NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर लामबंद किसानों ने तपती दुपरिया में केंद्र सरकार को अल्टीमेटम देते हुए दोबारा लंबी लड़ाई की मुहिम शुरू कर दी। वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, बलिया, मऊ, देवरिया, मिर्जापुर, सोनभद्र समेत पूर्वांचल के सभी जिलों के तहसील मुख्यालयों पर किसानों ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और प्रतिरोध मार्च निकला।
विजय विनीत
21 Mar 2022
Purvanchal

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी देने में हीलाहवाली, किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की वापसी समेत 11 प्रमुख मांगों को लेकर किसान एक बार फिर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुट गए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर पूर्वांचल में लामबंद किसानों ने तपती दुपरिया में केंद्र सरकार को अल्टीमेटम देते हुए दोबारा लंबी लड़ाई की मुहिम शुरू कर दी। वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, बलिया, मऊ, देवरिया, मिर्जापुर, सोनभद्र समेत पूर्वांचल के सभी जिलों के तहसील मुख्यालयों पर किसानों ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और प्रतिरोध मार्च निकला। आंदोलन को गति देने के लिए पूर्वांचल के सभी जिलों में किसानों की छोटी-छोटी टीमें तैयार की गई हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर वाराणसी के वरुणापुल स्थित शास्त्रीय घाट पर दोपहर में किसान एकत्र हुए और मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। कृषि उत्पादों पर स्वामीनाथन कमीशन द्वारा निर्धारित (सी2+50%) न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग उठाते हुए विद्या आश्रम की निदेशक डॉ. चित्रा सहश्रबुद्धे ने कहा, "मोदी सरकार एमएसपी की गारंटी देने में हीला-हवाली कर रही है। तीन महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने अपने आश्वासनों पर कुछ भी नहीं किया है। एमएसपी पर जो कमेटी बनाने का आश्वासन था उसका नामोनिशान भी नहीं है। यूपी में अभी तक किसानों के खिलाफ आंदोलन के दौरान दर्ज केस वापस नहीं लिए गए हैं। सबसे खराब स्थिति यूपी की है, जहां किसानों पर जुल्म और ज्यादतियां बढ़ती जा रही हैं। निर्दोष किसानों को जहां-तहां सताया जा रहा है। लखीमपुर खीरी कांड में सीएम योगी आदित्यनाथ की भूमिका न्यायदर्शी नहीं थी। अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए किसानों को फिर नए सिरे से लंबी लड़ाई लड़नी होगी। मोदी सरकार ने पश्चिम बंगाल में पराजय, यूपी चुनाव और राष्ट्रव्यापी आंदोलन के चलते तीनों काले कानूनों को वापस लिया, लेकिन वादे का बावजूद एमएसपी पर गारंटी कानून का बिल अभी तक नहीं लाया गया।"

किसान नेता अफलातून देसाई, चौधरी राजेंद्र सिंह, रामजी सिंह, शिवशंकर शास्त्री, लालमण वर्मा, डॉ. सुनील सहश्रबुद्धे, लक्ष्मण, प्रवाल जी ने मोदी सरकार की नीतियों पर प्रहार करते हुए कहा, "एमएसपी के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े-बड़े वादे किए, सभी कोरे निकले। गौर करने की बात है कि किसी देश के पीएम द्वारा किसानों को झूठा आश्वासन देने पर दुनिया क्या कहेगी?  एमएसपी के मुद्दे पर अब से पहले भी सभी सरकारों ने कमेटियां बनाईं, लेकिन उनके परिणाम कभी अच्छे नहीं रहे। आजादी के बाद किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए पांच आयोग बन चुके हैं, लेकिन किसी भी सरकार ने आयोगों की सिफारिशों को लागू नहीं किया। किसान चाहते हैं कि मोदी सरकार एमएसपी पर गारंटी कानून बनाए। जब तक किसानों की सभी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। भले ही हमें 2024 तक आंदोलन क्यों नहीं करना पड़े।" बनारस जिला मुख्यालय के अलावा पिंडरा और राजातालब में भी किसानों ने मोदी सरकार के खिलाफ मार्च निकालते हुए लंबी लड़ाई का अल्टीमेटम दिया।

चंदौली जिले के चकिया नगर पंचायत में किसानों ने 'आक्रोश-मार्च' निकाला, जो बाद में धरने में तब्दील हो गया। किसान नेता अजय राय ने कहा, "भाजपा सरकार किसानों को उनका वाजिब हक देने से कतरा रही है। यह सरकार सिर्फ दो-तीन कारपोरेट घरानों के लिए काम कर रही है। गौर करने की बात यह है कि कृषि लागत खर्च (C2) के अनुमान में किसान और उसके परिवार के श्रम को साधारण श्रम के रूप में देखा जाता है, जबकि वह कुशल श्रम होता है। किसानों को खेती-किसानी में कठिन प्रशिक्षण व परिश्रम से गुजरना पड़ता है। खाद, बीज, कृषि औजार और मशीनों के मूल्य को कम करना चाहिए। भूख सूचकांक के मामले में भारत लगातार पिछड़ता जा रहा है। ऐसे में गरीबों, भूमिहीन किसानों, मजदूरों के लिए 'संतुलित आहार गारंटी कानून' की मांग मजबूती से उठाने की जरूरत है।"

किसान आंदोलन में शामिल अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष परमानन्द कुशवाहा,  उत्तर प्रदेश किसान सभा के शुकदेव मिश्रा के अलावा किसान नेता लालचंद यादव, शंभूनाथ यादव, राजेन्द्र यादव, रामनिवास पांडेय ने बुनकरों को फ्लैट रेट पर बिजली देने और बटाईदार किसानों का पंजीकरण करते हुए उन्हें प्रमाण-पत्र देने का मुद्दा उठाया। यह भी कहा कि बाढ़ और सूखा में किसानों को सस्ती खाद, बीज, कीटनाशक और किसान सम्मान राशि और ग्रीन कार्ड दिया जाए।

जौनपुर के केराकत में मड़ियाहूं, बदलापुर, जंघई, मछलीशहर, शाहगंज, सदर तहसील मुख्ययों पर किसानों ने आक्रोश मार्च निकालते हुए सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने का अल्टीमेटम दिया। केराकत में बचऊ राम के नेतृत्व राष्ट्रपति को संबोधित 11 सूत्रीय मांगपत्र भेजा गया। जौनपुर में किसानों के जुलूस-प्रदर्शन में भाकियू और खेत मजदूर किसान संग्राम समिति के सदस्यों ने हिस्सा लिया। यहां किसान नेता राजनाथ यादव, विश्वनाथ गुप्ता, किरन शंकर सिंह, जयप्रकाश सिंह, रमेश यादव, राजदेव यादव, कैलाश राम, नमःनाथ शर्मा एडेवोकेट ने कहा, "किसानों के खिलाफ दर्ज तमाम फर्जी मामले अभी तक खत्म नहीं हुए हैं। रेल रोको आंदोलन के समय जिन किसानों के खिलाफ संगीन धाराओं में मामले दर्ज किए गए थे, वो जस के तस पड़े हैं। लाचारी में किसानों को अदालतों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।"

आजमगढ़ में भारतीय किसान यूनियन, किसान संग्राम समिति, मजदूर-किसान एकता मंच, खेत मजदूर और किसान संग्राम समिति, किसान महासभा, जय किसान आंदोलन के संयुक्त तत्वाधान में अमर शहीद कुंवर सिंह उद्यान में किसान एकत्र हुए और कलेक्ट्रेट भवन तक 'रोष-मार्च' निकाला। बाद में डीएम को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। किसान नेता राजेश आजाद, दुखहरन राम, विनोद सिंह, रामकरन राम, वेदप्रकाश उपाध्याय, अवधराज यादव, नंदलाल, राहुल विद्यार्थी, राजनेत यादव, तेजबहादुर, सूबेदार यादव ने कलेक्टर से साफ-साफ कहा, "हमारा लोकतंत्र पर अटूट भरोसा है। आंदोलन के जरिए हम सरकार के विश्वासघात और अन्याय को सामाजिक पटल पर पटल पर लाना चाहते हैं। किसानों के लिए यह चिंता के विषय है कि लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड के साजिशकर्ता अभी तक कुर्सी पर विराजमान हैं। एक तरफ मुख्य अभियुक्त जमानत पर छूटकर घूम रहा और दूसरी ओर शहीद किसानों के पक्ष में खड़े तमाम आंदोलनकारियों को देश भर की तमाम जेलों में सड़ाया जा रहा है। कातिलों को जमानतें दी जा रही हैं और देश के निर्दोष किसानों को न छोड़ने के लिए नित नए हथकंडे आजमाए जा रहे हैं। यह स्थिति तब है जब पीएम मोदी ने किसानों के सभी मामलों को खत्म करने के लिए सार्वजनिक रूप से ऐलान किया किया था।"

बलिया में जनार्दन सिंह, पीएन राय, डॉ. सत्यनारायण, रामजी सिंह, बलवंत यादव ने किसानों के पक्ष में लंबी लड़ाई का आगाज किया। गाजीपुर, मऊ, देवरिया के अलावा मिर्जापुर, सोनभद्र और भदोही में भी किसानों ने तहसील और कलेक्ट्रेट मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया और प्रशासनिक अधिकारियों को राष्ट्रपति के नाम 11 सूत्री मांग-पत्र सौंपा। प्रतिरोध मार्च के दौरान पूर्वांचल के किसानों ने यूपी के लखीमपुर खीरी का मुद्दा उठाया और कहा कि किसानों को बर्बर तरीके से रौंद दिया गया। दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन सरकार ने मजबूती से किसानों का पक्ष नहीं रखा और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के बेटे को छूट जाने दिया। एमएसपी की गारंटी के मामले में 11 से 17 अप्रैल के बीच एमएसपी गारंटी सप्ताह मनाया जाएगा। वादे से मुकर रही भाजपा सरकार को आड़ेहाथ लिया जाएगा।

Uttar pradesh
Purvanchal
kisan andolan
farmers movement
MSP
MSP for farmers
Samyukt Kisan Morcha
SKM
Narendra modi
Modi government

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

अनुदेशकों के साथ दोहरा व्यवहार क्यों? 17 हज़ार तनख़्वाह, मिलते हैं सिर्फ़ 7000...


बाकी खबरें

  • Yogi
    रश्मि सहगल
    यूपी चुनाव: पिछले 5 साल के वे मुद्दे, जो योगी सरकार को पलट सकते हैं! 
    29 Jan 2022
    यूपी की जनता में इस सरकार का एक अजीब ही डर का माहौल है, लोग डर के मारे खुलकर अपना मत ज़ाहिर नहीं कर रहे हैं लेकिन अंदर ही अंदर एक अलग ही लहर जन्म ले रही है, जो दिखाई नहीं देती। 
  • Pegasus
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    पेगासस मामले में नया खुलासा, सीधे प्रधानमंत्री कठघरे में, कांग्रेस हुई हमलावर
    29 Jan 2022
    अमेरिकी समाचार पत्र ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की खबर के अनुसार, 2017 में भारत और इजराइल के बीच हुए लगभग दो अरब डॉलर के अत्याधुनिक हथियारों एवं खुफिया उपकरणों के सौदे में पेगासस स्पाईवेयर तथा एक मिसाइल…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: कैसे करेंगे चुनाव प्रचार? जब बागों में ही नहीं है कोई बहार! 
    29 Jan 2022
    बिहार चुनाव होते हैं तो नीतीश बाबू अपने 15 साल के शासन को भुलाकर लालू-राबड़ी की सरकार को कोसते रहते हैं, लेकिन यूपी में किसको कोसेंगे? यहाँ तो उनके ही भाई-बंधुओं की सरकार है।
  • potato farming UP
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: आलू की कीमतों में भारी गिरावट ने उत्तर प्रदेश के किसानों की बढ़ाईं मुश्किलें
    29 Jan 2022
    ख़राब मौसम और फसल की बीमारियों के बावजूद, यूपी की आलू बेल्ट में किसानों ने ऊंचे दामों की चाह में आलू की अच्छी पैदावार की है। हालांकि, मौजूदा खुदाई के मौसम में गिरती कीमतों ने उनकी उम्मीदों पर पानी…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के नए मामले तो कम हुए लेकिन प्रति दिन मौत के मामले बढ़ रहे हैं  
    29 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,35,532 नए मामले सामने आए हैं | इसके अलावा कोरोना से बीते दिन 871 मरीज़ों की मौत हुई है और देश में अब तक 4 लाख 93 हज़ार 198 लोग अपनी जान गँवा चुके हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License