NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
फरीदाबाद : 'घर में ही रहें' की नसीहत के बीच खोरी गांव के 10 हज़ार परिवार को बेघर करने की तैयारी!
सर्वोच्च न्यायालय के 'अतिक्रमण' हटाने के आदेश के बाद से हरियाणा के फरीदाबाद में अरावली क्षेत्र में बसे खोरी गांव बस्ती के 10000 से भी ज़्यादा परिवारों पर बेघर होने का ख़तरा मंडरा रहा है।
मुकुंद झा
16 Jun 2021
फरीदाबाद : 'घर में ही रहें' की नसीहत के बीच खोरी गांव के 10 हज़ार परिवार को बेघर करने की तैयारी!

मोदी सरकार का लोकसभा चुनाव में बहुत बड़ा वादा था कि जहाँ झुग्गी वहीं मकान, लेकिन इसके विपरीत वर्तमान महामारी के समय में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई सहित कई राज्यों में अवैध अतिक्रमण के नाम पर हज़ारों लोगों को बेघर किया जा रहा है। बेघर करके उन्हें सड़कों पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर किया जा रहा है। ऐसे समय जब देश ही नहीं दुनिया अभूतपूर्व संकट कोरोना माहमारी का सामना कर रही है। जिस दौरान सरकार खुद भी घर में रहें, सुरक्षित रहें जैसे नारे और सबक जनता को दे रही है। ऐसे में लोगो के आशियाने को छीनकर सड़क पर लाना कई सवाल खड़े करता है।

अभी ताज़ा मामला हरियाणा के फरीदाबाद में अरावली क्षेत्र में बसे खोरी गाँव बस्ती का है। जहाँ 10 हजार से भी ज्यादा परिवारों पर बेदखली व बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है।

आपको बता दे 7 जून को उच्चतम न्यायालय ने एक याचिका की सुनवाई में खोरी गाँव बस्ती के लोगों को हटाने के लिए फरीदाबाद नगर निगम व प्रशासन को 6 सप्ताह का समय दिया है। आदेश के बाद से ही बस्ती में नोटिस लगा दिया गया और वहां पर भारी पुलिस बल तैनात कर बस्ती को छावनी में बदल दिया गया है।

बस्ती सुरक्षा मंच, वर्किंग पीपल चार्टर, बंधुआ मुक्ति मोर्चा और एनएपीएम ने एक साझा बयान जारी कर बताया है कि फिलहाल बस्ती में 20 हजार से भी अधिक बच्चे, गर्भवती महिलाएं, व एकल परिवार के साथ वृद्ध व निःशक्त जन रहते हैं। किसी भी वैकल्पिक व्यवस्था के बिना यह बेदखली इन सभी वर्गों के लिए जानलेवा हमला के समान है।

एक सप्ताह पहले उच्चतम न्यायलय ने आदेश जारी कर गांव खोरी की जमीन पर बने मकानों को हटाने के आदेश दिए हैं। आदेश के अनुसार, 10 हजार मकान को तोड़ा जाना है। हालांकि, न्यायलय के आदेश आए एक सप्ताह हो गया है। प्रशासन ने भी अब यह बेदखली करने का पूरा मन बना लिया है। सोमवार से इस इलाके में बिजली पानी काट दिया है। इससे डरकर कुछ लोगों ने अपने घर मकान छोड़ दिए हैं, लेकिन एक बड़ी आबादी भी भी वहीं जमी है और उनका कहना है कि परिणाम कुछ भी हो लेकिन वह किसी भी हाल में अपने घरों को छोड़कर नहीं जाएंगे।

साथ ही लोगों ने प्रशासन से पहले भूमाफिया पर कार्रवाई की मांग की है। क्योंकि उन्होंने ये ज़मीन उन्ही से खरीदी थी। प्रशासन ने भी जो सर्वे कराया उसमें पता चला कि 800 से अधिक प्लाट काटकर बेचे जा चुके हैं। इसको लेकर वहां रहने वाले लोगो का कहना है उन्होंने अपनी पूरे जीवन की कमाई से अपना घर बनाया और अब एक झटके उसे तोड़ने की बात हो रही है। जिससे वो घबराए हुए हैं।

लोगों का यह भी कहना है कि ऐसी आपदा की परिस्थिति में शासन-प्रशासन अदालत से भी अभी कार्रवाई पर रोक की प्रार्थना कर सकता था। लेकिन सरकार ही उन्हें बेदखल करना चाहती है।

बस्ती को बचाने की कोशिश कर रहे लोगो का कहना है कि प्रशासन की ओर से किसी भी तरह के पुनर्वास की बात नहीं की जा रही है और निर्वाचित प्रतिनिधि लोगों से मिलने को तैयार नहीं हो रहे हैं। बस्ती में जो भी बेदखली का विरोध करता है उसे गिरफ्तार कर लिया जा रहा है। अभी तक 150 से भी अधिक स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता व बंधुआ मुक्ति मोर्चा के महासचिव निर्मल गोरना को भी पुलिस ने 15 जून को गिरफ्तार किया व बिना किसी मुकदमे के भी 10 घण्टे से अधिक थाने में रखा।

हालांकि प्रशासन ने दावा किया है कि वो लोगों को इलाक़े को खाली करने में मदद कर रहा है और यहाँ से शिफ्ट कर रहे लोगो के लिए गाड़ी की व्यवस्था की गई है जिससे वो अपना समान ले जा सकते हैं। साथ ही दो दिन के अस्थाई कैंप की भी बात कही जा रही है।

बस्ती में स्थिति बिगड़ती जा रही है और लोग कुछ सोच नहीं पा रहे हैं। कई स्थानीय लोगों ने आत्महत्या की भी कोशिश की है। बस्ती को लेकर प्रशासन कुछ स्पष्ट नहीं कर रहा व लाखों लोगों का जीवन अधर में अटका हुआ है वहीं उसी ज़मीन पर सैकड़ों फार्म हाउस, होटल व उद्योगों को कोई खतरा नहीं बताया जा रहा।

ये कोई पहला मौका नहीं है जब सरकारों की शह पर इस तरह के अभियान चलाएं जा रहे हों। इससे पहले पिछले साल जुलाई अगस्त में हरियाणा के गुरुग्राम में 600 परिवारों को नगरपालिका ने बेघर कर दिया था। ये सभी परिवार लगभग 25-30 वर्षों से गुरुग्राम के सिकंदरपुर इलाक़े के आरावली क्षेत्र में रहते थे। इसी तरह इस महामारी काल में दक्षिण दिल्ली में कालका स्टोन, दक्षिणी दिल्ली में तुगलकाबाद रेलवे बस्ती और पूर्वी दिल्ली में चिल्ला खादर में बड़ी बेदखली के साथ दिल्ली में लगभग 300 परिवार बेघर किए गए। इसी तरह मुंबई में इसी वर्ष अप्रैल में अतिक्रमण के नाम पर झुग्गियों को ध्वस्त कर दिया गया, जिससे लगभग 600 परिवार बेघर हो गए और कई लोग वायरस की चपेट में आ गए।

यह कोई अकेला मामले नहीं है राष्ट्रीय आवास अधिकार अभियान एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस महामारी और लॉकडाउन के समय में देशभर में ऐसे 100 से अधिक डेमोलिशन यानी तोड़-फोड़ की कार्रवाई हुईं हैं।

मानवाधिकार कार्यकर्ता इस तरह की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि “ किसी भी अदालत का आदेश कोरोना माहमारी के विस्तार को रोकने के लिए सरकारी गाइडलाइन को नहीं तोड़ सकता है।"

उनका मानना है कि, "मौजूदा स्थितियों को देखते हुए, जबकि सरकार लोगों को घर के अंदर रहने, हाथ धोने और सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए कह रही है, इन परिवारों को अदालत के आदेशों के पालन के लिए सड़कों पर पंहुचा दिया गया है,यह पूरी तरह गैरमानवीय कदम है।"

कई सामाजिक कार्यकर्ता दबे स्वर में कहते है " सरकारें शहरी इलाक़ों से ग़रीबों को बाहर निकालने के लिए महामारी की स्थिति का फ़ायदा उठा रहे हैं”। इसका विरोध करते हुए, यह वर्ग बेदख़ली अभियान पर रोक लगाने की मांग कर रहा है।  

Haryana
municipality
Manohar Lal khattar
BJP
Slum Area
10000 families homeless
Coronavirus
Pandemic Coronavirus
Poor People's
poverty
Homeless People
Faridabad Municipal Corporation
Faridabad
Khori village

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • राजेंद्र शर्मा
    मुस्कुराहट वाला नफ़रती बोल, नफ़रती नहीं होता
    28 Mar 2022
    कटाक्ष: जरा सोचिए, नये इंडिया को ऐेसे किसी भी कदम की कितनी ज़रूरत थी, जो देश में खुशी बढ़ाए, देश के खुशी सूचकांक को ऊपर उठाए। जब से विश्व खुशी सूचकांक में भारत खिसक कर 136वें नंबर पर पहुंचा है।
  • लाल बहादुर सिंह
    "जनता और देश को बचाने" के संकल्प के साथ मज़दूर-वर्ग का यह लड़ाकू तेवर हमारे लोकतंत्र के लिए शुभ है
    28 Mar 2022
    इस ऐतिहासिक हड़ताल से यह भरोसा पैदा होता है कि लड़ाकू मज़दूर, किसानों तथा छात्र-नौजवानों के साथ मिलकर जनता के सच्चे प्रतिपक्ष का निर्माण करेंगे तथा कारपोरेट हिंदुत्व के राष्ट्रीय विनाश के अभियान पर…
  • शोला लवाल
    अफ़्रीकी देश अपनी मुद्रायें यूरोप से क्यों छपवाते हैं
    28 Mar 2022
    आज़ादी के दशकों बाद भी कम से कम 40 अफ़्रीकी देश यूके, फ़्रांस और जर्मनी में अपनी मुद्रा छपवाते हैं,यह स्थिति दरअस्ल उनकी आत्मनिर्भरता पर सवाल उठाती है। इस लेख में डीडब्ल्यू ने इसी बात की पड़ताल किया…
  • न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,270 नए मामले, 31 मरीज़ों की मौत
    28 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.04 फ़ीसदी यानी 15 हज़ार 859 हो गयी है।
  • भाषा
    ऑस्कर में ‘ड्राइव माय कार’ को मिला सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फिल्म का पुरस्कार
    28 Mar 2022
    फिल्म को इससे पहले ‘गोल्डन ग्लोब’ और ‘बाफ्टा’ पुरस्कार में भी सम्मानित किया गया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License