NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मध्य प्रदेश: अपनी बर्बादी का तमाशा देखने को मजबूर राजगढ़ के किसान
मध्य प्रदेश सरकार 1375 करोड़ की एक वृहद सिंचाई परियोजना शुरू करने जा रही है। सरकार द्वारा तर्क दिया जा रहा है कि यहां खेती के लिए भरपूर पानी नहीं है, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि यहां सिंचाई के लिए इतना पानी है कि वे यहां साल में तीन फसल ले पा रहे हैं।
रूबी सरकार
01 Feb 2022
mp farmer

मध्यप्रदेश सरकार की एक वृहद सिंचाई परियोजना का राजगढ़ ज़िले के ग्रामीणों द्वारा विरोध किया जा रहा है। ये भारत के वे लोग हैं, जो अपनी बर्बादी का तमाशा अपनी आंखों से देखने को मजबूर हैं। ये वे लोग हैं, जिनकी खेतों में खड़ी फसल पर जेसीबी चलाई जा रही है। न पंचायत से और न गांव वालों से सहमति ली गई। मध्य प्रदेश सरकार 1375 करोड़ की एक वृहद सिंचाई परियोजना यहां से शुरू करने जा रही है। सरकार द्वारा तर्क दिया जा रहा है कि यहां खेती के लिए भरपूर पानी नहीं है, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि यहां सिंचाई के लिए इतना पानी है कि वे यहां साल में तीन फसल ले पा रहे हैं-सोयाबीन, मूंग और गेहूं।

ग्रामीणों का कहना है कि इस जमीन पर एक एकड़ में करीब 25 कुंतल गेहूं का पैदावार होता है। राजगढ़ जिले के सुठालिया विकासखंड के तत्कालीन भाजपा विधायक ने इस सिंचाई परियोजना के काम को आगे बढ़ाया। हालांकि अब वे विधायक नहीं हैं फिर भी पार्वती नदी पर इस परियोजना को स्वीकृति दे दी। पीढ़ियों से रह रहे यहां के किसान अब विस्थापन का दंश झेलने को मजबूर हैं। लोकतांत्रिक गणराज्य का यह कौन सा रूप सरकार का है। लोगों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, इसे कतई लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं कहा जा सकता। इस सिंचाई परियोजना के अंतर्गत 41 गांवों की लगभग 4330 हेक्टेयर भूमि डूब में जा रही है। लोग ही नहीं एक पूरी संस्कृति विस्थापित हो रही है। 

दरअसल इस वृहद सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति मध्यप्रदेश शासन, जल संसाधन विभाग, मंत्रालय ने 1375 करोड़ रुपए, 24 लाख , 42 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचाई के लिए यूएसआर 2017 में प्रदान की गई है। उस वक्त भाजपा के नारायण सिंह पवार यहां के विधायक थे। योजना के अन्तर्गत मुख्य बांध का निर्माण ग्राम-बैराड़ तहसील-सुठालिया, जिला राजगढ़ एवं ग्राम ख़ैराड़, तहसील- मधुसूदनगढ़, जिला गुना के मध्य पार्वती नदी पर कराया जाना है।

परियोजना के अंतर्गत 41 गांवों की लगभग 4330 हेक्टेयर भूमि डूब से प्रभावित हो रही है। राजगढ़ जिले की सुठालिया तहसील के 25 गांवों की लगभग 2385 हेक्टेयर निजी भूमि, गुना जिले की मकसूदनगढ़ तहसील के 8 गांवों की लगभग 739 हेक्टेयर निजी भूमि एवं भोपाल जिले की बैरसिया तहसील के 8 गांवों की लगभग 266 हेक्टेयर निजी भूमि डूब प्रभावित हो रही है। प्रभावित गांवों के अंतर्गत राजगढ़ जिले की सुठालिया तहसील के 2 गांवों गुर्जर खेड़ी खुर्द एवं गुर्जरखेड़ी कलां एवं गुना जिले की मकसूदनगढ़ तहसील के  एक गांव रघुनाथपुरा पूरी तरह डूब प्रभावित हो रहे हैं।

वर्तमान में भूमि अर्जन, पुनर्वासन ,पुनर्व्यवस्थापन में प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 अंतर्गत राजगढ़ जिले के 13 गांवों की धारा 19 का राजपत्र में प्रकाशन, गुना जिले के 2 गांवों की धारा 11 का राजपत्र में प्रकाशन एवं भोपाल जिले की बैरसिया तहसील के  5 गांवों की धारा 11 का राजपत्र में प्रकाशन पूरा हो चुका है गांवों में भू-अर्जन के अंतर्गत अग्रिम कार्यवाही की जा रही है।

सिंचित जमीन के मुआवजे से संतुष्ट नहीं किसान

चूंकि यह क्षेत्र मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह हैं। इसलिए उन्होंने डूब में आ रहे परिवारों की समस्याओं को लेकर प्रभावित किसानों के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने के लिए समय मांगा, अनेक पत्र भी इस संबंध में मुख्यमंत्री को लिखे। लेकिन न तो पत्रों का जवाब आया और न ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मिलने का समय दिया। दिग्विजय को मुख्यमंत्री से मिलने के लिए उनके आवास के बाहर धरने पर बैठना पड़ा। फिर भी समस्या का हल नहीं निकला।

दिग्विजय सिंह का कहना है कि किसानों को उनकी जमीन का जो मुआवजा दिया जा रहा, वह बहुत कम है। जमीन के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। डूब प्रभावित गांवों के किसानों को कलेक्टर गाइड लाइन वर्ष 2020 के अनुसार सिंचित भूमि की न्यूनतम दें 4 लाख आठ हजार प्रति हेक्टेयर एवं अधिकतम दर 5 लाख, 20 हजार प्रति हेक्टेयर है तथा असिंचित भूमि की न्यूनतम दर 2 लाख आठ हजार प्रति हेक्टेयर एवं अधिकतम दर 2 लाख 88 हजार प्रति हेक्टेयर है। इसी तरह भोपाल जिले के डूब प्रभावित गांवों के अंतर्गत कलेक्टर गाइडलाइन वर्ष 2020-21 के  अनुसार सिंचित भूमि की न्यूनतम दर 5 लाख साठ हजार प्रति हेक्टेयर एवं अधिकतम दर 10 लाख 40 हजार प्रति हेक्टेयर है तथा असिंचित भूमि की न्यूनतम दर 3 लाख साठ हजार प्रति हेक्टेयर अधिकतम दर 6 लाख 40 हजार प्रति हेक्टेयर है।

राजगढ़ जिले में डूब प्रभावित गांवों के अंतर्गत सिंचित भूमि की औसत दर 4 लाख 43 हजार प्रति हेक्टेयर एवं असिंचित भूमि की औसत दर 5 लाख 76 हजार प्रति हेक्टेयर एवं असिंचित भूमि की  औसत दर दो लाख 88 हजार प्रति हेक्टेयर एवं असिंचित भूमि की औसत दर 3 लाख 92 हजार प्रति हेक्टेयर संबंधित जिला कलेक्टर गाइड लाइन वर्ष 2020-21 के अनुसार है।

जमीन की उपज को देखते हुए यह भुगतान और पुनर्वास के लिए बहुत कम है। जब कोरोना संक्रमण के दौरान सारे व्यवसाय ठप्प पड़ गए थे, तब देश में कृषि ही एक ऐसा क्षेत्र है, जिसने लोगों को सहारा दिया। 

साल भर पहले 6 लाख रुपए बीघा में जमीन खरीदी, सरकार दे रही 2.5 लाख

सुठालिया गुर्जर खेड़ी गांव के किसान चंदू गुर्जर बताते हैं कि सदियों से उनका परिवार यहां रह रहे हैं। पिछले साल ही उनके परिवार ने दो बीघा जमीन प्रति बीघा 6 लाख रुपए में खरीदी थी। अब सरकार उसका ढाई लाख दे रही है। चंदू ने बताया उसका परिवार इतना बड़ा है कि कुल मिलाकर इस गांव में 200 बीघा जमीन अकेले उन्हीं लोगों की है। इतना बड़ा खानदान उजड़ कर अब एक जगह पर तो बस नहीं सकता। सब बिखर जाएंगे। सुख-दुख, बेटियों की शादी, संस्कार आदि में पूरा परिवार का एक साथ, एक जगह इकट्ठा होना  अब मुश्किल हो जाएगा। ऐसा कभी नहीं सोचा था। अब रोटी-बेटी का जीवंत संपर्क कैसे बचा पाएंगे।

गुर्जर खेड़ी में 125 घर हैं। यहां के सभी किसान साल में तीन फसल बड़े आराम से लेते हैं। चंदू ने कहा कि अगर बांध तीन मीटर कम कर दें, तो बहुत सारी खेती की जमीन बच जाएगी। पार्वती नदी में अथाह पानी है, इसलिए ट्यूबेल और तालाबों में भी पानी खूब भरा रहता है। यहां पानी का कोई अभाव ही नहीं है। यहां जमीन भी समतल है। सरकार जहां जमीन देने की बात कर रही है। वह उबड़-खाबड़ है। उसे समतल और खेती योग्य बनाने में भी समय लगेगा। 

खड़ी फसल पर चला दी जेसीबी!

इसी तरह नरेन्द्र गुर्जर ने बताया कि यहां की सरपंच पान बाई है। महिला होने के नाते उसे गुमराह किया जाता है। वह अपने स्तर पर लड़ाई लड़ रही है। जब गांव में सरकारी अधिकारी सर्वे के लिए आते हैं, तो झूठ बोलकर सर्वे करते हैं। किसी अन्य गांव में हमारे गांव का नाम लेकर बताते हैं, कि वहां लोगों ने सर्वे के लिए अनुमति दे दी है। इसी तरह झूठ-फरेब में सरकार का काम चल रहा है। अब सरकार से बड़ा तो कोई गुंडा नहीं है। उससे लड़ना आसान नहीं है। फिर भी आंदोलन करेंगे, देखेंगे क्या होता है। नरेंद्र ने कहा विरोध के बावजूद यहां एक बुजुर्ग किसान की खड़ी गेहूं की फसल पर जेसीबी मशीन चला दी गई। ठेकेदार ने हमारी एक न सुनी। हमारे यहां सारे युवा खेती पर ही आश्रित हैं। पढ़ाई के बावजूद वे खेती से जुड़े रहते हैं। सरकार उन्हें बेरोजगार बनाने पर आमादा है। नरेंद्र ने कहा, तीन साल पहले मोहनपुरा बांध के लिए प्रति बीघा ढाई लाख रुपए मुआवजा मिला। अब उसी जमीन का सरकार एक लाख मुआवजा दे रही है।

इसलिए किसान उपजाऊ जमीन के उचित मुहावजे के बगैर विस्थापित होने को तैयार नहीं है। नरेंद्र ने कहा कि ब्यावरा के पूर्व जनपद अध्यक्ष विजय बहादुर सिंह भी इसका विरोध कर रहे हैं। अब उजड़कर टुकडे़-टुकड़े यहां-वहां बसने से पहले एक आखिरी कोशिश कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ बांध का काम भी शुरू हो चुका है। शुरुआती आँकलन के तहत 5 गांव की आबादी व जमीन सहित पूरी तरह डूब में जा रही हैं। जिसमें राजगढ़ जिले की सुठालिया तहसील के गुर्जर खेड़ी कला व गुर्जर खेड़ी खुर्द शामिल है।

गुना के 3 नए गांव मिलाकर, 41 गांव होंगे प्रभावित फिर भी केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मौन हैं। बांध बनने के दौरान गुना जिले के 41 गांव प्रभावित हुए हैं। कुछ दिन पहले तक सिर्फ 38 गांव प्रभावित गांवों में शामिल थे, लेकिन हाल ही के सर्वे में गुना जिले के 3 नए गांव को शामिल कर लिया गया है। गुना में भी किसान इसका विरोध कर रहे हैं।

Madhya Pradesh
MP Farmers
Farmers crisis
MP Government
Rajgarh
Digvijaya Singh
Shivraj Singh Chauhan

Related Stories

नर्मदा के पानी से कैंसर का ख़तरा, लिवर और किडनी पर गंभीर दुष्प्रभाव: रिपोर्ट

परिक्रमा वासियों की नज़र से नर्मदा

कड़ी मेहनत से तेंदूपत्ता तोड़ने के बावजूद नहीं मिलता वाजिब दाम!  

मनासा में "जागे हिन्दू" ने एक जैन हमेशा के लिए सुलाया

‘’तेरा नाम मोहम्मद है’’?... फिर पीट-पीटकर मार डाला!

कॉर्पोरेटी मुनाफ़े के यज्ञ कुंड में आहुति देते 'मनु' के हाथों स्वाहा होते आदिवासी

एमपी ग़ज़ब है: अब दहेज ग़ैर क़ानूनी और वर्जित शब्द नहीं रह गया

मध्यप्रदेशः सागर की एग्रो प्रोडक्ट कंपनी से कई गांव प्रभावित, बीमारी और ज़मीन बंजर होने की शिकायत

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी


बाकी खबरें

  • Anganwadi workers
    रौनक छाबड़ा
    हरियाणा: हड़ताली आंगनवाड़ी कार्यकार्ताओं के आंदोलन में अब किसान और छात्र भी जुड़ेंगे 
    08 Mar 2022
    आने वाले दिनों में सभी महिला कार्यबलों से सम्बद्ध यूनियनों की आस ‘संयुक्त महापंचायत’ पर लगी हुई है; इस संबंध में 10 मार्च को रोहतक में एक बैठक आहूत की गई है।
  • refugee crisis
    एपी
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: संयुक्त राष्ट्र ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इसे यूरोप का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट बताया 
    08 Mar 2022
    अमेरीका ने रूस से आयात होने वाले तेल पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनी मुहिम शुरू की, तो दूसरी तरफ जेलेंस्की ने रूस को चिकित्सा आपूर्ति मार्ग पर हुआ समझौता याद दिलाया।
  • राज कुमार
    गोवा चुनावः कौन जीतेगा चुनाव और किसकी बनेगी सरकार?
    08 Mar 2022
    इस बार भाजपा के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है क्योंकि तमाम विपक्षी दल भाजपा को हराने के लिए लड़े हैं और ये स्थिति कांग्रेस के पक्ष में जाती है।
  • privatization of railways
    सतीश भारतीय
    निजी ट्रेनें चलने से पहले पार्किंग और किराए में छूट जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं!
    08 Mar 2022
    रेलवे का निजीकरण गरीब और मध्यम वर्ग की जेब पर वजन लादने जैसा है। क्योंकि यही वर्ग व्यवसाय और आवाजाही के लिए सबसे ज्यादा रेलवे पर आश्रित है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की घटकर 50 हज़ार से कम हुई
    08 Mar 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 3,993 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.12 फ़ीसदी यानी 49 हज़ार 948 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License