NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
बिहार और यूपी पढ़ाई में फिसड्डी: ईएसी-पीएम
रिपोर्ट में बड़े राज्यों में 9 राज्यों को शामिल किया गया है जिसमें बिहार 36.81 अंकों के साथ नौवें तथा उत्तर प्रदेश 38.46 अंकों के साथ आठवें स्थान पर है। दोनों राज्य का स्थान राष्ट्रीय औसत 48.38 से काफी कम है। 
एम.ओबैद
19 Dec 2021
 Bihar and UP lagging behind in studies
'प्रतीकात्मक फ़ोटो' साभार: The Indian Express

शिक्षा को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बड़े-बड़े वादों के बावजूद शिक्षा के मानकों में बिहार और उत्तर प्रदेश फिसड्डी साबित हुआ है। ये दोनों राज्य बड़े देश के राज्यों की श्रेणी में सबसे निचले पायदान पर हैं। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद अर्थात ईएसी-पीएम ने इस पर रिपोर्ट जारी की है। इसके अध्यक्ष बिबेक देबरॉय हैं। 

बड़े राज्यों में 9 राज्यों को शामिल किया गया है जिसमें पश्चिम बंगाल 58.95 अंकों के साथ पहले स्थान पर है जबकि बिहार 36.81अंकों के साथ नौवें तथा उत्तर प्रदेश 38.46 अंकों के साथ आठवें स्थान पर है। दोनों राज्य का स्थान राष्ट्रीय औसत 48.38 से काफी कम है। केवल 17 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों ने आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता सूचकांक में राष्ट्रीय औसत 48.38 से ऊपर स्कोर किया है।

'भारत में मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता की स्थिति' नाम के शीर्षक से ये रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। ये रिपोर्ट बच्चों की मूलभूत शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालती है और आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता की स्थिति के सूचकांक पर भी प्रकाश डालती है। इस रिपोर्ट में छोटे राज्यों की श्रेणी में 11 राज्यों को शामिल किया गया है जिसमें केरल 67.95 अंकों के साथ सबसे ऊपर है। वहीं संघ शासित प्रदेशों की श्रेणी में 52.69 अंकों के साथ लक्ष्यद्वीप सबसे टॉप पर है जबकि नॉर्थ ईस्ट राज्यों की श्रेणी में 51.64 अंकों के साथ सबसे ऊपर है। 

भारत में मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता की स्थिति के इस फ्रेमवर्क में पांच स्तंभ शामिल हैं जिसमें 41 संकेतक हैं। इन पांच स्तंभों में शैक्षिक बुनियादी ढांचा, शिक्षा तक पहुंच, बुनियादी स्वास्थ्य, शिक्षा के परिणाम और शासन विधि शामिल हैं। 

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षा तक पहुंच की चुनौती एक ऐसा घटक है जिस पर राज्यों को तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। राजस्थान (25.67), गुजरात (22.28) और बिहार (18.23) जैसे बड़े राज्य इस मोर्चे पर खास तौर से पीछे हैं। ये रिपोर्ट बच्चे के समग्र विकास में आधारभूत शिक्षण के वर्षों के महत्व पर प्रकाश डालती है और आगे सुनियोजित प्रारंभिक हस्तक्षेप की भूमिका पर जोर देती है। 

आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता (एफएलएन) में बुनियादी पढ़ाई-लिखाई और गणना कौशल शामिल हैं जिसकी बच्चे को प्रारंभिक वर्षों में विकसित करने की आवश्यकता होती है। आधारभूत शिक्षा के वर्षों में पिछड़ना, जिसमें विद्यालय-पूर्व शिक्षा तथा प्रारंभिक शिक्षा शामिल है, बच्चों को अधिक कमजोर बनाता है क्योंकि यह उनके शिक्षण के परिणामों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दस वर्ष से कम आयु के बच्चों में मूलभूत शिक्षा की समग्र स्थिति की समझ स्थापित करना आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता सूचकांक इस दिशा में पहला कदम है।

बता दें कि कुछ ही दिन पहले बिहार के वैशाली जिले से एक मामला प्रकाश में आया था जहां 204 विद्यालयों के पास अपना भवन नहीं है और बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं।

जिन विद्यालयों के पास अपना भवन नहीं है उन्हें दूसरे स्कूल में टैग कर दिया गया है। कुछ विद्यालय रेंट और रेंट फ्री पर संचालित हो रहे हैं। ऐसे विद्यालय जहां एक भवन में दो विद्यालय चल रहे है वहां समस्याएं अधिक हैं और बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों की बात करें तो वहां की स्थिति और बदतर है और छात्र-छात्राओं को कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। जिन स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है वहां बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। 

ज्ञात हो कि हाल में प्रकाशित नीति आयोग की रिपोर्ट में स्कूलिंग के मामले में बिहार का सबसे बुरा प्रदर्शन रहा है। यहां 26.27% लोगों की स्कूली शिक्षा पूरी नहीं हुई। नीति आयोग की रिपोर्ट में सात सूचकांकों में बिहार को सबसे पिछड़ा दिखाया गया था। 

उत्तर प्रदेश की बात करें तो इस महीने के शुरू में कई रिपोर्ट आई जिसमें बताया गया प्राइमरी स्कूल के बच्चे इस कपकपाती ठंड में फर्श पर टाट पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थें। यूपी सरकार शिक्षा पर बड़ी राशि खर्च करने का दावा करती है लेकिन इन बच्चों के बैठने की स्थिति को देखकर पता चलता है कि सरकार द्वारा स्कूल के बुनियादी ढ़ांचे और शिक्षा के मद में कितनी राशि खर्च की जा रही है।

ये भी पढ़ें: सीबीएसई ने दसवीं के इंग्लिश पेपर में पूछे भद्दे, स्त्री विरोधी सवाल, विवाद के बाद मांगी माफ़ी

Bihar
Uttar pradesh
Bihar and UP lagging behind in studie
EAC-PM
EAC-PM report
Education crises

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

बिहार : सरकारी प्राइमरी स्कूलों के 1.10 करोड़ बच्चों के पास किताबें नहीं

बिहार : सातवें चरण की बहाली शुरू करने की मांग करते हुए अभ्यर्थियों ने सिर मुंडन करवाया

बिहार मिड-डे-मीलः सरकार का सुधार केवल काग़ज़ों पर, हक़ से महरूम ग़रीब बच्चे

बीपीएससी प्रश्न पत्र लीक कांड मामले में विपक्षी पार्टियों का हमला तेज़

कोरोना लॉकडाउन के दो वर्ष, बिहार के प्रवासी मज़दूरों के बच्चे और उम्मीदों के स्कूल

बिहारः प्राइवेट स्कूलों और प्राइवेट आईटीआई में शिक्षा महंगी, अभिभावकों को ख़र्च करने होंगे ज़्यादा पैसे

बिहार में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने की मांग में भाकपा-माले विधायकों का प्रदर्शन

बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन


बाकी खबरें

  • leather industry
    न्यूज़क्लिक टीम
    बंद होने की कगार पर खड़ा ताज नगरी का चमड़ा उद्योग
    10 Feb 2022
    आगरा का मशहूर चमड़ा उद्योग और उससे जुड़े कारीगर परेशान है। इनका कहना है कि सरकार इनकी तरफ ध्यान नही दे रही जिसकी वजह से पॉलिसी दर पॉलिसी इन्हें नुकसान पे नुक्सान हो रहा है।
  • Lakhimpur case
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर कांड: मुख्य आरोपी और केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को मिली ज़मानत
    10 Feb 2022
    केंद्रीय मंत्री के बेटे की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा था कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है कि उसने किसानों को कुचलने के लिए घटना में शामिल वाहन के चालक को उकसाया था।
  • uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : टिहरी बांध से प्रभावित गांव आज भी कर रहे हैं न्याय की प्रतीक्षा!
    10 Feb 2022
    उत्तराखंड के टिहरी ज़िले में बने टिहरी बांध के लिए ज़मीन देने वाले ग्रामीण आज भी बदले में ज़मीन मिलने की आस लगाए बैठे हैं लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
  •  Bangladesh
    पीपल्स डिस्पैच
    बांग्लादेश: सड़कों पर उतरे विश्वविद्यालयों के छात्र, पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ उपजा रोष
    10 Feb 2022
    बांग्लादेश में शाहजलाल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के बाद, देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्र एकजुटता की लहर दौड़ गई है। इन प्रदर्शनकारी छात्रों ने…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    वैश्विक निरक्षरता के स्थिर संकट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ
    10 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र ने नोट किया कि 'दुनिया भर में 150 करोड़ से अधिक छात्र और युवा कोविड-19 महामारी के कारण बंद स्कूल और विश्वविद्यालयों से प्रभावित हो रहे हैं या प्रभावित हुए हैं'; कम से कम 100 करोड़…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License