NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार में कोविड मानदंडों का पालन करा पाने में विफल साबित हो रहा है चुनाव आयोग!
बिहार में चुनाव प्रचार के दौरान कोरोना गाइडलाइन के पालन न करने के सैकड़ों वीडियो सामने आ रहे हैं लेकिन प्रचार-प्रसार और सभाओं में कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर अब तक सिर्फ 25 एफआईआर ही दर्ज की गई हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
26 Oct 2020
बिहार चुनाव
Image courtesy: India Today

बिहार विधानसभा चुनाव में पहले दौर के बाद अब दूसरे दौर के प्रचार के लिए सरगर्मी तेज़ हो रही है। वर्चुअल रैलियों से शुरू हुआ चुनावी प्रचार एक्चुअल रैलियों में बदला लेकिन इन रैलियों में कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार सुरक्षा के तमाम उपायों की जानलेवा अनदेखी की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील और केंद्र सरकार के वैज्ञानिकों की नेशनल सुपरमॉडल समिति की चेतावनी का भी असर यहां पर नहीं हो रहा है।

ऐसे में बड़ी बड़ी चुनावी रैलियों और जनसभाओं के बीच में चुनाव आयोग असहाय नजर आ रहा है। वह सिर्फ चेतावनी जारी कर रहा है जिसका किसी भी दल या राजनेता पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। आपको बता दें कि गत बुधवार को चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी राजनीतिक पार्टियों को चेतावनी दी है कि जनसभाओं और रैलियों के दौरान तय संख्या में भीड़ जुटाने और कोरोना संबंधी गाइडलाइन का पालन किया जाए। लेकिन इसके बाद भी हकीकत यही है कि राजनीतिक पार्टियां जनसभाओं और रैलियों के दौरान कोविड-19 से जुड़े निर्देशों का पालन नहीं कर रहीं है। यहां तक कि इन पार्टियों के ज़्यादातर शीर्ष नेता भी चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। खुद प्रधानमंत्री की रैली में इस सबका पूरी तरह पालन होता नज़र नहीं आया।

इसी तरह चुनाव आयोग ने बिहार के जिला निर्वाचन अधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों की जिम्मेदारी तय करते हुए कहा है कि वे अपने जिले में रैलियों के लिए ऐसा मैदान चुनेंगे, जहां एंट्री और एग्जिट की उचित सुविधा हो। लेकिन ध्यान रखा जाए कि मैदान में उतने ही लोग उपस्थित रहें, जितना कि स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी अनुमति दे। डोर टू डोर कैंपेनिंग के लिए उम्मीदवार और सुरक्षाकर्मी सहित सिर्फ पांच लोगों को अनुमति दी जाएगी।

लेकिन हर दिन बिहार से सैकड़ों की संख्या में वीडियो राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया पर अपलोड किए जा रहे हैं जिसमें इसकी धज्जियां उड़ती नजर आ रही है। अगर हम चुनाव आयोग द्वारा इस पर रोक लगाने के लिए की गई कार्रवाई पर नजर डाले तो यह बहुत ही मामूली दिखाई पड़ रही है।

दैनिक जागरण की एक खबर के मुताबिक विधानसभा चुनाव में प्रचार-प्रसार और सभाओं में कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर अब तक मात्र 25 एफआइआर दर्ज की गई है, जबकि जांच अधिकारी ने 15 और प्राथमिकी की अनुशंसा की है। आपको बता दें कि अब तक चार सौ से अधिक जनसभाओं की अनुमति चुनाव आयोग द्वारा दी जा चुकी है। इनमें आधी से ज्यादा सभाएं हो चुकी हैं। गौरतलब है कि आयोग ने पार्टियों को जनसभाओं के लिए सशर्त अनुमति दी थी जिसके अनुसार छह फीट की दूरी तथा मास्क व सैनिटाइजर की उपलब्धता जरूरी थी।

खबर के मुताबिक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एचएन श्रीनिवास ने बताया कि प्रचार-प्रसार और सभा में कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर प्राथमिकी की गई है। जिन्होंने सभा की अनुमति ली है, उन्हें नामजद किया जा रहा है।

दूसरी तरफ इस जानलेवा लापरवाही का परिणाम भी अब दिखने लगा है। लगातार चुनाव प्रचार कर रहे कई नेता भी तेजी से कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। भाजपा के स्टार प्रचारक राजीव प्रताप रूडी और शाहनवाज हुसैन व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय कोरोना संक्रमित हो गए हैं। बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी कोरोना संक्रमित होकर पहले से ही पटना एम्स अस्पताल में भर्ती हैं। इसके अलावा कई जगहों के प्रत्याशी भी कोविड की चपेट में आ गए हैं।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की वैज्ञानिकों की नेशनल सुपर मॉडल कमेटी ने भी चेतावनी दी है कि बिहार में चुनाव के कारण असामान्य रूप से कोरोना के मामलों में वृद्धि हो सकती है। और संक्रमण अगर बढ़ेगा तो फरवरी तक कोरोना की दूसरी लहर का सामना करना पड़ सकता है। यहां आपको यह भी याद दिला दें कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले ही लचर हालत में है और यहां डॉक्टरों, प्रशिक्षित पैरामेडिक्स और नर्सों की भारी कमी है।

यह सही है कि अपने देश में पिछले कुछ समय से कोरोना के नए मामलों में कमी दिख रही है। बावजूद इसके, यह नहीं माना जा सकता कि इसका खतरा कम हो गया है। दुनिया के अन्य हिस्सों की तरफ नजर दौड़ाई जाए तो अमेरिका, रूस, स्पेन, ईरान आदि अनेक देशों में कोरोना का ग्राफ लहर की शक्ल में नजर आता है। यानी एक बार नीचे जाने के बाद दोबारा ऊपर आने वाला। ऐसे में लहर जैसा यह ग्राफ बताता है कि वायरस का एक बार काबू में आ जाना काफी नहीं है। यह दोबारा बेकाबू होकर पहले से भी बड़ी चुनौती खड़ी कर सकता है।

ऐसे में कोरोना से लड़ने का मास्क, फिजिकल डिस्टेंशिंग व सर्तकता के अलावा और कोई कारगर हथियार अभी लंबे समय तक हमारे पास नहीं है। बिहार चुनाव के दौरान चुनाव आयोग को सख्ती से कोरोना प्रोटोकाल का पालन नेताओं और राजनीतिक दलों को कराना चाहिए। आगामी कुछ महीनों में अगर बिहार में कोरोना संक्रमण के मामले अगर बढ़ते हैं तो निसंदेह इसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग और बिहार प्रशासन की होगी।

गौरतलब है कि बिहार में कुल तीन चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। पहले चरण की 71 सीटों के लिए 28 अक्टूबर को मतदान होगा, वहीं दूसरे चरण की 94 सीटों के लिए तीन नवंबर और तीसरे चरण की 78 सीटों के लिए सात नवंबर को मतदान होंगा। सभी 243 सीटों के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे।

Bihar
Bihar Elections 2020
Covid norms
COVID-19
Social Distancing
Mask compulsory
election commission of India

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट


बाकी खबरें

  • bharat ek mauj
    न्यूज़क्लिक टीम
    भारत एक मौज: क्यों नहीं हैं भारत के लोग Happy?
    28 Mar 2022
    'भारत एक मौज' के आज के एपिसोड में संजय Happiness Report पर चर्चा करेंगे के आखिर क्यों भारत का नंबर खुश रहने वाले देशों में आखिरी 10 देशों में आता है। उसके साथ ही वह फिल्म 'The Kashmir Files ' पर भी…
  • विजय विनीत
    पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर
    28 Mar 2022
    मोदी सरकार लगातार मेहनतकश तबके पर हमला कर रही है। ईपीएफ की ब्याज दरों में कटौती इसका ताजा उदाहरण है। इस कटौती से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सर्वाधिक नुकसान होगा। इससे पहले सरकार ने 44 श्रम कानूनों…
  • एपी
    रूस-यूक्रेन अपडेट:जेलेंस्की के तेवर नरम, बातचीत में ‘विलंब किए बिना’ शांति की बात
    28 Mar 2022
    रूस लंबे समय से मांग कर रहा है कि यूक्रेन पश्चिम के नाटो गठबंधन में शामिल होने की उम्मीद छोड़ दे क्योंकि मॉस्को इसे अपने लिए खतरा मानता है।
  • मुकुंद झा
    देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर
    28 Mar 2022
    सुबह से ही मज़दूर नेताओं और यूनियनों ने औद्योगिक क्षेत्र में जाकर मज़दूरों से काम का बहिष्कार करने की अपील की और उसके बाद मज़दूरों ने एकत्रित होकर औद्योगिक क्षेत्रों में रैली भी की। 
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    माले का 11वां राज्य सम्मेलन संपन्न, महिलाओं-नौजवानों और अल्पसंख्यकों को तरजीह
    28 Mar 2022
    "इस सम्मेलन में महिला प्रतिनिधियों ने जिस बेबाक तरीक़े से अपनी बातें रखीं, वह सम्मेलन के लिए अच्छा संकेत है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License