NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
फेक्ट चेक : भाजपा विधायक ने साझा की भारत की फर्ज़ी सैटेलाइट फ़ोटो
एक तरफ लगातार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सुप्रीम कोर्ट आदि लगातार फेक न्यूज़ को रोकने की अपील कर रहे हैं। दूसरी तरफ चुने हुये प्रतिनिधियों का बिना सत्यापन के फ़ोटो सांझा करना चिंता का विषय है।
राज कुमार
06 Apr 2020
फर्ज़ी सैटेलाइट फ़ोटो

5 अप्रैल 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से अपील की थी कि वो अपने घर की लाइट बंद करके अपनी बालकनी में दीया, मोमबत्ती, टार्च या मोबाइल फ्लैश जलाएं और कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एकजुटता जाहिर करें। ये रात को 9 बजे शुरु होना था और 9 मिनट का कार्यक्रम था यानी 9 बजकर 09 मिनट तक।

रात को 9 बजकर 48 मिनट पर भाजपा महाराष्ट्र के कांदिवली ईस्ट के विधायक ने एक तस्वीर ट्विट की। जिसके बारे मे उन्होंने दावा किया कि ये कोरोना के खिलाफ भारत की एकजुटता की तस्वीर है। जिसे उपग्रह द्वारा लिया गया है।

image 1_18.JPG

ये तस्वीर फर्ज़ी है। जब इस तस्वीर को रिवर्स इमेज सर्च किया गया तो पता चला कि ये तस्वीर काफी पुरानी है और इस तस्वीर का कोरोना के खिलाफ दीपोत्सव से कुछ भी लेना देना नहीं है।

 image 2_14.JPG

द न्यूयोर्क टाइम्स की एक खबर में इस तस्वीर को नेशनल जियोफीजिकल डाटा सेंटर से साभार छापा है। कैप्शन में लिखा गया है कि a light map of India from 2003.

 image 3_9.JPG

एक और वेबसाइट पर इस तरह की इमेज छपी है। कैप्शन में वर्ष 2001 और 2011 की ग्रामीण विद्युतिकरण की तुलना की गई है।

 image 4_5.JPG

स्पष्ट है कि भाजपा विधायक अतुल भातखालकर द्वारा सांझा की गई तस्वीर का 05 अप्रैल 2020 के दीप जलाओ अभियान से कोई संबंध नहीं है।

एक तरफ लगातार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सुप्रीम कोर्ट आदि लगातार फेक न्यूज़ को रोकने की अपील कर रहे हैं। दूसरी तरफ चुने हुये प्रतिनिधियों का बिना सत्यापन के फोटो सांझा करना चिंता का विषय है।

(लेखक राज कुमार स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते रहते हैं।)

fact check
Satellite photo
Fake satellite photo
Atul Bhatkhalkar
BJP
9 minutes Drama
Narendra modi

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • नीलांजन मुखोपाध्याय
    यूपी: योगी 2.0 में उच्च-जाति के मंत्रियों का दबदबा, दलितों-पिछड़ों और महिलाओं की जगह ख़ानापूर्ति..
    02 Apr 2022
    52 मंत्रियों में से 21 सवर्ण मंत्री हैं, जिनमें से 13 ब्राह्मण या राजपूत हैं।
  • अजय तोमर
    कर्नाटक: मलूर में दो-तरफा पलायन बन रही है मज़दूरों की बेबसी की वजह
    02 Apr 2022
    भारी संख्या में दिहाड़ी मज़दूरों का पलायन देश भर में श्रम के अवसरों की स्थिति को दर्शाता है।
  • प्रेम कुमार
    सीबीआई पर खड़े होते सवालों के लिए कौन ज़िम्मेदार? कैसे बचेगी CBI की साख? 
    02 Apr 2022
    सवाल यह है कि क्या खुद सीबीआई अपनी साख बचा सकती है? क्या सीबीआई की गिरती साख के लिए केवल सीबीआई ही जिम्मेदार है? संवैधानिक संस्था का कवच नहीं होने की वजह से सीबीआई काम नहीं कर पाती।
  • पीपल्स डिस्पैच
    लैंड डे पर फ़िलिस्तीनियों ने रिफ़्यूजियों के वापसी के अधिकार के संघर्ष को तेज़ किया
    02 Apr 2022
    इज़रायल के क़ब्ज़े वाले क्षेत्रों में और विदेशों में रिफ़्यूजियों की तरह रहने वाले फ़िलिस्तीनी लोग लैंड डे मनाते हैं। यह दिन इज़रायली क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ साझे संघर्ष और वापसी के अधिकार की ओर प्रतिबद्धता का…
  • मोहम्मद सज्जाद, मोहम्मद ज़ीशान अहमद
    भारत को अपने पहले मुस्लिम न्यायविद को क्यों याद करना चाहिए 
    02 Apr 2022
    औपनिवेशिक काल में एक उच्च न्यायालय के पहले मुस्लिम न्यायाधीश, सैयद महमूद का पेशेवराना सलूक आज की भारतीय न्यायपालिका में गिरते मानकों के लिए एक काउंटरपॉइंट देता है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License