NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
फ़ैक्ट चेकः सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के फ़ैक्ट चेक का फ़ैक्ट चेक
सूचना एवं लोक संपर्क विभाग का फ़ैक्ट चेक ग़लत और भ्रामक है। इससे एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर उठता है कि उत्तर प्रदेश का सूचना एवं लोक संपर्क विभाग भाजपा की आइटी सेल की तरह व्यवहार क्यों कर रहा है?
राज कुमार
13 Jan 2022
fact check

उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं लोक संपर्क विभाग का एक अधिकारिक फ़ैक्ट चेक ट्विटर अकाउंट है। जो वायरल संदेशों का फ़ैक्ट चेक करता है। इसी अधिकारिक ट्विटर अकाउंट से सांसद शशि थरूर के एक ट्वीट का फ़ैक्ट चेक किया गया। सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के ट्वीट का शीर्षक था महिलाओं के बारे में मुख्यमंत्री जी के कथित विचार प्रदर्शित करने वाली पेपर कटिंग वायरल। शशि थरूर के ट्वीट के बारे में कहा गया कि यह भ्रामक है और वास्तविक तथ्यों को प्रस्तुत नहीं करता है। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के इस फ़ैक्ट चेक के ही फ़ैक्ट चेक की जरूरत है। तो आइये, पड़ताल करते हैं।

क्या है मामला?

9 सितंबर 2021 को शशि थरूर ने एक ख़बर की फोटो डालते हुए ट्वीट किया था। ख़बर का शीर्षक था “Women Not Capable of Being left Free or Independent” यानी महिलाएं सक्षम नहीं हैं कि उन्हें आज़ाद या स्वतंत्र छोड़ा जाए। शशि थरूर ने ट्वीट में लिखा था कि “आपको तालिबान की तरह सोचने के लिए दाढ़ी और पगड़ी की जरूरत नहीं है। क्या उत्तर प्रदेश की महिला वोटर वास्तव में चाहती हैं कि ये मुख्यमंत्री उनका प्रतिनिधित्व करे”। सूचना एवं लोक संपर्क विभाग ने इसी ट्वीट का फ़ैक्ट चेक किया है।

 

सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के फ़ैक्ट चेक की सच्चाई

शशि थरूर के ट्वीट का फ़ैक्ट चेक करते हुए सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के फ़ैक्ट चेक अकाउंट ने इसे भ्रामक और वास्तविक तथ्यों से दूर बताया। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि मुख्यमंत्री जी ने महिलाओं के संदर्भ में ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की है। सवाल उठता है कि क्या सचमुच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस तरह की कोई टिप्पणी नहीं की है?

जब इस बारे खोजबीन की गई तो पता चला कि ये कोई नया मामला नहीं है। पहले भी योगी आदित्यनाथ के बारे में ये विवाद सामने आया था। कांग्रेस ने वर्ष 2017 में भी योगी आदित्यनाथ की इसी टिप्पणी का मुद्दा उठाया था। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने मांग की थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और भाजपा को योगी आदित्यनाथ की इस टिप्पणी की निंदा करनी चाहिये और योगी आदित्यनाथ को निर्देश जारी करने चाहिये कि वो भविष्य में महिलाओं बारे कोई अपमानजनक और अभद्र टिप्पणी ना करें।

असल में मुद्दे की जड़ योगी आदित्यनाथ के द्वारा लिखा गया एक लेख है। ये लेख योगी आदित्यनाथ की वेबसाइट पर पब्लिश किया गया था। लेख का शीर्षक है “मातृशक्ति भारतीय संस्कृति के संदर्भ में”। विवाद के बाद इस लेख को योगी आदित्यनाथ की वेबसाइट से डिलीट कर दिया गया। लेख को आप इस आर्काइव लिंक पर पढ़ सकते हैं। इस लेख में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं के बारे में कई आपत्तिजनक और पिछड़ी टिप्पणियां की हैं। मनुस्मृति जैसे ग्रंथों से ऐसे दकियानूसी उदाहरणों का संदर्भ दिया है जो अपमानजनक और आपत्तिजनक हैं। नीचे हम उसी लेख का एक हिस्सा दे रहे हैं। पूरा लेख आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं।

“सर्व वन्द्येन यतिना प्रसूर्वन्द्या प्रयत्नत;। अर्थात् जो सबके लिए है उस संन्यासी को भी माता की वंदना प्रयत्नपूर्वक करनी चाहिये। पूज्य वंदनीय अस्तु, हमारे शास्त्रों में जहां स्त्री की इतनी महिमा वर्णित की गई है वहां उसकी महत्ता और मर्यादा को देखते हुए उसे सदा संरक्षण देने की बात भी कही गयी है। जैसे ऊर्जा को यदि खुला और अनियंत्रित छोड़ दिया जाय तो वह व्यर्थ और विनाशक भी हो सकता है, वैसे ही शक्ति स्वरूपा स्त्री को भी स्वतंत्रता की नहीं, उपयोगी रूप में संरक्षण और चैनलाइजेशन की आवश्यकता है। इसलिये जो शास्त्रों में कहा गया कि-

पिता रक्षति कौमारे, भर्ता रक्षति यौवने।

बालाः स्थविरे रक्षन्ति न स्त्री स्वातन्त्र्यर्हति।।

स्त्रीशक्ति की रक्षा बचपन में पिता करता है-, यौवन में पति करता है तथा बुढ़ापे में उसकी रक्षा पुत्र करता है इस प्रकार स्त्री सर्वथा स्वतंत्र या -मुक्त छोड़ने योग्य नहीं है। कहने की आवश्यकता नहीं है कि शास्त्रकारों के स्त्रियों की गरिमा मंडित करने वाले अन्य वचनों के आलोक में – न स्त्री स्वातन्त्र्यमर्हति- अर्थात स्त्री स्वतंत्रता योग्य नहीं है, इस वचन का तात्पर्य स्त्री को पराधीनता नहीं ऊर्जा के रूप में उसके संरक्षण और नियंत्रण से है। क्योंकि इस प्रकार से संरक्षित स्त्री शक्ति की ऊर्जा ही महापुरूषों की जन्मदात्री और धात्री बनती है तथा आवश्यकतानुसार स्वयं भी घर से रणभूमि तक प्रकट होकर आसुरी शक्तियों का संहार करती है।”

निष्कर्ष

सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के द्वारा किया गया फ़ैक्ट चेक गलत है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लिखे गये लेख में वे स्पष्ट तौर पर कह रहे हैं कि स्त्री को नियंत्रित करने की जरूरत है उसे स्वतंत्र नहीं छोड़ा जा सकता। सूचना एवं लोक संपर्क विभाग का फ़ैक्ट चेक गलत और भ्रामक है। इससे एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर उठता है कि उत्तर प्रदेश का सूचना एवं लोक संपर्क विभाग भाजपा की आइटी सेल की तरह व्यवहार क्यों कर रहा है?

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। वे सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते हैं। )

फ़ैक्ट चेकः पुरानी तस्वीरों को यूपी के विकास के प्रमाण के तौर पर पेश कर रही भाजपा

fact check
Uttar pradesh
Yogi Adityanath
BJP
Shashi Tharoor
Congress
UP Government
Information and Public Relations Department

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • Shiromani Akali Dal
    जगरूप एस. सेखों
    शिरोमणि अकाली दल: क्या यह कभी गौरवशाली रहे अतीत पर पर्दा डालने का वक़्त है?
    20 Jan 2022
    पार्टी को इस बरे में आत्ममंथन करने की जरूरत है, क्योंकि अकाली दल पर बादल परिवार की ‘तानाशाही’ जकड़ के चलते आगामी पंजाब चुनावों में उसे एक बार फिर से शर्मिंदगी का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।
  • Roberta Metsola
    मरीना स्ट्रॉस
    कौन हैं यूरोपीय संसद की नई अध्यक्ष रॉबर्टा मेट्सोला? उनके बारे में क्या सोचते हैं यूरोपीय नेता? 
    20 Jan 2022
    रोबर्टा मेट्सोला यूरोपीय संसद के अध्यक्ष पद के लिए चुनी जाने वाली तीसरी महिला हैं।
  • rajni
    अनिल अंशुमन
    'सोहराय' उत्सव के दौरान महिलाओं के साथ होने वाली अभद्रता का जिक्र करने पर आदिवासी महिला प्रोफ़ेसर बनीं निशाना 
    20 Jan 2022
    सोगोय करते-करते लड़कियों के इतने करीब आ जाते हैं कि लड़कियों के लिए नाचना बहुत मुश्किल हो जाता है. सुनने को तो ये भी आता है कि अंधेरा हो जाने के बाद सीनियर लड़के कॉलेज में नई आई लड़कियों को झाड़ियों…
  • animal
    संदीपन तालुकदार
    मेसोपोटामिया के कुंगा एक ह्यूमन-इंजिनीयर्ड प्रजाति थे : अध्ययन
    20 Jan 2022
    प्राचीन डीएनए के एक नवीनतम विश्लेषण से पता चला है कि कुंगस मनुष्यों द्वारा किए गए क्रॉस-ब्रीडिंग के परिणामस्वरूप हुआ था। मादा गधे और नर सीरियाई जंगली गधे के बीच एक क्रॉस, कुंगा मानव-इंजीनियर…
  • Republic Day parade
    राज कुमार
    पड़ताल: गणतंत्र दिवस परेड से केरल, प. बंगाल और तमिलनाडु की झाकियां क्यों हुईं बाहर
    20 Jan 2022
    26 जनवरी को दिल्ली के राजपथ पर होने वाली परेड में केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की झांकियां शामिल नहीं होंगी। सवाल उठता है कि आख़िर इन झांकियों में ऐसा क्या था जो इन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। केरल की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License