NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
एल्गार मामला: अदालत ने स्टेन स्वामी को अस्पताल में रखने की अवधि बढ़ाई
अदालत ने कहा, ‘‘रिपोर्ट के मुताबिक गंभीर मेडिकल मुद्दे हैं। इस रिपोर्ट के आलोक में हमारा मानना है कि वादी को पांच जुलाई तक अस्पताल में रखा जाना उपयुक्त रहेगा।’’
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 Jun 2021
एल्गार मामला: अदालत ने स्टेन स्वामी को अस्पताल में रखने की अवधि बढ़ाई

मुंबई: बंबई उच्च न्यायालय ने एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता स्टेन स्वामी को शहर के एक निजी अस्पताल में रखे जाने की अवधि बृहस्पतिवार को पांच जुलाई तक के लिए बढ़ा दी।

अस्पताल ने अदालत को एक रिपोर्ट सौंप कर कहा था कि उनका स्वास्थ्य नाजुक बना हुआ है, जिसके बाद यह आदेश जारी किया गया।

उच्च न्यायालय के 28 मई के आदेश के बाद स्वामी (84) को विचाराधीन कैदी के रूप में नवी मुंबई की तलोजा जेल से इलाज के लिए उपनगरीय बांद्रा स्थित होली फेमिली हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। स्वामी पार्किंसंस (मस्तिष्क संबंधी बीमारी)सहित कई बीमारियों से ग्रसित हैं।

स्वामी ने अपने वकील मिहिर देसाई के जरिए इस साल की शुरूआत में उच्च न्यायालय का रुख किया था और स्वास्थ्य आधार पर उपचार और अंतरिम जमानत का अनुरोध किया था। निजी अस्पताल में उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी और उन्हें आईसूयी में भर्ती किया गया था।

न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और न्यायमूर्ति एनजी जामदार ने बृहस्पतिवार को कहा कि निजी अस्पताल द्वारा सौंपी गई स्वामी की नवीनतम मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि वह कोविड-19 से उबर गये हैं लेकिन उनके स्वास्थ्य की स्थिति नाजुक बनी हुई है और उन्हें गहन चिकित्सीय देखभाल में रहने की जरूरत है।

अदालत ने कहा, ‘‘रिपोर्ट के मुताबिक गंभीर मेडिकल मुद्दे हैं। इस रिपोर्ट के आलोक में हमारा मानना है कि वादी को पांच जुलाई तक अस्पताल में रखा जाना उपयुक्त रहेगा।’’

अदालत ने मामले की अभियोजन एजेंसी एनआईए (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) को मेडिकल रिपोर्ट की प्रति देने का भी निर्देश दिया।

पीठ ने एनआए को रिपोर्ट का अध्ययन करने और तीन जुलाई को स्वामी की याचिका पर अपनी दलील पेश करने का निर्देश दिया।

गौरतलब है स्वामी को अक्टूबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में हैं।

क्या है मामला
 
एल्गार परिषद मामला पुणे में 31 दिसंबर 2017 को एक सभा में कथित भड़काउ भाषण देने से संबंध है। पुलिस का दावा है कि उक्त भाषण के बाद पश्चिमी महाराष्ट्र के बाहरी इलाकों में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़की थी। पुणे पुलिस ने दावा किया था कि सभा को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था। मामले की जांच अब एनआईए कर रही है। इसमें कई कार्यकर्ताओं और अकादमिक जगत के लोगों को आरोपी बनाया गया है।

इसी मामले में देश के कई बुद्धजीवियों, पत्रकारों, लेखकों सहित समाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी हुई है।  हालांकि, किसी भी मामले में पुलिस कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई है। इसमें आनन्द तेलतुम्बड़े के अतिरिक्त, सुधा भारद्वाज, सोमा सेन, अरुण फरेरा, वेरनॉन गोंजाल्विस, फादर स्टेन स्वामी, सुधीर धावले वरवरा राव, रोना विल्सन, गौतम नवलखा, जैसे बुद्धिजीवी भी शामिल हैं। यह सभी, आम लोगों के सम्मानपूर्वक जीने के हक के पक्ष में, कोर्ट से लेकर सड़क तक संघर्षशील रहे हैं। ये लोग स्वास्थ्य-शिक्षा मुफ्त मिले, इसके लिए निजीकरण का विरोध करते रहे हैं और उन आदिवासियों के साथ खड़े हुए जिनकी जीविका के संसाधन को छीन कर पूंजीपतियों के हवाले किया जाता रहा है। इसलिए ये लोग शासक वर्ग के आंखों के किरकिरी बने हुए थे।

सुधा भरद्वाज, सोमा सेन, अरुण फरेरा, वेरनॉन गोंजाल्विस, फादर स्टेन स्वामी, सुधीर धावले, वरवरा राव, रोना विल्सन भीमा कोरेंगांव केस में जून और सितम्बर, 2018 से ही महाराष्ट्र के जेलों में बंद हैं। जबकि उस केस के असली गुनाहगार संभाजी भिंडे और मिलिन्द एकबोटे बाहर हैं।

महाराष्ट्र में सरकार बदलने के बाद केन्द्र सरकार ने इस केस को एनआईए के हाथों में सुपुर्द कर दिया था। 18 माह बाद लम्बी कानूनी प्रक्रिया झेलने के बाद 14 अप्रैल 2020, को गौतम नवलखा और आनन्द तेलतुम्बड़े को एनआईए के समक्ष आत्मसमर्पण करना पड़ा। तब से ही ये दोनों भी जेल में है।

कौन हैं फादर स्टेन स्वामी

स्टेन झारखंड के जाने–माने सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह बीते कई दशक से राज्य के आदिवासियों-वंचितों के लिए काम करते रहे हैं। मूल रूप से तमिलनाडु के रहनेवाले स्टेन शुरूआत में पादरी थे। बाद में आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई के क्रम में पादरी का काम छोड़ दिया। इस दौरान उन्होंने संविधान के पांचवी अनुसूची के सही से काम न करने, पेसा कानून, वनाधिकार कानून को सही से लागू करवाने को लेकर लंबी लड़ाई लड़ी।  

इसके साथ ही झारखंड के जेलों में बंद दस हजार से अधिक विचाराधीन कैदियों को लेकर सर्वे तैयार किया। फिर इसे लेकर कोर्ट गए। राज्यभर में हुए विस्थापनों के खिलाफ लगातार आंदोलन करते रहे। इनके ऊपर पत्थलगड़ी आंदोलन के दौरान भी मुकदमा दर्ज किया गया था।  

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

Stan Swamy
Elgar case
Bombay High Court

Related Stories

मोदी जी, देश का नाम रोशन करने वाले इन भारतीयों की अनदेखी क्यों, पंजाबी गायक की हत्या उठाती बड़े सवाल

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

एनआईए स्टेन स्वामी की प्रतिष्ठा या लोगों के दिलों में उनकी जगह को धूमिल नहीं कर सकती

फादर स्टेन स्वामी की हिरासत में मौत 'हमेशा के लिए दाग': संयुक्त राष्ट्र समूह

"पॉक्सो मामले में सबसे ज़रूरी यौन अपराध की मंशा, न कि ‘स्किन टू स्किन’ टच!"

क्रूज ड्रग्स पार्टी केस: बंबई उच्च न्यायालय ने आर्यन खान को दी जमानत

स्टेन स्वामी की मौत एक संस्थानिक हत्या थी’: सह-कैदियों ने उद्धव ठाकरे को अपने पत्र में लिखा था

बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब क्या करेंगे राज्यपाल कोश्यारी?

आज भी न्याय में देरी का मतलब न्याय न मिलना ही है

झारखण्ड : आंदोलनकारियों की हत्या, दमन के ख़िलाफ़ संयुक्त जन अभियान : एके राय - चारु मजुमदार संकल्प सप्ताह की शुरुआत 


बाकी खबरें

  • SSC GD 2018
    धारण गौर
    SSC GD 2018: सरकारी परीक्षा व्यवस्था की मार से जूझ रहे युवाओं की कहानी उनकी ज़ुबानी
    13 Dec 2021
    "हम में कमी क्या थी? लिखित और शारीरिक परीक्षा में पास थे, मेडिकली फिट थे, लेकिन फिर भी यह सरकार और व्यवस्था हमारे सपने और नौकरी ‘खा’ गई, हम तो आंदोलन में पुलिस के डंडे खा कर इतना सीख गए थे कि शायद…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    सीएम आदित्यनाथ पर "अपनों" का सितम
    13 Dec 2021
    वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा आज न्यूज़चक्र में चर्चा कर रहे हैं 'उत्तर प्रदेश 2022 में होने वाले चुनाव पर, क्या योगी आदित्यनाथ की मुश्किलें बढ़ती जा रही है ? अखिलेश यादव की पार्टी को लोगों का…
  • bihar
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः प्रारंभिक शिक्षकों की काउंसलिंग टलने के बाद दसवीं और बारहवीं शिक्षकों की नियुक्त‍ि पर भी ग्रहण
    13 Dec 2021
    शिक्षा विभाग द्वारा शनिवार को प्रारंभिक शिक्षकों के नियोजन कार्यक्रम के तहत घोषित 14 से 22 दिसंबर तक की काउंसलिंग को तत्काल प्रभाव से स्थगित किये जाने के बाद अब दसवीं-बारहवीं शिक्षकों के नियुक्ति…
  • cbse
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    सीबीएसई ने दसवीं के इंग्लिश पेपर में पूछे भद्दे, स्त्री विरोधी सवाल, विवाद के बाद मांगी माफ़ी
    13 Dec 2021
    11 दिसम्बर को हुए दसवीं की इंग्लिश की बोर्ड परीक्षा में एक अनसीन पैसेज में स्त्रियों की स्वतंत्रता को सामाजिक और पारिवारिक समसायों का प्रमुख ज़िम्मेदार बताया गया। संसद में कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया…
  • modi
    सोनिया यादव
    क्या सरकार की पीएम मोदी के जन्मदिन पर ढाई करोड़ लोगों के टीकाकरण की बात 'झूठ' थी?
    13 Dec 2021
    लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि पीएम मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मृत लोगों और वैक्सीन न लेने वालों को भी डेटा एंट्री करते समय हुई गलती के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License