चलते
न जाने कितनी चोटियाँ नीचे रह गयीं
चलना दुश्वार हो गया है
घिसटने के अलावा कोई
चारा भी तो नहीं
यूँ भी जीवन भर
घिसटती ही तो रही हूँ
यदि कभी चली भी हूँ तो
दूसरों ही के पैरों पर  
सबसे आगे मेरा ज्येष्ठ पति
सारी विपत्तियों की जड़
निर्लज्ज युधिष्ठर
चला जा रहा है
अपने कुत्ते को साथ लिए
बिना किसी की ओर देखे
पहले ही कब इसने किसी और की चिंता की
जो अब करेगा?
 
कभी समझ नहीं पायी
ऐसे आत्मकेंद्रित, निकम्मे और ढुलमुल स्वभाव के आदमी को
लोग धर्मराज क्यों कहते हैं
मैंने तो इसे कभी कोई धर्म का काम करते नहीं देखा
हाँ, धर्म की जुमलेबाज़ी
इससे चाहे जितनी करवा लो

अगर जुआ खेलना
और अपनी सारी संपत्ति, भाइयों और पत्नी को
दाँव पर लगाकर हार जाना  
धर्म का काम है
तब यह ज़रूर
धर्मराज कहलाने का अधिकारी है

एक यही काम तो इसने अपने बलबूते पर किया
वरना सारे काम भीम और अर्जुन के ही हिस्से में आते थे
और यह बड़े भाई के अधिकार से
उनका फल भोगता था

मुझे भी तो सबसे पहले इसी ने भोगा
मुझे स्वयंवर में जीतने वाले अर्जुन की बारी
तो भीम के भी बाद आयी

यह जीवन भर धर्म की व्याख्या करता रहा
उस पर चला एक भी दिन नहीं

और मैं?

पूरा जीवन मेरा
अंगारों पर ही गुज़रा

गुज़रता भी क्यों नहीं
मेरा तो जन्म ही
यज्ञकुंड की अग्नि के गर्भ से हुआ था
और तभी से मेरी अग्नि परीक्षा शुरू हो गयी थी


हर क्षण यही सोचती रही हूँ
मैं पैदा ही क्यों हुई?
क्या सार रहा मेरे इस जीवन का
क्या मिला मुझे?

पाँच-पाँच पुरुषों की कामाग्नि का संताप, दुस्सह अपमान
अर्जुन जैसे प्रेमी-पति की उपेक्षा

स्वयंवर में विजयी होने के बाद
कैसी प्रेमसिक्त दृष्टि से देखा था
अर्जुन ने मुझे
वह सुदर्शन चेहरा मुझसे मिलने की आस में
कैसा दिपदिपा रहा था
उसकी आँखों में
प्यार का महासागर था

और मेरी सास कुंती ने
कितनी चालाक निष्ठुरता के साथ
मुझे पाँचों भाइयों की सामूहिक पत्नी बना डाला
कुलवधु की ऐसी परिभाषा
न देखी गयी, न सुनी गयी
उस क्षण से अर्जुन के चेहरे की कांति जो लुप्त हुयी
तो फिर कभी नहीं लौटी
उसकी आँखें हमेशा शून्य में किसी को  
ढूँढती रहती थीं
शायद घूमती हुई मछली की आँख को
जिसके भेदन के बाद उसने
मुझे
प्राप्त किया था

बस वही तो एक क्षण था
जब मैं
उसकी थी-
केवल उसकी

टूटे हुए हृदय के साथ
उसने सुभद्रा और उलूपी के साथ विवाह किया  
जो प्रेम उसे मुझसे नहीं मिला
शायद उसकी तलाश में
लेकिन यहाँ भी वह निराश ही हुआ
उसके मुख पर कभी वह उल्लास और आनंद दिखा ही नहीं
जो स्वयंवर के समय दिखा था

महाभारत के युद्ध का
सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर प्रेम में
निराश
विफल
विकल
जिसके हृदय में इतने बाण धँसे  
कि वह उसका तूणीर ही बन गया था

अंतिम समय में
लग रहा है
जीवन कभी शुरू ही नहीं हुआ
कभी साँस ली ही नहीं,
सूर्योदय और सूर्यास्त का अनुभव ही नहीं किया
चाँदनी की रहस्यमय शीतल हथेली ने  
मुझे स्पर्श ही नहीं किया
मुझे आज तक समझ में नहीं आया
कि स्थिर स्वभाव वाली गरिमामयी कुंती ने
मेरे साथ ऐसा हृदयहीन व्यवहार क्यों किया
क्या वही मेरे जीवन के नरक से भी बदतर बनने की
एकमात्र ज़िम्मेदार नहीं है?
न उसने मुझे पाँचों भाइयों के साथ बांधा होता
और न यह क्लीव युधिष्ठर मेरा सर्वसत्तावान
पति बनकर मुझे जुए में दाँव पर लगा पाता
और न कर्ण, दुर्योधन और दु:शासन की हिम्मत होती
कि मुझे भरी राजसभा में निर्वसन करने की कोशिश कर सकें
जहां भीष्म और विदुर जैसे ढोंगी नीतिज्ञ बैठे थे

केवल एक वकर्ण था
जिसने मेरे पक्ष की बात की थी
दुर्योधन का भाई, गांधारी का पुत्र
विकर्ण
उसने मनुष्यता में मेरे विश्वास को
नष्ट होने से बचाया था

कुंती कभी अच्छी सास तो बन ही नहीं सकी
क्या वह अच्छी माँ बन पायी?
नहीं

कर्ण के साथ उसने हमेशा अन्याय किया
वरना ऐसा उदार, ऐसा दानी, ऐसा वीर
क्या कभी ऐसा दुष्टता का बर्ताव कर सकता था
जैसा उसने मेरे साथ किया
कुरुओं की राजसभा में

कुंती ने उसे स्वीकार किया
केवल अपने स्वार्थ के लिए
ममता के कारण नहीं
फिर भी उसने उस निष्ठुर माँ को
पूरी तरह निराश नहीं किया
और कहा कि वह केवल अर्जुन के साथ ही युद्ध करेगा

उसने तो अर्जुन के साथ भी ऐसा अन्याय किया
कि संभवत: कभी किसी माँ ने नहीें किया होगा
स्वयंवर में मुझे प्राप्त किया अर्जुन ने
और पाँचों भाइयों से बाँध दिया मुझे कुंती ने
क्या उसे अर्जुन के मुख पर छाई वेदना नज़र नहीं आयी?

स्वयंवर में अर्जुन की जीत के बाद
मुझे कभी उस पर प्यार नहीं आया
हमेशा मन में तिक्तता
ही बनी रही
 
क्या वह कुंती से नहीं कह सकता था
कि वह मुझे भिक्षा में नहीं
स्वयंवर में जीत कर लाया है
और मुझ पर केवल उसी का अधिकार है
क्या वह मुझे इस भीषण अपमान और जीवन भर के दुःख से
नहीं बचा सकता था?
क्या माँ की मतिहीन आज्ञा का पालन करना
मेरे पूरे जीवन से अधिक महत्वपूर्ण था?

किससे था मुझे सच्चा प्रेम?
और किसे था, मुझसे सच्चा प्रेम?

शायद कृष्ण से
शायद कृष्ण को
सखा-सखी का
शुद्ध वासनारहित प्रेम

अधिकांश मनुष्य ऐसे प्रेम को असंभव समझते हैं
मानते हैं कि स्त्री-पुरुष के बीच काम रहित प्रेम
हो ही नहीं सकता
लेकिन इससे बड़ा झूठ कोई नहीं है

मेरा सखा कृष्ण
जाने कैसे मेरी बात
बिना कहे ही समझ जाता था
घंटों-घंटों मुझसे बातें करता था
दुनिया-जहान की बातें
अपनी और राधा की बातें
ब्रज की बातें
रुक्मिनी और सत्यभामा के झगड़े
सब मुझे ही तो बताकर जाता था

कृष्णा का कृष्ण
जिसने मेरी लज्जा को
अपनी लज्जा समझा

दुर्योधन को मैंने
केवल उसी के तेज के सामने सहमते देखा
कितनी कोशिश की उसे बंदी बनाने की
लेकिन वह तो  
कारागृह में जन्मा था
उसे कौन बंदी बना सकता था?

आगे अब कोई राह नहीं है
कभी थी भी नहीं?
जिसने चाहा उसी ने किसी भी राह पर धकेल दिया

अब हिमालय मुझे अपनी गोद में ले ले
तो मेरी यात्रा पूरी हो
अग्निकुंड से
हिमशिखर तक की
अर्थहीन यात्रा… 


...

इस सिलसिले की पहली चारों कविताएं नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ें :

'बिन जिया जीवन' की महाभारत व्यथा...

...जहाँ ज़बरदस्ती की जाएगी, जहाँ बलात्कार होगा, उस राज्य का नाश अवश्यंभावी है

महाभारत का युद्ध, बलात्कार का ही परिणाम है

माद्री… जलती ही तो रही हूँ अब तक

hindi poetry
hindi poet
Hindi fiction writer
mahabharat
हिंदी काव्य
हिंदी साहित्य
Gender Equality
gender justice
Women Rights
gender violence
Kuldeep kumar

Related Stories

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

देवी शंकर अवस्थी सम्मान समारोह: ‘लेखक, पाठक और प्रकाशक आज तीनों उपभोक्ता हो गए हैं’

गणेश शंकर विद्यार्थी : वह क़लम अब खो गया है… छिन गया, गिरवी पड़ा है

अदम गोंडवी : “धरती की सतह पर” खड़े होकर “समय से मुठभेड़” करने वाला शायर

हमें यह शौक़ है देखें सितम की इंतिहा क्या है : भगत सिंह की पसंदीदा शायरी

इतवार की कविता: अपने जगे एहसास को पत्थर नहीं बना सकतीं अफ़ग़ान औरतें

विशेष: ...मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए

इतवार की कविता : तुम्हारी जाति क्या है कुमार अंबुज?

राही मासूम रज़ा : साझा भारतीय संस्कृति के भाष्यकार

एक दिन सुन लीजिए जो कुछ हमारे दिल में है...


बाकी खबरें

  • Ukraine Russia
    पार्थ एस घोष
    यूक्रेन युद्ध: क्या हमारी सामूहिक चेतना लकवाग्रस्त हो चुकी है?
    14 Mar 2022
    राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न उस पवित्र गाय के समान हो गया है जिसमें हर सही-गलत को जायज ठहरा दिया जाता है। बड़ी शक्तियों के पास के छोटे राष्ट्रों को अवश्य ही इस बात को ध्यान में रखना होगा, क्योंकि बड़े…
  • Para Badminton International Competition
    भाषा
    मानसी और भगत चमके, भारत ने स्पेनिश पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 21 पदक जीते
    14 Mar 2022
    भारत ने हाल में स्पेनिश पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय (लेवल दो) प्रतियोगिता में 11 स्वर्ण, सात रजत और 16 कांस्य से कुल 34 पदक जीते थे।
  • भाषा
    बाफ्टा 2022: ‘द पावर ऑफ द डॉग’ बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म
    14 Mar 2022
    मंच पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार देने आए ‘द बैटमैन’ के अभिनेता एंडी सर्किस ने विजेता की घोषणा करने से पहले अफगानिस्तान और यूक्रेन के शरणार्थियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार के लिए सरकार पर निशाना…
  • उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: दक्षिण अमेरिका में वाम के भविष्य की दिशा भी तय करेंगे बोरिक
    14 Mar 2022
    बोरिक का सत्ता संभालना सितंबर 1973 की सैन्य बगावत के बाद से—यानी पिछले तकरीबन 48-49 सालों में—चिली की राजनीतिक धारा में आया सबसे बड़ा बदलाव है।
  • indian railway
    बी. सिवरामन
    भारतीय रेल के निजीकरण का तमाशा
    14 Mar 2022
    यह लेख रेलवे के निजीकरण की दिवालिया नीति और उनकी हठधर्मिता के बारे में है, हालांकि यह अपने पहले प्रयास में ही फ्लॉप-शो बन गया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License