NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
किसान आंदोलन: एक दिन में तीन किसानों की मौत, अब तक 50 से अधिक गंवा चुके हैं जान, ज़िम्मेदार कौन?
इतनी जानें जा चुकी हैं लेकिन सरकार की किसानों के प्रति कोई संवेदना नहीं दिख रही है। ऐसे में सवाल उठाता है क्या इन मौत की ज़िम्मेदार सरकार नहीं, तो फिर कौन?
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
04 Jan 2021
किसान आंदोलन

केन्द्र के कृषि कानूनों के खिलाफ एक महीने से ज़्यादा समय से धरना-प्रदर्शन कर रहे किसानों में से रविवार को तीन और किसानों की मौत हो गई। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बॉर्डरों पर जमे किसानों में से टिकरी बॉर्डर पर एक जबकि कुंडली बॉर्डर पर दो किसानों की ठंड लगने से मौत हो गई। जबकि नए साल के अवसर पर दिल्ली यूपी बॉर्डर पर क्रमश एक और दो जनवरी को दो किसानो ने अपनी जान गंवा दी। अभी तक एक अनुमान के मुताबिक लगभग 55 किसान अपनी जान गंवा चुके है। लेकिन सरकार इसपर पूरी तरह से चुप्पी साढ़े हुए है।

केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे तीन और किसानों की मौत हो गई। यह जानकारी रविवार को पुलिस ने दी। उन्होंने बताया कि एक किसान की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई, एक अन्य किसान बुखार से पीड़ित था जबकि तीसरे किसान की मौत का कारण पता नहीं चला है।

पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान पंजाब के संगरूर जिले के लिधरा गांव के रहने वाले शमशेर सिंह (करीब 45 वर्ष), पंजाब के बठिंडा जिले के चाउके गांव के रहने वाले जशनदीप सिंह (18) और हरियाणा के जींद के रहने वाले जगबीर सिंह (60) के तौर पर हुई है। शमशेर सिंह सिंघु बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल थे जबकि जगबीर सिंह टीकरी बॉर्डर पर प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे थे। अधिकतर किसान 26 तारीख से ही इस संघर्ष का हिस्सा थे।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि शमशेर ने रविवार की सुबह सीने में दर्द होने की शिकायत की थी। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम के बाद मौत के कारणों का पता चलेगा। बहादुरगढ़ थाने के एक अधिकारी ने बताया कि जगबीर की टिकरी बॉर्डर पर मौत हो गई।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हुई। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम के बाद शव उनके परिवार के सदस्यों को सौंप दिया गया।

पुलिस ने कहा कि जशनदीप की मौत शनिवार की शाम को हुई। वह टिकरी बॉर्डर पर आंदोलनकारी किसानों का समर्थन करने गए थे। जशनदीप बुखार से पीड़ित थे और उन्हें रोहतक के पीजीआईएमएस ले जाया गया जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

केंद्र के तीन कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब और हरियाणा सहित देश के विभिन्न राज्यों के किसान दिल्ली की सीमाओं पर 40 दिनों से धरना दे रहे हैं। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने केंद्र से किसानों की मांग मान लेने की अपील की।

रविवार को सोनीपत में संवाददाताओं से उन्होंने कहा कि स्थिति ‘‘चिंताजनक’’ है क्योंकि पिछले 24 घंटे में कुछ प्रदर्शनकारी किसानों की मौत हो चुकी है।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ. राकेश टिकैत जी ने किसानों की आत्महत्या पर संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार किसानों के धैर्य की परीक्षा न ले। किसानों का बलिदान व्यर्थ नही जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के लिए सरकार से मुआवज़ा देने को कहा है।

"पहली बार ऐसी अहंकारी सरकार सत्ता में है"

इतनी जानें जा चुकी है लेकिन सरकार की किसानों के प्रति कोई संवेदना नहीं दिख रही है। ऐसे में सवाल उठता है क्या इन मौत की जिम्मेदार सरकार नहीं, तो फिर कौन? क्योंकि ये किसान 26 नवंबर से लगातर केंद्र से तीन नए कृषि कानून वापस लेने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे है। हालंकि अभीतक एक भी किसान की मौत पर सत्तधारी दल की तरफ से कोई शोक संवेदना नहीं आई है। जबकि हमारे प्रधनमंत्री इतने अधिक संवेदनशील है कि वो तो एक क्रिकेटर के अंगुली में चोट लगने पर संवेदनाऐं प्रकट करते हैं। यहाँ तक कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधनमंत्री की माता जी के मौत पर भी दुःखी हो उठते हैं लेकिन अपने देश के किसानों की मौत पर चुप्पी साधे रहते हैं। किसान पूछते हैं ऐसा क्यों है? क्या वो इन मौत से ज़रा भी व्यथित नहीं हुए या उन्हें किसानों की मौत से कोई फ़र्क ही नहीं पड़ता है।

किसानों के प्रदर्शन को लेकर केंद्र की आलोचना करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रविवार को कहा कि देश की आजादी के बाद से पहली बार ऐसी ‘‘अहंकारी’’ सरकार सत्ता में आई है, जिसे अन्नदाताओं की ‘‘पीड़ा’’ दिखाई नहीं दे रही है। साथ ही, उन्होंने नये कृषि कानूनों को बिना शर्त फौरन वापस लेने की मांग की।

कांग्रेस अध्यक्ष ने एक वक्तव्य में कहा, ‘‘लोकतंत्र में जनभावनाओं की उपेक्षा करने वाली सरकारें और उनके नेता लंबे समय तक शासन नहीं कर सकते। अब यह बिल्कुल साफ़ है कि मौजूदा केंद्र सरकार की ‘थकाओ और भगाओ’ की नीति के सामने आंदोलनकारी धरती पुत्र किसान मज़दूर घुटने टेकने वाले नहीं हैं।’’

सोनिया ने कहा, ‘‘अब भी समय है कि (नरेंद्र) मोदी सरकार सत्ता के अहंकार को छोड़कर तत्काल बिना शर्त तीनों काले क़ानून वापस ले और ठंड एवं बारिश में दम तोड़ रहे किसानों का आंदोलन समाप्त कराए। यही राजधर्म है और दिवंगत किसानों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि भी।’’

उन्होंने कहा कि (केंद्र की) मोदी सरकार को यह याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र का अर्थ ही जनता एवं किसान-मज़दूरों के हितों की रक्षा करना है।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यरमंत्री अखिलेश यादव ने गाजीपुर बार्डर पर किसान की आत्महत्या की घटना के लिए रविवार को भारतीय जनता पार्टी की सरकार को दोषी ठहराया।

सपा अध्यपक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को ट़वीट किया, 'किसान आंदोलन में गाजीपुर बार्डर पर वयोवृद्ध किसान की आत्महत्या की खबर बेहद दुखद है, श्रद्धांजलि। किसान अपने भविष्य को बचाने के लिए जान दे रहा है लेकिन भाजपा सरकार बेतुके तर्कों व झूठे तथ्यों से काले कृषि कानून थोपना चाहती है। किसान की मृत्यु के लिए भाजपा दोषी है।'

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

farmers protest
Farm bills 2020
Farmers Death
BJP
farmers protest update
Narendra modi
Modi government

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल


बाकी खबरें

  • KALICHRAN
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    भड़काऊ बयान देने का मामला : पुणे पुलिस ने कालीचरण को हिरासत में लिया
    05 Jan 2022
    कालीचरण वही महाराज है जिसने छत्तीसगढ़ की (अ)धर्म संसद में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। इसके खिलाफ पुणे में भी एक मामला दर्ज है।
  • Taliban
    एम.के. भद्रकुमार
    तालिबान सरकार को मान्यता देने में अनिच्छुक क्यों है पाकिस्तान?
    05 Jan 2022
    तालिबान के दो अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि सीमा पर हुई एक घटना को लेकर तालिबान और पाक सेना ‘आमने-सामने’ हो गयी थीं और स्थिति ‘तनावपूर्ण’ थी। घटना के बाद 22 दिसंबर को उत्तर में कुनार सूबे की सीमा…
  • ख़बर भी-नज़र भी: किसानों ने कहा- गो बैक मोदी!
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ख़बर भी-नज़र भी: किसानों ने कहा- गो बैक मोदी!
    05 Jan 2022
    13 महीने चले किसान आंदोलन के स्थगित होने के बाद यह मोदी का पहला पंजाब दौरा है। इस बीच वे एक बार भी न किसानों के बीच गए न पंजाब गए। अब चुनाव हैं तो पंजाब जाना उनकी मजबूरी बन गया है, लेकिन किसान मोदी…
  • CORONA
    न्यूज़क्लिक टीम
    सावधान: देश में 6 महीने बाद कोरोना के 50 हज़ार से ज्यादा नए मामले सामने आए
    05 Jan 2022
    देश में आज 6 महीने बाद कोरोना के 50 हज़ार से ज्यादा यानी 58,097 नए मामले दर्ज किये गए हैं। और कुल मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 50 लाख 18 हज़ार 358 हो गयी है।
  • रौनक छाबड़ा
    हरियाणा की 20,000 हड़ताली आंगनवाड़ी कार्यकर्ता करनाल में करेंगी रैली
    05 Jan 2022
    2018 में घोषित की गई वेतन वृद्धि को लागू करने की मांग को लेकर आंगनवाड़ी की महिलाएँ और सहायिकाएं 8 दिसंबर, 2021 से हड़ताल पर हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License