NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
इक्वाडोर : जनता ने लेनिन मोरेनो के नए आर्थिक उपायों को अस्वीकार किया
मोरेनो प्रशासन ने बजट में और कर्मचारियों के वेतन में की गई कटौती को यह कह कर सही साबित करने की कोशिश की है कि तेल की क़ीमतों में आई गिरावट और कोरोनावायरस की वजह से देश की आर्थिक हालत ठीक नहीं है।
पीपल्स डिस्पैच
12 Mar 2020
 लेनिन मोरेनो

11 मार्च बुधवार को इक्वाडोर के राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो के नए आर्थिक उपायों के ऐलान के बाद हज़ारों इक्वाडोर वासियों ने सोशल मीडिया और सड़कों पर इन उपायों का विरोध किया। मोरेनो ने तर्क दिया था कि तेल की क़ीमतों में आई गिरावट और कोरोनावायरस की वजह से देश की आर्थिक हालत ठीक नहीं है।

राष्ट्रीय टीवी पर देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि नए आर्थिक सुधारों में 3 बड़े कदम उठाए जाएंगे- पब्लिक सेक्टर में कटौती, नए बाहरी क्रेडिट और कंपनियों के आयकर में इज़ाफ़ा।

वास्तव में इससे इक्वाडोर समाज के प्रमुख क्षेत्रों पर भारी असर पड़ेगा जैसे वेतन और सामाजिक देखभाल के क्षेत्र।

उपायों में 1,400 मिलियन अमेरिकी डॉलर की बजट कटौती है; युवा सचिवालय का उन्मूलन; साथ ही चार नियामक और नियंत्रण एजेंसियां; तीन संस्थान; तीन सार्वजनिक कंपनियां; चार तकनीकी सचिवालय; और पब्लिक मीडिया कंपनी का उन्मूलन शामिल है। इनके अलावा, 2,000 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एक बाहरी ऋण और सार्वजनिक श्रमिकों की मज़दूरी में कटौती, जो उनके वेतनमान के आधार पर उनके भुगतान के 4% से 8% के बीच वंचित होंगे।

इक्वाडोर के लोगों ने अपने "क्रूर नवउदारवादी पैकेज", जिसे लोकप्रिय रूप से "पिकेटाज़ो" कहा जाता है, की अस्वीकृति को व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया। उन्होंने मोरेनो के तर्कों को ख़ारिज कर दिया और कहा कि आर्थिक उपायों का उद्देश्य देश में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) के एजेंडे का पक्ष लेना है।

Confederation of Indigenous Nationalities of Ecuador (CONAIE) ने नए आर्थिक उपायों पर अपनी चिंता व्यक्त की। CONAIE ने ट्वीट किया, "CONAIE और पार्लियामेंट ऑफ पीपुल्स एंड सोशल ओर्गनाइजेशन आर्थिक उपायों की घोषणा के लिए अलर्ट पर हैं। हम एक और पेवेटाज़ो में उलझेंगे नहीं। अक्टूबर 2019 में वास्तविक नागरिक भागीदारी के साथ आर्थिक संकट का सामना करते हुए, हमने एक आर्थिक प्रस्ताव पेश किया जिसे लेनिन ने ध्यान में नहीं रखा।"

CONAIE इक्वाडोर का सबसे बड़ा स्वदेशी संगठन है। वह पिछले साल भी मोरेनो के नव-उदारवादी सुधारों के विरोध में सबसे आगे था। अक्टूबर 2019 में 12 दिनों के भारी विरोध के बाद, सरकार को डिक्री 883 को दोहराने के लिए मजबूर किया गया, जिसने ईंधन पर सब्सिडी को हटा दिया, जिससे बड़े पैमाने पर मूल्य वृद्धि हुई और श्रम-विरोधी उपाय हुए। इसे आईएमएफ़ के साथ 4.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर समझौते के हिस्से के रूप में भी लगाया गया था।

साभार : पीपल्स डिस्पैच

Lenin Moreno
Ecuador
Confederation of Indigenous Nationalities of Ecuador
CONAIE

Related Stories

इक्वाडोर के नारीवादी आंदोलनों का अप्रतिबंधित गर्भपात अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प

इक्वाडोर के लोग राष्ट्रपति लासो की आर्थिक नीतियों के ख़िलाफ़ लामबंद

इंटरकल्चरल एजुकेशन लॉ लागू करने की मांग को लेकर इक्वाडोर के शिक्षक भूख हड़ताल पर

बोलीविया सरकार ने इक्वाडोर द्वारा तख़्तापलट सरकार को हथियारों की आपूर्ति की जांच की

दुनिया भर की: अमेरिकी महाद्वीप में समाजवादी व्यवस्थाओं का इम्तिहान

दक्षिणपंथी गुइलर्मो लास्सो ने इक्वाडोर के राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता

विजेता वाम उम्मीदवार ने इक्वाडोर में दूसरे दौर के राष्ट्रपति चुनावों में बाधा डालने की योजना की चेतावनी दी

इक्वाडो : राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में एंड्रेस अराउज के प्रतिद्वंद्वी को लेकर अनिश्चितता बरक़रार

इक्वाडोर में 11 अप्रैल को राष्ट्रपति चुनावों के दूसरे दौर का मतदान

पैसा पूरी दुनिया के लोकतांत्रिक व्यवस्था को तबाह कर रहा है!


बाकी खबरें

  • वसीम अकरम त्यागी
    ‘हेट स्पीच’ के मामले 6 गुना बढ़े, कब कसेगा क़ानून का शिकंजा?
    15 Apr 2022
    2014 में देश में हेट स्पीच के कुल 336 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2020 में 1,804 मामले दर्ज हुए हैं। कुल मिलाकर सात साल में हेट स्पीच के मामले छह गुना तक बढ़े हैं।
  • राज वाल्मीकि
    बाबा साहेब की राह पर चल देश को नफ़रती उन्माद से बचाने का संकल्प
    15 Apr 2022
    आंबेडकर जयंती पर संसद मार्ग पर लगे जनता मेले में लोग फ़ासीवादी ताक़तों और उनके नफ़रती उन्माद की चर्चा करते नज़र आए। वर्तमान व्यवस्था  पर लोग आक्रोशित नज़र आए और ये संकल्प ले रहे थे कि इस नफ़रती…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट : दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते कोरोना के मामले
    15 Apr 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 949 नए मामले सामने आए हैं। इनमे से क़रीब 35 फ़ीसदी यानी 325 नए मामले दिल्ली से सामने आए हैं।
  • पुलकित कुमार शर्मा
    क्या देश में कोरोना के नए XE वैरिएंट से चौथी लहर का ख़तरा?
    15 Apr 2022
    दुनियाभर के कई देशों में कोरोना के नए XE वैरिएंट के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
  • एम. के. भद्रकुमार
    रूस के यूक्रेन ऑपरेशन की कोई समय सीमा नहीं है
    15 Apr 2022
    बुधवार को पुतिन द्वारा की गई टिप्पणी से पता चलता है कि रूस किसी भी क़ीमत पर जल्दबाज़ी में हासिल की जाने वाली जीत की तलाश में नहीं है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License