NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आसमान छू रहीं ईंधन क़ीमतों के ख़िलाफ़ हुए अखिल भारतीय प्रदर्शन में शामिल हुए किसान संगठन
एक किसान नेता ने कहा, "अगर हमें अंतरिम राहत नहीं पहुंचाई गई, तो हम हर गांव से लोगों को इकट्ठा करेंगे और बीजेपी विधायकों के कार्यालयों को घेरेंगे।"
रवि कौशल
09 Jul 2021
आसमान छू रहीं ईंधन क़ीमतों के ख़िलाफ़ हुए अखिल भारतीय प्रदर्शन में शामिल हुए किसान संगठन

नई दिल्ली: बुधवार को किसान संगठनों ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के खिलाफ़ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान लोग अपने दो और चार पहिया वाहनों पर खाली गैस सिलेंडर लेकर सड़कों पर निकले। 

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के साथ ऊंचे केंद्रीय करों के चलते, पहले से ही महामारी से बदहाल हो चुकी आम लोगों की जिंदगी बदतर होती जा रही है। दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों के विरोध में 7 महीने से प्रदर्शन कर रहे किसानों ने भी इन बढ़ती कीमतों के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया। 

टिकरी बॉर्डर पर मौजूद किसानों ने 2.5 किलोमीटर लंबा जुलूस निकाला। इस दौरान कीमतों में हो रही बढ़ोत्तरी के खिलाफ़ लगातार नारे लगाए जाते रहे। न्यूज़क्लिक से फोन पर बात करते हुए भारतीय किसान यूनियन (कादियां) के बलदेव सिंह ने कहा, "ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ़ टिकरी बॉर्डर पर हुए प्रदर्शन में कई किसान शामिल हुए।" सिंह ने कहा कि प्रदर्शन में यह गुप्त संदेश देना था कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के चलते किसान अपने वाहनों को चलाने का भार नहीं उठा पा रहे हैं।

BKU (दाकुंडा) के महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा कि जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों से समाज का हर वर्ग, जिसमें कामग़ार, छात्र, महिलाएं और दूसरे लोग शामिल हैं, वे सभी प्रभावित हो रहे हैं। सिंघु बॉर्डर पर मौजूद जगमोहन सिंह कहते हैं, "किसान आंदोलन की शुरुआत से ही हमें इन समूहों को बहुत समर्थन मिला है। अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनके मुद्दों को अपने हाथों में लें और तुरंत राहत की मांग करते हुए आवाज़ उठाएं।"

एक दूसरे किसान नेता कुलवंत सिंह संधू ने न्यूज़क्लिक को बताया कि देशव्यापी प्रदर्शन करने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि विपक्षी पार्टियां बहुत कम विरोध कर रही हैं। वह कहते हैं, "बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी के साथ कई जगहों पर प्रदर्शन किए गए, इसमें छात्र और कामग़ार समूह भी शामिल हुए। कार्यक्रम में इसका भी प्रबंध किया गया कि जो लोग दिल्ली नहीं आ सकते, वे भी प्रदर्शन में शामिल हो सकें।"

हरियाणा

पेट्रोल- 97.70 रुपये प्रति लीटर, डीजल- 90.70 रुपये प्रति लीटर, रसोई गैस- 843.50 प्रति सिलेंडर

हरियाणा के सभी 22 जिलों में प्रदर्शन किए गए। राज्य की राजनीतिक राजधानी रोहतक में प्रदर्शनकारियों ने मानसरोवर पार्क से लेकर डिस्ट्रिक्ट कमिश्नरेट तक वाहनों की एक श्रंखला बनाई गई और अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए थालियां बजाईं।

'ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेन्स एसोसिएशन' की नेता जगमति सांगवान ने न्यूज़क्लिक से कहा कि बढ़ती बेरोज़गारी के साथ महंगाई ने कई महिलाओं को जरूरी चीजों के लिए भीख मांगने पर मजबूर कर दिया है। वे कहती हैं, "मैंने कभी इतनी महिलाओं को इतने दुख में नहीं देखा, वे सड़कों पर भटक रही हैं और चावल-आटे के लिए भीख मांग रही हैं। जब मैं इन महिलाओं से बात करती हूं, तो पता चलता है कि वे अब दालें नहीं खा रही हैं। वे अब आलू जैसे सस्ते विकल्प को अपना रही हैं।"

सांगवान ने कहा, "महामारी से कर्ज़ बढ़ा है। रोजाना होने वाली जलालत से कुछ लोग इतने तंग आ चुके हैं कि वे अपनी जि़ंदगी को ख़त्म तक कर देना चाहते हैं। इस सबके बीच, सरकार दोयम दर्जे के आटे और बाजरा का वितरण कर रही है। आप देखना कोई भी इस मौसम में बाजरा नहीं खाएगा, क्योंकि गर्म लहरें चल रही हैं। ऐसा लग रहा है जैसे घावों पर और नमक रगड़ा जा रहा है।"

हिमाचल प्रदेश

पेट्रोल- 95.86 रुपये प्रति लीटर, डीजल- 95.85 रुपये प्रति लीटर, रसोई गैस- 880 रुपये प्रति सिलेंडर

पहाड़ी प्रदेश में कुल्लु, कांगड़ा, सिरमौर, सोलन और ऊना जिलों में प्रदर्शन हुए। इस दौरान लोग खाली सिलेंडरों के साथ सड़कों पर निकले और बढ़ती कीमतों के खिलाफ़ अपना गुस्सा ज़ाहिर किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 2019 में प्रधानमंत्री मोदी के दूसरा कार्यकाल शुरू करने के बाद, अबतक डीजल और पेट्रोल की कीमतों में 24 बार वृद्धि हो चुकी है। 

सिरमौर के पोंटा साहिब में ऐसे ही एक प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले गुरविंदर सिंह ने न्यूज़क्लिक से कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से जो महंगाई बढ़ रही है, उसे महामारी के प्रभाव के साथ देखा जाना चाहिए, जिसके चलते लाखों लोग बेरोज़गार हो गए हैं। थोक कीमत सूचकांक पिछले 11 सालों में सबसे ऊपर, 12.5 फ़ीसदी के ऊपर पहुंच चुका है। 

वह कहते हैं, रसोई के तेल की कीमत 160 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है। यहां तक कि सब्ज़ियों का तेल तक 90 से बढ़कर 130 रुपये प्रतिलीटर तक पहुंच गया है। 

गुरविंद सिहं कहते हैं, "मुझे राशन डीलर्स ने बताया कि अब तो ऊचित मूल्य की दुकानों पर 50 फ़ीसदी लोग पहुंच ही नहीं रहे हैं, क्योंकि वहां भी सरसों के तेल की कीमत 165 रुपये प्रति लीटर है। ऊपर से अब किसानों को खेत में ट्रैक्टर चलाना बहुत मुश्किल पड़ रहा है। ट्रक और परिवहनकर्ताओं को भी अब पेट्रोल-डीजल की गर्मी महसूस हो रही है। सरकार को अपने करों को घटाकर कीमतें कम करनी चाहिए। अगर हमें अंतरिम राहत नहीं पहुंचाई गई, तो हम हर गांव से लोगों को इकट्ठा करेंगे और बीजेपी विधायकों के कार्यालयों को घेरेंगे।"

राजस्थान

पेट्रोल- 107 रुपये प्रति लीटर, डीजल- 95 रुपये प्रति लीटर, रसोई गैस- 870 रुपये प्रति सिलेंडर

चुरू, नागौर, बीकानेर, जयपुर ग्रामीण, श्रीगंगानगर, झुंझनू, करौली, सवाई माधोपुर, हनुमानगढ़ और सीकर में हुए बड़े स्तर के प्रदर्शनों में लोग खाली गैस सिलेंडर लेकर प्रदर्शन स्थलों पर पहुंचे। बता दें राजस्थान उन राज्यों में शामिल है, जहां कुछ जगहों पर पेट्रोल की कीमत 110 रुपये प्रति लीटर को तक पार कर चुकी है। 

श्रीगंगानगर के पवन दुग्गल ने न्यूज़क्लिक को फोन पर बताया कि लोगों के सामने अब आजीविका का बड़ा संकट पैदा हो गया है। उनके दिमाग में बस एक ही सवाल है- "हम जिंदा कैसे रहेंगे?"

वह आगे कहते हैं, "यह वह सवाल है जो समाज के हर तबके, चाहे वह छात्र, कामग़ार या महिलाएं हों, उन्हें सता रहा है। मैंने कल ही 870 रुपये का सिलेंडर खरीदा है। जब आप पेट्रोल पंप जाते हैं, तो आपको हर लीटर के लिए 110 रुपये चुकाने होते हैं। पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल सामान के परिवहन में होता है। इसलिए इनमें होने वाली बढ़ोत्तरी का असर हर चीज पर पड़ेगा।" 

गुजरात

पेट्रोल- 97.35 रुपये प्रति लीटर, डीजल- 96.48 रुपये प्रति लीटर, रसोई गैस- 842 रुपये प्रति लीटर

किसान संगठनों ने राजकोट, अरावली, सूरत, नवसारी, साबरकांठा, भावनगर और दाहोद जैसे आठ जिलों में प्रदर्शन किए। कई दूर-दराज के क्षेत्रों में भी प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए तख़्तियां दिखाईं।

अखिल भारतीय किसान सभा गुजरात के अध्यक्ष दयाभाई गजेरा कहते हैं कि "पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों से ग्रामीण भारत में भी तनाव बढ़ रहा है। अब तक पूरे राज्य में बारिश नहीं पहुंच पाई है। इसलिए लोगों के पास बुआई का काम नहीं आ रहा है। खरीददारी की क्षमता पूरी तरह ख़त्म हो चुकी है। आपने देखा होगा कि महामारी से हमारा राज्य कितने बुरे तरीके से प्रभावित हुआ था।"

उन्होंने बताया, "औद्योगिक केंद्रों में बहुत ज़्यादा गतिविधियां नहीं हो रही हैं। जब हम इस चीज को पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के साथ देखते हैं, तो हमें एक अभूतपूर्व संकट सामने खड़ा नज़र आता है। ऐसा संकट, जैसा कभी इतिहास में नहीं देखा गया।" 

जब उनसे सरकार समर्थकों का अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमतें ज़्यादा होने के तर्क के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "हमारे यहां गुजराती में एक कहावत है जिसका मतलब होता है कि किसी बकरी से कभी भी दूध लगाया जा सकता है। मोदी के लिए पेट्रोलियम उत्पाद बकरी की तरह ही हैं। सरकार समर्थक यह क्यों नहीं बताते कि सरकार को हर एक रुपये पर 60 पैसे कर मिल रहा है। संक्षिप्त में कहें तो दैनिक कमाई के ज़रिए गुजर-बसर करने वाले कामग़ारों को भार से दबाया जा रहा है और उन्हें किसी तरह की राहत उपलब्ध नहीं है।"

एक वक्तव्य में सम्युक्त किसान मोर्चा ने कहा कि संगठन को उत्तराखंड, बिहार, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तमिलनाडु में प्रदर्शन की रिपोर्टें मिली हैं। 

इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Farmers’ Organisations Join Pan-India Protest Against Sky-Rocketing Fuel Prices

AIKS
SKM
petrol prices
Inflation
BKU
Farmer protests
fuel prices
Inflation

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

क्या जानबूझकर महंगाई पर चर्चा से आम आदमी से जुड़े मुद्दे बाहर रखे जाते हैं?

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

गतिरोध से जूझ रही अर्थव्यवस्था: आपूर्ति में सुधार और मांग को बनाये रखने की ज़रूरत

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

महंगाई की मार मजदूरी कर पेट भरने वालों पर सबसे ज्यादा 

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी


बाकी खबरें

  • yogi
    एम.ओबैद
    सीएम योगी अपने कार्यकाल में हुई हिंसा की घटनाओं को भूल गए!
    05 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गोरखपुर में एक बार फिर कहा कि पिछली सरकारों ने राज्य में दंगा और पलायन कराया है। लेकिन वे अपने कार्यकाल में हुए हिंसा को भूल जाते हैं।
  • Goa election
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोवा चुनाव: राज्य में क्या है खनन का मुद्दा और ये क्यों महत्वपूर्ण है?
    05 Feb 2022
    गोवा में खनन एक प्रमुख मुद्दा है। सभी पार्टियां कह रही हैं कि अगर वो सत्ता में आती हैं तो माइनिंग शुरु कराएंगे। लेकिन कैसे कराएंगे, इसका ब्लू प्रिंट किसी के पास नहीं है। क्योंकि, खनन सुप्रीम कोर्ट के…
  • ajay mishra teni
    भाषा
    लखीमपुर घटना में मारे गए किसान के बेटे ने टेनी के ख़िलाफ़ लोकसभा चुनाव लड़ने का इरादा जताया
    05 Feb 2022
    जगदीप सिंह ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने उन्हें लखीमपुर खीरी की धौरहरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि वे 2024 के लोकसभा…
  • up elections
    भाषा
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पहला चरण: 15 निरक्षर, 125 उम्मीदवार आठवीं तक पढ़े
    05 Feb 2022
    239 उम्मीदवारों (39 प्रतिशत) ने अपनी शैक्षणिक योग्यता कक्षा पांच और 12वीं के बीच घोषित की है, जबकि 304 उम्मीदवारों (49 प्रतिशत) ने स्नातक या उससे ऊपर की शैक्षणिक योग्यता घोषित की है।
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    "चुनाव से पहले की अंदरूनी लड़ाई से कांग्रेस को नुकसान" - राजनीतिक विशेषज्ञ जगरूप सिंह
    05 Feb 2022
    पंजाब में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के दावेदार की घोषणा करना राहुल गाँधी का गलत राजनीतिक निर्णय था। न्यूज़क्लिक के साथ एक खास बातचीत में राजनीतिक विशेषज्ञ जगरूप सिंह ने कहा कि अब तक जो मुकाबला…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License