NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
किसान संगठनों की देशभर में ‘चक्का जाम’ की पूरी तैयारी, दिल्ली-यूपी में नहीं करेंगे सड़क जाम
एसकेएम ने बयान जारी कर कहा कि ‘चक्का जाम’ के दौरान एंबुलेंस और स्कूल बस जैसी आवश्यक सेवाओं को नहीं रोका जाएगा। ‘चक्का जाम’ शनिवार को दोपहर 12 बजे से अपराह्न तीन बजे तक आयोजित करने का प्रस्ताव है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Feb 2021
किसान

नयी दिल्ली: केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के समूह संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने आज, शुक्रवार को ऐलान किया कि छह फरवरी को दिल्ली में ‘चक्का जाम’ नहीं होगा। इसके अलावा देश के अन्य हिस्से में किसान तीन घंटे तक राजमार्गों को शांतिपूर्ण तरीके से जाम करेंगे।

एसकेएम ने बयान जारी कर कहा कि ‘चक्का जाम’ के दौरान एंबुलेंस और स्कूल बस जैसी आवश्यक सेवाओं को नहीं रोका जाएगा। ‘चक्का जाम’ शनिवार को दोपहर 12 बजे से अपराह्न तीन बजे तक आयोजित करने का प्रस्ताव है।

बयान में बताया गया है, ‘‘दिल्ली के अंदर चक्का जाम का कार्यक्रम नहीं होगा क्योंकि प्रदर्शन के सभी स्थल पहले से ही चक्का जाम मोड में हैं। दिल्ली में प्रवेश के सभी मार्ग खुले रहेंगे, केवल वही मार्ग बंद रहेंगे, जहां किसानों का प्रदर्शन चल रहा है।’’

पंजाब, हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्से के हजारों किसान दिल्ली की तीन सीमाओं -- सिंघु, टीकरी और गाजीपुर में 70 से अधिक दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं और केंद्रीय कृषि कानूनों को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य दर्शन पाल ने कहा कि ‘चक्का जाम’ पूरी तरह शांतिपूर्ण और अहिंसक होगा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों से कहा गया है कि सरकारी अधिकारियों या किसी भी नागरिक से किसी भी तरह के संघर्ष में नहीं उलझें।

मोर्चा के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के हवाले से यह भी जानकारी आ रही है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी किसान चक्का जाम नहीं करेंगे, बल्कि सिर्फ़ अधिकारियों को ज्ञापन देंगे।

कुछ पत्रकारों को बाइट देते समय राकेश टिकैत को यह कहते सुना गया कि यूपी और उत्तराखंड के किसानों को कुछ आराम देने के लिए ऐसा किया गया है और उन्हें स्टैंडबाई में रखा गया है।

इससे पूर्व भी राकेश टिकैत ने छह फरवरी के प्रस्तावित चक्का जाम के बारे में बताते हुए गाजीपुर, टीकरी और सिंघु बॉर्डर की किलेबंदी करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए पत्रकारों से कहा था कि “ दिल्ली में हम कुछ नहीं कर रहे हैं, वहां तो राजा ने खुद किले-बंदी कर रखी है, हमारे चक्का जाम करने की जरूरत ही नहीं है।”

उन्होंने कहा कि तीन घंटे का चक्का जाम होगा। इस दौरान जिन गाड़ियों को रोका जाएगा, उन्हें खाने को कुछ दिया जाएगा और पानी दिया जाएगा और बताया जाएगा कि सरकार उनके साथ क्या कर रही है।

टिकैत ने कहा कि किसान सरकार की सभी कीलें उखाड़ देंगे और एक-एक करके प्रदर्शन स्थल के बाहर लगाई गई कीलों को भी उखाड़ देंगे।

आपको बता दें कि इससे पहले एसकेएम ने देशव्यापी चक्का जाम शनिवार को करने की घोषणा की थी। इसने कहा था कि किसान आंदोलन स्थलों के आसपास के क्षेत्र में इंटरनेट बंद करने के खिलाफ तीन घंटे के लिए राजमार्गों को जाम करेंगे।

एसकेएम के मुताबिक, चक्का जाम अपराह्न तीन बजे एक मिनट के लिए वाहनों के हॉर्न बजाकर समाप्त किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों के साथ एकजुटता एवं समर्थन जताना है।

इस बीच सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और वहां कई स्तर के बैरीकेड, कंटीले तार और सड़कों पर कील लगाए गए हैं। इसके अलावा वहां काफी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।

दिल्ली पुलिस के आयुक्त एस. एन. श्रीवास्तव ने भी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की।

अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों के खिलाफ सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर पुलिस नजर रखेगी।

दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी चिन्मय बिस्वाल ने कहा कि 26 जनवरी को हुई हिंसा को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने बॉर्डर पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए हैं।

दिल्ली पुलिस के पूर्वी जिले से एक अन्य अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि सावधानी के तौर पर गाजीपुर बॉर्डर पर अवरोधकों के पीछे सड़कों पर लोहे की नुकीली कीलों का स्थान बदला गया है।

पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) दीपक यादव ने कहा, ‘‘प्रदर्शनकारी किसानों के अनुसार, वे राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश नहीं करेंगे, लेकिन फिर भी सावधानी के तौर पर हमने कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध किए हैं। जिले में सभी महत्वपूर्ण बिन्दुओं और स्थलों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती होगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सभी सीमा बिन्दुओं पर अतिरिक्त चौकी होंगी। चौकियों और सीमाओं के सभी प्रवेश और निकास बिन्दुओं पर वाहनों की सघन जांच होगी। अतिरिक्त बस पहले ही लगाई जा चुकी हैं और शहर में चौकियों पर अतिरिक्त अवरोधक लगाए जा रहे हैं।’’

किसान आंदोलन ‘‘अराजनीतिक’’ रहा है और आगे भी रहेगाः संयुक्त किसान मोर्चा

संयुक्त किसान मोर्चा ने बृहस्पतिवार को कहा कि आंदोलन अब तक ‘‘अराजनीतिक’’ रहा है और ‘‘आगे भी रहेगा’’ तथा किसी भी राजनीतिक दल के नेता को उसके मंच का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने सिंघु, गाज़ीपुर, टीकरी एवं अन्य सीमाओं पर चल रहे प्रदर्शन स्थलों का दौरा किया और केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। इसके बाद, संयुक्त किसान मोर्चा का यह बयान आया है।

संयुक्त किसान मोर्चा के एक नेता, दर्शन पाल सिंह द्वारा एक बयान में मोर्चा ने कहा, " यह आंदोलन शुरू से पूरी तरह से अराजनीतिक रहा है और अराजनीतिक रहेगा। इस आंदोलन को राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के समर्थन का स्वागत है, लेकिन किसी भी सूरत में संयुक्त किसान मोर्चा के मंच पर राजनीतिक नेताओं को आने की इजाजत नहीं होगी।"

मोर्चा ने प्रदर्शन स्थलों पर इंटरनेट सेवा तत्काल बहाल करने की भी मांग की।

बयान में कहा गया है, " असहमति की आवाज़ दबाने की सरकार की कोशिशें जारी हैं। इंटरनेट पर रोक से आंदोलन कर रहे किसानों के साथ ही, मीडिया कर्मी और स्थानीय लोगों को भी बहुत परेशानी हो रही है।"

संगठन ने कहा कि खासकर, छात्र "बड़ी समस्या" का सामना कर रहे हैं, क्योंकि उनकी परीक्षाएं आ रही हैं।

बयान में कहा गया है कि एक ओर सरकार ‘‘डिजिटल इंडिया’’ जैसी योजनाओं का प्रचार कर रही है, वहीं दूसरी ओर देश के लोगों को इंटरनेट से महरूम किया जा रहा है।

बयान में कहा गया है कि इस आंदोलन को लगातार देश और दुनिया से समर्थन मिल रहा है। यह शर्मनाक है कि सरकार " आंतरिक मामला" बता कर इसे "दबाना" चाहती है।

बयान के मुताबिक, " जो लोग किसानों के साथ एकजुटता दिखा रहे हैं, उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है, जो निंदनीय है।"

बयान में कहा गया है कि अबतक मिली जानकारी के मुताबिक, 125 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और 21 प्रदर्शनकारी अब भी लापता हैं।

हरियाणा पुलिस ने सुरक्षा बढ़ायी

चंडीगढ़:  हरियाणा पुलिस ने किसानों संगठनों द्वारा शनिवार को आहूत देशव्यापी ‘चक्का जाम’ के पहले सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।

पुलिस को जारी आधिकारिक पत्र के मुताबिक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को महत्वपूर्ण स्थानों पर निजी तौर पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की निगरानी करने जबकि जिला पुलिस प्रमुखों को पर्याप्त कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस प्रमुखों को भी किसान संगठनों के स्थानीय नेताओं के साथ बातचीत कर उनके कार्यक्रम का शांतिपूर्ण आयोजन सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कदम उठाने का प्रयास करने को कहा गया है।

बहरहाल, हरियाणा के गृह और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने किसानों से चक्का जाम नहीं करने की अपील की है।

गुरुग्राम में इस मुद्दे पर संवाददाताओं द्वारा पूछे गए एक सवाल पर विज ने कहा, ‘‘दुनिया की बड़ी से बड़ी समस्या और अंतरराष्ट्रीय मुद्दे भी वार्ता के जरिए ही सुलझाए जाते हैं।’’

उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के साथ बातचीत के लिए हमेशा से तैयार है और प्रदर्शनकारी किसानों को बातचीत के लिए आगे आना चाहिए।

भिवानी और चरखी दादरी में सड़क जाम करेंगे किसान संगठन

भिवानी:  केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ भिवानी में किसानों के जारी धरने के दौरान खाप, किसान संगठनों, सामाजिक एवं कर्मचारी संगठनों की बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा के निर्देश पर 6 फरवरी को 12 से 3 बजे तक सभी राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों को जाम करने का निर्णय किया गया है।

इस दौरान यह निर्णय किया गया कि प्रदेश के भिवानी में 14 स्थानों पर जबकि दादरी में 10 स्थानों पर चक्का जाम किया जायेगा।

किसान नेताओं ने बताया कि जाम लगाने के दौरान एंबुलेंस और दमकल गाड़ियों को रोका नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई बीमार व्यक्ति निजी वाहन से जा रहा होगा, तो उसे भी रास्ता दिया जाएगा।

दूसरी ओर जिला प्रशासन ने किसानों के इस ऐलान को देखते हुये पुलिस की पांच कंपनियां तैनात करने का निर्णय किया है। इसके अलावा विभिन्न थानों की पुलिस को भी अलर्ट पर रखा गया है।

दूसरी ओर दादरी से निर्दलीय विधायक एवं सांगवान खाप के प्रधान सोमबीर सांगवान ने बताया कि किसान आंदोलन को और मजबूत बनाने तथा अगली रणनीति तैयार करने के लिए सात फरवरी को चरखी गांव स्थित एससीआर स्कूल में किसान महापंचायत का आयोजन किया जाएगा।

सांगवान ने बताया कि इसमें किसान नेता राकैश टिकैत एवं गुरनाम सिंह चंढूनी समेत कई अन्य किसान नेता एवं विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।

गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए

नोएडा (उप्र):  किसान संगठन के नेताओं द्वारा शनिवार को आहूत चक्का जाम के मद्देनजर गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

अपर पुलिस आयुक्त लव कुमार ने बताया कि शनिवार को किसान संगठनों द्वारा आहूत किए गए प्रदर्शन तथा चक्का जाम के मद्देनजर गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) युवा के जिला अध्यक्ष विभोर शर्मा ने बताया कि चक्का जाम के मद्देनजर उनके संगठन ने पूरी तैयारी की है। संगठन के विभिन्न पदाधिकारी जनपद गौतम बुद्ध नगर में विभिन्न स्थानों पर चक्का जाम करेंगे।

इसके अलावा आज शामली में भी किसान आंदोलन के समर्थन में किसान महापंचायत हुई। हालांकि पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी थी और इलाके में धारा 144 लगा दी थी। लेकिन इसके बावजूद हज़ारों की संख्या में किसान महापंचायत में जुटे और कृषि क़ानून वापस लेने की मांग दोहराई गई।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

farmers protest
Farm bills 2020
Chakka Jam
Kisan Ekta Morcha
AIKS
AIKSCC

Related Stories

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा

केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान

किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे

ऐतिहासिक किसान विरोध में महिला किसानों की भागीदारी और भारत में महिलाओं का सवाल

महाराष्ट्र: किसानों की एक और जीत, किसान विरोधी बिल वापस लेने को एमवीए सरकार मजबूर

पंजाब : किसानों को सीएम चन्नी ने दिया आश्वासन, आंदोलन पर 24 दिसंबर को फ़ैसला

लखीमपुर कांड की पूरी कहानी: नहीं छुप सका किसानों को रौंदने का सच- ''ये हत्या की साज़िश थी'’

इतवार की कविता : 'ईश्वर को किसान होना चाहिये...


बाकी खबरें

  • loksabha
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    संसद में चर्चा होना देशहित में- मोदी, लेकिन कृषि क़ानून निरस्त करने का बिल बिना चर्चा के ही पास!
    29 Nov 2021
    सरकार की कथनी-करनी का फ़र्क़ एक बार फिर तुरंत देश के सामने आ गया। आज सुबह संसद सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से कहा कि संसद में चर्चा होना देशहित में है और सरकार हर सवाल का जवाब…
  • TN
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु इस सप्ताह: राज्य सरकार ने सस्ते दामों पर बेचे टमाटर, श्रमिकों ने किसानों के प्रति दिखाई एकजुटता 
    29 Nov 2021
    इस सप्ताह, तमिलनाडु ने 52,549 करोड़ रूपये की 82 औद्योगिक परियोजनाओं के लिए सभी क्षेत्रों के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये। इसके साथ ही सरकार ने थूथुकड़ी, नागापट्टिनम और…
  • alok dhanwa
    अनिल अंशुमन
    ‘जनता का आदमी’ के नाम ‘जनकवि नागार्जुन स्मृति सम्मान’: नए तेवर के कवि आलोक धन्वा हुए सम्मानित
    29 Nov 2021
    यह सम्मान 2020 में ही दिल्ली में नागार्जुन जी के स्मृति दिवस पर दिया जाना था। लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसलिए महामारी प्रकोप के कम होते ही यह सम्मान आलोक धन्वा के प्रिय शहर…
  • Assam
    संदीपन तालुकदार
    असम: नागांव ज़िले में स्वास्थ्य ढांचा उपलब्ध होने के बावजूद कोविड मरीज़ों को स्थानांतरित किया गया
    29 Nov 2021
    महामारी ने स्वास्थ्य सुविधा संकट की परतें खोलकर रख दी हैं और बताया कि कैसे एम्स की सुविधा होने पर नागांव बेहतर तरीक़े से महामारी का सामना कर सकता था।
  • Bahgul River
    तारिक़ अनवर
    यूपी के इस गाँव के लोग हर साल बांध बना कर तोड़ते हैं, जानिए क्यों?
    29 Nov 2021
    हालांकि सरकार ने पिछले साल एक स्थायी जलाशय बनाने के लिए 57.46 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी, लेकिन इस परियोजना को अभी तक अमल में नहीं लाया गया है और इस साल भी मिट्टी से बांध बनाने की प्रक्रिया…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License