NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
महंगाई भत्ते पर रोक से कर्मचारी संगठन  नाराज़,  फ़ैसला वापस लेने की मांग
केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से गुरुवार को एक आदेश जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि जुलाई 2021 तक केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले बढ़े हुए महंगाई भत्ते पर रोक लगाई जाती है।
मुकुंद झा
25 Apr 2020
 कर्मचारी संगठन
Image courtesy: Oneindia

दिल्ली: कोरोना वायरस महामारी पर काबू पाने में लगी केंद्र सरकार ने बढ़ते आर्थिक बोझ को देखते हुये अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते की नई किस्तों पर एक जुलाई 2021 तक के लिये रोक लगा दी है। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 1 जनवरी 2020 के वास्ते दिए जाने वाले महंगाई भत्ते और महंगाई राहत का भुगतान नहीं किया जाएगा।

लेकिन सरकार के इस फैसले का सभी ट्रेड यूनियन और सरकारी कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया है। उन्होंने सरकार से अपने इस आदेश पर पुनः विचार करने का आग्रह किया है। दरअसल केंद्र के इस फैसले के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य सरकारें भी इस तरह का निर्णय  कर सकती हैं। इस फैसले से 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 61 लाख पेंशनभोगियों पर असर पड़ेगा।

इन कर्मचारियों का कहना है कि देश कोरोना के भीषण महामारी से ग्रषित है और केन्द्रीय कर्मचारी व सरकारी विभागों के कर्मचारी अपने जीवन की परवाह किए बिना अति आवश्यक कार्यों को पूरा कर रहे हैं। स्वास्थ्य, पोस्टल, रक्षा, रेलवे इत्यादि क्षेत्रों के कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बगैर काम पर लगे हुए हैं। ऐसे में उनके वेतन में एक तरह से कटौती गैरवाजिब है।

आपको बता दें कि इससे पहले भी सरकार ने ऐसे ही आदेश में सरकारी कर्मचारियों से एक साल तक हर महीने एक दिन का वेतन पीएम केयर्स में दान देने के लिए कहा था।

फिलहाल महंगाई भत्ते पर रोक के निर्णय का शिक्षक संघ, डॉक्टरों, रेलवे, केंद्रीय ट्रेड यूनियन और विपक्षी दलों ने विरोध किया है।

कर्मचारी संगठनों के मुताबिक भारत सरकार के स्तर पर केंद्रीय कर्मचारियों के बेहद महत्वपूर्ण  विषय पर वित्त मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 23 अप्रैल  को एक तरफा और मनमाना निर्णय लिया गया है जिससे कार्यरत केन्द्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी बुरी तरीके से प्रभावित हो रहे है। इस फैसले में सरकार द्वारा गठित राष्ट्रीय परिषद, सयुंक्त पारमर्शदात्री समिति और किसी भी मान्यता प्राप्त कर्मचारी महासंघों के साथ भी कोई संवाद नहीं किया गया और ना ही उनको विश्वास मे लिया गया, जो की भारतीय संविधान के सहभागिता के प्रबंधन के धारा की भी अनदेखी है।

भारतीय रेल के सबसे बड़े कर्मचारी यूनियन आल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा ने भी इस निर्णय को गलत बताया और सरकार को महंगाई भत्ते पर रोक लगाने के फैसले पर पुनर्विचार कर उसे फिर से बहाल करना को कहा। उन्होंने कहा "डीए को फ्रीज करने का फैसला गलत है। इससे औसतन एक रेल कर्मचारी की करीब डेढ़ महीने की सैलरी ख़त्म हो जाएगी और पेंशन धारियों को भी नुकसान होगा।"

हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के नेताओ ने भी केंद्र सरकार के इस फैसले को गलत बताते हुए केंद्र सरकार से इस पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। अध्यापक संघ का यह भी कहना है कि" जुलाई 2021 तक रिटायर होने वाले कर्मचारियों पर इसकी दोहरी मार पड़ेगी ।"

केन्द्रीय कर्मचारी कामगार समन्व्यव समिति, उत्तराखंड ने भी सरकार के इस फैसले का विरोध किया। तो वहीं, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी सरकार के इस फैसले का विरोध किया। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) ने सरकार के फैसले को फ्रीज करने की निंदा की और कहा निःसन्देह देश आज आर्थिक संकट से गुजर रहा है लेकिन इसकी मार केवल कर्मचारी पर क्यों? जबकि वो इस संकट में भी काम कर रहे हैं।

इस तरह ऑल इण्डिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ़ ट्रेड यूनियन (एक्टू) ने कहा कि सरकार के इस तरह के निर्णय और आदेश से फ्रंटलाइन वर्कर्स भी नहीं बचेंगे।

आगे उन्होंने कहा ये सरकार लगातार कामकाजी लोगों पर हमले कर रही है। सरकार ने लॉकडाउन अवधि के दौरान कार्यालय में उपस्थित नहीं होने वाले कर्मचारियों को परिवहन भत्ता रोक दिया है। इसके अलावा, यह आशंका है कि 'पीएम केयर' फंड के लिए एक दिन का वेतन कटौती एक साल तक जारी रह सकती है।

ऐक्टू ने बयान जारी करते हुए सरकार को इस संकट से निपटने के लिए सुझाव दिया और कहा कि संकट की इस घड़ी में सरकार केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों, और बड़े पैमाने पर काम करने वाले लोगों को टारगेट करने के बजाय, कॉर्पोरेट्स पर 10% Covid19 कर लगाए। इसी तरह केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षक और कर्मचारियों ने भी इसका विरोध किया है।

मज़दूर नेता और बिहार में भाकपा-माले के राज्यसचिव कुणाल ने कहा है कि "एक तो प्रधानमंत्री कोरोना पीड़ितों के लिए गठित पीएम केयर फंड का कोई हिसाब नहीं दे रहे हैं, दूसरे इस मद में अब सरकारी कर्मचारियों की महीने की एक दिन की सैलरी जबरदस्ती काट ली जा रही है। सरकार अपने कर्मचारियों की सैलरी काटने की बजाए देश में अकूत संपत्ति जमा कर चुके अंबानी-अडानी जैसे काॅरपोरेट लाॅबी से पैसे क्यों नहीं निकालती है? लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर रही जो दिखता है कि इस विकट संकट में भी वह काॅरपोरेटों को बचाने में, उन्हें सुरक्षा प्रदान करने में और आम लोगों की सैलरी काटने में लगी है। "

कांग्रेस पार्टी ने भी सरकार से इस निर्णय का विरोध किया और कहाकि सरकार सेंट्रल विस्टा और बुलेट ट्रेन जैसे प्रोजेक्ट को रोकर सरकारी खर्चों को कम करे और इन कर्मचारियों के भत्तों को पुनः बहाल करे।

government employees
Central Government
modi sarkar
Lockdown
Coronavirus
Finance Ministry
Nirmala Sitharaman

Related Stories

क्या जानबूझकर महंगाई पर चर्चा से आम आदमी से जुड़े मुद्दे बाहर रखे जाते हैं?

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना मामलों में 17 फ़ीसदी की वृद्धि

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

दिवंगत फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी को दूसरी बार मिला ''द पुलित्ज़र प्राइज़''

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Internet Shutdowns
    इशिता चिगिल्ली पल्ली
    क्यों भारतीय राज्य इंटरनेट शटडाउन पर अपनी निर्भरता बढ़ाता जा रहा है?
    21 Sep 2021
    एक बार फिर भारतीय राज्य ने इंटरनेट शटडाउन का विकल्प अपनाया है, इस बार हरियाणा में यह प्रतिबंध लागू किए गए हैं, ताकि क़ानून-व्यवस्था पर नियंत्रण किया जा सके। 
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    चरणजीत सिंह चन्नी बने पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री, यूपी में जानलेवा बुखार और अन्य खबरें
    20 Sep 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र होगी पंजाब के पहले मुख्यमंत्री के रूप में चरणजीत सिंह चन्नी के शपथग्रहण समारोह, कर्नाटक के मुख्यमंत्री को जानलेवा धमकी देने वाला हिन्दू महासभा नेता की…
  • kashmir
    अनीस ज़रगर
    जम्मू के व्यापारियों ने लगाया भेदभाव का आरोप, 22 सितंबर को बंद का ऐलान
    20 Sep 2021
    सरकार द्वारा लिए गए रिलायंस के 100 रिटेल स्टोर खोलने के फ़ैसले का विरोध करते हुए व्यापारी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन की भी चेतावनी दी है।
  • Yogi
    सोनिया यादव
    यूपी: ज़मीनी हक़ीक़त से बहुत दूर है योगी सरकार का  साढ़े 4 साल का रिपोर्ट कार्ड!
    20 Sep 2021
    कोरोना संकट की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों के बाहर बेड के इंतजार में तड़पते लोगों की तस्वीरें हों या युवाओं का सड़क पर रोज़गार को लेकर धरना, अखबारों में हाथरस, उन्नाव जैसे आए दिन छपते मामले हों, या…
  • crime
    एम.ओबैद
    बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में एमपी पहले और यूपी दूसरे स्थान परः एनसीआरबी
    20 Sep 2021
    बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में बीजेपी शासित मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर हैं। वहीं भ्रूण हत्या के मामले में गुजरात पहले स्थान पर है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License