NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
देशभर में किसान मज़दूर मना रहे ‘काला दिवस’, जगह जगह फूंके जा रहे हैं मोदी सरकार के पुतले
लोग अपनी गाड़ियों और घरों पर भी काले झंडे लगाकर विरोध जता रहे हैं। हरियाणा में बड़ी संख्या में आशा आंगनवाड़ी कर्मी भी सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज करा रही हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
26 May 2021
देशभर में किसान मज़दूर मना रहे ‘काला दिवस’, जगह जगह फूंके जा रहे हैं मोदी सरकार के पुतले

आज यानी बुधवार, 26 मई को दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन के 6 महीने पूरा होने और केंद्र की मोदी सरकार के 7 साल पूरे होने पर सयुंक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर देशभर में काला दिवस मनाया जा रहा है। इसके तहत जगह जगह मोदी सरकार के पुतले फूंके जा रहे हैं और लोग अपनी गाड़ियों और घरों पर भी काले झंडे लगाकर विरोध जता रहे हैं।

किसानों के साथ ही अनेक मजदूर संगठन लोकतांत्रिक जनवादी संगठन एवं कई दलों ने विरोध दिवस का समर्थन किया है। इन सबका कहना है 26 मई का काला दिवस सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज तेज करने का दिन है।

आंदोलनकारियों का कहना है ' जहां एक तरफ किसान हर मौसम में हर स्थिति में अपने आप को मजबूत रखते हुए दिल्ली की सीमाओं पर 6 महीनों से संघर्ष कर रहे हैं, उसके विपरीत केंद्र की मोदी सरकार पिछले 7 सालों से किसानों समेत समाज के हर वर्ग का गहरा शोषण कर रही है। आज का दिन देश के तमाम जनवादी संगठन विरोध दिवस के तौर पर मना रहे हैं व केंद्र सरकार को एक सीधा संदेश दे रहे हैं कि लोकतंत्र में लोक बड़ा होता है, तंत्र नहीं।'


 संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने इस ऐतिहासिक दिन ‘ब्लैक डे’ पर किसानों, मजदूरों, युवाओं, छात्रों, कर्मचारियों, लेखकों, चित्रकारों, ट्रांसपोर्टरों, व्यापारियों और दुकानदारों सहित सभी वर्गों से अपना विरोध व्यक्त करने की अपील की है। किसान नेताओं ने कहा कि पक्के मोर्चो में काली पगड़ी और काली चुन्नी पहनी जाए। हालांकि कोरोना माहमारी को देखते किसान संगठनों ने कोई विशाल रैली नहीं करने का फैसला किया है, लेकिन चौक-चौराहों पर नारेबाजी व धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है।

संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर किसान और मज़दूर अपने-अपने गांवों और कालोनियों में किसान विरोधी 3 कृषि कानूनों के खिलाफ काला दिवस मना कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी के तहत दिल्ली से सटे नोएडा में भी सीटू सहित तमाम मजदूर संगठन ने अपना विरोध जताया।

मजदूर संगठन सीटू के कार्यकर्ताओं ने भी आज अपने संस्थानों में काली पट्टी बांधकर काम किया तथा जनपद में अनेकों स्थानों पर सीटू कार्यकर्ताओं ने काला दिवस की मांगों के प्ले कार्ड के साथ विरोध प्रदर्शन किए।

नोएडा में आयोजित विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू जिलाध्यक्ष गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कहा कि "जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है देश के मजदूर- किसान, गरीब आम जनता के हालात बद से बदतर हो गए हैं सरकार की गलत नीतियों के कारण बढ़ती महंगाई बेरोजगारी ने आज विकराल रूप ले लिया है यह सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है।"

हरियाणा और पंजाब में गांव में किसानों का विरोध जारी है। वहां किसान मोदी सरकार का पुतला फूंक रहे हैं और काले झंडे अपने घरो और गाड़ियों पर लगा रहे हैं। हरियाणा में बड़ी संख्या में आशा आंगनवाड़ी कर्मी भी सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज करा रही हैं।

दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में मज़दूर अपना विरोध जता रहे है और किसानों के मुद्दे का समर्थन करते हुए, साथ ही वो नए लेबर कोड का भी विरोध कर रहे है। इसी कड़ी में उत्तर पूर्व श्रम आयुक्त कार्यालय के बाहर दिल्ली सीटू अध्यक्ष के नेतृत्व में मज़दूरों ने काले झंडे और काली पट्टी के साथ अपने मांगों की तख्तियों के साथ अपना विरोध जताया।

गौरतलब है कि तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान दिल्ली की सिंघु, टिकरी और गाजीपुर सीमा पर नवंबर से ही प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि केंद्र सरकार का आज भी यही दावा है कि ये कानून किसानों के हित में हैं। किसानों और केंद्र के बीच इस मुद्दे पर 22 जनवरी से कोई बातचीत नहीं हुई है।

किसान नेता ने दावा किया, ‘‘बड़ी संख्या में किसान दिल्ली मोर्चों की ओर बढ़ रहे हैं।’’

भाकियू (एकता डकौंदा) के नेता जगमोहन सिंह पटियाला ने कहा कि किसान पंजाब के कई जिलों जैसे संगरुर, पटियाला, गुरदासपुर, मनसा, बठिंडा, मोगा, फरीदकोट, फाजिल्का से दिल्ली की सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। .

किसानों ने कहा कि बुजुर्गों के साथ-साथ युवा और महिलाएं भी वाहन में जरूरी सामान लेकर टिकरी और सिंघु बार्डर जा रहे हैं।

भाकियू नेता श्रृंगार सिंह ने कहा, ‘‘प्रत्येक रविवार को राज्य के सभी जिलों से किसान दिल्ली की सीमा पर जाते हैं और एक सप्ताह के बाद उनका स्थान नया समूह ले लेता है।’’

 

BLACK DAY
SKM
AIKS
CITU
modi sarkar
farmers protest

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • channi sidhu
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: ‘अनिवार्य’ वैक्सीन से सिद्धू-चन्नी के ‘विकल्प’ तक…
    23 Jan 2022
    देश के 5 राज्यों में चुनावों का मौसम है, इसलिए खबरें भी इन्हीं राज्यों से अधिक आ रही हैं। ऐसी तमाम खबरें जो प्रमुखता से सामने नहीं आ पातीं  “खबरों के आगे-पीछे” नाम के इस लेख में उन्हीं पर चर्चा होगी।
  • Marital rape
    सोनिया यादव
    मैरिटल रेप: घरेलू मसले से ज़्यादा एक जघन्य अपराध है, जिसकी अब तक कोई सज़ा नहीं
    23 Jan 2022
    भारतीय कानून की नज़र में मैरिटल रेप कोई अपराध नहीं है। यानी विवाह के बाद औरत सिर्फ पुरुष की संपत्ति के रूप में ही देखी जाती है, उसकी सहमति- असहमति कोई मायने नहीं रखती।
  • Hum Bharat Ke Log
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    महज़ मतदाता रह गए हैं हम भारत के लोग
    23 Jan 2022
    लोगों के दिमाग में लोकतंत्र और गणतंत्र का यही अर्थ समा पाया है कि एक समय के अंतराल पर राजा का चयन वोटों से होना चाहिए और उन्हें अपना वोट देने की कुछ क़ीमत मिलनी चाहिए।
  • Hafte Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    नये चुनाव-नियमों से भाजपा फायदे में और प्रियंका के बयान से विवाद
    22 Jan 2022
    कोरोना दौर में चुनाव के नये नियमों से क्या सत्ताधारी पार्टी-भाजपा को फ़ायदा हो रहा है? कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने प्रशांत किशोर पर जो बयान दिया; उससे कांग्रेस का वैचारिक-राजनीतिक दिवालियापन…
  • chunav chakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनाव चक्र: यूपी की योगी सरकार का फ़ैक्ट चेक, क्या हैं दावे, क्या है सच्चाई
    22 Jan 2022
    एनसीआरबी की रिपोर्ट है कि 2019 की अपेक्षा 2020 में ‘फ़ेक न्यूज़’ के मामलों में 214 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। फ़ेक न्यूज़ के जरिए एक युद्ध सा छेड़ दिया गया है, जिसके चलते हम सच्चाई से कोसो दूर होते…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License