NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मीडिया को लेकर निर्वाचन आयोग की याचिका ‘अस्वाभाविक’ है : उच्चतम न्यायालय
पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से की गई सुनवाई में कहा, “मीडिया को जवाबदेही तय करने के लिए सबकुछ रिपोर्ट करने में सक्षम होना चाहिए और अदालत में होने वाले संवाद चर्चा का आधार तय करने के लिए होते हैं।”
भाषा
03 May 2021
मीडिया को लेकर निर्वाचन आयोग की याचिका ‘अस्वाभाविक’ है : उच्चतम न्यायालय
Image courtesy : Live Law

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने अदालती कार्यवाहियों में की गई टिप्पणियों की रिपोर्टिंग से मीडिया को रोकने के अनुरोध वाली निर्वाचन आयोग की याचिका को “अत्यंत अस्वाभाविक” करार दिया और उच्च न्यायालय के समर्थन में कहा कि वे लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, इसलिए वह उच्च न्यायालयों उनका मनोबल नहीं गिराना चाहता।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने निर्वाचन आयोग को आश्वस्त किया कि उच्च न्यायालय की टिप्पणी आयोग को “कमतर” दिखाने के लिए नहीं की गई थी और वह अपने आदेश में कहा कि दो संवैधानिक निकायों - उच्च न्यायालय और निर्वाचन आयोग के अधिकारों को संतुलित रखने का प्रयास करेगी।

शीर्ष अदालत ने कोविड-19 के मामले बढ़ने के लिए निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने और उनपर हत्या के आरोपों में मुकदमा चलाने जैसी मद्रास उच्च न्यायालय की टिप्पणियों के खिलाफ दायर निर्वाचन आयोग की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

पीठ ने कहा कि वह “शीघ्र” अपना आदेश सुनाएगी।

पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से की गई सुनवाई में कहा, “मीडिया को जवाबदेही तय करने के लिए सबकुछ रिपोर्ट करने में सक्षम होना चाहिए और अदालत में होने वाले संवाद चर्चा का आधार तय करने के लिए होते हैं।”

इसने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया महत्त्वपूर्ण एवं शक्तिशाली प्रहरी है और उसे उच्च न्यायालयों में हुई चर्चाओं की रिपोर्टिंग से रोका नहीं जा सकता है।

चुनाव आयोग की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि कोविड-19 प्रबंधन निर्वाचन आयोग के जिम्मे नहीं आता है और तमिलनाडु में चुनाव के 20 दिनों बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि उसपर हत्या के आरोप लगने चाहिए।

उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के खिलाफ हत्या के आरोपों पर उच्च न्यायालय की टिप्पणी को लेकर मीडिया में लगातार चर्चा हो रही है। साथ ही कहा कि कहीं तो सीमा तय करनी होगी।

हालांकि, शीर्ष अदालात ने निर्वाचन आयोग को उच्च न्यायालय की टिप्पणियों को अच्छे भाव से लेने को कहा और कहा कि “आपने बहुत अच्छा काम किया है।”

पीठ ने कहा, “हम निर्वाचन आयोग की शिकायत पर गौर करेंगे और हमारी क्षमताओं के अनुरूप आयोग और उच्च न्यायालयों के अधिकारों के बीच संतुलन बिठाने की कोशिश करेंगे।”

शीर्ष अदालत ने द्विवेदी से कहा कि मद्रास उच्च न्यायालय का प्रयास निर्वाचन आयोग को संस्थान के तौर पर कमतर बताने का नहीं था।

निर्वाचन आयोग ने मद्रास उच्च न्यायालय की आलोचनात्मक टिप्पणियों के खिलाफ शनिवार को शीर्ष अदालत का रुख किया था जिनमें उसे देश में कोविड-19 के मामले बढ़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। आयोग ने इन टिप्पणियों को “अनावश्यक और अपमानजनक” बताया है।

उच्च न्यायालय ने वैश्विक महामारी की दूसरी लहर के दौरान कोविड-19 मामले बढ़ने के लिए निर्वाचन आयोग को फटकार लगाते हुए इस बीमारी के प्रसार के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया था, इसे “बेहद गैर-जिम्मेदार संस्थान” कहा था और यहां तक कहा था कि अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला चलना चाहिए।

अदालत ने कहा था कि चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को रैलियां एवं बैठक करने के लिए अनुमति दी जिससे कोविड के मामले बढ़े।

इन टिप्पणियों के खिलाफ निर्वाचन आयोग की याचिका उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 30 अप्रैल को खारिज कर दी थी जिस वजह से उसे शीर्ष अदालत में अपील दायर करनी पड़ी।

election commission of India
Supreme Court

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • Kusmunda coal mine
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    भू-विस्थापितों के आंदोलन से कुसमुंडा खदान बंद : लिखित आश्वासन, पर आंदोलन जारी
    01 Nov 2021
    कुसमुंडा में कोयला खनन के लिए 1978 से 2004 तक कई गांवों के हजारों किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था। लेकिन अधिग्रहण के 40 वर्ष बाद भी भू-विस्थापित रोजगार के लिए भटक रहे हैं और एसईसीएल दफ्तरों…
  • Puducherry
    हर्षवर्धन
    विशेष : पांडिचेरी के आज़ादी आंदोलन में कम्युनिस्ट पार्टी की भूमिका
    01 Nov 2021
    आज एक नवंबर के दिन ही 1954 में पांडिचेरी फ्रांस से आज़ाद हुआ था। पांडिचेरी फ्रांस की गुलामी से आज़ाद कैसे हुआ और उसका भारत में विलय कैसे हुआ यह कहानी आम भारतीय जनमानस से कोसो-कोस दूर है। आइए जानते…
  • education
    प्रभात पटनायक
    विचार: एक समरूप शिक्षा प्रणाली हिंदुत्व के साथ अच्छी तरह मेल खाती है
    01 Nov 2021
    वैश्वीकृत पूंजी के लिए, अपने कर्मचारी भर्ती करने के लिए, ऐसे शिक्षित मध्यवर्ग की उपस्थिति आदर्श होगी, जो हर जगह जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके, एक जैसा हो। शिक्षा का ऐसा एकरूपीकरण हिंदुत्व के जोर से…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    यमन में एक बच्चा होना बुरे सपने जैसा है
    01 Nov 2021
    3 करोड़ की आबादी वाले यमन ने इस युद्ध में 2,50,000 से अधिक लोगों को खो दिया है, इनमें से आधे लोग युद्ध की हिंसा में मारे गए और बाक़ी आधे लोग भुखमरी और हैज़ा जैसी बीमारियों की वजह से।
  • Amit Shah
    सुबोध वर्मा
    लखनऊ में अमित शाह:  फिर किया पुराने जुमलों का रुख
    01 Nov 2021
    एक अहम स्वीकारोक्ति में शाह ने 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की संभावनाओं को 2024 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साथ जोड़ दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License