NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
किसान संसद : महिला किसानों की ललकार, गद्दी छोड़े मोदी सरकार
बात बोलेगी: महिला किसान नेताओं ने महात्मा गांधी द्वारा 1942 में 9 अगस्त को दिए गए ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ के नारे को याद करते हुए ‘मोदी गद्दी छोड़ो, कॉरपोरेट देश छोड़ो’ के नारे के साथ मोदी सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया।
भाषा सिंह
09 Aug 2021
किसान संसद : महिला किसानों की ललकार, गद्दी छोड़े मोदी सरकार

करीब 15 राज्यों की किसान महिलाओं ने 9 अगस्त 2021 को एतिहासिक बनाया। किसान संसद का नेतृत्व करते हुए इन महिला किसान नेताओं ने महात्मा गांधी द्वारा 1942 में 9 अगस्त को दिए गए ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ के नारे को याद करते हुए ‘मोदी गद्दी छोड़ो, कॉरपोरेट देश छोड़ो’ के नारे के साथ मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया। देश की राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर भीषण सुरक्षा के बीच चल रही किसान संसद ने 13 दिनों तक विधिवत तरीके से तीनों कृषि बिलों पर चर्चा करते हुए इन्हें न सिर्फ देश के अन्नदाताओं के खिलाफ बल्कि देश के आम नागरिक के लिए विनाशकारी बताया और इन्हें रद्द कर दिया गया।

तेरह दिनों तक चली किसान संसद में दो दिन महिला किसानों के नाम थे—जिसमें तमाम राज्यों से आई हुईं महिला किसान नेताओं ने निर्धारित समय के भीतर (करीब 3-5 मिनट) अपनी बातें रखीं। आज किसान संसद में दो एक्सपर्ट वक्ता भी बुलाए गये थे—जिनमें अर्थशास्त्री नवशरण कौर और पटियाला विश्वविद्यालय की प्रो. अनुपमा। इन दोनों के भाषणों से ही आज की संसद की कार्यवाही शुरू हुई, जो शाम तक चलती रही।

नवशरण कौर ने तीनो कानूनों के किसान विरोधी और देश विरोधी चेहरे को उजागर करते हुए कहा,  किसान संसद ने देश और दुनिया को दिखाया कि किस तरह से लोकतंत्र को बहस-मुबाहिसें के साथ जिंदा रखना चाहिए। दरअसल किसान आंदोलन लोकतंत्र की एक पाठशाला है, जहां संविधान, अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जबर्दस्त शिक्षा-दीक्षा हो रही है। जिस तरह से महिला किसानों ने कमान संभाली है आंदोलन की और आज यहां से मोदी सरकार के खिलाफ हुकुम जारी किया गया है, वह लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

जिस तरह का गुस्सा और आक्रोश महिला किसान नेताओं में था और जिस तरह से वे इस बात को दोहरा रही थीं कि जब तक ये तीन कृषि कानून वापस नहीं लिये जाते, तब तक वे अपने आंदोलन में डटी रहेंगी, इसे आगे बढ़ाती रहेंगी। आज किसान महिला संसद में भारत के उन तमाम खिलाड़ियों को शाबाशी दी गई, जो ओलंपिक में मेडल जीत कर आए और जिन्होंने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया। इस बारे में  ट्रॉली टाइम्स की संपादक नवकिरण नट ने कहा, कम से कम ओलंपिक में जिस तरह से किसानों की बेटियों और बेटों ने अपनी मेहनत दिखाई है, उससे तो मोदी सरकार को चेत जाना चाहिए। ओलंपिक मेडल जीतने वाले इस देश की मिट्टी से जुड़े हुए खिलाड़ी हैं, उन्हें ज्यादा से ज्यादा हौसला किसानी ने दिया है और इससे पता चलता है कि किसानों में कितना दम है। अगर हम ठान लें तो कुछ भी कर सकते हैं।

हरियाणा की अंतरराष्ट्रीय शूटर पूनम पंडित जो उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के इस्माइलपुर से वास्ता रखती हैं, उन्होंने पूरे तेवर के साथ कहा,  ओलंपिक में किसानों की मेहनत चमकी है, गोल्ड मेडल किसान का बेटा लाया है। किसान आज कह रहा है कि मोदी सरकार ठीक नहीं कर रही, बिना मतलब के हिंदू-मुसलमान कर रही है—देश बांट रही है, तो सरकार को सुनना पड़ेगा। देश के किसान को कमजोर समझकर मोदी सरकार ने गलती कर दी। अब हम किसान औरतें उसे ठीक करके ही चैन पाएंगी।

लखनऊ से आई महिला नेता मीना सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही नहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी योगी- मोदी सरकार के खिलाफ गुस्सा है। यह आने वाले विधानसभा चुनावों में सत्ता परिवर्तन की राह खोल सकता है। जिस तरह से किसानों और आम नागरिकों के हकों की बटमारी की जा रही है, उससे सिर्फ हिंदू-मुसलमान कार्ड खेलकर जनता को भरमाया नहीं जा सकता।

किसान संसद के पहले सत्र की स्पीकर प्रो. रणधीर कौर भंगु और वाइस स्पीकर रीमन नैन

तीन सत्रों में बंटे आज के सत्र में बड़ी संख्या में महिला किसान नेताओं ने शिरकत की। पहले सत्र की स्पीकर पंजाब की प्रो. रणधीर कौर भंगु और वाइस स्पीकर हरियाणा की रीमन नैन थी, जबकि दूसरे सत्र में उत्तर प्रदेश की सुनीता टिकैत और पंजाब की उषा रानी ने सत्र को संचालित किया। सभी ने एक स्वर में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर सहमति जताई और ऐलान किया कि मोदी सरकार को हटाना ही किसानों और देश के हित में है, क्योंकि वह सिर्फ कॉरपोरेट घरानों के लिए काम कर रही है।

 किसान संसद के दूसरे सत्र को सुनीता टिकैत और उषा रानी ने सत्र संचालित किया।

महिला किसानों का किसान संसद के आखिरी दिन को नेतृत्व करना और पूरे पेशेवर अंदाज में सत्र का पूर्ण आत्मविश्वास और राजनीतिक परिपक्वता के साथ संचालन करना—निश्चित तौर पर बदलते किसान आंदोलन की उजली तस्वीर है। क्या जिस तरह से 1942 में गांधी के भारत छोड़ो नारे की गूंज रही और भारत के इतिहास में वह एक अमिट छाप छोड़ पाया, क्या आज किसान संसद का नारा—मोदी गद्दी छोड़ो भी उस तरह का असर पैदा कर पाएगा---यह तो समय ही बताएगा।

कैमरे की नज़र से

kisan andolan
farmers protest
Mahila Kisan Sansad
Mahila kisan
Farm Bills
Farm Laws
Narendra modi
Modi government

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • अनिल अंशुमन
    झारखंड: हेमंत सरकार की वादाख़िलाफ़ी के विरोध में, भूख हड़ताल पर पोषण सखी
    04 Mar 2022
    विगत 23 फ़रवरी से झारखंड राज्य एकीकृत पोषण सखी संघ के आह्वान पर प्रदेश की पोषण सखी कार्यकर्ताएं विधान सभा के समक्ष अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी हुई हैं।
  • health sector in up
    राज कुमार
    यूपी चुनाव : माताओं-बच्चों के स्वास्थ्य की हर तरह से अनदेखी
    04 Mar 2022
    देश में डिलीवरी के दौरान मातृ मृत्यु दर 113 है। जबकि उत्तर प्रदेश में यही आंकड़ा देश की औसत दर से कहीं ज़्यादा 197 है। मातृ मृत्यु दर के मामले में उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है।
  • Mirzapur
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव : मिर्ज़ापुर के ग़रीबों में है किडनी स्टोन की बड़ी समस्या
    04 Mar 2022
    जिले में किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी के मामले बहुत अधिक हैं, और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के चलते पहले से ही दुखी लोगों की आर्थिक स्थिति ओर ख़राब हो रही है।
  • workers
    अजय कुमार
    सरकार की रणनीति है कि बेरोज़गारी का हल डॉक्टर बनाकर नहीं बल्कि मज़दूर बनाकर निकाला जाए!
    04 Mar 2022
    मंदिर मस्जिद के झगड़े में उलझी जनता की बेरोज़गारी डॉक्टर बनाकर नहीं, बल्कि मनरेगा जैसी योजनाएं बनाकर हल की जाती हैं।
  • manipur election
    न्यूज़क्लिक टीम
    मणिपुर चुनाव: भाजपा के धनबल-भ्रष्ट दावों की काट है जनता का घोषणापत्र
    03 Mar 2022
    ख़ास इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकारा भाषा सिंह ने बातचीत की ह्यूमन राइट्स अलर्ट के बबलू लोइतोंगबन से। आप भी सुनिए मणिपुर के राजनीतिक माहौल में मानवाधिकारों पर छाए ख़ौफ़ के साये के बारे में बेबाक बातचीत।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License