NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थशास्त्रियों-शिक्षाविदों की सरकार से NSSO रिपोर्ट जारी करने की मांग
200 से अधिक अर्थशास्त्रियों और शिक्षाविदों ने सरकार से उपभोक्ता व्यय सर्वे 2017-18 समेत NSSO के सभी आंकड़े और रिपोर्ट जारी करने की अपील की है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Nov 2019
NSSO
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार : Economic Times

अर्थशास्त्रियों और शिक्षाविदों ने विभिन्न आंकड़ों को लेकर एक बार फिर सरकार को घेरा है। दो सौ से अधिक अर्थशास्त्रियों और शिक्षाविदों ने सरकार से उपभोक्ता व्यय सर्वे 2017-18 समेत NSSO के सभी आंकड़े और रिपोर्ट जारी करने की अपील की है।

उपभोक्ता व्यय सर्वे  (Consumer Expenditure Survey) का काम राष्ट्रीय नमूना सर्वे कार्यालय (NSSO : National Sample Survey Office ) ने पूरा किया है।

मीडिया में लीक रिपोर्ट के अनुसार 2017-18 के उपभोक्ता व्यय सर्वे में औसत उपभोक्ता खपत में तीव्र गिरावट को दिखाया गया है। सर्वे के परिणाम को जारी नहीं किया जा रहा है क्योंकि वह अर्थव्यवसथा में नरमी के अन्य साक्ष्यों का समर्थन करता है।

इसे पढ़ें :40 साल में पहली बार घटी लोगों के खर्च करने की क्षमता: रिपोर्ट

अर्थशास्त्रियों और शिक्षाविदों ने एक बयान में कहा, ‘‘यह गौर करने वाली बात है कि खपत सर्वेक्षण के आंकड़ों को राष्ट्रीय लेखा के वृहत आर्थिक अनुमानों से अलग परिणाम देने के लिये जाना जाता है।’’ इसके साथ ही राष्ट्रीय लेखा के अनुमान न केवल प्रशासनिक आंकड़ों पर आधारित होते हैं बल्कि ये एनएसएसओ तथा अन्य सर्वेक्षणों के मिले जुले स्रोतों पर आधारित होते हैं। उनका कहना है कि कई समितियों ने इन विसंगतियों पर गौर किया है।

बयान में आगे कहा गया है, ‘‘पारदर्शिता और जवाबदेही के हित में सभी आंकड़े बिना विलम्ब के जारी किये जाने चाहिए... सरकार जिस आंकड़े से असहमत है, उसके विश्लेषण के खिलाफ अपना पक्ष रख सकती है।’’ लेकिन यह तकनीकी दस्तावेज और सेमिनार के जरिये होना चाहिए। प्रतिकूल आंकड़े को जारी होने से रोकना ...न तो पारदर्शिता है और न ही तकनीकी रूप से अच्छी स्थिति है।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘इसीलिए हम मांग करते हैं कि सरकार को 75वें उपभोक्ता व्यय सर्वे की रिपोर्ट और आंकड़े तत्काल जारी करने चाहिए। साथ ही सरकार को सामान्य प्रक्रियाओं के बाद अन्य सभी सर्वे आंकड़े जारी करने चाहिए।’’

देश के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि सांख्यिकीय संस्थानों को राजनीतिक हस्तक्षेप से स्वतंत्र रखा जाता है और उन्हें स्वतंत्र रूप से सभी आंकड़े जारी करने दिए जाते हैं। इस मामले में वर्तमान सरकार का रिकॉर्ड बहुत ख़राब रहा है। कुछ समय पहले तक भारत अपनी सांख्यिकीय प्रणाली पर गर्व करता था और एनएसएसओ द्वारा किए गए नमूना सर्वेक्षणों ने दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए बेहतर उदाहरण और मॉडल के रूप में कार्य किया है। हालांकि सर्वेक्षणों की कार्यप्रणाली के बारे में बहुत चर्चा और बहस हुई है। ये वैज्ञानिक और तकनीकी प्रकृति के रहे हैं जो महत्वपूर्ण संकेतकों के बेहतर उपायों को सक्षम करने के लिए सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए समर्पित हैं।

बयान जारी करने वाले अर्थशास्त्रियों और शिक्षाविदों में ए. वैद्यनाथन और अभिजीत सेन (पूर्व योजना आयोग के सदस्य), विश्वजीत धर (जेएनयू), दिलीप मुखर्जी (बोस्टन यूनिवर्सिटी), मैत्रीश घटक (एलएसई), प्रभात पटनायक (जेएनयू के मानद प्रोफेसर) और थॉमस पिकेती (पेरिस स्कूल आफ एकोनोमिक्स) शामिल हैं।

पूरे बयान को यहां पढ़ा जा सकता है: 

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

economist
Central Government
nsso
nsso data
Economic Recession
Consumer Expenditure Survey

Related Stories

एक ‘अंतर्राष्ट्रीय’ मध्यवर्ग के उदय की प्रवृत्ति

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

लोगों के एक घर बनाने में टूटने और उजड़ जाने की कहानी

LIC के कर्मचारी 4 मई को एलआईसी-आईपीओ के ख़िलाफ़ करेंगे विरोध प्रदर्शन, बंद रखेंगे 2 घंटे काम

किधर जाएगा भारत— फ़ासीवाद या लोकतंत्र : रोज़गार-संकट से जूझते युवाओं की भूमिका अहम

शहरों की बसावट पर सोचेंगे तो बुल्डोज़र सरकार की लोककल्याण विरोधी मंशा पर चलाने का मन करेगा!

ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?

कन्क्लूसिव लैंड टाईटलिंग की भारत सरकार की बड़ी छलांग

नेट परीक्षा: सरकार ने दिसंबर-20 और जून-21 चक्र की परीक्षा कराई एक साथ, फ़ेलोशिप दीं सिर्फ़ एक के बराबर 


बाकी खबरें

  • Modi in Varanasi
    सुबोध वर्मा
    यूपी चुनाव : पीएम मोदी की 1 लाख करोड़ की घोषणा कितनी प्रभावी?
    24 Dec 2021
    इसमें से क़रीब 70,000 करोड़ रुपये एक्सप्रेसवे और हवाई अड्डों के लिए हैं।
  • otting massacre
    सुकुमार मुरलीधरन
    नागालैंड ओटिंग नरसंहार और लोकतंत्र में अपवाद की स्थिति
    24 Dec 2021
    सुकुमार मुरलीधरन लिखते हैं कि नागालैंड में हुई यह हालिया त्रासदी अंदरूनी संघर्ष की स्थितियों में ज़्यादा से ज़्यादा ताक़त के इस्तेमाल को लेकर सज़ा से छूट दिये जाने के ख़तरों और विरोधाभास को सामने…
  • parliament
    रवि शंकर दुबे
    टाइमलाइन : संसद के शीतकालीन सत्र में क्या कुछ हुआ, विपक्षी सांसदों को क्यों रहना पड़ा संसद से बाहर?
    23 Dec 2021
    संसद के दोनों सदनों का शीतकालीन सत्र 22 दिसंबर को ख़त्म हो गया। इस सत्र में भी विपक्ष का विरोध और सरकार की नज़रअंदाज़ी जारी रही।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    अयोध्या ज़मीन घोटाला, 'धर्म संसद' में नफ़रत का खेल और अन्य ख़बरें
    23 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी अयोध्या का ज़मीन मामला, हरिद्वार के धर्म संसद में फैली नफ़रत और अन्य ख़बरों पर।
  • Afghanistan
    न्यूज़क्लिक टीम
    2.2 करोड़ अफ़ग़ानियों को भीषण भुखमरी में धकेला अमेरिका ने, चिले में वाम की ऐतिहासिक जीत
    23 Dec 2021
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने अमेरिकी sanctions की वजह से भुखमरी के भीषण संकट को झेल रहे अफ़गानिस्तान पर न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से बातचीत की। साथ ही चर्चा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License