NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
गणतंत्र दिवस की ट्रैक्टर परेड पर टिकी नज़रें, राजस्थान-हरियाणा सीमा पर महिलाओं ने किया प्रदर्शन का नेतृत्व
चाहे यह मंच के प्रबंधन की बात हो या जनता को भाषण देने की, या फिर किसी मुद्दे पर भूख हड़ताल में भाग लेने की, शाहजहांपुर प्रदर्शन स्थल 18 जनवरी को प्रदर्शनकारियों द्वारा मनाए गए महिला किसान दिवस में हर चीज का प्रबंधन महिलाओं ने किया।
रौनक छाबड़ा
19 Jan 2021
गणतंत्र दिवस की ट्रैक्टर परेड पर टिकी नज़रें, राजस्थान-हरियाणा सीमा पर महिलाओं ने किया प्रदर्शन का नेतृत्व

शाहजहांपुर/अलवर: चाहे यह मंच के प्रबंधन की बात हो या जनता को भाषण देने की, या फिर किसी मुद्दे पर भूख हड़ताल में भाग लेने की, शाहजहांपुर प्रदर्शन स्थल 18 जनवरी को प्रदर्शनकारियों द्वारा मनाए गए महिला किसान दिवस में हर चीज का प्रबंधन महिलाओं ने किया। प्रदर्शनकारियों ने कृषि में महिलाओं के अतुलनीय योगदान को सम्मान देने के लिए महिला किसान दिवस को मनाया था।

महिलाओं ने दिल्ली-जयपुर हाईवे पर ट्रैक्टर भी चलाए। अब सभी की नज़रें गणतंत्र दिवस पर होने वाली ट्रैक्टर परेड पर हैं। इसलिए महिलाओं ने और इसे "ट्रायल रन" भी बताया। दिल्ली-जयपुर हाईवे शाहजहांपुर प्रदर्शन स्थल से होकर गुजरता है। यह राजस्थान और हरियाणा को जोड़ता है।

किसान संगठन के साझा मंच "संयुक्त किसान मोर्चा" ने 26 जनवरी को राजधानी दिल्ली में ट्रैक्टर जुलूस निकालने का आह्वान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा दिल्ली की सीमाओं पर हो रहे इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहा है।

सभी प्रदर्शन स्थल, जहां किसान कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं, वहां महिला किसान दिवस मनाया गया।

शाहजहांपुर सीमा पर "ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेन एसोसिएशन (AIDWA)" की प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकला वर्मा कहती हैं, "यहां महिलाओं ने प्रदर्शन स्थल का प्रबंधन किया और इस मौके पर सिर्फ़ महिला प्रदर्शनकारियों ने ही जनता को संबोधित किया।"

वर्मा बताती हैं, "जब महिलाएं बोल रही थीं, तब उन्होंने अपनी ज़्यादातर बात गांवों में उनके कृषि में दिए जाने वाले सक्रिय योगदान पर केंद्रित रखी।"

भाषणों को सुनकर महिलाओं सभा में आगे की कतारों में आ गईं। यह महिलाएं राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, केरल, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और दूसरे राज्यों से आई हैं।

राजस्थान के बीकानेर से आने वाली डॉ सीमा जैन प्रदर्शन स्थल पर महिला वक्ताओं को संभाल रही हैं। उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया, "अलग-अलग राज्यों से आने वाली इन महिलाओं ने यहां नाच-गाने जैसे कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया।"

महिला कृषकों ने इस मौके पर एक और कार्यक्रम चालू किया है, जिसका नाम "थाप मारो मोदी को" है। महिला प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में एक लंबे सफेद कपड़े से बना बैनर भी थाम रखा था, जिस पर "किसान विरोधी कानून वापस लो" लिखा था। जैन के मुताबिक़ यह "एकता" दिखाने का तरीका था।

47 साल की परमिंदर कौर पंजाब के फिरोजपुर जिले से आती हैं। उनका कहना है कि महिलाएं अपने परिवारों को "बचाने के संघर्ष" में हमेशा सबसे "आगे" रहती हैं। वह कहती हैं, "नए कृषि कानूनों से हमारे परिवारों की आय बहुत कम हो जाएगी, जो पहले ही काफ़ी नीचे जा रही है.... ऐसे में कैसे घर चलेगा और कैसे बच्चे पलेंगे।"

यहां कौर के साथ उनके ही जिले की हमउम्र 15 महिलाएं शामिल हुई हैं। कौर बताती हैं कि वह पिछले एक महीने से भी ज़्यादा वक़्त से यहां डटी हुई हैं। कौर कहती हैं, "जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जातीं, हम वापस नहीं जाएंगे।" यह कहते हुए उनकी आंखों में अलग ही आत्मविश्वास उभरता है।

प्रेमलता अपनी उम्र के चौथे दशक में हैं। वह कहती हैं, "कुछ दिन पहले हमसे घर वापस जाने के लिए कहा गया। यह इसलिए कहा गया, क्योंकि अगर महिलाएं ज़्यादा दिन तक सड़कों पर रह गईं, तो मोदी सरकार के पास पीछे हटने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा।"

राजस्थान के अलवर से आने वाली प्रेमलता यहां जस्टिस एस ए बोबड़े की टिप्पणी पर बात कर रही थीं। सुप्रीम कोर्ट में किसानों से संबंधित याचिका पर सुनवाई करने के दौरान बोबड़े ने सवाल पूछते हुए कहा था कि महिलाओं और बूढ़ों को प्रदर्शन में क्यों शामिल किया गया है और उनसे वापस जाने की अपील की थी।

प्रेमलता कहती हैं, "सुप्रीम कोर्ट को यह जानना चाहिए कि महिलाएं हमेशा पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही हैं। हमारे खेतों में आइए और खुद देख लीजिए कि हम खेती-किसानी में कितना योगदान देते हैं।" नाराज प्रेमलता तब कहती हैं, "फिर हमें विरोध प्रदर्शन में शामिल क्यों नहीं होना चाहिए?"

महिलाओं द्वारा "अपने फ़ैसले लेने के अधिकार" के इस्तेमाल और सबसे ज़्यादा उसका सम्मान किए जाने को भी बाकी लोगों ने जरूरी बताया।

37 साल की रीना यादव हरियाणा के रेवाड़ी में शिक्षिका हैं। वह कहती हैं कि इस तरह के प्रदर्शन में महिलाओं की भागीदारी से कई बनी-बनाई मान्यताओं को भी चुनौती मिलती है, जो अब भी ग्रामीण इलाकों में उनके जीवन को प्रभावित करती हैं।

यादव कहती हैं, "गांवों में एक महिला को खेत और उसे परिवार की सेवा करनी होती है, वे अब भी अपनी फ़ैसले लेने के लिए स्वतंत्र नहीं होती हैं।"

वे इस बात को समझाते हुए खुद का उदाहरण देती है। वह कहती हैं कि उन्होंने सोमवार को प्रदर्शन में शामिल होने के पहले अपने पति को नहीं बताया था। वह कहती हैं, "अगर मैं उनसे कहती तो वो सीधा मना कर देते।"

शाहजहांपुर में पिछले महीने से हर दिन 11 लोग एक दिन का उपवास रखते हैं। यह उपवास उन लोगों को श्रद्धांजलि के तौर पर रखा जाता है, जिन्होंने मौजूदा किसान आंदोलन में अपनी जिंदगी खो दी। सोमवार को इस लंबी भूख हड़ताल में सभी महिलाओं ने भागीदारी निभाई।

35 साल की अश्विनी चौहान महाराष्ट्र के औरंगाबाद से आती हैं, उन्होंने भी सोमवार को भूख हड़ताल में हिस्सा लिया था। उन्हें कानून वापस लेने के साथ-साथ अपनी स्थानीय मांगों को भी उठाए जाने की उम्मीद है।

वह कहती हैं, "हमारा परिवार पांच एकड़ पर खेती करता है, लेकिन वह ज़मीन हमारे नाम पर पंजीकृत नहीं है। हमारे परिवार पर हमेशा यह डर छाया होता है कि कभी भी हमसे वह ज़मीन छीनी जा सकती है। हमें ज़मीन का पट्टा ही दे दिया जाए.... यह हमारे लिेए कई साल का संघर्ष हो चुका है।"

वह कहती हैं कि नया कृषि कानून उनके लिए चीजों को "बदतर" ही करेगा। उन्हें डर है कि नए सुधारों से फ़सल के बाज़ार मूल्य में और भी ज़्यादा कमी आ जाएगी।

सोमवार को राजस्थान के कोटपुतली के शुक्लावस गांव से 30 ट्रैक्टरों पर 100 के करीब प्रदर्शनकारी शाहजहांपुर सीमा पर पहुंचे हैं। इन्हें महिलाएं चलाकर लाई हैं।

इनका नेतृत्व 24 साल की निशा यादव कर रही हैं, जिनका दावा है कि गणतंत्र दिवस की परेड में महिलाएं "सबसे आगे" होंगी। वह कहती हैं, "आज की रैली बस ट्रायल रन है.... 26 जनवरी को ट्रैक्टर पर सवार महिलाएं मोदी को एक सबक सिखाएंगी।" पिछले 2-3 दिन से कई महिलाएं शाहजहांपुर सीमा पर ट्रैक्टर चलाना सीख रही हैं।

सोमवार को एक प्रेस स्टेटमेंट में "ऑल इंडिया किसान संघर्ष कोआर्डिनेशन कमेटी (AIKSCC) ने कहा, "300 से ज़्यादा जिलों की महिला किसानों ने किसान के तौर पर अपने अधिकारों की दृढ़ता दिखाई है। 75 फ़ीसदी से ज़्यादा कृषि कार्य महिलाओं द्वारा किया जाता है और यह तीन कृषि कानून उनकी आजीविका को तबाह कर देंगे, इससे उनका अस्तित्व ही ख़तरे में आ जाएगा।"

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Eyes on R-Day Tractor Parade, Women Take Charge of Protest at Rajasthan-Haryana Border

Mahila Kisan Diwas
Shahjahanpur Border
delhi-jaipur highway
farmers protest
Farm Laws
Rajasthan
Haryana
women farmers
Women Farmers Protest

Related Stories

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

हड़ताल के कारण हरियाणा में सार्वजनिक बस सेवा ठप, पंजाब में बैंक सेवाएं प्रभावित

हरियाणा: आंगनबाड़ी कर्मियों का विधानसभा मार्च, पुलिस ने किया बलप्रयोग, कई जगह पुलिस और कार्यकर्ता हुए आमने-सामने

हरियाणा : आंगनवाड़ी कर्मचारियों की हड़ताल 3 महीने से जारी, संगठनों ने सरकार से की बातचीत शुरू करने की मांग

दिल्ली में गूंजा छात्रों का नारा— हिजाब हो या न हो, शिक्षा हमारा अधिकार है!

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान

हरियाणा: आंगनवाड़ी कर्मचारियों के आंदोलन के 50 दिन पूरे

ख़बर भी-नज़र भी: किसानों ने कहा- गो बैक मोदी!


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में न Modi magic न Yogi magic
    06 Mar 2022
    Point of View के इस एपिसोड में पत्रकार Neelu Vyas ने experts से यूपी में छठे चरण के मतदान के बाद की चुनावी स्थिति का जायज़ा लिया। जनता किसके साथ है? प्रदेश में जनता ने किन मुद्दों को ध्यान में रखते…
  • poetry
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 'टीवी में भी हम जीते हैं, दुश्मन हारा...'
    06 Mar 2022
    पाकिस्तान के पेशावर में मस्जिद पर हमला, यूक्रेन में भारतीय छात्र की मौत को ध्यान में रखते हुए पढ़िये अजमल सिद्दीक़ी की यह नज़्म...
  • yogi-akhilesh
    प्रेम कुमार
    कम मतदान बीजेपी को नुक़सान : छत्तीसगढ़, झारखण्ड या राजस्थान- कैसे होंगे यूपी के नतीजे?
    06 Mar 2022
    बीते कई चुनावों में बीजेपी को इस प्रवृत्ति का सामना करना पड़ा है कि मतदान प्रतिशत घटते ही वह सत्ता से बाहर हो जाती है या फिर उसके लिए सत्ता से बाहर होने का खतरा पैदा हो जाता है।
  • modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: धन भाग हमारे जो हमें ऐसे सरकार-जी मिले
    06 Mar 2022
    हालांकि सरकार-जी का देश को मिलना देश का सौभाग्य है पर सरकार-जी का दुर्भाग्य है कि उन्हें यह कैसा देश मिला है। देश है कि सरकार-जी के सामने मुसीबत पर मुसीबत पैदा करता रहता है।
  • 7th phase
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव आख़िरी चरण : ग़ायब हुईं सड़क, बिजली-पानी की बातें, अब डमरू बजाकर मांगे जा रहे वोट
    06 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में अब सिर्फ़ आख़िरी दौर के चुनाव होने हैं, जिसमें 9 ज़िलों की 54 सीटों पर मतदान होगा। इसमें नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी समेत अखिलेश का गढ़ आज़मगढ़ भी शामिल है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License