NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
इक्वाडोर के उपराष्ट्रपति ओट्टो सोनेनहोल्ज़्नर ने इस्तीफ़ा दिया
राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो के चार साल के कार्यकाल में सोनेनहोल्ज़्नर तीसरे उपराष्ट्रपति थे।
पीपल्स डिस्पैच
08 Jul 2020
पीपल्स डिस्पैच

इक्वाडोर के उपराष्ट्रपति ओट्टो सोनेनहोल्ज़्नर ने 7 जुलाई को अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। वे इस पद पर दिसंबर 2018 से थे। स्थानीय मीडिया के अनुसार कई सरकारी अधिकारियों के साथ उनकी असहमति ने उन्हें ये निर्णय लेने के लिए मजबूर किया।

ऐसी अफ़वाहें हैं कि सोनेनहोल्ज़्नर साल 2021 के राष्ट्रपति चुनावों में संभावित उम्मीदवार की योजना बना रहे हैं। देश के संविधान के अनुसार उनका ये इस्तीफ़ा उन्हें इस पद की उम्मीदवारी के लिए आवेदन करने की अनुमति देता है। हालांकि, अपने भाषण में उन्होंने पुष्टि की कि फिलहाल, उन्होंने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वह चुनाव में भाग लेंगे, लेकिन इक्वाडोर के इतिहास में आगामी चुनावों के महत्व पर ज़ोर ज़रूर दिया।

सोनेनहोल्ज़्नर लेनिन मोरेनो के कार्यकाल में तीसरे उपराष्ट्रपति थे। उन्होंने मारिया एलेजांद्रा विसुना की जगह ली थी जिन्होंने 11 महीने (जनवरी से दिसंबर 2018 तक) पद संभालने के बाद एक भ्रष्टाचार घोटाले के मामले में इस्तीफ़ा दे दिया था। उन्होंने जॉर्ज ग्लैस के बाद कार्यभार संभाला था जिन्होंने अप्रैल 2017 में मोरेनो के साथ चुनाव जीता था। ग्लैस को अगस्त 2017 में उनके पद से निलंबित कर दिया गया था। वे जघन्य ओडेब्रेच्ट मामले में अपनी कथित भूमिका के लिए 6 साल की सजा काट रहे हैं।

मोरेनो अब उन संभावित उम्मीदवारों की सूची नेशनल एसेंबली को भेजेंगे जिसके पास उपाध्यक्ष को मनोनित करने का अधिकार है। ये घोषणा आर्थिक, राजनीतिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को बढ़ाती है जो साल 2017 में मोरेनो के पद संभालने के बाद से गहरा रहा है। कोर्रिया प्रशासन की प्रगतिशील और साम्राज्यवाद-विरोधी नीतियों से अलग उनके विपरीत फैसले ने पाया है कि इक्वाडोर पर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों का काफी ऋण जमा हो गया है जो साल 2019 में 4.2 बिलियन डॉलर आईएमएफ ऋण था, इसके बाद शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यक्रमों जैसी प्रमुख सेवाओं के सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तपोषण में बड़ी कटौती की गई।

मोरेनो प्रशासन द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की निरंतर अनदेखी ने COVID-19 महामारी का सामना करने के लिए देश को पूरी तरह पंगु बना दिया है और इक्वाडोर को अधिक संक्रमण और मौत का सामना करना पड़ा। 7 जुलाई तक इक्वाडोर में 62,380 से अधिक मामले सामने आए और वहीं 4,821 से अधिक इससे मौत हुई है। इक्वाडोर के कई लोगों का आरोप है कि यह संख्या वास्तविकता से बहुत कम है क्योंकि जांच बहुत कम हुई है।

 

Anti-IMF protests in Ecuador
Austerity policies in Ecuador COVID-19 in Ecuador
Ecuadorian National Assembly
Guayaquil
International Monetary Fund
IMF
Jorge Glas
Lenin Moreno
Odebrecht
Otto Sonnenholzner

Related Stories

श्रीलंका की मौजूदा स्थिति ख़तरे से भरी

इक्वाडोर के नारीवादी आंदोलनों का अप्रतिबंधित गर्भपात अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प

श्रीलंकाई संकट : राजनीति, नीतियों और समस्याओं की अराजकता

पड़ताल दुनिया भर कीः पाक में सत्ता पलट, श्रीलंका में भीषण संकट, अमेरिका और IMF का खेल?

यूक्रेन के संकट का आईएमएफ कनेक्शन

साम्राज्यवाद अब भी ज़िंदा है

इस बजट की चुप्पियां और भी डरावनी हैं

लेबनान में ड्राइवरों और परिवहन कर्मचारियों को लेकर सरकारी उदासीनता के ख़िलाफ़ हड़ताल

पाकिस्तान में राजनीतिक अशांति की आर्थिक जड़ों को समझना ज़रूरी है

टीका रंगभेद के बाद अब टीका नवउपनिवेशवाद?


बाकी खबरें

  • BIRBHUMI
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    टीएमसी नेताओं ने माना कि रामपुरहाट की घटना ने पार्टी को दाग़दार बना दिया है
    30 Mar 2022
    शायद पहली बार टीएमसी नेताओं ने निजी चर्चा में स्वीकार किया कि बोगटुई की घटना से पार्टी की छवि को झटका लगा है और नरसंहार पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री के लिए बेहद शर्मनाक साबित हो रहा है।
  • Bharat Bandh
    न्यूज़क्लिक टीम
    देशव्यापी हड़ताल: दिल्ली में भी देखने को मिला व्यापक असर
    29 Mar 2022
    केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के द्वारा आवाह्न पर किए गए दो दिवसीय आम हड़ताल के दूसरे दिन 29 मार्च को देश भर में जहां औद्दोगिक क्षेत्रों में मज़दूरों की हड़ताल हुई, वहीं दिल्ली के सरकारी कर्मचारी और…
  • IPTA
    रवि शंकर दुबे
    देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'
    29 Mar 2022
    किसानों और मज़दूरों के संगठनों ने पूरे देश में दो दिवसीय हड़ताल की। जिसका मुद्दा मंगलवार को राज्यसभा में गूंजा। वहीं हड़ताल के समर्थन में कई नाटक मंडलियों ने नुक्कड़ नाटक खेलकर जनता को जागरुक किया।
  • विजय विनीत
    सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी
    29 Mar 2022
    "मोदी सरकार एलआईसी का बंटाधार करने पर उतारू है। वह इस वित्तीय संस्था को पूंजीपतियों के हवाले करना चाहती है। कारपोरेट घरानों को मुनाफा पहुंचाने के लिए अब एलआईसी में आईपीओ लाया जा रहा है, ताकि आसानी से…
  • एम. के. भद्रकुमार
    अमेरिका ने ईरान पर फिर लगाम लगाई
    29 Mar 2022
    इज़रायली विदेश मंत्री याइर लापिड द्वारा दक्षिणी नेगेव के रेगिस्तान में आयोजित अरब राजनयिकों का शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक परिघटना है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License