NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
किसान संगठनों की दो टूक : मध्यस्थता के लिए कोई कमेटी मंज़ूर नहीं
किसान नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया करते हुए ये साफ़ कर दिया है कि उन्हें कोई कमेटी मंज़ूर नहीं है। वे इस सिलसिले में सरकार से ही बात करेंगे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Jan 2021
किसान संगठन

“कानूनों को होल्ड करने और हमारे प्रदर्शन के अधिकार को सुरक्षित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया, लेकिन हमें कमेटी मंज़ूर नहीं।”

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद किसान संगठनों ने सिंघु बार्डर पर आज, मंगलवार शाम की प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात साफ कर दी कि कानून वापसी से कम कुछ मंज़ूर नहीं है।

किसान नेताओं ने साफ़ किया कि यह कमेटी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से स्वीकार नहीं है। किसान नेताओं ने कहा कि कमेटी में शामिल चारों सदस्यों पहले से इन कानूनों के पक्ष में रहे हैं। और अगर न भी रहे होते तो भी कमेटी उन्हें उसूलन स्वीकार नहीं है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने आदेश में इन तीनों क़ानूनों के अमल पर रोक लगाते हुए एक कमेटी बनाई है जिसमें भारतीय किसान यूनियन के नेता भूपिंदर सिंह मान, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, IFPRI के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद कुमार जोशी और शेतकारी संगठन के अनिल घनवत शामिल किए गए हैं।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अगुआई वाली तीन सदस्यी पीठ जिसमें न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन शामिल रहे, ने अपना फ़ैसला सुनाते हुए किसानों से भी सहयोग करने को कहा और स्पष्ट किया कि कोई भी ताकत उसे गतिरोध दूर करने के लिये इस तरह की समिति गठित करने से नहीं रोक सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद पंजाब के करीब 32 संगठनों ने अपनी आपात बैठक की। जिसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने बताया कि इसी सिलसिले में वे संयुक्त किसान मोर्चा की बुधवार को बैठक करने जा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने साफ किया कि कल, सोमवार को ही किसान संगठनों ने एक प्रेस नोट जारी कर साफ कर दिया था कि उन्हें किसी तरह की कोई कमेटी मंजूर नहीं होगी। और वे ये मानते हैं कि सरकार अपने कांधे का बोझ हल्का करने के लिए कोर्ट का सहारा ले रही है।

इसके अलावा अपने आगामी कार्यक्रम दोहराते हुए किसान नेताओं ने बताया कि बुधवार, 13 जनवरी लोहड़ी के मौके पर तीनों कानूनों की प्रतियां जलाई जाएंगी। 18 को महिला किसान दिवस मनाया जाएगा। 20 को गुरुगोविंद सिंह का प्रकाशोत्सव और 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद बोस की जयंती पर कार्यक्रम होंगे। इसी कड़ी में 26 जनवरी का भी कार्यक्रम यथावत होगा।

किसान नेताओं ने साफ किया कि 26 को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड होगी। लाल किले पर झंडा फहराना या राजपथ की परेड में व्यवधान करने जैसी जो अफवाहे फैलाई जा रही हैं, वे बिल्कुल बेबुनियाद और किसानों को बदनाम करने वाली हैं।

इसी के साथ अंबानी-अडानी का बहिष्कार और सरकार के सहयोगियों पर दबाव के कार्यक्रम भी जारी रहेंगे।

किसानों को कमेटी से क्या दिक्कत है? और क्या ये सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं होगी? पत्रकारों की ओर से ये सवाल बार बार पूछे जाने पर किसान नेताओं ने साफ किया कि उन्होंने कोर्ट से कोई कमेटी नहीं मांगी थी। उनकी ओर से ऐसी कोई एप्लीकेशन अदालत में नहीं दी गई। इसके अलावा उनका मानना है कि ये सब सरकार का खेल है और वे इस खेल या ट्रेप में नहीं फंसना चाहते।

किसानों के मुताबिक कमेटी में शामिल चारों सदस्य सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों के समर्थन में कहे जाते हैं। कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी ने इस संबंध में अख़बारों में बड़े बड़े लेख लिखे हैं। वे तो एमएसपी के भी विरोधी माने जाते हैं।

किसान नेताओं ने साफ किया कि ये कानून सरकार ने बनाए हैं और इसे सरकार ही वापस लेगी। उन्हें बाहर की कोई कमेटी स्वीकार नहीं।

यह पूछने पर कि क्या किसान नेता 15 जनवरी को सरकार के साथ निर्धारित वार्ता में हिस्सा लेंगे, किसान नेताओं ने साफ किया कि हां, वे उस बैठक में हिस्सा लेंगे।

इसे पढ़ें : सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों के अमल पर लगाई रोक, कमेटी का गठन

farmers protest
Farm Bills
Supreme Court
AIKS
MSP
BJP
Modi government
farmers protest update

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Neha Singh Rathore
    न्यूज़क्लिक टीम
    ‘यूपी में सब बा’ के जवाब में नेहा सिंह राठौर का ‘ यूपी में का बा’
    23 Jan 2022
    यूपी विधानसभा चुनाव में वोटरों को रिझाने के लिए सांसद और अभिनेता रवि किशन भाजपा की तारीफ़ में एक वीडियो लेकर आए, जिसके बोल हैं ‘ यूपी में सब बा’। भाजपा की उपलब्धियों का बखान वाला यह वीडियो घर-घर…
  • pm
    अजय कुमार
    दो टूक: मोदी जी, आप ग़लत हैं! अधिकारों की लड़ाई से देश कमज़ोर नहीं बल्कि मज़बूत बनता है
    23 Jan 2022
    75 वर्षों में हम सिर्फ़ अधिकारों की बात करते रहे हैं। अधिकारों के लिए झगड़ते रहे, जूझते रहे, समय भी खपाते रहे। सिर्फ़ अधिकारों की बात करने की वजह से समाज में बहुत बड़ी खाई पैदा हुई है: प्रधानमंत्री…
  • Ethiopia
    शिरीष खरे
    इथियोपिया : फिर सशस्त्र संघर्ष, फिर महिलाएं सबसे आसान शिकार
    23 Jan 2022
    इथियोपिया, अफ्रीका महाद्वीप का यह देश पिछले दो वर्षों से अधिक समय से सुखिर्यों में है, जहां नवंबर, 2020 से शुरू हुआ सशस्त्र संघर्ष अभी भी जारी है, जहां टिग्रे अलगाववादियों और उनके खिलाफ इथियोपियाई…
  • nehru and subhash
    एल एस हरदेनिया
    नेताजी की जयंती पर विशेष: क्या नेहरू ने सुभाष, पटेल एवं अंबेडकर का अपमान किया था?
    23 Jan 2022
    नरेंद्र मोदी का यह आरोप तथ्यहीन है कि नेहरू ने सुभाष चंद्र बोस, डॉ. अंबेडकर और सरदार पटेल को अपेक्षित सम्मान नहीं दिया।
  • cartoon
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    …सब कुछ ठीक-ठाक है
    23 Jan 2022
    "क्यों, क्या सब ठीक-ठाक नहीं हैं? क्या सब ख़ैरियत से नहीं है? क्या हम हिंदू राष्ट्र नहीं बन रहे हैं? ठीक है भाई! बेरोज़गारी है, महंगाई है, शिक्षा बरबाद हो रही है और अस्पताल बदहाल। पर देश में क्या…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License