NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
किसान आंदोलन : 'आम जनता का संघर्ष है जिसे किसान लड़ रहे हैं'
आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि ये क़ानून किसान के लिए तो मौत का फ़रमान है ही लेकिन ये देश की बड़ी आबादी के लिए भी ख़तरनाक है।
मुकुंद झा
04 Dec 2020
किसान आंदोलन

पिछले दो दशकों के सबसे बड़े किसान आंदोलन को हम देख रहे हैं। इस मोदी सरकार के कार्यकाल में ये उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है। किसान साफतौर पर कह रहा है कि उसके लिए कृषि कानूनों की वापसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं, जबकि सरकार चाहती है कि कुछ संशोधन करके काम चला लिया जाए। किसान नेताओं ने इसे सरकार की लीपापोती से अधिक कुछ नहीं कहा। इसके साथ ही जब हम आंदोलनकारी किसानों से बात करते हैं तो वे कहते हैं कि ये कानून किसान के लिए तो मौत का फ़रमान है ही लेकिन ये देश की बड़ी आबादी के लिए भी ख़तरनाक है।

सरकार-किसानों के बीच बातचीत में गतिरोध बरकरार

कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के नेतृत्व में तीन केंद्रीय मंत्रियों के साथ आंदोलनकारी किसानों के प्रतिनिधिमंडल की बृहस्पतिवार को हुई बैठक भी बेनतीजा रही। लगभग आठ घंटे चली इस बैठक में किसान नेता नए कृषि कानूनों को रद्द करने की अपनी मांग पर कायम रहे।

किसान नेताओं ने बातचीत के दौरान सरकार की तरफ से की गयी दोपहर के भोजन, चाय और पानी की पेशकश को भी ठुकरा दिया।

सरकार ने बातचीत के लिये पहुंचे विभिन्न किसान संगठनों के 40 किसान नेताओं के समूह को आश्वासन दिया कि उनकी सभी वैध चिंताओं पर गौर किया जाएगा और उनपर खुले दिमाग से विचार किया जायेगा। लेकिन दूसरे पक्ष ने कानूनों में कई खामियों और विसंगतियों को गिनाते हुये कहा कि इन कानूनों को सितंबर में जल्दबाजी में पारित किया गया। बैठक शनिवार को फिर से शुरू होगी क्योंकि समय की कमी के कारण कोई अंतिम नतीजा नहीं निकल सका।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि यूनियनों की मुख्य मांग उक्त तीन कानूनों को निरस्त करने की है और सरकार ने किसान नेताओं द्वारा बताई गई 8-10 विशिष्ट कमियों को भी सुना है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम कोई संशोधन नहीं चाहते हैं। हम चाहते हैं कि इन कानूनों को निरस्त किया जाए।’’ मोल्लाह ने कहा कि सरकार के साथ अगले दौर की बातचीत के लिए सभी किसान संगठन शुक्रवार को सुबह 11 बजे बैठक करेंगे।

बैठक में कृषि मंत्री तोमर के अलावा, सरकार की ओर से रेलवे, खाद्य एवं उपभोक्ता मामले तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश जो कि पंजाब से सांसद हैं, भी बैठक में शामिल थे।

ये क़ानून किसान के साथ ही आम जनता के लिए ख़तरनाक है !

हरियाणा के हिसार से आये अखिल भारतीय किसान सभा के नेता मियां सिंह जिन्हें 25 नवंबर को हरियाणा पुलिस ने आंदोलन रोकने के लिए गिरफ़्तार कर लिया था, हालांकि उन्हें 27 को कोर्ट ने ज़मानत दी और वो रिहा हुए, उसके बाद वो सीधे दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के आंदोलन में शामिल हुए, उन्होंने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा "ये आंदोलन सिर्फ़ किसान का ही नहीं बल्कि पूरे मेहनतकश वर्ग का है। हालांकि आम जनता की इस लड़ाई को लड़ किसान रहे हैं।"

मियां सिंह ने कहा अगर ये क़ानून वापस नहीं हुए तो देश के करोड़ों खेत मज़दूर, गरीब मज़दूर , खुदरा व्यापारी से लेकर आम उपभोक्ता सब परेशान होंगे। क्योंकि इस क़ानून में मंडी को ख़त्म करने की साज़िश के साथ ही बड़े पूंजीपतियों को मन चाहा भंडारण करने की छूट है जिससे वो होर्डिंग कर अपनी मर्जी से बाज़ार की मांग और पूर्ति को प्रभावित करेंगे। जिससे वो अपने मुनाफे के लिए मंहगाई को बढ़ाएंगे।

उन्होंने उदाहरण देते कहा आप अभी आलू की कीमत को देखिए जबकि पिछले दो सालो में हमारे यहां इसका रिकॉर्ड 2019-20 में आलू का कुल उत्पादन 50.19 मिट्रिक टन था। इस साल 48.66 मिट्रिक टन हुआ है। फिर भी आलू की क़ीमत आसमान छू रही है जबकि किसान ने अपना आलू मात्र 2-2 रुपये किलो में बेचा था।

उनके साथ आए एक अन्य साथी ने कहा इन कानूनों से किसान तो मरेगा ही लेकिन बचेगा भी कोई नहीं, इससे फायदा केवल और केवल बड़े पूंजीपतियों को है। उन्होंने बताया रिटेल व्यापार में व्हाट्सअप, गूगल और रिलायंस जैसी कंपनियां निवेश कर रही है,जो हमारे देश के छोटे खुदरा व्यापारियों को खा जाएगी (ख़त्म कर देगी )

लगभग 70 वर्षीय वृद्ध जसवंत कौर जो पंजाब के संगरूर से किसान जत्थे के साथ दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर आई हैं और वहां बैठकर वो सरकार को ललकार रही है उन्होंने अपने काँपती हुयी बुलंद आवाज़ में न्यूज़क्लिक से कहा "ये हमारे बच्चों की जिंदगी का सवाल है, अगर यह क़ानून आ गया तो हमारे बच्चे दूसरे की गुलामी करेंगे हमारी ज़मीन सरकार बड़े सेठों को दे रही है। जो हम नहीं होने देंगे।"

आपको बता दें ऐसे ही दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे किसानों ने भी अपनी माँगों के साथ ही कई अन्य मांग उठाईं जो आम जनमानस से जुड़ी हुई है। जैसे वहां आंदोलनरत किसानों ने उत्तर प्रदेश के कई ग्रामीण इलाके को एनसीआर में शामिल करने का विरोध किया और कहा हमें एनसीआर में डाल दिया लेकिन सुविधा कोई नहीं दी जबकि क़ानून सभी एनसीआर वाले लगा दिए, जैसे डीजल बसों, ट्रक और ट्रैक्टर को दस साल में कूड़े में डालना पड़ता है।

किसानों का सरकार के साथ ही कॉरपोरेट के ख़िलाफ़ भी विरोध-प्रदर्शन

एआईकेएससीसी के वर्किंग ग्रुप ने घोषणा की है कि 5 दिसम्बर 2020 को नरेन्द्र मोदी सरकार तथा विशालकाय कॉरपोरेट अडाणी व अम्बानी के बड़े पैमाने पर पुतले फूंके जाएंगे। संभावना है कि देश में 5000 स्थानों पर ये विरोध प्रदर्शन होंगे।

भविष्य के कार्यक्रम

1. आज 4 दिसम्बर को जनसंगठनों द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन।

2. आज 4 व कल 5 दिसम्बर को विरोध सभाओं का आयोजन, चक्का जाम आदि।

एआईकेएससीसी ने केन्द्र सरकार के किसान विरोधी, जन विरोधी कानून व नीति के खिलाफ आयोजित किये जा रहे सभी कार्यक्रमों का स्वागत किया है और केन्द्र सरकार की इन नीतियों को पराजित करने के लिए इनके योगदान की सराहना की।

एआईकेएससीसी ने कहा कि वह नेताओं के खिलाफ किये जा रहे दमन की निन्दा करती है और मांग करती है कि हिरासत में लिये गये सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए। एआईकेएससीसी ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो जनता का और बड़ा प्रतिरोध सामने आएगा।

सभी फोटो मोहित सौदा द्वारा खींची गई है 

farmers protest
AIKS
Singhu Border
BJP
CAA
NRC
NPR
NRIC
Narendra modi
BJP
Farm bills 2020

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल


बाकी खबरें

  • Victims of Tripura
    मसीहुज़्ज़मा अंसारी
    त्रिपुरा हिंसा के पीड़ितों ने आगज़नी में हुए नुकसान के लिए मिले मुआवज़े को बताया अपर्याप्त
    25 Jan 2022
    प्रशासन ने पहले तो किसी भी हिंसा से इंकार कर दिया था, लेकिन ग्राउंड से ख़बरें आने के बाद त्रिपुरा सरकार ने पीड़ितों को मुआवज़ा देने की घोषणा की थी। हालांकि, घटना के तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के…
  • genocide
    अजय सिंह
    मुसलमानों के जनसंहार का ख़तरा और भारत गणराज्य
    25 Jan 2022
    देश में मुसलमानों के जनसंहार या क़त्ल-ए-आम का ख़तरा वाक़ई गंभीर है, और इसे लेकर देश-विदेश में चेतावनियां दी जाने लगी हैं। इन चेतावनियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
  • Custodial Deaths
    सत्यम् तिवारी
    यूपी: पुलिस हिरासत में कथित पिटाई से एक आदिवासी की मौत, सरकारी अपराध पर लगाम कब?
    25 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार दावा करती है कि उसने गुंडाराज ख़त्म कर दिया है, मगर पुलिसिया दमन को देख कर लगता है कि अब गुंडाराज 'सरकारी' हो गया है।
  • nurse
    भाषा
    दिल्ली में अनुग्रह राशि नहीं मिलने पर सरकारी अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ ने विरोध जताया
    25 Jan 2022
    दिल्ली नर्स संघ के महासचिव लालाधर रामचंदानी ने कहा, ‘‘लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल, जीटीबी हस्पताल और डीडीयू समेत दिल्ली सरकार के अन्य अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ ने इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग…
  • student
    भाषा
    विश्वविद्यालयों का भविष्य खतरे में, नयी हकीकत को स्वीकार करना होगा: रिपोर्ट
    25 Jan 2022
    रिपोर्ट के अनुसार महामारी के कारण उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों में विश्वविद्यालयों के सामने अनेक विषय आ रहे हैं और ऐसे में विश्वविद्यालयों का भविष्य खतरे में है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License