NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
जानिये नर्सिंग और मिडवाइफ़ से जुड़े नए प्रस्तावित क़ानून का क्या है विवाद?
पूरे देश की नर्सें और मिडवाइफ़(दाई/प्रसाविका) केंद्र द्वारा नर्सिंग शिक्षा और क़ानूनों में प्रस्तावित बदलावों का विरोध कर रही हैं।
दित्सा भट्टाचार्य
18 Nov 2020
नर्सिंग

राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफ़री कमीशन बिल, 2020 क्या है?

5 नवंबर को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने आम जनता को सूचित किया कि वह मौजूदा 'इंडियन नर्सिंग काउंसिल एक्ट, 1947' को खत्म करने पर विचार कर रही है। साथ में कहा गया कि 'नेशनल नर्सिंग एवम् मिडवाइफ़री कमीशन' बनाने के लिए नया कानून लाने की योजना बनाई जा रही है। मंत्रालय ने विधेयक का एक मसौदा तय भी कर लिया है और 6 दिसंबर तक उस पर सलाह व टिप्पणियां आमंत्रित करने का ऐलान किया है।

मंत्रालय के मुताबिक़, प्रस्तावित विधेयक का मक़़सद, नर्सिंग और प्रसूति पेशेवरों की शिक्षा और उनके द्वारा दी जाने वाली सेवा के स्तर का नियंत्रण और प्रबंधन, संस्थानों का आंकलन, केंद्रीय और राज्य रजिस्टरों का प्रबंधन और एक ऐसे तंत्र का निर्माण है, जो स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, शोध और विकास को बढ़ावा दे। साथ ही ताजा वैज्ञानिक घटनाक्रमों को अपने भीतर ढाल सके।

फिलहाल जो कानून लागू है, उसके ज़रिए इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) नाम की एक स्वायत्त नियामक संस्था का गठन हुआ है। यह संस्था नर्सिंग अर्हता के पैमाने तय करती है और नर्सिंग शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता देती है।

क्यों स्वास्थ्यकर्मी इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं?

सामाजिक कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि इस विधेयक के ज़रिए ज़मीन पर काम करने वाले कर्मचारियों की कोई मदद नहीं की जा रही है, बल्कि इससे पुराने कानून के प्रावधानों को कमज़ोर किया जा रहा है, ताकि केंद्र का ज़्यादा नियंत्रण किया जा सके। "ऑल इंडिया गवर्मेंट नर्सेज़ फेडरेशन (AIGNF)" के मुताबिक़, जब स्वास्थ्य मंत्रालय कानून का मसौदा तैयार कर रहा था, तब उसने देश के नर्सिंग क्षेत्र के पेशेवरों के ज़्यादातर हिस्से के मत पर ध्यान ही नहीं दिया।

11 नवंबर को AIGNF के महासचिव जी के खुराना द्वारा राष्ट्रपति को लिेखे एक ख़त में बताया गया है कि भारत में 95 फ़ीसदी नर्सेज़ या तो अस्पतालों या फिर सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में काम करती हैं, केवल 5 फ़ीसदी नर्स ही शैक्षणिक शाखा से जु़ड़ी हैं। लेकिन इन 95 फ़ीसदी नर्सिंग पेशेवरों के मत को विधेयक का मसौदा तैयार करते वक़्त ध्यान में नहीं लिया गया। AIGNF के मुताबिक़, नर्सिंग शिक्षा के तंत्र में प्रस्तावित इस बड़े बदलाव के बारे में AIGNF से सलाह भी नहीं ली गई, जबकि यह संगठन सरकारी अस्पतालों, सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों की नर्सों और नर्सिंग कॉलेज के शिक्षकों का एकमात्र प्रतिनिधि संगठन है।

नए आयोग के सदस्य कौन होंगे?

इस प्रस्तावित विधेयक के बारे में एक बड़ी चिंता इसके द्वारा इंडियन नर्सिंग काउंसिल का खात्मा है। INC स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था है। इसकी जगह राष्ट्रीय नर्सिंग एवम् मिडवाइफ़री कमीशन (NNMC) को लाने का प्रस्ताव है। इसमें सदस्यों का चुनाव नहीं होगा, बल्कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली खोज और चयन समिति के सुझावों के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा उनकी नियुक्ति होगी। खोज समिति के दूसरे सदस्यों में चार विेशेषज्ञ ऐसे होंगे, जिन्हें नर्सिंग और प्रसूति शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य नर्सिंग शिक्षा और नर्सिंग स्वास्थ्य शोध में 25 साल से ज़्यादा का अनुभव होगा। एक विशेषज्ञ ऐसा होगा जिसके पास प्रबंधन या कानून या अर्थशास्त्र या विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में 25 साल से ज़्यादा का अनुभव होगा। पांचों विशेषज्ञों की नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव भी इसके सदस्य बनेंगे।

यह खोज समिति फिर NMMC के 40 सदस्यों को नामित करेगी, जिसमें नर्सिंग संस्थानों और अस्पतालों के प्रतिनिधि और नर्सिंग व प्रसूति पेशे के ख्यात सदस्य होंगे।

अलोचकों का कहना है कि चुनावों को हटाकर और सदस्यों को नामित करने की शक्ति अपने पास लाकर, प्रस्तावित नए कानून ने केंद्र सरकार को बहुत ज़्यादा ताकत दे दी है। अब राज्यों के मतों को कोई जगह नहीं दी जाएगी।

प्रस्तावित NNMC के उद्देश्य भी नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की तरह ही हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन की स्थापना सितंबर, 2020 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को हटाकर की गई थी। पूरे देश में इस कदम का डॉक्टरों ने खूब विरोध किया था, लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी तरफ ध्यान नहीं दिया। प्रस्तावित NNMC की तरह ही NMC में भी 25 सदस्य होंगे, जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार एक समिति के सुझावों पर करेगी।

नर्स क्यों विरोध प्रदर्शन की बात कर रही हैं?

मौजूदा महामारी ने स्वास्थ्यकर्मियों पर बहुत दबाव डाला है, खासकर सरकारी अस्पतालों और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में काम करने वाली नर्सों पर, जहां पहले से ही बेहद कम संख्या में स्टॉफ की नियुक्ति है।  पूरे देश में नर्सें, नियंत्रित सेवा शर्तों और मरीज़ सेवाओं की मांग कर रही हैं। उनकी यह भी मांग है कि मरीज़ों से नर्सों का अनुपात निश्चित किया जाए और काम करने की स्थितियां सुधारी जाएं। लेकिन अब प्रस्तावित नए विधेयक ने उन्हें और ज़्यादा नाराज़ कर दिया है।

AIGNF के मुताबिक़ मौजूदा सरकार द्वारा हाल के वक़्त में उठाए गए सभी कदमों ने नर्सिंग पेशवरों की ज़िंदगी मुश्किल कर की है। AIGNF ने बताया कि कई सालों से वे लोग सरकार से नर्सों की समस्याओं का समाधान करने के लिए एक केंद्रीय तंत्र बनाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने उनके काम को आसान करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए। AIGNF ने नए विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले केंद्र सरकार से अपील की है कि वो सभी दावेदारों और हितग्राहियों से ठीक ढंग से सलाह ले। संगठन ने एक 29 बिंदुओं वाला चार्टर भी निकाला है।

संघ ने कहा है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे एक महीने के भीतर राष्ट्रीय स्तर पर एक विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। उस स्थिति में अगर अस्पतालों में मरीज़ों को पर्याप्त सेवा और सुविधाएं नहीं मिल पाईं, तो इसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार होगी।

इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2020 को नर्स और मि़डवाइफ का अंतरराष्ट्रीय वर्ष घोषित किया है। ऐसा फ्लोरेंस नाइटेंगल की 200वें जन्मवर्ष के उपलक्ष्य में किया गया है। साथ में यह बताने की कोशिश भी है कि स्वास्थ्य सेवा को बदलने में नर्सों ने कितनी अहम भूमिका निभाई है। AIGNF का कहना है कि ठीक इसी साल सरकार नर्सों के प्रति बेपरवाही दिखा रही है।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Explained: Why a New Law for Nursing and Midwifery Is Creating a Stir

Nursing and Midwifery Law
National Nursing and Midwifery Commission Indian Nursing Council Act
Healthcare workers
Nurses Protest

Related Stories

केन्या के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों ने काम बंद किया; 7 दिसंबर से नर्से भी हैं हड़ताल पर

HAHC अस्पताल ने 84 नर्सों को बर्खास्त किया

कोरोना संकट: भोजन, नौकरी और सुरक्षा के लिए हुआ देशव्यापी विरोध

केन्या के मेरु काउंटी में हेल्थकेयर श्रमिक 5 फरवरी के हड़ताल के लिए तैयार


बाकी खबरें

  • tourism sector
    भाषा
    कोरोना के बाद से पर्यटन क्षेत्र में 2.15 करोड़ लोगों को रोज़गार का नुकसान हुआ : सरकार
    15 Mar 2022
    पर्यटन मंत्री ने बताया कि सरकार ने पर्यटन पर महामारी के प्रभावों को लेकर एक अध्ययन कराया है और इस अध्ययन के अनुसार, पहली लहर में 1.45 करोड़ लोगों को रोजगार का नुकसान उठाना पड़ा जबकि दूसरी लहर में 52…
  • election commission of India
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली नगर निगम चुनाव टाले जाने पर विपक्ष ने बीजेपी और चुनाव आयोग से किया सवाल
    15 Mar 2022
    दिल्ली चुनाव आयोग ने दिल्ली नगर निगम चुनावो को टालने का मन बना लिया है। दिल्ली चुनावो की घोषणा उत्तर प्रदेश और बाकी अन्य राज्यों के चुनावी नतीजों से पहले 9 मार्च को होनी थी लेकिन आयोग ने इसे बिल्कुल…
  • hijab
    सीमा आज़ाद
    त्वरित टिप्पणी: हिजाब पर कर्नाटक हाईकोर्ट का फ़ैसला सभी धर्मों की औरतों के ख़िलाफ़ है
    15 Mar 2022
    इस बात को दरअसल इस तरीके से पढ़ना चाहिए कि "हर धार्मिक रीति का पालन करना औरतों का अनिवार्य धर्म है। यदि वह नहीं है तभी उस रीति से औरतों को आज़ादी मिल सकती है, वरना नहीं। "
  • skm
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा
    15 Mar 2022
    एसकेएम ने फ़ैसला लिया है कि अगले महीने 11 से 17 अप्रैल के बीच एमएसपी की क़ानूनी गारंटी सप्ताह मना कर राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरूआत की जाएगी। 
  • Karnataka High Court
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिजाब  मामला: हिजाब इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने खारिज की याचिका
    15 Mar 2022
    अदालत ने अपना फ़ैसला सुनते हुए यह भी कहा कि शिक्षण संस्थानों में यूनिफ़ॉर्म की व्यवस्था क़ानूनी तौर पर जायज़ है और इसे संविधान के तहत दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन नहीं कहा जा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License